Wednesday, 5 November 2025

★ *गुरु नानक देव जी — मानवता के प्रकाशपुंज* ★ *जग में फैलाई ज्योति अपार*, *नानक नाम अमर आधार।* सत्य, प्रेम, करुणा के दूत, किया अंधकार का पूर्ण स्फूट। *“एक ओंकार” का दिया संदेश*, *सबमें है ईश्वर, सबमें विशेष।* भेद मिटाकर जोड़े दिलों को, मानवता बाँधी सूत्र मिलों को। *“नाम जपो, किरत करो”कहा*, *“वंड छको” से जीवन सजा।* सेवा-सद्भाव बना प्रतीक, न्याय और शांति का संगीत। *स्त्री को दी सम्मान की शान*, *“जित जन्मे राजन” का अभिमान।* मंदिर-मस्जिद सब एक समान, प्रेम बना नानक का विधान। *धन का मोह, छल का भार*, *त्याग दिया सबका अधिकार।* सादा जीवन, उच्च विचार, यही था नानक का व्यवहार। *जो नानक पथ पर चल पाता*, *सच्चे सुख का रस वह पाता।* उनके उपदेश बने आधार, जग में फैलाएँ प्रेम अपार। *नानक का दीप जले हर मन*, *मिटे अज्ञान, उठे सुमन।* मानवता का हो उत्सव नया, नानक नाम से जगमग धरा। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (74) 05/11/25 #dineshapna



 

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