Thursday, 6 November 2025

★ *वल्लभकुल और बृजवासी —* *पुष्टि मार्ग का तना और जड़* ★ *श्रीवल्लभ का सत्य संदेश*, *सेवा में था जीवन सारा*, श्रीनाथजी को समर्पित तन, मन, धन, हर पल प्यारा। *भक्ति का मार्ग नया बताया,* *पुष्टि नाम से विख्याता*, सेवा, प्रेम, समर्पण पथ, जीव का मोक्ष कराता। *वल्लभकुल ने निभाई मर्यादा,* *त्याग, धर्म, परंपरा न्यारी*, उनकी रीत अमर बनी है, जैसे नदिया पावन धारा भारी। *बृजवासी त्यागी सखा बन,* *श्रीनाथ संग चले थे दूर*, बृज की माटी छोड़ दी, सेवा को माना मंज़िल हूर। *आज भी वही सखा भाव से,* *करते नित्य आराधन प्यारा*, पुष्टि मार्ग की जड़ वही हैं, जिनसे वृक्ष फूला-फला न्यारा। *वल्लभकुल तना,शाखाएँ* *उसकी, सेवा में रमे निरंतर*, जड़ बृजवासी, तना आचार्य, पुष्टिमार्ग हुआ अमर अनंत! *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक बृजवासी* (75) 06/11/25 #dineshapna



 

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