Saturday, 25 October 2025

★ *“अधिकार माँग कर या छिन कर”* ★ *माँग कर जो अधिकार मिले*, वह दया का दान कहलाए, देने वाला जब खुश हो, तभी तुम्हें कुछ पाय। उसकी मर्जी, उसकी रज़ा, उसी पे सब कुछ टिका, ऐसे अधिकारों की डोर सदा, रहती औरों के हाथों बंधा। पर *जब अधिकार छिन कर लो*, तो हक़ तुम्हारा कहलाए, कर्म, साहस, सत्य का संग, तब न्याय स्वयं मुस्काए। ना भीख, ना दया, ना डर किसी का बोझ उठाए, जो अपना है, वह लेकर ही, आत्मगौरव जगाए। *माँगने वाला झुकता सिर, पाने की आशा में*, *छीनने वाला खड़ा अडिग, सत्य की भाषा में*। एक दया का पात्र बने, दूसरा सम्मान का अधिकारी, माँग में गुलामी की रेखा, छिनने में स्वतंत्रता सारी। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (67) 26/10/25 #dineshapna



 

★ *छठ पूजा 2025 की शुभकामनाएँ !* ★ 25 अक्टूबर, शनिवार को नहाय-खाय के साथ शुरू ~~ और 28 अक्टूबर, मंगलवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न ! *छठ पूजा के चारों दिनों का महत्व :-* ◆25 अक्टूबर (शनिवार): नहाय-खाय ◆26 अक्टूबर (रविवार): खरना ◆27 अक्टूबर (सोमवार): संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य) ◆28 अक्टूबर (मंगलवार): उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य) और व्रत का पारण ! *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (66) 25/10/25 #dineshapna


 

Wednesday, 22 October 2025

■ *एक वर्ष मे 73 दीपावली अपनाये !* ■ ★ *पंच दिवसीय दीपावली पर पंच सन्देश ; शेष 360 दिनो के लिए !* ★ १. *धनतेरस :* स्वास्थ्य का दीप जलाओ, तन-मन को रखो पावन, लक्ष्मी संग धन आए घर, हो सुखमय जीवन सावन। २. *रूप चौदस (रूप चतुर्दशी) :* अंधकार हर लो अंतर का, सत्य का दीप जलाओ, रूप-सुगंध से जगमग मन, ईश्वर से मिलन पाओ। ३. *दीपावली :* दीप जले जब घर-आँगन में, जग में उजियारा छाए, सत्य, धर्म और प्रेम की ज्योति, हर मन में आनंद लाए। ४. *अन्नकूट / गोवर्धन पूजा :* अन्नकूट का पर्व सिखाए, अहंकार को मिटाना, सेवा, त्याग और एकता से, सच्चा पूजन मानना। ५. *भाईदूज :* भाई-बहन का पावन स्नेह, प्रेम का सदा प्रतीक, बंधन यह पावन रिश्तों का, रहे अमर, अटूट, अनीक। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक श्रीजी सखा* (65) 23/10/25 #dineshapna












 

Tuesday, 21 October 2025

★ *भाईदूज की शुभकामनाएँ !* ★ 🕉️ *धार्मिक महत्त्व :-* 1. यम-यमुना का पवित्र मिलन, भाईदूज का यही कारण! 2. तिलक, आरती, शुभ आशीष — धर्म में भरे मधुर सन्देश! 3. भाई की लम्बी उम्र की आस, बहन का प्रेम बने विश्वास! 4. धार्मिक भाव से जुड़ा ये पर्व, परिवार में भरता दिव्य सर्व! 🕉️ *सामाजिक महत्त्व :-* 1. भाई-बहन का प्यारा बंधन, समाज में प्रेम का कारण! 2. बहन का तिलक, भाई का वचन — यही है जीवन का सच्चा धन! 3. भाईदूज लाए संदेश नया, नारी-सम्मान बने सदा जया! 4. परिवार में मेल-मिलाप बढ़ाओ, प्रेम-सद्भाव के दीप जलाओ! 🕉️ *ऐतिहासिक महत्त्व :-* 1. आर्य काल से चली परंपरा, भाईदूज हमारी संस्कृति का धरा! 2. राजाओं का तिलक और वीरता का मान, भाईदूज में बसता भारत महान! 3. संस्कृति, संबंध, और सम्मान — यही है भाईदूज का गान! 4. इतिहास गवाह है इस प्रेम का, भाईदूज है प्रतीक धर्म-नीति-नेम का! 🕉️ *भाईदूज उत्सव का संदेश :-* 1. भाईदूज सिखाता है — प्रेम, सुरक्षा और सम्मान ही सच्चा धर्म है। 2. यम-यमुना का मिलन बताता है — संबंधों में आस्था ही जीवन का सार है। 3. यह पर्व परिवार को जोड़ता है, संस्कार और संस्कृति को संवारता है। 4. भाईदूज केवल परंपरा नहीं — भारतीय जीवन-मूल्यों का जीवंत प्रतीक है। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक श्रीजी सखा* (64) 22/10/25 #dineshapna










 

Monday, 20 October 2025

★ *अन्नकूट महोत्सव की शुभकामनाएँ !* ★ 🕉️ *धार्मिक महत्त्व :-* 1. गोवर्धन पूजा का यही संदेश — अहंकार मिटा, भक्ति बने विशेष! 2. अन्नकूट दिवस करे उद्घोष — अन्न ही ब्रह्म, यही संतोष! 3. श्रीकृष्ण ने दिखाया मार्ग — ईश्वर भक्ति में नहीं कोई भार्ग! 4. हर दाने में ईश्वर का वास — अन्नकूट लाता भक्तों में विश्वास! 🕉️ *सामाजिक महत्त्व :-* 1. अन्नकूट मिलन का पर्व महान — सबका अन्न, सबका सम्मान! 2. दान करो, सेवा करो, प्रेम बढ़ाओ — अन्नकूट का संदेश अपनाओ! 3. जाति-भेद सब भूल जाओ — एक थाल में संग खाओ! 4. अन्न का सम्मान, समाज का उत्थान — यही अन्नकूट का प्रधान अभियान! 🕉️ *ऐतिहासिक महत्त्व :-* 1. द्वापर युग की अमर कहानी — श्रीकृष्ण ने दी मानवता को निशानी! 2. वैदिक यज्ञों की पुरानी रीत — अन्नकूट आज भी करती प्रीत! 3. मंदिरों में भंडारे का परंपरागत विधान — संस्कृति की पहचान, अन्नकूट महान! 4. अन्नकूट कहे भारत की बाणी — कृषि है जीवन, यही हमारी निशानी! 🕉️ *अन्नकूट उत्सव पर संदेश :-* 1. अन्न ही ब्रह्म है — उसका सम्मान ही सच्ची पूजा है। 2. अन्नकूट एकता, समानता व सेवा का प्रतीक पर्व है। 3. श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला हमें अहंकार त्याग और कृतज्ञता सिखाती है। 4. अन्नकूट भारतीय कृषि-संस्कृति और लोक-धर्म की अमर परंपरा है। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक श्रीजी सखा* (63) 21/10/25 #dineshapna






 

Sunday, 19 October 2025

★ *दीपावली की शुभकामनाएँ—* *अंधकार से प्रकाश की यात्रा* ★ *राम लौटे वनवास से जब*, अयोध्या हर्ष मनाई, दीप जले हर द्वार-द्वार, आनंद धरा पर छाई। सत्य की जय, असत्य पराजित, धर्म का ऊँचा मान, रामराज्य की उस झलक से जग का हुआ कल्याण। *लक्ष्मी माँ का पूजन आज*, धन-धन्य से घर भर जाए, गणपति, कुबेर, सरस्वती संग, ज्ञान व बुद्धि जगाए। नव संवत्सर की शुभ बेला, व्यापार में शुभ आरम्भ, हर घर में मंगल दीप जले, हो समृद्धि का परवशंत। *पर दीप केवल तेल-रुई का*, इतना ही अर्थ न मानो, यह तो अंतर का अंधकार मिटाने का है बहाना। लोभ-क्रोध-अहंकार जला दो, सत्य का दीप जलाओ, आत्मप्रकाश से जग आलोकित, प्रेम-भाव अपनाओ। *जब भीतर का दीप जलेगा*, तब जग में उजियारा होगा, हर हृदय बने मंदिर पावन, हर जीवन सुधारा होगा। दीपावली केवल पर्व नहीं, यह आत्मजागरण की राह, अंधकार से प्रकाश की ओर, यही सिखलाए यह दिन खास। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक श्रीजी सखा* (62) 20/10/25 #dineshapna