Sunday, 19 October 2025

★ *दीपावली की शुभकामनाएँ—* *अंधकार से प्रकाश की यात्रा* ★ *राम लौटे वनवास से जब*, अयोध्या हर्ष मनाई, दीप जले हर द्वार-द्वार, आनंद धरा पर छाई। सत्य की जय, असत्य पराजित, धर्म का ऊँचा मान, रामराज्य की उस झलक से जग का हुआ कल्याण। *लक्ष्मी माँ का पूजन आज*, धन-धन्य से घर भर जाए, गणपति, कुबेर, सरस्वती संग, ज्ञान व बुद्धि जगाए। नव संवत्सर की शुभ बेला, व्यापार में शुभ आरम्भ, हर घर में मंगल दीप जले, हो समृद्धि का परवशंत। *पर दीप केवल तेल-रुई का*, इतना ही अर्थ न मानो, यह तो अंतर का अंधकार मिटाने का है बहाना। लोभ-क्रोध-अहंकार जला दो, सत्य का दीप जलाओ, आत्मप्रकाश से जग आलोकित, प्रेम-भाव अपनाओ। *जब भीतर का दीप जलेगा*, तब जग में उजियारा होगा, हर हृदय बने मंदिर पावन, हर जीवन सुधारा होगा। दीपावली केवल पर्व नहीं, यह आत्मजागरण की राह, अंधकार से प्रकाश की ओर, यही सिखलाए यह दिन खास। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक श्रीजी सखा* (62) 20/10/25 #dineshapna




 

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