Sunday, 26 October 2025

★ *“अधिकार और कर्तव्य का संतुलन”* ★ *अधिकार तभी मिले, जब कर्तव्य निभाया जाये*, कर्तव्य बिना हक माँगना व्यर्थ कहलाये। *माँगने से न मिले, तो दृढ़ होकर लेना चाहिए*, पर सत्य के मार्ग से ही आगे बढ़ना चाहिए। जो कर्तव्य से विमुख है, उससे हक छीनना उचित, *न्याय हेतु संघर्ष हो, यही है कर्म का हित*। अधिकार माँगने की वस्तु नहीं, वो हक लड़कर पाना है, *पर कर्तव्य निभाकर ही, उसे सच्चा बनाना है*। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (68) 27/10/25 #dineshapna



 

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