Sunday, 2 August 2026

★ *गणितीय संबंध का जीवन-दर्शन* ★ *एक अकेला दीप जले तो, सीमित उसका प्रकाश रहे,* हाथ मिलें जब लाखों के, सूरज-सा इतिहास रहे। *एक और एक ग्यारह बनते, यही विजय का प्रथम विधान,* संगठित जनशक्ति के आगे, झुक जाता हर अभिमान। *एक जोड़ एक बराबर दो, श्रम से बढ़ता हर सम्मान,* मिल-जुलकर जो कर्म करें, उनका ऊँचा हो अभियान। *एक गुणा एक फिर भी एक, लक्ष्य जहाँ हो एक समान,* तन-मन-वचन समर्पित हों तो, अटल बने हर संगठन महान। *एक घटा एक शून्य बने, यही अहं का कड़वा ज्ञान,* आपस का संघर्ष मिटा देता, वैभव, शक्ति और सम्मान। *एक भाग एक फिर भी एक, न्याय-संतुलन की पहचान,* समान भाव से जो जीते, उनका अमर रहे सम्मान। *आओ मिलकर प्रण यह लें—न टूटे अपना हिंदुस्तान,* एकता ही सबसे बड़ा गणित है, यही राष्ट्र का स्वाभिमान। *गणित नहीं केवल अंकों का, यह जीवन का दिव्य विधान,* एक रहें, नेक रहें, श्रेष्ठ बनें—यही मानव का सच्चा मान! *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* (210) #एक_हिन्दुस्तानी #02/08/2026 #dineshapna






 

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