dineshapna
Chartered Accountant,Social Activist,Political Analysist-AAP,Spritual Thinker,Founder of Life Management, From India, Since 1987.
Sunday, 19 July 2026
★ *आम आदमी सबसे ताकतवर है !* ★ आम आदमी सबसे ताकतवर, लोकतंत्र की है शान। *वोट से लिखता देश की किस्मत, उसकी अपनी पहचान।।* *कर देकर चलता शासन सारा, बढ़ता भारत महान।* जनता से ही शक्ति मिलती, जनता ही है प्राण।। अपने अधिकारों को जानो, मत बनो कभी लाचार। *नेता हों या हों अधिकारी, सब हैं जनता के द्वार।।* सम्मान सभी का करना लेकिन, सत्य न छोड़ो साथ। *जनहित, नीति और संविधान, रखें सदा अपने हाथ।।* *अन्याय, भ्रष्टाचार के आगे, कभी न शीश झुकाओ।* कानून के पथ पर चलकर, अपना हक़ तुम पाओ।। *जागरूक बन, निर्भय बनकर, राष्ट्रधर्म निभाना है।* आत्मसम्मान और कर्तव्य से, भारत को सजाना है।। *जनता जागे, देश सँवरे, यही सफलता का सार।* जिम्मेदार नागरिक से ही, होता राष्ट्र सदा सशक्त अपार।। *याद रहे हर हिन्दुस्तानी, जनता ही असली सरकार।* जागरूक आम आदमी से ही, लोकतंत्र रहे सशक्त अपार।। — सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य (186) #एक_हिन्दुस्तानी #19/07/2026
★ *एक आम आदमी को ताकतवर बनने व बने रहने के लिए !* ★ लोकतंत्र में नागरिक की वास्तविक शक्ति केवल वोट नहीं, बल्कि *उसकी जागरूकता, संगठन, चरित्र और सक्रिय भागीदारी है।* यदि प्रत्येक नागरिक निम्न 10 कार्य अपनाए, तो वह वास्तव में सशक्त नागरिक बन सकता है। *1. मतदान अवश्य करें और सोच-समझकर करें।* (जाति, धर्म, भय या लालच से नहीं, बल्कि उम्मीदवार के चरित्र, कार्य और जनहित के आधार पर वोट दें।) *2. संविधान, अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी रखें।* (अधिकारों के साथ-साथ मौलिक कर्तव्यों का पालन करें। जागरूक नागरिक को कोई आसानी से भ्रमित नहीं कर सकता।) *3. कानून का सम्मान करें और कानून का सहारा लें।* (अन्याय होने पर हिंसा नहीं, बल्कि RTI, जनसुनवाई, लोक शिकायत, न्यायालय और अन्य वैधानिक उपायों का उपयोग करें।) *4. कर (Tax) ईमानदारी से दें और उसके उपयोग का हिसाब भी माँगें।* (जो नागरिक कर देता है, उसे यह पूछने का पूरा अधिकार है कि उसका धन कहाँ और कैसे खर्च हो रहा है।) *5. नेता और प्रशासन से सम्मानपूर्वक, लेकिन आत्मसम्मान के साथ व्यवहार करें।* (न चापलूसी करें, न भय रखें। जनप्रतिनिधि और प्रशासन जनता की सेवा के लिए हैं।) *6. गलत कार्यों का विरोध करें और सही कार्यों का समर्थन करें।* (भ्रष्टाचार, पक्षपात और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाएँ तथा अच्छे कार्यों की खुलकर सराहना करें।) *7. आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें।* (ज्ञान, कौशल, रोजगार या व्यवसाय के माध्यम से आत्मनिर्भर नागरिक अधिक स्वतंत्र और प्रभावशाली होता है।) *8. संगठित रहें और समाज से जुड़े रहें।* (सामाजिक संस्थाओं, स्थानीय समितियों और जनहित अभियानों में भाग लें। संगठित समाज की आवाज़ अधिक प्रभावी होती है।) *9. सही और सत्य जानकारी के आधार पर निर्णय लें।* (अफवाहों, फर्जी समाचारों और भ्रामक प्रचार से बचें। तथ्य जाँचकर ही अपनी राय बनाएँ।) *10. राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।* (व्यक्तिगत हित, दलगत सोच या संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र, समाज और आने वाली पीढ़ियों के हित में सोचें और कार्य करें।) ★★★ याद रखें :- ★★★ लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति न धन है, न पद और न सत्ता। *सबसे बड़ी शक्ति एक जागरूक, ईमानदार, संगठित, आत्मसम्मानी और सक्रिय नागरिक है।* ★★★ सूत्र वाक्य :- ★★★ *"जागरूक नागरिक + ईमानदार चरित्र + संवैधानिक ज्ञान + सक्रिय सहभागिता = सशक्त लोकतंत्र और सशक्त भारत।"* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढय* (185) #19/05/2026 #dineshapna
🌿 *स्वस्थ रहें — तन से व मन से!* 🌿 *पौष्टिक भोजन, योग से तन में नव-ऊर्जा का संचार हो,* जल, विश्राम और अनुशासन से जीवन सदा साकार हो। *नशे और बुरी आदतों से हर पल अपना नाता तोड़ें,* स्वस्थ शरीर के बल पर ही हर सपने से रिश्ता जोड़ें। *सकारात्मक सोच से जीवन में आशा का उजियारा हो,* क्रोध, तनाव, ईर्ष्या मिटें, हर मन निर्मल धारा हो। *ध्यान, प्रार्थना, प्रेम-सद्भाव से अंतर्मन मुस्काता रहे,* स्वस्थ मन ही सुख, सफलता और जीवन का सच्चा धन कहलाए। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* #(184) #18/07/2026 #dineshapna ############################ 🌿*स्वस्थ रहें — तन से व मन से !* 🌿 स्वस्थ जीवन केवल रोगों से मुक्त रहने का नाम नहीं, *बल्कि शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन* का नाम है। ◆ *तन की स्वस्थता के लिए —* • संतुलित एवं पौष्टिक आहार लें। • प्रतिदिन योग, प्राणायाम एवं व्यायाम करें। • पर्याप्त जल पिएँ और पूरी नींद लें। • नशे एवं अन्य हानिकारक आदतों से दूर रहें। ◆ *मन की स्वस्थता के लिए —* • सकारात्मक सोच अपनाएँ। • क्रोध, तनाव और ईर्ष्या से स्वयं को बचाएँ। • प्रतिदिन कुछ समय ध्यान, प्रार्थना या ईश्वर-स्मरण करें। • परिवार एवं मित्रों के साथ प्रेमपूर्ण संबंध बनाए रखें। *याद रखें —* "स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का निवास होता है, और स्वस्थ मन ही सुखी, सफल एवं सार्थक जीवन का आधार बनता है।" 🌸 *स्वस्थ रहें* — तन से भी, मन से भी; यही *सच्ची समृद्धि और जीवन का सबसे बड़ा धन* है। 🌸 ############################ ★ *प्रेसंनोट*★ *स्वस्थ तन और स्वस्थ मन ही सुखी जीवन का आधार : सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* राजसमन्द। श्रीहरि साहित्य सेवा संस्थान द्वारा "स्वस्थ रहें – तन से व मन से" विषय पर गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा चिकित्सा, पुलिस एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कर्मयोगियों का सम्मान करना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सर्कल इंस्पेक्टर औकार सिंह थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपना ट्रस्ट के अध्यक्ष सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य ने की। विशिष्ट अतिथि उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राष्ट्र सहाना आजाद एवं डॉ. घनश्याम मुरड़िया रहे। कार्यक्रम का संचालन श्रीहरि साहित्य सेवा संस्थान के अध्यक्ष रविनंदन चारण ने किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य ने कहा कि स्वास्थ्य केवल शरीर तक सीमित नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार स्वास्थ्य केवल रोगों की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक रूप से पूर्ण स्वस्थता की अवस्था है। यदि इसमें आध्यात्मिक संतुलन भी जुड़ जाए तो व्यक्ति के जीवन में वास्तविक आनंद, शांति और संतोष का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पुलिसकर्मी एवं समाजसेवी प्रतिदिन समाज की सेवा में अपना अमूल्य योगदान देते हैं। वे केवल अपने दायित्वों का निर्वहन ही नहीं करते, बल्कि समाज के स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं संस्कारों की भी रक्षा करते हैं। उन्होंने सभी से आत्ममंथन करने का आग्रह करते हुए कहा कि जो लोग दूसरों की सेवा में निरंतर लगे रहते हैं, उन्हें अपने स्वास्थ्य की भी उतनी ही चिंता करनी चाहिए। उन्होंने वर्तमान समय की तनावपूर्ण जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या तथा बढ़ते मानसिक दबाव को अनेक बीमारियों का प्रमुख कारण बताते हुए संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित योग एवं व्यायाम, पर्याप्त जल सेवन, पर्याप्त नींद तथा नशामुक्त जीवन अपनाने का आह्वान किया। साथ ही सकारात्मक सोच, ध्यान, प्रार्थना, ईश्वर-स्मरण, तनाव प्रबंधन तथा परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने को मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि "शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्", अर्थात यह शरीर ही सभी श्रेष्ठ कार्यों का प्रथम साधन है। यदि शरीर और मन स्वस्थ नहीं होंगे तो व्यक्ति परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं कर सकेगा। मुख्य अतिथि सर्कल इंस्पेक्टर औकार सिंह ने विशेष रूप से डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ एवं पुलिसकर्मियों से स्वयं के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने का आग्रह किया तथा समाजसेवियों से स्वास्थ्य जागरूकता को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धन, पद और प्रतिष्ठा का वास्तविक महत्व तभी है, जब व्यक्ति का तन स्वस्थ और मन प्रसन्न हो। विशिष्ट अतिथि डॉ. राष्ट्र सहाना आजाद एवं डॉ. घनश्याम मुरड़िया ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अनुशासित जीवनशैली अपनानी चाहिए तथा स्वयं स्वस्थ रहकर दूसरों को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सक के रूप में सेवा का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है और इस दायित्व का निर्वहन सेवा-भाव एवं समर्पण के साथ किया जाना चाहिए। इस अवसर पर चिकित्सा एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रमेश सुथार, डॉ. राष्ट्र सहाना आजाद, पारस देवी, रिद्धि शर्मा, गायत्री माली, दिव्या कुमावत, डॉ. गौतम पालीवाल, कैलाश चन्द्र बंजारा एवं मीरा कुमावत का सम्मान किया गया। पुलिस विभाग से हेड कांस्टेबल भगवतीलाल, कांस्टेबल पीराराम, एएसआई देवी लाल, एएसआई ओमप्रकाश चौधरी, कांस्टेबल विजेन्द्र कुमार, एएसआई छोगालाल, एएसआई मधुसूदन तथा एएसआई मदनलाल को भी समाज के प्रति उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, चिकित्सक, पुलिस अधिकारी, समाजसेवी एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
Saturday, 18 July 2026
★ *"आम आदमी सबसे ताकतवर है"* ★ आम आदमी इस लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। क्योंकि – 1. वही अपने *मत (Vote)* से जनप्रतिनिधियों का चुनाव करता है और सरकार बनती है। 2. वही प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष *कर (Taxes)* देकर शासन-प्रशासन के संचालन में योगदान देता है। फिर भी, *अपनी संवैधानिक शक्ति को न पहचानने के कारण* अनेक नागरिक स्वयं को नेता और प्रशासन के सामने याचक समझने लगते हैं। जबकि लोकतंत्र में नागरिक स्वामी (Sovereign Citizen) है और जनप्रतिनिधि तथा प्रशासन उसके सेवक (Public Servants) हैं, जिन्हें संविधान और कानून के अनुसार जनता की सेवा का दायित्व सौंपा गया है। *आम आदमी को क्या करना चाहिए?* *(1) नेता के साथ —* - सम्मानपूर्ण, लेकिन समानता और जवाबदेही का व्यवहार रखें। - व्यक्ति नहीं, नीति, कार्य और जनहित को महत्व दें। - मतदान सोच-समझकर करें और किए गए वादों का हिसाब मांगें। - किसी भी प्रकार की चापलूसी या भय से मुक्त रहें। *(2) प्रशासन के साथ —* - कानून का पालन करते हुए अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहें। - अपना वैध कार्य आत्मविश्वास के साथ अधिकारपूर्वक करवाएँ। - आवश्यकता होने पर RTI, जनसुनवाई, शिकायत पोर्टल और न्यायालय जैसे वैधानिक उपायों का उपयोग करें। - भ्रष्टाचार, अनुचित दबाव या अन्याय का कानूनी रूप से विरोध करें। याद रखें — *लोकतंत्र में आम आदमी न तो शासक का याचक है और न ही किसी का कृपापात्र। वह संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों से संपन्न, राष्ट्र का जिम्मेदार नागरिक है। इसलिए उसका व्यवहार सम्मानपूर्ण, जागरूक, आत्मसम्मानपूर्ण और कानूनसम्मत होना चाहिए।* संदेश: *"नेता और प्रशासन का सम्मान करें, लेकिन अपने संवैधानिक अधिकारों का सम्मान सबसे पहले स्वयं करें। जागरूक आम आदमी ही सशक्त लोकतंत्र की पहचान है।"* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* (183) #एक हिन्दुस्तानी #18/07/2026
Friday, 17 July 2026
"श्रीकृष्ण शरणम् ममः" पर 10 पोस्टरों की एक श्रृंखला बनाई गई है, अतः प्रत्येक पोस्टर में एक अलग विषय लिया गया है कि :— 1) अर्थ एवं भावार्थ 2) भगवत्प्रदत्त अष्टाक्षर मंत्र 3) ब्रह्मसम्बन्ध का रहस्य 4) बृजवासियों की शरणागति 5) पुष्टिमार्ग का सिद्धान्त 6) श्रीनाथजी का प्राकट्य 7) सेवा का महत्व 8) कृपा और पुष्टि 9) आधुनिक जीवन में उपयोगिता 10) निष्कर्ष – "जीवन जीने का सिद्धांत" सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य 16/07/2026 Dinesh Sanadhya: : 📽️ slideshow.pptx
Wednesday, 15 July 2026
★ *"श्रीकृष्ण शरणम् ममः"* ★ श्रीकृष्ण शरणम् ममः, जीवन का दिव्य विधान, *शरणागति में छिपा हुआ, भक्ति-सुधा का अमृत-ज्ञान।* अहंकार का त्याग जहाँ हो, कृपा वहीं बरसाती है, *श्रीनाथजी की करुणा से, जीवन-ज्योति जगाती है।* *वल्लभ प्रभु को स्वयं प्रभु ने, यह अष्टाक्षर मंत्र दिया,* ब्रह्मसम्बन्ध के पावन पथ का, दिव्य अनन्त प्रकाश किया। *बृजवासियों ने तन-मन-धन, अर्पित कर निज प्राण दिए,* निष्काम प्रेम की अनुपम गाथा, जग को अमर प्रमाण दिए। *सेवा ही साधन, सेवा ही साध्य, यही पुष्टिमार्ग का सार,* कृपा बिना न मिलते श्याम, यही भक्ति का सच्चा आधार। भय मिटता, विश्वास खिलता, शांति हृदय में घर करती, *प्रेम, समर्पण, विनय, सरलता, जीवन को मधुवन करती।* जप से बढ़कर इसे जियो, यही प्रभु का सच्चा मर्म, *"श्रीकृष्ण शरणम् ममः" बने, मानव जीवन का परम धर्म।* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* #एक_हिन्दुस्तानी (172) | 16/07/2026 #dineshapna
★ *"श्रीकृष्ण शरणम् ममः" का व्यावहारिक स्वरूप* ★ *(१) यदि "श्रीकृष्ण शरणम् ममः" मंत्र का वास्तविक एवं जीवंत स्वरूप किसी ने अपने जीवन में चरितार्थ किया, तो वे बृजवासी थे।* यद्यपि यह मंत्र उस समय शब्दरूप में प्रचलित था या नहीं, इसका ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, किन्तु इसका भाव सम्पूर्ण बृज-जीवन में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है। *(२) बृजवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण को केवल ईश्वर नहीं माना*, बल्कि उन्हें अपना सर्वस्व मान लिया। उन्होंने अपना तन, मन, धन, परिवार, मान-सम्मान और सम्पूर्ण जीवन श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया। उनकी भक्ति निष्काम थी; उन्होंने भगवान की सेवा के बदले कभी स्वर्ग, मोक्ष, सिद्धि अथवा किसी सांसारिक लाभ की कामना नहीं की। *(३) इसी निष्काम, अनन्य और आत्मसमर्पित प्रेम के कारण* श्रीमद्भागवत में व्रजवासियों का स्थान समस्त भक्तों में सर्वोच्च माना गया है। इसलिए श्रीकृष्ण बृजवासियों को अपना सखा मानते है। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं कि वे बृजवासियों के प्रेम का ऋण कभी नहीं चुका सकते। *(४) पुष्टिमार्ग का मूल सिद्धान्त* भी यही है कि भगवान की कृपा (पुष्टि) प्राप्त करने का मार्ग निष्काम प्रेम और पूर्ण शरणागति है। इसलिए पुष्टिमार्ग बृजवासियों की इसी भाव-भक्ति को आदर्श मानता है। *(५) श्रीकृष्ण का पुनः प्राकट्य :-* पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार, बृजवासियों के इसी निष्काम प्रेम के प्रतिफलस्वरूप भगवान श्रीकृष्ण ने कलियुग में श्रीनाथजी के रूप में पुनः प्राकट्य किया, ताकि वे अपने प्रिय भक्तों से पुनः सेवा स्वीकार कर सकें। (६) पुष्टिमार्ग व परंपरा के अनुसार, *गोवर्धन पर्वत पर श्रीनाथजी ने सर्वप्रथम सद्दू पाण्डे को दर्शन दिए और उनसे अपनी सेवा प्रारम्भ करवाई।* इसके पश्चात् भगवान ने जगद्गुरु श्री वल्लभाचार्य महाप्रभु को स्वप्न में आज्ञा देकर गोवर्धन पधारने का आदेश दिया तथा अपनी नियमित सेवा-पूजा की व्यवस्था स्थापित कराई। इसी से पुष्टिमार्ग में सेवा-प्रधान भक्ति और ब्रह्मसम्बन्ध की परंपरा का विस्तार हुआ। *(७) निष्कर्ष :-* इस दृष्टि से कहा जा सकता है कि *"श्रीकृष्ण शरणम् ममः" केवल उच्चारण करने का मंत्र नहीं, बल्कि बृजवासियों द्वारा जिया गया जीवन-दर्शन है।* बृजवासियों ने इसे अपने आचरण से सिद्ध किया और पुष्टिमार्ग ने उसी आदर्श को सिद्धान्त एवं साधना के रूप में प्रतिष्ठित किया। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* #एक_हिन्दुस्तानी (171) | 15/07/2026 #dineshapna
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