Saturday, 3 October 2026

★ *अपना मंच — (Gen-A = जागरूक जनता)* ★ ( आम जनता की पाठशाला — 7 ) 🟥 *जिम्मेदारी तय करना!* 🟥 *काम किसका है?* पिछली पाठशाला में हमने समझा— *> “समस्या दिखाई देने से पहले उसकी वास्तविक प्रकृति और कारण को समझना जरूरी है।”* अब अगला प्रश्न है— ❓ *इस समस्या का समाधान करना किसकी जिम्मेदारी है?* आम जनता अक्सर समस्या होने पर सीधे किसी जनप्रतिनिधि से शिकायत करती है। लेकिन हर समस्या का समाधान जनप्रतिनिधि स्वयं नहीं करता। किसी सार्वजनिक कार्य में अलग-अलग स्तर पर कानून, नीति, स्वीकृति, धन, कार्यान्वयन, निरीक्षण और जवाबदेही की अलग-अलग जिम्मेदारियाँ हो सकती हैं। 🟥 **Gen-A के 7 सवाल* 🟥 *① समस्या किस विषय से संबंधित है?* पानी, सड़क, सफाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण आदि। *② इसके लिए कानून/नियम क्या कहते हैं?* किस संस्था या प्राधिकारी को क्या जिम्मेदारी दी गई है? *③ जिम्मेदार संस्था कौन है?* नगरपालिका, नगर परिषद, पंचायत, राज्य सरकार, संबंधित विभाग या अन्य सार्वजनिक संस्था? *④ निर्णय लेने वाला कौन है?* नीति, योजना या कार्य की स्वीकृति किस स्तर पर होती है? *⑤ कार्य कराने वाला कौन है?* कार्य का वास्तविक क्रियान्वयन किस विभाग/अधिकारी/एजेंसी के माध्यम से होना है? *⑥ निगरानी और जाँच की जिम्मेदारी किसकी है?* कार्य सही हुआ या नहीं—इसकी जाँच कौन करेगा? *⑦ जवाबदेही किसकी बनती है?* समस्या के समाधान में देरी, लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में किससे वैधानिक रूप से जवाब माँगा जा सकता है? 🟥 *एक उदाहरण से समझें* 🟥 *समस्या — वार्ड में कचरा नियमित नहीं उठ रहा।* Gen-A केवल यह नहीं कहेगा— *> “सफाई नहीं हो रही है।”* *बल्कि पूछेगा—* ◆ सफाई की जिम्मेदारी किस संस्था की है? ↓ ◆ कौन-सा कानून/नियम लागू है? ↓ ◆ किस अधिकारी/व्यवस्था को जिम्मेदारी दी गई है? ↓ ◆ सफाई के लिए बजट/व्यवस्था क्या है? ↓ ◆ किस एजेंसी/कर्मचारी को काम सौंपा गया है? ↓ ◆ निगरानी कौन करता है? ↓ ◆ शिकायत के बाद क्या कार्रवाई हुई? ↓ ◆ जवाबदेही किसकी बनती है? 🟥 *याद रखें* 🟥 *> “जिसका काम है, उसी से काम का हिसाब पूछें।”* लेकिन जिम्मेदारी अनुमान से नहीं, कानून, नियम, आदेश और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तय करें। ★ *अपना मंच का सूत्र* ★ 【समस्या → कानून/नियम → जिम्मेदार संस्था → जिम्मेदार अधिकारी/व्यवस्था → प्रमाण → जवाबदेही → समाधान】 🟥 *Gen-A का अगला कदम* 🟥 *>“समस्या समझ ली?* *अब यह पता करो—* *❝काम किसका है?❞”* *आम जनता → जागरूक जनता (Gen-A) बने!* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* • Chartered Accountant • Social Activist • Political Analyst • Spiritual Thinker • Founder of Life Management (309) #एक_हिन्दुस्तानी #03/10/2026 #dineshapna


 

Friday, 2 October 2026

★ *अपना मंच — (Gen-A = जागरूक जनता)* ★ ( आम जनता की पाठशाला — 6 ) 🟥 *समस्या को समझना!* 🟥 *वास्तविक समस्या क्या है?* आम जनता के सामने जब कोई समस्या आती है, तो हम अक्सर समस्या दिखाई देने वाले रूप को ही वास्तविक समस्या मान लेते हैं। लेकिन Gen-A (जागरूक जनता) केवल समस्या को देखती नहीं— समस्या की जड़ तक पहुँचने का प्रयास करती है। 🟥 *समस्या को समझने के लिए 7 प्रश्न* 🟥 *① समस्या क्या है?* वास्तव में जनता को परेशानी किस बात से हो रही है? *② समस्या कहाँ है?* किस स्थान, वार्ड, क्षेत्र या संस्था से संबंधित है? *③ समस्या कितने लोगों को प्रभावित कर रही है?* क्या यह व्यक्तिगत समस्या है या सार्वजनिक समस्या? *④ समस्या का वास्तविक कारण क्या है?* केवल दिखाई देने वाले परिणाम को समस्या न मानें—मूल कारण खोजें। *⑤ यह समस्या किसकी जिम्मेदारी है?* जनप्रतिनिधि, नगरपालिका, पंचायत, विभाग, संस्था या किसी अन्य प्राधिकरण की? *⑥ समस्या के समाधान के लिए कानून/नियम क्या कहते हैं?* अधिकार के साथ कानूनी जिम्मेदारी को भी समझें। *⑦ अब तक समस्या के समाधान के लिए क्या किया गया?* शिकायत, आवेदन, स्वीकृति, बजट, कार्यवाही और परिणाम—रिकॉर्ड के आधार पर जाँचें। 🟥 *उदाहरण से समझें* 🟥 दिखाई देने वाली समस्या: *“सड़क खराब है।”* लेकिन Gen-A के सवाल होंगे— *सड़क क्यों खराब है?* → निर्माण की गुणवत्ता कैसी थी? → रखरखाव कब और किसने करना था? → कार्य किस योजना से हुआ? → कितना बजट स्वीकृत हुआ? → कितना खर्च हुआ? → कार्य की गुणवत्ता की जाँच हुई या नहीं? → जिम्मेदार संस्था कौन है? → समाधान के लिए अब क्या कार्रवाई होनी चाहिए? इसलिए— *> “जो दिखाई दे रहा है, वह हमेशा वास्तविक समस्या नहीं होती;* वास्तविक समस्या तक पहुँचने के लिए उसके कारण और जिम्मेदारी को समझना आवश्यक है।” 🟥 *Gen-A का पहला कदम* 🟥 *समस्या देखकर शिकायत नहीं—पहले समस्या को समझें।* 【समस्या → कारण → प्रभावित जनता → कानून/नियम → जिम्मेदारी → प्रमाण → समाधान】 ★ *अपना मंच का संदेश* ★ > “समस्या की तस्वीर नहीं, समस्या की जड़ पहचानिए।” *आम जनता → जागरूक जनता (Gen-A) बने!* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* • Chartered Accountant • Social Activist • Political Analyst • Spiritual Thinker • Founder of Life Management (308) #एक_हिन्दुस्तानी #03/10/2026 #dineshapna


 

Thursday, 1 October 2026

■ *शास्त्री जी व गांधी जी की जयंती पर शुभकामनाएँ व मुबारकबाद !* ■ ★ *“अहिंसा परमो धर्मः, धर्मरक्षा तथैव च।”* ★ *शाब्दिक अर्थ:* अहिंसा सर्वोच्च धर्म है, और धर्म की रक्षा करना भी उतना ही सर्वोच्च कर्तव्य है। अर्थात् शांति का पालन करो, लेकिन धर्म और न्याय की रक्षा से पीछे मत हटो। *(१) महात्मा गांधी* अहिंसा को जीवन और संघर्ष का प्रमुख सिद्धान्त बनाया तथा अन्याय का विरोध सत्याग्रह से किया। धर्म/न्याय की रक्षा को भी महत्व दिया, लेकिन हिंसक प्रतिकार को स्वीकार नहीं किया। *(2) लाल बहादुर शास्त्री* अहिंसा और शांति में विश्वास रखते हुए भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक शक्ति-प्रयोग को कर्तव्य माना। “जय जवान, जय किसान” के माध्यम से शांति के साथ राष्ट्र की रक्षा को समान महत्व दिया। *(३) श्रीकृष्ण* पहले शांति और समझौते का प्रयास किया; असफल होने पर धर्म की रक्षा के लिए युद्ध को स्वीकार किया। अर्थात् अहिंसा को आदर्श माना, लेकिन धर्मरक्षा के लिए आवश्यक धर्मयुक्त संघर्ष से पीछे नहीं हटे। *(४) निष्कर्ष* इसलिए वास्तविक वैचारिक अंतर यह है: *“अहिंसा परमो धर्मः”* → गांधीजी ने इसे अहिंसा को सर्वोच्च साधन मानकर अत्यधिक महत्व दिया। *“धर्मरक्षा तथैव च”* → कृष्ण की दृष्टि में धर्म और न्याय की रक्षा भी सर्वोच्च कर्तव्य है; इसलिए केवल अहिंसा के नाम पर धर्मरक्षा का कर्तव्य छोड़ा नहीं जा सकता। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* • Chartered Accountant • Social Activist • Political Analyst • Spiritual Thinker • Founder of Life Management (307) #एक_हिन्दुस्तानी #02/10/2026 #dineshapna


 






■ *शास्त्रीजी व गाँधीजी की जयन्ती की शुभकामनाएँ !* ■ ★ *गांधी और श्रीकृष्ण की अहिंसा / हिंसा में महत्वपूर्ण तथ्य व सत्य* ★ 🟥 *1. गांधीजी की दृष्टि* 🟥 ◆ अन्याय का विरोध भी अहिंसा से। ◆अत्याचारी कोई भी हो— हिंसा का उत्तर हिंसा से नहीं, बल्कि सत्य, आत्मबल और सत्याग्रह से। ◆गांधीजी की अहिंसा का सूत्र— *अन्याय → सत्य → अहिंसक प्रतिरोध → जन-संगठन → परिवर्तन* 🟥 *2. श्रीकृष्ण की दृष्टि* 🟥 ◆ पहला मार्ग — शांति और समझौता। ◆ यदि अधर्म समाप्त न हो और धर्म व न्याय की रक्षा आवश्यक हो जाए, तो कर्तव्य से पलायन नहीं। ◆गांधीजी की अहिंसा का सूत्र— *शांति → धर्म/न्याय का प्रयास → धर्मयुक्त संघर्ष* गीता 2.31 — “धर्म्याद् युद्धात्...” ★★ *मुख्य अंतर* ★★ गांधी: *अन्याय का विरोध — अहिंसक सत्याग्रह से।* श्रीकृष्ण: *शांति का प्रयास पहले; अपरिहार्य धर्मयुक्त संघर्ष से पलायन नहीं।* ■ अहिंसा का अर्थ अन्याय को सहना नहीं है। और ■ धर्म के लिए संघर्ष का अर्थ हिंसा-प्रिय होना भी नहीं है। ■ *गांधीजी की कसौटी → अहिंसक साधन* ■ *श्रीकृष्ण की कसौटी → धर्मयुक्त कर्तव्य* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* • Chartered Accountant • Social Activist • Political Analyst • Spiritual Thinker • Founder of Life Management (306) #एक_हिन्दुस्तानी #02/10/2026 #dineshapna


 

★ *अपना मंच — (Gen-A = जागरूक जनता)* ★ (आम जनता की पाठशाला — 5) 🟥 *आम जनता की भूमिका* 🟥 *① आम जनता → जनप्रतिनिधि चुनती है* आम जनता वोट देकर अपने जनप्रतिनिधि चुनती है, जो शासन व्यवस्था में जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। *② आम जनता → शासन-व्यवस्था के लिए संसाधन देती है* जनता करों एवं अन्य वैधानिक माध्यमों से राजस्व उपलब्ध कराती है, जिससे शासन-प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं का संचालन होता है। *③ जनप्रतिनिधि → कानून एवं नीतियाँ बनाते हैं* जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे जनहित में कानून, नीतियाँ और योजनाएँ बनाने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भूमिका निभाएँ तथा सरकार के कार्यों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करें। *④ शासन-प्रशासन → कानून लागू करता है* प्रशासनिक तंत्र का दायित्व है कि संविधान, कानून, नियम और स्वीकृत नीतियों के अनुसार जनसेवाएँ तथा विकास कार्य निष्पादित करे। *⑤ न्यायपालिका → कानून की रक्षा एवं न्याय* न्यायपालिका संविधान और कानून के अनुसार विवादों का न्यायिक निपटारा करती है तथा नागरिकों के अधिकारों की न्यायिक सुरक्षा करती है। 🟥 *फिर भी प्रश्न है—जन समस्याएँ क्यों?* 🟥 *जब —* ◆ जनता जनप्रतिनिधि चुनती है, ◆ जनता कर एवं अन्य माध्यमों से राजस्व देती है, ◆ जनप्रतिनिधि कानून एवं नीतियों के निर्माण में भूमिका निभाते हैं, ◆ शासन-प्रशासन जनसेवा के लिए कार्य करता है, और ◆ न्यायपालिका कानून एवं अधिकारों की रक्षा करती है, *तो फिर —* ❓ आम जनता की मूलभूत समस्याएँ आज भी क्यों बनी रहती हैं? 【पानी • सड़क • सफाई • स्वास्थ्य • शिक्षा • रोजगार • पर्यावरण • सार्वजनिक सेवाएँ • अन्य जनसमस्याएँ】 🟥 *समस्या का समाधान है — Gen-A : जागरूक जनता* 🟥 *शिकायतकर्ता नहीं — Social Auditor बनें!* आम जनता केवल समस्या की शिकायत न करे, बल्कि समस्या के समाधान की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखे। *Gen-A की प्रक्रिया* 【समस्या ~ कानून एवं जिम्मेदारी की जानकारी ~ प्रमाण ~ प्रश्न ~ आवेदन / शिकायत ~ सुनवाई ~ जवाबदेही ~ समाधान ~ परिणाम का Social Audit ~ निगरानी】 🟥 *आम जनता याद रखें* 🟥 ◆ वोट से जनप्रतिनिधि चुनो। ◆ कानून से अपने अधिकार और जिम्मेदारी जानो। ◆ प्रमाण से सवाल करो। ◆ आवेदन से समाधान की प्रक्रिया शुरू करो। ◆ जवाबदेही से काम कराओ। ◆ परिणाम का Social Audit करो। ◆ समाधान के बाद भी निगरानी रखो। *आम जनता → Gen-A (जागरूक जनता) बने!* “शिकायत करने वाली जनता से समाधान कराने वाली जनता बनें।” *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* • Chartered Accountant • Social Activist • Political Analyst • Spiritual Thinker • Founder of Life Management (305) #एक_हिन्दुस्तानी #02/10/2026 #dineshapna


 

Wednesday, 30 September 2026

★ *अपना मंच — (Gen-A = जागरूक जनता)* ★ ( आम जनता की पाठशाला – ●4● ) *1. आम जनता लोकतंत्र का आधार क्यों है?* *(i) लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता:* 【वोट देती है → प्रतिनिधि चुनती है → कर/राजस्व देती है → सार्वजनिक व्यवस्था चलाने के लिए संसाधन उपलब्ध कराती है → और शासन से जवाबदेही मांग सकती है।】 *(ii) स्थानीय शासन के संदर्भ में* संविधान ने *पंचायती राज और नगरपालिकाओं को संवैधानिक स्थान* दिया है। लेकिन उनके प्रभावी कामकाज के लिए Functions, Funds और Functionaries का वास्तविक हस्तांतरण महत्वपूर्ण है। *CAG* की हाल की स्थानीय निकाय ऑडिट रिपोर्टों में भी इन्हीं क्षेत्रों—कार्य, वित्त, स्टाफ, वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही—से संबंधित कमियाँ सामने आती रही हैं। *इसलिए केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि “सरकार है, इसलिए काम हो जाएगा।”* *(iv) सही प्रश्न है:* “जिस काम की जिम्मेदारी जिस संस्था की है, *उसे काम करने के लिए अधिकार, धन, कर्मचारी और जवाबदेही—चारों मिले हैं या नहीं?”* *2. फिर आम जनता के मूलभूत कार्य क्यों नहीं हो पाते?* इसके कई कारण हो सकते हैं। हर मामले में सभी कारण लागू हों, यह जरूरी नहीं। *① जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होती* एक नागरिक की समस्या—जैसे सड़क, नाली, पानी, सफाई या स्ट्रीट लाइट—एक से अधिक विभागों से जुड़ सकती है। फिर नागरिक को कहा जाता है: *“यह हमारे विभाग का काम नहीं है।”* इससे जिम्मेदारी एक-दूसरे पर स्थानांतरित होती रहती है। *② अधिकार और जिम्मेदारी अलग-अलग संस्थाओं में बँटी होती है* कई बार स्थानीय निकाय से सेवा देने की अपेक्षा होती है, लेकिन उसके पास पर्याप्त धन, कर्मचारी या प्रशासनिक अधिकार नहीं होते। *CAG* की स्थानीय निकाय संबंधी रिपोर्टों में ऐसी स्थितियों के उदाहरण मिलते हैं — *जैसे स्टाफ की कमी, वित्तीय प्रबंधन की कमियाँ और कार्यों/संसाधनों के हस्तांतरण से जुड़ी समस्याएँ।* *③ खर्च होना और परिणाम मिलना अलग-अलग बातें हैं* सरकार यह बता सकती है कि: “₹10 लाख खर्च किए गए।” लेकिन *जनता का असली प्रश्न होना चाहिए:* “₹10 लाख से जनता को मिला क्या?” यही Financial Audit से आगे Performance Audit का मूल प्रश्न है। CAG स्थानीय निकायों में वित्तीय, अनुपालन और *performance audit करता है।* *④ योजना बनती है, लेकिन क्रियान्वयन कमजोर हो सकता है* समस्या: 【आवश्यकता → योजना → बजट → स्वीकृति → कार्य → भुगतान】 इनमें से किसी भी चरण पर कमी हो तो अंतिम परिणाम जनता तक नहीं पहुँचता। *⑤ जवाबदेही परिणाम से नहीं, केवल प्रक्रिया से जुड़ जाती है* ◆कई बार अधिकारी कह सकता है: *“फाइल चला दी।”* ◆जनप्रतिनिधि कह सकता है: *“कार्य स्वीकृत करा दिया।”* ◆ठेकेदार कह सकता है: *“काम कर दिया।”* ◆लेकिन जनता पूछती है: *> “समस्या समाप्त हुई या नहीं?”* यहीं *Outcome-based accountability आवश्यक हो* जाती है। *⑥ सूचना का अभाव जनता की शक्ति कम करता है* यदि जनता को यह ही पता नहीं कि — ◆पैसा कितना आया? ◆किस योजना में आया? ◆किसने स्वीकृत किया? ◆किसे ठेका मिला? ◆कितना भुगतान हुआ? ◆काम की गुणवत्ता किसने जाँची? *तो जवाबदेही मांगना कठिन हो जाता है।* इसीलिए RTI Act, 2005 का उद्देश्य ही सार्वजनिक प्राधिकरणों के नियंत्रण में उपलब्ध सूचना तक नागरिकों की पहुँच के माध्यम से transparency और accountability को बढ़ाना है। *3. क्या इसका अर्थ है कि जनप्रतिनिधि या सरकारी कर्मचारी काम नहीं करते?* नहीं। यह निष्कर्ष भी सही नहीं होगा। बहुत से जनप्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी-कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। *समस्या को व्यक्ति-विशेष के बजाय व्यवस्था और जवाबदेही के दृष्टिकोण से देखना अधिक उचित है।* असल प्रश्न यह होना चाहिए: *> जहाँ जनता का वैध काम नहीं हो रहा है, वहाँ जिम्मेदार व्यक्ति/संस्था कौन है और उसे जवाबदेह बनाने की प्रभावी व्यवस्था क्या है?* *4. समाधान क्या है?* मेरे विचार से आपके “अपना मंच — Gen-A = जागरूक जनता” के लिए *समाधान का सबसे मजबूत मॉडल* यह हो सकता है: *जनता को शिकायतकर्ता से Social Auditor बनाना।* अर्थात— ① समस्या पहचानो ↓ ② जिम्मेदार विभाग/अधिकारी पहचानो ↓ ③ कानून और अधिकार जानो ↓ ④ रिकॉर्ड और प्रमाण प्राप्त करो ↓ ⑤ लिखित आवेदन करो ↓ ⑥ समयबद्ध जवाब मांगो ↓ ⑦ आवश्यकता हो तो RTI/अपील/अन्य वैधानिक उपाय अपनाओ ↓ ⑧ काम और खर्च की जाँच करो ↓ ⑨ परिणाम की जाँच करो ↓ ⑩ समस्या समाप्त होने तक निगरानी रखो। *यही आपकी पहले से विकसित श्रृंखला —* 【जानकारी → प्रश्न → प्रमाण → आवेदन → सुनवाई → जवाबदेही → समाधान → निगरानी】 का वास्तविक उपयोग है। *5. सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कहाँ चाहिए?* सिर्फ “सरकार से काम करवाना” पर्याप्त नहीं है। *व्यवस्था को इस प्रकार देखना चाहिए:* *पुराना तरीका:* 【जनता → शिकायत → अधिकारी → आश्वासन → फिर शिकायत】 *Gen-A का तरीका:* 【जनता → समस्या → कानून → प्रमाण → जिम्मेदारी → लिखित कार्रवाई → समयसीमा → परिणाम → Social Audit】 इससे बातचीत “कृपया मेरा काम कर दीजिए” से बदलकर *> “कानून के अनुसार यह काम किसकी जिम्मेदारी है, किस समय में होना चाहिए और इसकी जवाबदेही किसकी है?”* हो जाती है। *6. एक लाइन में पूरा निष्कर्ष* *> लोकतंत्र में जनता का काम केवल सरकार चुनना नहीं है; सरकार के काम का वैधानिक, तथ्यात्मक और शांतिपूर्ण तरीके से सामाजिक ऑडिट करना भी जागरूक नागरिकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।* और आपके अपना मंच के लिए इसे इस सूत्र में रखा जा सकता है: 🟥 *वोट से सरकार चुनो —* कानून से अधिकार जानो — प्रमाण से सवाल करो — जवाबदेही से काम कराओ — और परिणाम का Social Audit करो।** *यही “आम जनता → Gen-A (जागरूक जनता)” बनने की दिशा है।* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* • Chartered Accountant • Social Activist • Political Analyst • Spiritual Thinker • Founder of Life Management (304) #एक_हिन्दुस्तानी #01/10/2026 #dineshapna


 

Tuesday, 29 September 2026

★ *अपना मंच — (Gen-A = जागरूक जनता)* ★ ( आम जनता की पाठशाला – 3 ) 🟥 *आम जनता का अर्थ* 🟥 “आम जनता” से आशय *सामान्य नागरिकों के उस व्यापक वर्ग से है, जो किसी देश, राज्य, शहर, गाँव, वार्ड या समाज में रहता है और जिसके जीवन पर* सरकार, प्रशासन, कानून, नीतियों, सार्वजनिक सेवाओं तथा जनप्रतिनिधियों के निर्णयों का सीधा प्रभाव पड़ता है। सरल शब्दों में— *> आम जनता वह है जो शासन-व्यवस्था की लाभार्थी भी है और उसके प्रति जवाबदेही मांगने का अधिकार भी रखती है।* “आम जनता” का अर्थ गरीब या कमजोर व्यक्ति मात्र नहीं है। इसमें विभिन्न आर्थिक, सामाजिक और व्यावसायिक वर्गों के सामान्य नागरिक शामिल हो सकते हैं। 🟥 *आम जनता के प्रमुख प्रकार* 🟥 इसे व्यावहारिक रूप से इस प्रकार समझा जा सकता है— *(१) आर्थिक स्थिति के आधार पर* ◆निम्न आय वर्ग ◆मध्यम आय वर्ग ◆उच्च आय वर्ग के सामान्य नागरिक *(२) व्यवसाय के आधार पर* ◆किसान ◆मजदूर ◆कर्मचारी ◆व्यापारी ◆स्वरोजगार करने वाले ◆पेशेवर ◆छोटे उद्यमी ◆विद्यार्थी एवं युवा ◆गृहिणियाँ ◆वरिष्ठ नागरिक *(३) निवास के आधार पर* ◆ग्रामीण जनता ◆शहरी जनता ◆नगर/वार्ड की जनता ◆आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्र की जनता 🟥 *सार्वजनिक समस्या से प्रभावित आम जनता*🟥 (१) पानी, सड़क, बिजली, सफाई आदि से प्रभावित (२) शिक्षा एवं स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं से प्रभावित (३) रोजगार एवं व्यवसाय संबंधी समस्याओं से प्रभावित (४) पर्यावरण एवं प्रदूषण से प्रभावित (५) सरकारी सेवाओं एवं योजनाओं से संबंधित नागरिक *🟥 “अपना मंच” के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण वर्गीकरण*🟥 आम जनता को उसकी *जागरूकता और सक्रियता के आधार पर* भी समझा जा सकता है— *① Gen-S — शिकायत करने वाली जनता* समस्या होने पर शिकायत करती है, लेकिन आगे की प्रक्रिया और परिणाम की निगरानी सीमित रहती है। *② Gen-A — जागरूक जनता* समस्या को समझती है, कानून और अधिकार जानती है, प्रमाण जुटाती है, प्रश्न पूछती है, आवेदन करती है, सुनवाई एवं जवाबदेही मांगती है और परिणाम की निगरानी करती है। इस दृष्टि से आपका ★★ *“अपना मंच” का मूल विचार* ★★ बहुत स्पष्ट रूप में लिखा जा सकता है: *> “आम जनता केवल शिकायतकर्ता नहीं—जागरूक नागरिक और जनता की सोशल ऑडिटर बने।”* ★★ *अपना मंच” का सूत्र:*★★ 【जानकारी → प्रश्न → प्रमाण → आवेदन → सुनवाई → जवाबदेही → समाधान → निगरानी】 *यही आम जनता से Gen-A (जागरूक जनता) बनने की प्रक्रिया है।* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* Chartered Accountant • Social Activist • Political Analyst • Spiritual Thinker • Founder of Life Management (303) #एक_हिन्दुस्तानी #30/09/2026 #dineshapna