dineshapna
Chartered Accountant,Social Activist,Political Analysist-AAP,Spritual Thinker,Founder of Life Management, From India, Since 1987.
Monday, 18 May 2026
★ *“खनिज भी रहे, प्रकृति भी बचे”* ★ धरती माँ की गोद से हम, खनिज रत्न जो पाते हैं, *पर हर आघात पहाड़ों पर, अपने भविष्य को मिटाते हैं।* मार्बल देता रोजगार हमें, समृद्धि का वरदान, *पर पर्यावरण के बिन सूना, हर वैभव, हर सम्मान।* कटते वृक्ष, उड़ती धूल, नदियों में घुलता ज़हर, *यदि अब भी हम न चेते, संकट आएगा प्रखर।* खनिज सम्पदा का दोहन हो, पर नियमों का भी मान, *हर खदान के संग उगें फिर, हरियाली के नव प्राण।* व्यापारी हों उत्तरदायी, अधिकारी भी जागें आज, *धरती, जल, वन, वायु बचाना—हम सबका है यह काज।* आओ मिलकर प्रण ये लें, प्रकृति का मान बढ़ाएँ, *पत्थर के संग आने वाली पीढ़ी का भविष्य भी बचाएँ।* *“हर खदान के साथ हरियाली,* यही हमारी सच्ची जिम्मेदारी।” *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (119) #19/05/2026 #dineshapna
Saturday, 16 May 2026
★ *“सनातन बोर्ड” क्यों बनना चाहिए ?"* ★ यदि “सनातन बोर्ड” का उद्देश्य निम्न हो, तो इसकी आवश्यकता पर विचार किया जा सकता है :— (i) *मन्दिरों की स्वायत्तता एवं संरक्षण हेतु :-* आज अनेक हिन्दू मन्दिर विभिन्न राज्य कानूनों के अधीन सरकारी नियंत्रण में हैं। एक स्वतंत्र सनातन बोर्ड मन्दिरों के धार्मिक, आर्थिक और प्रशासनिक प्रबंधन को सनातन परम्पराओं के अनुरूप संचालित करने में सहायक हो सकता है। (ii) *सनातन संस्कृति एवं शिक्षा के संरक्षण हेतु :-* वेद, उपनिषद, संस्कृत, शास्त्र, गौशाला, गुरुकुल, तीर्थ परम्परा, उत्सव आदि के संरक्षण और संवर्धन हेतु एक संस्थागत निकाय उपयोगी हो सकता है। (iii) *धार्मिक अधिकारों की रक्षा हेतु :-* भारतीय संविधान के *अनुच्छेद 25* — धर्म मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता। *अनुच्छेद 26* — धार्मिक संस्थाओं को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार। *अनुच्छेद 29* — अपनी संस्कृति के संरक्षण का अधिकार। यदि बोर्ड इन अधिकारों की रक्षा और धार्मिक स्वायत्तता के लिए बने, तो उसका संवैधानिक आधार मजबूत हो सकता है। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (118) #17/05/2026 #dineshapna
★ *श्रीनाथजी मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त हो !* ★ — (आस्था, अधिकार और उत्तरदायित्व का प्रश्न) — नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि *वल्लभ सम्प्रदाय की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत केंद्र है।* सदियों से यह मंदिर “सेवा ही साधना” की भावना के साथ वल्लभ कुल एवं वैष्णव समाज द्वारा संचालित धार्मिक मर्यादाओं का प्रतीक रहा है। गोवर्धन से मेवाड़ तक *श्रीनाथजी की यात्रा केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि धर्म और परंपरा की रक्षा का इतिहास है।* महाराणा राज सिंह जी के संरक्षण में स्थापित यह मंदिर सदैव धार्मिक स्वायत्तता और श्रद्धा का केंद्र रहा, किन्तु *वर्तमान में “नाथद्वारा मंदिर मंडल अधिनियम, 1959” के अंतर्गत सरकारी नियंत्रण में है।* भारतीय *संविधान के अनुच्छेद 25 से 28* प्रत्येक धार्मिक सम्प्रदाय को अपने धर्म और धार्मिक संस्थानों के संचालन की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं। ऐसे में किसी विशिष्ट हिन्दू मंदिर पर निरंतर सरकारी नियंत्रण धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांत पर प्रश्न खड़े करता है। चिंता का विषय यह भी है कि *सरकारी नियंत्रण के बावजूद मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा, दानराशि के पारदर्शी उपयोग एवं प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर समय-समय पर प्रश्न उठते रहे हैं।* श्रद्धालुओं की अपेक्षा है कि ठाकुरजी को अर्पित धन धर्म, सेवा, गौसंरक्षण, संस्कृत शिक्षा और जनकल्याण में समर्पित हो। अतः समय की मांग है कि श्रीनाथजी मंदिर को *सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर, वल्लभ कुल एवं बृजवासी समाज की परंपरानुसार* एक पारदर्शी, उत्तरदायी और धर्मसम्मत व्यवस्था स्थापित की जाए। यह *केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि आस्था के सम्मान, परंपरा की रक्षा और श्रद्धालुओं के विश्वास की पुनर्स्थापना का प्रश्न है।* “श्रीनाथजी की सेवा, श्रीनाथजी की मर्यादा के अनुसार हो — यही प्रत्येक भक्त की भावना है।” *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (117) #16/05/2026 #dineshapna
Tuesday, 12 May 2026
★ *स्वतंत्र भारत में सनातन समाज के अधिकार* ★ *भारत की सनातन संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध परम्पराओं में से एक है।* हमारे मन्दिर केवल पूजा-स्थल नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक जीवन के केन्द्र रहे हैं। इतिहास साक्षी है कि *आक्रांताओं ने हमारी आस्था को कमजोर करने हेतु सबसे पहले मन्दिरों को लूटा, तोड़ा, हमारी शिक्षा और जीवन-पद्धति को नष्ट करने का प्रयास किया तथा अनेक लोगों को अत्याचार सहने पड़े।* किन्तु *आज हम स्वतंत्र भारत के नागरिक हैं। हमारा Constitution of India हमें समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार देता है।* *अनुच्छेद 14* सभी को समानता का अधिकार देता है, जबकि *अनुच्छेद 25 एवं 26* हमें अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक संस्थाओं के स्वतंत्र संचालन का अधिकार प्रदान करते हैं। ऐसी स्थिति में *यह अपेक्षा न्यायसंगत है कि सनातन समाज, उसके मन्दिरों और धार्मिक संस्थानों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव या अन्याय न हो।* हमें अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक होकर, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपने जनप्रतिनिधियों से न्याय और समानता की मांग करनी चाहिए। *इतिहास ने हमें संघर्ष सिखाया है, और संविधान ने हमें अधिकार दिए हैं* — अब समय है जागरूक होकर अपने अधिकार प्राप्त करने का। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (116) #12/05/2026 #dineshapna
Sunday, 10 May 2026
★ *सनातन जागरण का शंखनाद* ★ *“धर्मो रक्षति रक्षितः” — जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।* हमें गर्व है कि हम हिन्दू हैं, हिन्दुस्तानी हैं, और इसलिए सनातनी हैं। *हमारा प्रथम कर्तव्य है कि हम सनातन धर्म का पूर्ण निष्ठा से पालन करें, और साथ ही भारत के संविधान एवं विधि-व्यवस्था का सम्मान करें।* किन्तु जब कहीं संविधान की मूल भावना के विपरीत भेदभाव, अन्याय या असमानता दिखाई दे, तब उसका संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक विरोध करना भी प्रत्येक जागरूक नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है। *१. समानता का अधिकार – अनुच्छेद 14* भारत का संविधान अनुच्छेद 14 के अंतर्गत सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता एवं समान संरक्षण का अधिकार देता है। यदि अन्य धार्मिक संस्थानों की तुलना में केवल हिन्दू मन्दिरों के प्रबंधन, सम्पत्ति या धार्मिक कार्यों में अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप हो, तो यह प्रश्न उठाना स्वाभाविक है कि क्या समानता का सिद्धान्त समान रूप से लागू हो रहा है? यह विषय संवैधानिक विमर्श और न्यायिक समीक्षा का विषय है, और इस पर जागरूक चर्चा आवश्यक है। *२. धर्म की स्वतंत्रता – अनुच्छेद 25 एवं 26* संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। अनुच्छेद 26 धार्मिक सम्प्रदायों को अपने धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन का अधिकार प्रदान करता है। अतः सनातन समाज को अपने मन्दिरों, परम्पराओं और धार्मिक संस्थाओं के संरक्षण हेतु इन संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए। *३. शिक्षा और संस्कृति की रक्षा – अनुच्छेद 29 एवं 30* संविधान अनुच्छेद 29 के माध्यम से प्रत्येक समुदाय को अपनी संस्कृति और परम्परा सुरक्षित रखने का अधिकार देता है। हिन्दू समाज को भी अपनी संस्कृति, शास्त्र, संस्कार और धर्मज्ञान अगली पीढ़ियों तक पहुँचाने हेतु संगठित प्रयास करने चाहिए—घर में, समाज में और शिक्षण संस्थानों में। *अब समय है जागरण का!* यदि हम स्वयं अपने धर्म, मन्दिरों और परम्पराओं के प्रति उदासीन रहेंगे, तो उनकी रक्षा कौन करेगा? सनातन केवल पूजा-पद्धति नहीं, यह जीवन-पद्धति है। मन्दिर केवल भवन नहीं, हमारी आस्था, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के केन्द्र हैं। *आज आवश्यकता है कि प्रत्येक हिन्दू संकल्प ले :—* ⚔️ मैं अपने धर्म का ज्ञान प्राप्त करूँगा। ⚔️ मैं अपने मन्दिरों और धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों के प्रति जागरूक रहूँगा। ⚔️ मैं संविधानसम्मत और विधिसम्मत तरीके से अपने अधिकारों की रक्षा करूँगा। ⚔️ मैं सनातन संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का दायित्व निभाऊँगा। *याद रखें :—* "जो अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा नहीं करता, इतिहास उसकी पहचान मिटा देता है।" अतः आइए, *स्वयं से, अभी से, अपने घर से—सनातन रक्षा का यह पावन अभियान प्रारम्भ करें।* ●जय श्रीराम।●जय श्रीकृष्ण।●जय हिन्द। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (115) #10/05/2026 #dineshapna
Saturday, 9 May 2026
★ *आदर्श पुजारी : : सनातन के सच्चे रक्षक* ★ तब समझ आता है, *पुजारी होना कितना कठिन,* *कितना तप, कितना अनुशासन,* कितना समर्पण माँगता प्रतिक्षण। यह सेवा न यश की अभिलाषा, न धन पाने का कोई मान; *यह तो केवल प्रभु चरणों में* *अर्पित जीवन का सम्मान।* *वे धर्म का भाषण नहीं देते,* *धर्म को जीवन में जीते हैं;* अपने कर्म और पावन आचरण से सनातन की ज्योति सींचते हैं। किताबों से संस्कृति जीवित नहीं, तपस्वी परंपराएँ आधार हैं; *इन्हीं के कारण मंदिर आज भी* *आस्था के सच्चे द्वार हैं।* *बद्रीनाथ धाम के आदर्श पुजारी,* *त्याग और सेवा की पहचान;* हिम शिखरों में तप कर जो रखते प्रभु का दिव्य सम्मान। नमन उन कर्मयोगी जनों को, जो धर्म के सच्चे रक्षक हैं; *पुजारी केवल सेवक नहीं—* *सनातन संस्कृति के संरक्षक हैं।* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (114) #09/05/2026 #dineshapna
Thursday, 7 May 2026
*★“सुरक्षित हरित परिवहन – स्वच्छ पर्यावरण – सुरक्षित राजस्थान” अभियान की पहल !★* राजस्थान में खनिज परिवहन से उत्पन्न प्रदूषण, ओवरलोडिंग एवं सड़क सुरक्षा की गंभीर समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय पर्यावरण एवं खनिज संरक्षण मंच द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। *मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मी नारायण आमेटा एवं राजस्थान प्रदेश सचिव सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* ने उपमुख्यमंत्री श्रीमती दीया कुमारी जी को उनके नाथद्वारा प्रवास के दौरान एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि मार्बल, ग्रेनाइट एवं अन्य खनिजों के अनियंत्रित परिवहन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग एवं मुख्य जिला सड़कों पर प्रदूषण, ओवरलोडिंग एवं दुर्घटनाओं का जोखिम लगातार बढ़ रहा है, जिससे जन-धन हानि एवं पर्यावरण क्षति हो रही है। मंच द्वारा प्रस्तुत सुझावों में प्रमुख रूप से— *खनिज वाहनों में ओवरलोडिंग पर सख्ती, तिरपाल से ढककर सुरक्षित परिवहन*, बिना ढकाव के रॉयल्टी निर्गमन पर रोक, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में निगरानी, प्रदूषण नियंत्रण उपायों का सख्त पालन तथा उद्योगों में वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित करने की मांग की गई है। साथ ही, *परिवहन विभाग, खान एवं भू-विज्ञान विभाग, यातायात पुलिस, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, जिला उद्योग केंद्र* एवं संबंधित एसोसिएशनों की संयुक्त उच्च स्तरीय बैठक आयोजित कर समन्वित कार्ययोजना बनाने का आग्रह किया गया है। मंच का मानना है कि इन उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन से *सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 30% तक कमी* लाई जा सकती है तथा पर्यावरण संरक्षण और जनसुरक्षा को मजबूत किया जा सकेगा। इस अवसर पर यह संदेश दिया गया कि *“सुरक्षित हरित परिवहन – स्वच्छ पर्यावरण – सुरक्षित राजस्थान”* केवल प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की साझा जिम्मेदारी है। मंच ने विश्वास व्यक्त किया कि उपमुख्यमंत्री के नेतृत्व में राजस्थान में प्रदूषण नियंत्रण एवं सुरक्षित परिवहन का एक आदर्श मॉडल स्थापित होगा। ज्ञापन देने के बाद राजसमन्द लोटते समय *एक गिट्टी की ओवरलोड डम्पर को देखा जिसमें गिट्टी सडक पर बिखरती हुए जा रही थी, तब उसकी शिकायत* परिवहन , खनन , जीएसटी व प्रदूषण विभाग को की । जिस पर परिवहन विभाग ने तुरंत कार्यवाही करते हुए डम्पर को सीज किया व अन्य विभागों ने भी उचित कार्यवाही शुरू की । *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (113) #07/05/2026 #dineshapna
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