dineshapna
Chartered Accountant,Social Activist,Political Analysist-AAP,Spritual Thinker,Founder of Life Management, From India, Since 1987.
Sunday, 24 May 2026
★ *सड़क बचाओ :: जीवन बचाओ* ★ *(१) सड़क अतिक्रमण मुक्त हो :-* सड़कें जन-जन की धरोहर हैं, इन पर सबका अधिकार रहे, अतिक्रमण की दीवारें हटें, हर पथ निर्भय, साकार रहे। रुके न जीवन, थमे न साँसें, दुर्घटना का नाम न हो, स्वच्छ, सुरक्षित, खुली सड़कें हों— यही हमारा धाम हो। *(२) गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण हो :-* गड्ढों वाली टूटी राहें, कितनों का जीवन हर लेतीं, घटिया निर्माण की लापरवाही, कितनी आँखें नम कर देतीं। मजबूत सड़क हो, श्रेष्ठ निर्माण— यही सुरक्षा का मान बने, हर ठेकेदार की जवाबदेही, जन-जीवन का सम्मान बने। *(३) वृक्ष और खम्भों का हो वैज्ञानिक स्थान :-* पेड़ हमारे जीवनदाता, इनसे धरती मुस्काती है, इनकी छाया में हर प्राणी, शीतल साँसें पाती है। दूरी रखकर रोपें इनको, खम्भे भी सुव्यवस्थित हों, विकास और पर्यावरण दोनों, साथ-साथ संरक्षित हों। *(४) खनिज परिवहन हो जिम्मेदार :-* धूल उड़ाकर, सड़क बिखेरकर, लाभ कमाना उचित नहीं, ओवरलोड वाहन की गति में, किसी प्राण का मोल नहीं। ढककर ले जाएँ हर खनिज, नियमों का सम्मान करें, सुरक्षित परिवहन अपनाकर, मानवता का मान करें। *(५) फोरलेन की गुणवत्ता पर ध्यान रहे :-* टोल लिया तो कर्तव्य निभाओ, सुरक्षित हर मार्ग बनाओ, डिवाइडर, संकेत, सर्विस रोड— सब मानकों से सजवाओ। पेड़ों का फिर रोपण करना, सड़कों की मरम्मत भी हो, यात्री की हर साँस सुरक्षित— ऐसी जिम्मेदारी भी हो। *(६) भावनात्मक निवेदन :-* एक दुर्घटना केवल घटना नहीं, जीवनभर की पीड़ा होती है, किसी पिता का साया जाता, किसी माँ की दुनिया रोती है। आओ मिलकर प्रण ये लें— . सड़क बचाएँ, जीवन बचाएँ, सुरक्षित राहों के संग हम, सुखी समाज का दीप जलाएँ। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (122) #24/05/2026 #dineshapna
Saturday, 23 May 2026
★ *पर्यावरण की बातें बड़ी-बड़ी,* *धरातल पर कार्य बहुत कम* ★ पर्यावरण की बातें बड़ी-बड़ी, मंचों पर भाषण, नारों की लड़ी। धरती माँ फिर भी पूछ रही— "मेरे घावों की मरहम कहाँ पड़ी?" पेड़ लगाने के उत्सव होते, फोटो खिंचते, समाचार छपते। किन्तु कुछ ही दिनों के बाद, वो पौधे पानी को तरसते। नन्हे अंकुर सूख के गिरते, कोई उनकी सुध न लेता। कर्तव्य केवल रोपण तक सीमित, पालन का धर्म कौन निभाता? पेड़ लगाने पर जोर बहुत है, पर कटाई पर रोक कहाँ? हरियाली का वचन सभी देते, पर संरक्षण का संकल्प कहाँ? एक ओर वृक्षारोपण अभियान, दूजी ओर जंगलों का संहार। काग़ज़ों में हरियाली बढ़ती, धरती पर बढ़ता अंधकार। प्लास्टिक थैलियों पर प्रतिबंध है, यह शासन का उत्तम आदेश। पर उनकी फैक्ट्रियाँ चलती रहें, तो कैसा होगा यह परिवेश? बाज़ारों में ढेरों प्लास्टिक, नदियों में बहता उसका विष। मूक पशु खाते हैं उसको, और भुगतते जीवन का क्लेश। संविधान भी कहता हमसे— अनुच्छेद 48(क) का यही विधान, "राज्य करे पर्यावरण रक्षा," हरियाली का हो सम्मान। अनुच्छेद 51(क)(g) पुकारे, हर नागरिक का यह कर्तव्य बने— "वन, जल, जीवों की रक्षा कर," धरती फिर से स्वर्ग सजे। केवल कानून बनाने से, कर्तव्य कभी पूरे न होंगे। जब तक मन में प्रेम न जागे, वन फिर हरे-भरे न होंगे। पेड़ लगाना केवल प्रारम्भ है, उनकी सेवा ही सच्चा धर्म। जल दो, रक्षा करो, प्रेम दो, यही प्रकृति पूजा का मर्म। आओ अब संकल्प करें हम— नारे नहीं, व्यवहार बदलें। धरती माँ की पीड़ा समझें, अपने जीवन के आधार बदलें। यदि वृक्ष रहेंगे, जल बचेगा, तो ही जीवन मुस्काएगा। यदि प्रकृति का मान रखेंगे, तो भारत फिर हरियाएगा। पर्यावरण की बातें बड़ी-बड़ी, अब धरातल पर काम भी हो। केवल शब्दों से नहीं मित्रों, कर्तव्य से हर नाम भी हो॥ *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (121) #24/05/2026 #dineshapna
Tuesday, 19 May 2026
★ *केले खाकर छिलके सड़क पर मत फेंकिए!* ★ आदरणीय मार्बल एवं मिनरल खनन व्यापारीगण, प्रोसेसिंग यूनिट संचालकगण एवं परिवहन व्यवसायीगण, सादर निवेदन! *आप व्यापार करें, लाभ कमाएँ, प्रगति करें—यह स्वागतयोग्य है।* आप समाज को रोजगार दे रहे हैं, अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं—यह सराहनीय है। किन्तु *प्रश्न तब उठता है, जब लाभ की दौड़ में नियमों की अनदेखी, कर चोरी, पर्यावरण प्रदूषण, और अब मानव जीवन के साथ खिलवाड़ होने लगे।* अब तक हम बहुत कुछ सहते आए हैं— *कटते पहाड़, उड़ती धूल, प्रदूषित जल, टूटी सड़कें, ओवरलोड वाहन, बिना ढके ट्रक, और बढ़ती दुर्घटनाएँ।* किन्तु अब *यह केवल पर्यावरण का प्रश्न नहीं रहा— यह निर्दोष व्यक्तियों के जीवन और सुरक्षा का प्रश्न बन चुका है।* केले खाकर उसका छिलका सड़क पर फेंक देना, और फिर किसी के गिरने की चिंता न करना— *क्या यही हमारी जिम्मेदारी है?* आपकी लापरवाही भी आज कुछ ऐसा ही कर रही है— *सड़कों पर बिखरता खनिज, धूल और असुरक्षित परिवहन किसी भी क्षण किसी की जान ले सकता है।* यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, *यह नैतिकता और मानवता का भी खुला अपमान है।* हम folded hands से आपसे निवेदन करते हैं— *अब रुक जाइए। संभल जाइए। सुधर जाइए।* उक्त नुकसान को रोकने का ब्रह्मास्त्र हमारे पास है, और उसकी चाबी भी अभी हमारे पास सुरक्षित है। *हम नहीं चाहते कि वह चाबी प्रशासन को सौंपनी पड़े—* क्योंकि उसके बाद बचाव कठिन ही नहीं, असंभव हो जाएगा। इसलिए आज फिर विनम्र आग्रह है— *व्यापार कीजिए, पर जिम्मेदारी के साथ।* *लाभ कमाइए, पर जीवन की कीमत पर नहीं।* *कृपया व्यक्तियों के जीवन के साथ खेलना बंद करें।* यही कानून का सम्मान है, यही समाज के प्रति आपका धर्म है। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (120) #19/05/2026 #dineshapna
Monday, 18 May 2026
★ *“खनिज भी रहे, प्रकृति भी बचे”* ★ धरती माँ की गोद से हम, खनिज रत्न जो पाते हैं, *पर हर आघात पहाड़ों पर, अपने भविष्य को मिटाते हैं।* मार्बल देता रोजगार हमें, समृद्धि का वरदान, *पर पर्यावरण के बिन सूना, हर वैभव, हर सम्मान।* कटते वृक्ष, उड़ती धूल, नदियों में घुलता ज़हर, *यदि अब भी हम न चेते, संकट आएगा प्रखर।* खनिज सम्पदा का दोहन हो, पर नियमों का भी मान, *हर खदान के संग उगें फिर, हरियाली के नव प्राण।* व्यापारी हों उत्तरदायी, अधिकारी भी जागें आज, *धरती, जल, वन, वायु बचाना—हम सबका है यह काज।* आओ मिलकर प्रण ये लें, प्रकृति का मान बढ़ाएँ, *पत्थर के संग आने वाली पीढ़ी का भविष्य भी बचाएँ।* *“हर खदान के साथ हरियाली,* यही हमारी सच्ची जिम्मेदारी।” *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (119) #19/05/2026 #dineshapna
Saturday, 16 May 2026
★ *“सनातन बोर्ड” क्यों बनना चाहिए ?"* ★ यदि “सनातन बोर्ड” का उद्देश्य निम्न हो, तो इसकी आवश्यकता पर विचार किया जा सकता है :— (i) *मन्दिरों की स्वायत्तता एवं संरक्षण हेतु :-* आज अनेक हिन्दू मन्दिर विभिन्न राज्य कानूनों के अधीन सरकारी नियंत्रण में हैं। एक स्वतंत्र सनातन बोर्ड मन्दिरों के धार्मिक, आर्थिक और प्रशासनिक प्रबंधन को सनातन परम्पराओं के अनुरूप संचालित करने में सहायक हो सकता है। (ii) *सनातन संस्कृति एवं शिक्षा के संरक्षण हेतु :-* वेद, उपनिषद, संस्कृत, शास्त्र, गौशाला, गुरुकुल, तीर्थ परम्परा, उत्सव आदि के संरक्षण और संवर्धन हेतु एक संस्थागत निकाय उपयोगी हो सकता है। (iii) *धार्मिक अधिकारों की रक्षा हेतु :-* भारतीय संविधान के *अनुच्छेद 25* — धर्म मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता। *अनुच्छेद 26* — धार्मिक संस्थाओं को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार। *अनुच्छेद 29* — अपनी संस्कृति के संरक्षण का अधिकार। यदि बोर्ड इन अधिकारों की रक्षा और धार्मिक स्वायत्तता के लिए बने, तो उसका संवैधानिक आधार मजबूत हो सकता है। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (118) #17/05/2026 #dineshapna
★ *श्रीनाथजी मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त हो !* ★ — (आस्था, अधिकार और उत्तरदायित्व का प्रश्न) — नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि *वल्लभ सम्प्रदाय की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत केंद्र है।* सदियों से यह मंदिर “सेवा ही साधना” की भावना के साथ वल्लभ कुल एवं वैष्णव समाज द्वारा संचालित धार्मिक मर्यादाओं का प्रतीक रहा है। गोवर्धन से मेवाड़ तक *श्रीनाथजी की यात्रा केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि धर्म और परंपरा की रक्षा का इतिहास है।* महाराणा राज सिंह जी के संरक्षण में स्थापित यह मंदिर सदैव धार्मिक स्वायत्तता और श्रद्धा का केंद्र रहा, किन्तु *वर्तमान में “नाथद्वारा मंदिर मंडल अधिनियम, 1959” के अंतर्गत सरकारी नियंत्रण में है।* भारतीय *संविधान के अनुच्छेद 25 से 28* प्रत्येक धार्मिक सम्प्रदाय को अपने धर्म और धार्मिक संस्थानों के संचालन की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं। ऐसे में किसी विशिष्ट हिन्दू मंदिर पर निरंतर सरकारी नियंत्रण धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांत पर प्रश्न खड़े करता है। चिंता का विषय यह भी है कि *सरकारी नियंत्रण के बावजूद मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा, दानराशि के पारदर्शी उपयोग एवं प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर समय-समय पर प्रश्न उठते रहे हैं।* श्रद्धालुओं की अपेक्षा है कि ठाकुरजी को अर्पित धन धर्म, सेवा, गौसंरक्षण, संस्कृत शिक्षा और जनकल्याण में समर्पित हो। अतः समय की मांग है कि श्रीनाथजी मंदिर को *सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर, वल्लभ कुल एवं बृजवासी समाज की परंपरानुसार* एक पारदर्शी, उत्तरदायी और धर्मसम्मत व्यवस्था स्थापित की जाए। यह *केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि आस्था के सम्मान, परंपरा की रक्षा और श्रद्धालुओं के विश्वास की पुनर्स्थापना का प्रश्न है।* “श्रीनाथजी की सेवा, श्रीनाथजी की मर्यादा के अनुसार हो — यही प्रत्येक भक्त की भावना है।” *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (117) #16/05/2026 #dineshapna
Tuesday, 12 May 2026
★ *स्वतंत्र भारत में सनातन समाज के अधिकार* ★ *भारत की सनातन संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध परम्पराओं में से एक है।* हमारे मन्दिर केवल पूजा-स्थल नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक जीवन के केन्द्र रहे हैं। इतिहास साक्षी है कि *आक्रांताओं ने हमारी आस्था को कमजोर करने हेतु सबसे पहले मन्दिरों को लूटा, तोड़ा, हमारी शिक्षा और जीवन-पद्धति को नष्ट करने का प्रयास किया तथा अनेक लोगों को अत्याचार सहने पड़े।* किन्तु *आज हम स्वतंत्र भारत के नागरिक हैं। हमारा Constitution of India हमें समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार देता है।* *अनुच्छेद 14* सभी को समानता का अधिकार देता है, जबकि *अनुच्छेद 25 एवं 26* हमें अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक संस्थाओं के स्वतंत्र संचालन का अधिकार प्रदान करते हैं। ऐसी स्थिति में *यह अपेक्षा न्यायसंगत है कि सनातन समाज, उसके मन्दिरों और धार्मिक संस्थानों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव या अन्याय न हो।* हमें अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक होकर, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपने जनप्रतिनिधियों से न्याय और समानता की मांग करनी चाहिए। *इतिहास ने हमें संघर्ष सिखाया है, और संविधान ने हमें अधिकार दिए हैं* — अब समय है जागरूक होकर अपने अधिकार प्राप्त करने का। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (116) #12/05/2026 #dineshapna
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