Tuesday, 19 May 2026

★ *केले खाकर छिलके सड़क पर मत फेंकिए!* ★ आदरणीय मार्बल एवं मिनरल खनन व्यापारीगण, प्रोसेसिंग यूनिट संचालकगण एवं परिवहन व्यवसायीगण, सादर निवेदन! *आप व्यापार करें, लाभ कमाएँ, प्रगति करें—यह स्वागतयोग्य है।* आप समाज को रोजगार दे रहे हैं, अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं—यह सराहनीय है। किन्तु *प्रश्न तब उठता है, जब लाभ की दौड़ में नियमों की अनदेखी, कर चोरी, पर्यावरण प्रदूषण, और अब मानव जीवन के साथ खिलवाड़ होने लगे।* अब तक हम बहुत कुछ सहते आए हैं— *कटते पहाड़, उड़ती धूल, प्रदूषित जल, टूटी सड़कें, ओवरलोड वाहन, बिना ढके ट्रक, और बढ़ती दुर्घटनाएँ।* किन्तु अब *यह केवल पर्यावरण का प्रश्न नहीं रहा— यह निर्दोष व्यक्तियों के जीवन और सुरक्षा का प्रश्न बन चुका है।* केले खाकर उसका छिलका सड़क पर फेंक देना, और फिर किसी के गिरने की चिंता न करना— *क्या यही हमारी जिम्मेदारी है?* आपकी लापरवाही भी आज कुछ ऐसा ही कर रही है— *सड़कों पर बिखरता खनिज, धूल और असुरक्षित परिवहन किसी भी क्षण किसी की जान ले सकता है।* यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, *यह नैतिकता और मानवता का भी खुला अपमान है।* हम folded hands से आपसे निवेदन करते हैं— *अब रुक जाइए। संभल जाइए। सुधर जाइए।* उक्त नुकसान को रोकने का ब्रह्मास्त्र हमारे पास है, और उसकी चाबी भी अभी हमारे पास सुरक्षित है। *हम नहीं चाहते कि वह चाबी प्रशासन को सौंपनी पड़े—* क्योंकि उसके बाद बचाव कठिन ही नहीं, असंभव हो जाएगा। इसलिए आज फिर विनम्र आग्रह है— *व्यापार कीजिए, पर जिम्मेदारी के साथ।* *लाभ कमाइए, पर जीवन की कीमत पर नहीं।* *कृपया व्यक्तियों के जीवन के साथ खेलना बंद करें।* यही कानून का सम्मान है, यही समाज के प्रति आपका धर्म है। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (120) #19/05/2026 #dineshapna



 

Monday, 18 May 2026

★ *“खनिज भी रहे, प्रकृति भी बचे”* ★ धरती माँ की गोद से हम, खनिज रत्न जो पाते हैं, *पर हर आघात पहाड़ों पर, अपने भविष्य को मिटाते हैं।* मार्बल देता रोजगार हमें, समृद्धि का वरदान, *पर पर्यावरण के बिन सूना, हर वैभव, हर सम्मान।* कटते वृक्ष, उड़ती धूल, नदियों में घुलता ज़हर, *यदि अब भी हम न चेते, संकट आएगा प्रखर।* खनिज सम्पदा का दोहन हो, पर नियमों का भी मान, *हर खदान के संग उगें फिर, हरियाली के नव प्राण।* व्यापारी हों उत्तरदायी, अधिकारी भी जागें आज, *धरती, जल, वन, वायु बचाना—हम सबका है यह काज।* आओ मिलकर प्रण ये लें, प्रकृति का मान बढ़ाएँ, *पत्थर के संग आने वाली पीढ़ी का भविष्य भी बचाएँ।* *“हर खदान के साथ हरियाली,* यही हमारी सच्ची जिम्मेदारी।” *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (119) #19/05/2026 #dineshapna


 

Saturday, 16 May 2026

★ *“सनातन बोर्ड” क्यों बनना चाहिए ?"* ★ यदि “सनातन बोर्ड” का उद्देश्य निम्न हो, तो इसकी आवश्यकता पर विचार किया जा सकता है :— (i) *मन्दिरों की स्वायत्तता एवं संरक्षण हेतु :-* आज अनेक हिन्दू मन्दिर विभिन्न राज्य कानूनों के अधीन सरकारी नियंत्रण में हैं। एक स्वतंत्र सनातन बोर्ड मन्दिरों के धार्मिक, आर्थिक और प्रशासनिक प्रबंधन को सनातन परम्पराओं के अनुरूप संचालित करने में सहायक हो सकता है। (ii) *सनातन संस्कृति एवं शिक्षा के संरक्षण हेतु :-* वेद, उपनिषद, संस्कृत, शास्त्र, गौशाला, गुरुकुल, तीर्थ परम्परा, उत्सव आदि के संरक्षण और संवर्धन हेतु एक संस्थागत निकाय उपयोगी हो सकता है। (iii) *धार्मिक अधिकारों की रक्षा हेतु :-* भारतीय संविधान के *अनुच्छेद 25* — धर्म मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता। *अनुच्छेद 26* — धार्मिक संस्थाओं को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार। *अनुच्छेद 29* — अपनी संस्कृति के संरक्षण का अधिकार। यदि बोर्ड इन अधिकारों की रक्षा और धार्मिक स्वायत्तता के लिए बने, तो उसका संवैधानिक आधार मजबूत हो सकता है। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (118) #17/05/2026 #dineshapna





 

★ *श्रीनाथजी मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त हो !* ★ — (आस्था, अधिकार और उत्तरदायित्व का प्रश्न) — नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि *वल्लभ सम्प्रदाय की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत केंद्र है।* सदियों से यह मंदिर “सेवा ही साधना” की भावना के साथ वल्लभ कुल एवं वैष्णव समाज द्वारा संचालित धार्मिक मर्यादाओं का प्रतीक रहा है। गोवर्धन से मेवाड़ तक *श्रीनाथजी की यात्रा केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि धर्म और परंपरा की रक्षा का इतिहास है।* महाराणा राज सिंह जी के संरक्षण में स्थापित यह मंदिर सदैव धार्मिक स्वायत्तता और श्रद्धा का केंद्र रहा, किन्तु *वर्तमान में “नाथद्वारा मंदिर मंडल अधिनियम, 1959” के अंतर्गत सरकारी नियंत्रण में है।* भारतीय *संविधान के अनुच्छेद 25 से 28* प्रत्येक धार्मिक सम्प्रदाय को अपने धर्म और धार्मिक संस्थानों के संचालन की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं। ऐसे में किसी विशिष्ट हिन्दू मंदिर पर निरंतर सरकारी नियंत्रण धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांत पर प्रश्न खड़े करता है। चिंता का विषय यह भी है कि *सरकारी नियंत्रण के बावजूद मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा, दानराशि के पारदर्शी उपयोग एवं प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर समय-समय पर प्रश्न उठते रहे हैं।* श्रद्धालुओं की अपेक्षा है कि ठाकुरजी को अर्पित धन धर्म, सेवा, गौसंरक्षण, संस्कृत शिक्षा और जनकल्याण में समर्पित हो। अतः समय की मांग है कि श्रीनाथजी मंदिर को *सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर, वल्लभ कुल एवं बृजवासी समाज की परंपरानुसार* एक पारदर्शी, उत्तरदायी और धर्मसम्मत व्यवस्था स्थापित की जाए। यह *केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि आस्था के सम्मान, परंपरा की रक्षा और श्रद्धालुओं के विश्वास की पुनर्स्थापना का प्रश्न है।* “श्रीनाथजी की सेवा, श्रीनाथजी की मर्यादा के अनुसार हो — यही प्रत्येक भक्त की भावना है।” *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (117) #16/05/2026 #dineshapna




 

Tuesday, 12 May 2026

★ *स्वतंत्र भारत में सनातन समाज के अधिकार* ★ *भारत की सनातन संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध परम्पराओं में से एक है।* हमारे मन्दिर केवल पूजा-स्थल नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक जीवन के केन्द्र रहे हैं। इतिहास साक्षी है कि *आक्रांताओं ने हमारी आस्था को कमजोर करने हेतु सबसे पहले मन्दिरों को लूटा, तोड़ा, हमारी शिक्षा और जीवन-पद्धति को नष्ट करने का प्रयास किया तथा अनेक लोगों को अत्याचार सहने पड़े।* किन्तु *आज हम स्वतंत्र भारत के नागरिक हैं। हमारा Constitution of India हमें समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार देता है।* *अनुच्छेद 14* सभी को समानता का अधिकार देता है, जबकि *अनुच्छेद 25 एवं 26* हमें अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक संस्थाओं के स्वतंत्र संचालन का अधिकार प्रदान करते हैं। ऐसी स्थिति में *यह अपेक्षा न्यायसंगत है कि सनातन समाज, उसके मन्दिरों और धार्मिक संस्थानों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव या अन्याय न हो।* हमें अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक होकर, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपने जनप्रतिनिधियों से न्याय और समानता की मांग करनी चाहिए। *इतिहास ने हमें संघर्ष सिखाया है, और संविधान ने हमें अधिकार दिए हैं* — अब समय है जागरूक होकर अपने अधिकार प्राप्त करने का। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (116) #12/05/2026 #dineshapna


 

Sunday, 10 May 2026

★ *सनातन जागरण का शंखनाद* ★ *“धर्मो रक्षति रक्षितः” — जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।* हमें गर्व है कि हम हिन्दू हैं, हिन्दुस्तानी हैं, और इसलिए सनातनी हैं। *हमारा प्रथम कर्तव्य है कि हम सनातन धर्म का पूर्ण निष्ठा से पालन करें, और साथ ही भारत के संविधान एवं विधि-व्यवस्था का सम्मान करें।* किन्तु जब कहीं संविधान की मूल भावना के विपरीत भेदभाव, अन्याय या असमानता दिखाई दे, तब उसका संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक विरोध करना भी प्रत्येक जागरूक नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है। *१. समानता का अधिकार – अनुच्छेद 14* भारत का संविधान अनुच्छेद 14 के अंतर्गत सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता एवं समान संरक्षण का अधिकार देता है। यदि अन्य धार्मिक संस्थानों की तुलना में केवल हिन्दू मन्दिरों के प्रबंधन, सम्पत्ति या धार्मिक कार्यों में अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप हो, तो यह प्रश्न उठाना स्वाभाविक है कि क्या समानता का सिद्धान्त समान रूप से लागू हो रहा है? यह विषय संवैधानिक विमर्श और न्यायिक समीक्षा का विषय है, और इस पर जागरूक चर्चा आवश्यक है। *२. धर्म की स्वतंत्रता – अनुच्छेद 25 एवं 26* संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। अनुच्छेद 26 धार्मिक सम्प्रदायों को अपने धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन का अधिकार प्रदान करता है। अतः सनातन समाज को अपने मन्दिरों, परम्पराओं और धार्मिक संस्थाओं के संरक्षण हेतु इन संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए। *३. शिक्षा और संस्कृति की रक्षा – अनुच्छेद 29 एवं 30* संविधान अनुच्छेद 29 के माध्यम से प्रत्येक समुदाय को अपनी संस्कृति और परम्परा सुरक्षित रखने का अधिकार देता है। हिन्दू समाज को भी अपनी संस्कृति, शास्त्र, संस्कार और धर्मज्ञान अगली पीढ़ियों तक पहुँचाने हेतु संगठित प्रयास करने चाहिए—घर में, समाज में और शिक्षण संस्थानों में। *अब समय है जागरण का!* यदि हम स्वयं अपने धर्म, मन्दिरों और परम्पराओं के प्रति उदासीन रहेंगे, तो उनकी रक्षा कौन करेगा? सनातन केवल पूजा-पद्धति नहीं, यह जीवन-पद्धति है। मन्दिर केवल भवन नहीं, हमारी आस्था, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के केन्द्र हैं। *आज आवश्यकता है कि प्रत्येक हिन्दू संकल्प ले :—* ⚔️ मैं अपने धर्म का ज्ञान प्राप्त करूँगा। ⚔️ मैं अपने मन्दिरों और धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों के प्रति जागरूक रहूँगा। ⚔️ मैं संविधानसम्मत और विधिसम्मत तरीके से अपने अधिकारों की रक्षा करूँगा। ⚔️ मैं सनातन संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का दायित्व निभाऊँगा। *याद रखें :—* "जो अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा नहीं करता, इतिहास उसकी पहचान मिटा देता है।" अतः आइए, *स्वयं से, अभी से, अपने घर से—सनातन रक्षा का यह पावन अभियान प्रारम्भ करें।* ●जय श्रीराम।●जय श्रीकृष्ण।●जय हिन्द। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (115) #10/05/2026 #dineshapna






 

Saturday, 9 May 2026

★ *आदर्श पुजारी : : सनातन के सच्चे रक्षक* ★ तब समझ आता है, *पुजारी होना कितना कठिन,* *कितना तप, कितना अनुशासन,* कितना समर्पण माँगता प्रतिक्षण। यह सेवा न यश की अभिलाषा, न धन पाने का कोई मान; *यह तो केवल प्रभु चरणों में* *अर्पित जीवन का सम्मान।* *वे धर्म का भाषण नहीं देते,* *धर्म को जीवन में जीते हैं;* अपने कर्म और पावन आचरण से सनातन की ज्योति सींचते हैं। किताबों से संस्कृति जीवित नहीं, तपस्वी परंपराएँ आधार हैं; *इन्हीं के कारण मंदिर आज भी* *आस्था के सच्चे द्वार हैं।* *बद्रीनाथ धाम के आदर्श पुजारी,* *त्याग और सेवा की पहचान;* हिम शिखरों में तप कर जो रखते प्रभु का दिव्य सम्मान। नमन उन कर्मयोगी जनों को, जो धर्म के सच्चे रक्षक हैं; *पुजारी केवल सेवक नहीं—* *सनातन संस्कृति के संरक्षक हैं।* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (114) #09/05/2026 #dineshapna