dineshapna
Chartered Accountant,Social Activist,Political Analysist-AAP,Spritual Thinker,Founder of Life Management, From India, Since 1987.
Saturday, 20 June 2026
★ *आओ ! योग करें, सीए के साथ !* ★ 💐"योग *जीवन का संतुलन* बनाता है और चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) *वित्त का संतुलन* ; दोनों का आधार अनुशासन, सत्यनिष्ठा और निरंतर साधना है।" 💐"योग *मन का ऑडिट* है, और चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) *वित्त का ऑडिट*; दोनों का लक्ष्य शुद्धता, संतुलन और विश्वास है।" *दोनों की मूल भावना में अनेक समानताएँ हैं :—* *1. अनुशासन (Discipline) :-* योग में नियमित साधना आवश्यक है, वहीं CA में निरंतर अध्ययन, नियमों का पालन और समयबद्ध कार्य आवश्यक है। *2. एकाग्रता (Concentration) :-* योग मन को केंद्रित करता है, जबकि CA को लेखा, कर एवं कानून के जटिल विषयों पर गहन एकाग्रता रखनी पड़ती है। *3. संतुलन (Balance) :-* योग शरीर, मन और आत्मा में संतुलन स्थापित करता है; CA वित्तीय लेन-देन और खातों में संतुलन स्थापित करता है। *4. सत्यनिष्ठा (Integrity) :-* योग सत्य के मार्ग पर चलना सिखाता है, वहीं CA का सम्पूर्ण व्यवसाय सत्य, पारदर्शिता और ईमानदारी पर आधारित है। *5. निरंतर अभ्यास (Continuous Practice) :-* योग का लाभ नियमित अभ्यास से मिलता है; CA की दक्षता भी निरंतर अध्ययन और अनुभव से बढ़ती है। *6. आत्म-नियंत्रण (Self-Control) :-* योग इन्द्रियों और मन पर नियंत्रण सिखाता है, जबकि CA को भावनाओं से ऊपर उठकर तथ्यों और नियमों के आधार पर निर्णय लेना होता है। *7. त्रुटि सुधार (Error Correction) :-* योग व्यक्ति की आंतरिक कमियों को दूर करता है, वहीं CA खातों एवं वित्तीय त्रुटियों को सुधारता है। *8. विश्वास निर्माण (Trust Building) :-* योग से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है, जबकि CA अपनी निष्पक्षता और विशेषज्ञता से समाज का विश्वास अर्जित करता है। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* ◆1st Elected Chairman of ICAI (2025-26) ◆Treasurer of ICAI (2026-27) (139) #20/06/2026 #dineshapna
Friday, 19 June 2026
★★ *रक्तदान – छ: लाभ* ★★ 🩸 *"रक्तदान – महादान,* क्योंकि आपके कुछ मिनट किसी के पूरे जीवन को बचा सकते हैं।" 🩸 "जो रक्तदान करता है, वह *केवल रक्त नहीं देता, बल्कि किसी परिवार की उम्मीद और किसी जीवन की सांसें लौटाता है।"* ❤️*रक्तदान करने वाले व्यक्ति (Donor) को लाभ :-*❤️ *1. स्वास्थ्य की नियमित जांच* 🩸 रक्तदान से पहले रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, नाड़ी, वजन आदि की जांच की जाती है, जिससे स्वास्थ्य की प्रारंभिक जानकारी मिल जाती है। *2. नया रक्त बनने की प्रक्रिया तेज होती है* 🩸 रक्तदान के बाद शरीर कुछ ही दिनों में नए रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है, जिससे रक्त निर्माण प्रणाली सक्रिय रहती है। *3. आयरन (Iron) का संतुलन* 🩸 नियमित रक्तदान से शरीर में अतिरिक्त आयरन कम होता है, जिससे कुछ हृदय एवं यकृत (Liver) संबंधी समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है। *4. हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक*🩸 कई अध्ययनों में पाया गया है कि नियमित और सुरक्षित रक्तदान हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है। *5. मानसिक संतोष एवं आत्मिक खुशी*🩸 किसी अज्ञात व्यक्ति का जीवन बचाने का सुख और संतोष अत्यंत मूल्यवान होता है। इससे सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ती है। *6. कैलोरी खर्च होती है*🩸 एक बार रक्तदान करने पर शरीर को रक्त की पूर्ति हेतु अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है, जिससे कुछ कैलोरी भी खर्च होती हैं। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* ◆1st Elected Chairman of ICAI (2025-26) ◆Treasurer of ICAI (2026-27) (138) #20/06/2026 #dineshapna
★ *ब्लड डोनेशन और चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) प्रोफेशन में अद्भुत समानता* ★ (🩸🩸🩸जीवनदाता🩸🩸🩸) 🩸"रक्तदान से *शरीर को जीवन,* और सीए के ज्ञान से *व्यवसाय को जीवन* मिलता है।" 🩸🩸*"रक्तदाता* शरीर को जीवन देता है, जबकि *चार्टर्ड अकाउंटेंट* संस्था, व्यापार और अर्थव्यवस्था को स्वस्थ जीवन देता है।" 🩸🩸🩸 *"रक्तदाता *रक्त देकर जीवन बचाता है,* और चार्टर्ड अकाउंटेंट ज्ञान, ईमानदारी एवं *मार्गदर्शन देकर संस्थाओं और व्यक्तियों के आर्थिक जीवन को सुरक्षित बनाता है;* दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र के *जीवनदाता* हैं।" *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* ◆1st Elected Chairman of ICAI (2025-26) ◆Treasurer of ICAI (2026-27) (137) #19/06/2026 #dineshapna
Thursday, 18 June 2026
★ *महाराणा प्रताप के गुणों को वर्तमान युग में कैसे आत्मसात करें?* ★ महाराणा प्रताप का जीवन *केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शन है।* आज शत्रु का स्वरूप बदल गया है। अब *युद्ध तलवारों से नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, नेताओं की लूट, प्रशासनिक मनमानी, सामाजिक अन्याय, अज्ञानता और गरीबी के विरुद्ध है।* ऐसे में प्रताप के गुणों को इस प्रकार अपनाया जा सकता है— *(1) अटूट स्वाभिमान → रिश्वत और अन्याय का विरोध :-* न स्वयं रिश्वत दें, न लें। अपने अधिकारों के लिए कानूनी एवं लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाएँ। *(2) राष्ट्र सर्वोपरि → स्वहित से ऊपर जनहित :-* जाति, दल, धर्म और व्यक्तिगत लाभ से ऊपर राष्ट्रहित एवं समाजहित को प्राथमिकता दें। *(3) अदम्य साहस एवं संघर्षशीलता → अन्याय के विरुद्ध खड़े होना :-* भ्रष्टाचार, शोषण और प्रशासनिक मनमानी देखकर मौन न रहें। शिकायत, जनसुनवाई, सूचना का अधिकार (RTI) और न्यायालय जैसे वैधानिक साधनों का उपयोग करें। *(4) असंभव को संभव बनाने की क्षमता → संसाधनों की कमी को बहाना न बनाना :-* सीमित साधनों के बावजूद संगठित प्रयास, जनजागरण और सामाजिक भागीदारी से बड़े परिवर्तन लाए जा सकते हैं। *(5) प्रेरणादायी नेतृत्व → स्वयं उदाहरण बनना :-* दूसरों को उपदेश देने से पहले स्वयं ईमानदारी, अनुशासन और सेवा का उदाहरण प्रस्तुत करें। *(6) सर्वधर्म समभाव एवं राष्ट्रीय एकता → समाज को जोड़ना :-* विभाजनकारी सोच से बचें। समाज को जाति, धर्म और वर्ग के आधार पर बाँटने के बजाय एकता और सहयोग की भावना विकसित करें। *(7) राष्ट्रभक्ति का संचार → जागरूक नागरिक बनाना :-* परिवार, मित्रों और युवाओं में राष्ट्रप्रेम, संविधान के प्रति सम्मान, कर्तव्यबोध और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करें। *(8) जनकल्याणकारी दृष्टिकोण → कमजोर वर्गों का सहयोग :-* गरीब, वंचित, किसान, श्रमिक और जरूरतमंद लोगों के उत्थान के लिए समय, ज्ञान और संसाधनों का योगदान दें। *(9) दूरदर्शिता एवं रणनीतिक कौशल → संगठित एवं वैधानिक संघर्ष :-* भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय तथ्य, कानून, जनसमर्थन और उचित रणनीति के आधार पर कार्य करें। *(10) त्याग और सादगी → लोभ पर नियंत्रण :-* भोग-विलास और अनावश्यक प्रदर्शन की बजाय सादगी, नैतिकता और सेवा को जीवन का आधार बनाएं। ============================ ★ *विजय का सूत्र* ★ महाराणा प्रताप ने सिखाया कि— *"जब जनता जागरूक, संगठित, साहसी और राष्ट्रनिष्ठ बन जाती है, तब कोई भी अन्याय, भ्रष्टाचार या शोषण अधिक समय तक टिक नहीं सकता।"* ============================ ★ *वर्तमान युग का प्रताप कौन?* ★ आज का प्रताप वह है जो— ◆सत्य बोलने का साहस रखता है, ◆भ्रष्टाचार के सामने झुकता नहीं, ◆अपने अधिकारों और कर्तव्यों को जानता है, ◆समाज को जोड़ता है, ◆राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखता है, ◆और व्यक्तिगत लाभ से ऊपर जनकल्याण को महत्व देता है। *"आज हमें तलवार उठाने वाले प्रताप नहीं, बल्कि सत्य, साहस, संगठन, सेवा और राष्ट्रनिष्ठा को जीवन में उतारने वाले प्रताप चाहिए।"* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (136) #18/06/2026 #dineshapna
★ *प्रातः स्मरणीय वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप* ★ (१) *एक पंक्ति में :-* "अटूट स्वाभिमान, राष्ट्रनिष्ठा, अदम्य साहस, प्रेरक नेतृत्व और त्यागमय जीवन — यही महाराणा प्रताप की अमर पहचान है।" (२) *10 पंक्ति मे :- (अद्वितीय गुण)* *(1) अटूट स्वाभिमान :-* संपूर्ण जीवन कष्ट सह लिए, पर पराधीनता और आत्मसमर्पण स्वीकार नहीं किया। *(2) राष्ट्र सर्वोपरि की भावना :-* व्यक्तिगत सुख, परिवार और राज्य से ऊपर मातृभूमि के सम्मान को रखा। *(3) अदम्य साहस एवं संघर्षशीलता :-* विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी और निरंतर संघर्ष करते रहे। *(4) असंभव को संभव बनाने की क्षमता :-* सीमित संसाधनों के बावजूद विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना का सामना किया। *(5) प्रेरणादायी नेतृत्व :-* जनता, सरदारों और सैनिकों में विश्वास, उत्साह और बलिदान की भावना जागृत की। *(6) सर्वधर्म समभाव एवं राष्ट्रीय एकता :-* धर्म और जाति से ऊपर उठकर सभी को राष्ट्रहित के लिए साथ जोड़ा। *(7) स्वामीभक्ति एवं राष्ट्रभक्ति का संचार :-* ऐसे संस्कार दिए कि घोडा (चेतक), हाथी (रामप्रसाद) और उनके साथी भी त्याग एवं निष्ठा के प्रतीक बन गए। *(8) जनकल्याणकारी दृष्टिकोण :-* स्वयं के वैभव से अधिक प्रजा की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता को महत्व दिया। *(9) दूरदर्शिता एवं रणनीतिक कौशल :-* गुरिल्ला युद्ध नीति और संगठन क्षमता से लंबे समय तक संघर्ष को सफल बनाए रखा। *(10) त्याग और सादगी का आदर्श :-* राजसी जीवन छोड़कर कठिन वनवास स्वीकार किया, पर अपने सिद्धांत नहीं छोड़े। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (135) #18/06/2026 #dineshapna
Wednesday, 17 June 2026
★ *गुलामी के 1200 वर्ष* *बनाम* *आज़ादी के 79 वर्ष* ★ ( महाराणा प्रताप के पाँच महान आदर्श ) इतिहास साक्षी है कि जब-जब हमारे शासकों में *आपसी फूट बढ़ी, स्वार्थ राष्ट्रहित पर भारी पड़ा और समाज मौन दर्शक बना,* तब-तब राष्ट्र को भारी मूल्य चुकाना पड़ा। विदेशी शक्तियों ने हमारी कमजोरियों का लाभ उठाया और देश लंबे समय तक पराधीन रहा। आज हम स्वतंत्र भारत के नागरिक हैं, परंतु स्वतंत्रता केवल सीमाओं की रक्षा से नहीं, बल्कि विचारों, मूल्यों, संस्कृति, चरित्र और राष्ट्रीय एकता की रक्षा से भी सुरक्षित रहती है। *लोकतंत्र में भी यदि दलगत हित, व्यक्तिगत स्वार्थ, सामाजिक विभाजन और नागरिक उदासीनता बढ़ती है, तो यह राष्ट्र के लिए चिंता का विषय* बन सकता है। वर्तमान युग का *संघर्ष तलवारों का नहीं, बल्कि विचारों, संस्कृति, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, सूचना और सामाजिक चेतना का है।* इसलिए आज का राष्ट्रधर्म केवल शत्रु से लड़ना नहीं, बल्कि स्वयं को जागरूक, संगठित, चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ बनाना है। ऐसे समय में *महाराणा प्रताप का जीवन हमें मार्ग दिखाता है।* उनका संदेश *किसी विशेष समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि अन्याय, पराधीनता, स्वार्थ और आत्मसमर्पण के विरुद्ध था।* उनके जीवन के *पाँच महान आदर्श* आज भी प्रासंगिक हैं— ■ अटूट स्वाभिमान ■ राष्ट्रनिष्ठा ■ अदम्य साहस ■ प्रेरक नेतृत्व ■ त्यागमय जीवन आज *आवश्यकता किसी एक महाराणा प्रताप की नहीं, बल्कि करोड़ों ऐसे नागरिकों की है* जिनमें प्रताप जैसा स्वाभिमान, कर्तव्यबोध, राष्ट्रप्रेम और त्याग की भावना हो। ★ *संकल्प* ★ "हम किसी के *विरोध में नहीं, राष्ट्र के उत्थान के पक्ष में* खड़े होंगे। हम *विभाजन नहीं, एकता का मार्ग* चुनेंगे। हम *स्वार्थ नहीं, राष्ट्रहित को प्राथमिकता* देंगे। और अपने आचरण से महाराणा प्रताप के आदर्शों को जीवन में उतारेंगे।" "हर भारतीय में *जब प्रताप का स्वाभिमान जागेगा, तभी राष्ट्र का गौरव और अधिक ऊँचा होगा।"* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (134) #17/06/2026 #dineshapna
★ *महाराणा प्रताप – अजेय राष्ट्रनायक* ★ *त्याग दिया राजसिंहासन, त्यागे वैभव के सारे हार,* मातृभूमि की रक्षा हेतु चुना संघर्षों का पावन द्वार। *वन-वन भटके, कष्ट सहे, पर झुकना कभी स्वीकार न था,* मेवाड़ की स्वतंत्र धरा पर शत्रु का कोई अधिकार न था। *अद्भुत था उनका नेतृत्व, जन-जन में विश्वास जगाया,* विपदा के घोर अंधेरों में भी विजय-पथ का दीप जलाया। *कम सैनिक थे, कम थे शस्त्र, सीमित थे संसाधन सारे,* फिर भी रण में डटे रहे वे, बनकर साहस के ध्रुव तारे। जनता में देशप्रेम जगाया, वीरों में बलिदान भरा, *हर हृदय में स्वाधीनता का अमृतमय अभियान भरा।* *चेतक, हाथी, रण के साथी, सबमें मातृभूमि का मान जगा,* मुस्लिम वीरों के मन में भी, भारत-भक्ति का गान जगा। *जो असंभव था जग के लिए, प्रताप ने उसको संभव कर दिखलाया,* अजेय, अद्वितीय महायोद्धा बन, इतिहास में अमर कहलाया। *जय मेवाड़! जय मातृभूमि! जय प्रताप का अमर प्रकाश,* जब तक भारत का सूर्य रहेगा, प्रताप का यश अमर रहेगा। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (133) #17/06/2026 #dineshapna
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