Monday, 20 July 2026

★ *पर्यावरण संरक्षण :: जीवन संरक्षण* ★ *(३) पर्यावरण संरक्षण क्यों आवश्यक है ?* पर्यावरण संरक्षण केवल प्रकृति की रक्षा नहीं, बल्कि मानव जीवन के अस्तित्व की रक्षा है। *मुख्य कारण :—* ◆ स्वच्छ वायु एवं शुद्ध जल के लिए। ◆ जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को नियंत्रित करने के लिए। ◆ प्राकृतिक आपदाओं को कम करने के लिए। ◆ जैव विविधता बचाने के लिए। ◆ कृषि एवं खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए। ◆आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए। ◆संविधान के अनुच्छेद 48A एवं 51A(g) के अनुसार पर्यावरण संरक्षण राज्य एवं प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। *(४) पर्यावरण को नुकसान कौन और कैसे पहुँचा रहे हैं ?* पर्यावरण को नुकसान कई स्रोतों से पहुँचता है, *जिनमें प्रमुख हैं :—* *1. उद्योग :-* ◆बिना उपचार के प्रदूषित जल छोड़ना। ◆जहरीली गैसों का उत्सर्जन। ◆खतरनाक अपशिष्ट का अनुचित निस्तारण। *2. खनन गतिविधियाँ :-* ◆अवैज्ञानिक खनन। ◆धूल प्रदूषण। ◆पहाड़ों एवं जंगलों का विनाश। *3. परिवहन :-* ◆वाहनों से धुआँ। ◆ओवरलोड वाहन। ◆बिना ढके खनिज एवं निर्माण सामग्री का परिवहन। *4. नगर निकाय एवं स्थानीय प्रशासन :-* ◆कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण न होना। ◆सीवेज का नदियों में प्रवाह। ◆खुले में कचरा जलाना। *5. कृषि :-* ◆रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग। ◆पराली जलाना। *6. आम नागरिक :-* ◆प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग। ◆जल एवं बिजली की बर्बादी। ◆वृक्षों की कटाई। ◆सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फैलाना। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* (188) #एक_हिन्दुस्तानी #20/07/2026 #dineshapna


 

★ *पर्यावरण संरक्षण :: जीवन संरक्षण* ★ *(१) पर्यावरण (Environment) का अर्थ है :—* हमारे चारों ओर विद्यमान वह समस्त प्राकृतिक, जैविक, सामाजिक एवं मानव-निर्मित परिवेश, जो मानव, पशु-पक्षियों, वनस्पतियों तथा समस्त जीव-जगत के जीवन को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। सरल शब्दों में, जल, वायु, भूमि, वन, पर्वत, नदियाँ, जीव-जंतु, वनस्पतियाँ तथा मानव समाज—इन सभी का समग्र स्वरूप ही पर्यावरण है। *(२) पर्यावरण के प्रकार :-* *1. प्राकृतिक पर्यावरण :-* (वायु, जल, भूमि, वन एवं जैव विविधता, पर्वत, समुद्र, नदियाँ) *2. जैविक पर्यावरण :-* (मनुष्य, पशु-पक्षी, वनस्पतियाँ, सूक्ष्म जीव) *3. सामाजिक एवं सांस्कृतिक पर्यावरण :-* (परिवार, समाज, शिक्षा, संस्कृति, परम्पराएँ) *4. मानव-निर्मित (कृत्रिम) पर्यावरण :-* (शहर, सड़कें, उद्योग, भवन, बाँध एवं अन्य निर्माण) *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* (187) #एक_हिन्दुस्तानी #20/07/2026 #dineshapna


 

Sunday, 19 July 2026

★ *आम आदमी सबसे ताकतवर है !* ★ आम आदमी सबसे ताकतवर, लोकतंत्र की है शान। *वोट से लिखता देश की किस्मत, उसकी अपनी पहचान।।* *कर देकर चलता शासन सारा, बढ़ता भारत महान।* जनता से ही शक्ति मिलती, जनता ही है प्राण।। अपने अधिकारों को जानो, मत बनो कभी लाचार। *नेता हों या हों अधिकारी, सब हैं जनता के द्वार।।* सम्मान सभी का करना लेकिन, सत्य न छोड़ो साथ। *जनहित, नीति और संविधान, रखें सदा अपने हाथ।।* *अन्याय, भ्रष्टाचार के आगे, कभी न शीश झुकाओ।* कानून के पथ पर चलकर, अपना हक़ तुम पाओ।। *जागरूक बन, निर्भय बनकर, राष्ट्रधर्म निभाना है।* आत्मसम्मान और कर्तव्य से, भारत को सजाना है।। *जनता जागे, देश सँवरे, यही सफलता का सार।* जिम्मेदार नागरिक से ही, होता राष्ट्र सदा सशक्त अपार।। *याद रहे हर हिन्दुस्तानी, जनता ही असली सरकार।* जागरूक आम आदमी से ही, लोकतंत्र रहे सशक्त अपार।। — सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य (186) #एक_हिन्दुस्तानी #19/07/2026


 











★ *एक आम आदमी को ताकतवर बनने व बने रहने के लिए !* ★ लोकतंत्र में नागरिक की वास्तविक शक्ति केवल वोट नहीं, बल्कि *उसकी जागरूकता, संगठन, चरित्र और सक्रिय भागीदारी है।* यदि प्रत्येक नागरिक निम्न 10 कार्य अपनाए, तो वह वास्तव में सशक्त नागरिक बन सकता है। *1. मतदान अवश्य करें और सोच-समझकर करें।* (जाति, धर्म, भय या लालच से नहीं, बल्कि उम्मीदवार के चरित्र, कार्य और जनहित के आधार पर वोट दें।) *2. संविधान, अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी रखें।* (अधिकारों के साथ-साथ मौलिक कर्तव्यों का पालन करें। जागरूक नागरिक को कोई आसानी से भ्रमित नहीं कर सकता।) *3. कानून का सम्मान करें और कानून का सहारा लें।* (अन्याय होने पर हिंसा नहीं, बल्कि RTI, जनसुनवाई, लोक शिकायत, न्यायालय और अन्य वैधानिक उपायों का उपयोग करें।) *4. कर (Tax) ईमानदारी से दें और उसके उपयोग का हिसाब भी माँगें।* (जो नागरिक कर देता है, उसे यह पूछने का पूरा अधिकार है कि उसका धन कहाँ और कैसे खर्च हो रहा है।) *5. नेता और प्रशासन से सम्मानपूर्वक, लेकिन आत्मसम्मान के साथ व्यवहार करें।* (न चापलूसी करें, न भय रखें। जनप्रतिनिधि और प्रशासन जनता की सेवा के लिए हैं।) *6. गलत कार्यों का विरोध करें और सही कार्यों का समर्थन करें।* (भ्रष्टाचार, पक्षपात और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाएँ तथा अच्छे कार्यों की खुलकर सराहना करें।) *7. आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें।* (ज्ञान, कौशल, रोजगार या व्यवसाय के माध्यम से आत्मनिर्भर नागरिक अधिक स्वतंत्र और प्रभावशाली होता है।) *8. संगठित रहें और समाज से जुड़े रहें।* (सामाजिक संस्थाओं, स्थानीय समितियों और जनहित अभियानों में भाग लें। संगठित समाज की आवाज़ अधिक प्रभावी होती है।) *9. सही और सत्य जानकारी के आधार पर निर्णय लें।* (अफवाहों, फर्जी समाचारों और भ्रामक प्रचार से बचें। तथ्य जाँचकर ही अपनी राय बनाएँ।) *10. राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।* (व्यक्तिगत हित, दलगत सोच या संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र, समाज और आने वाली पीढ़ियों के हित में सोचें और कार्य करें।) ★★★ याद रखें :- ★★★ लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति न धन है, न पद और न सत्ता। *सबसे बड़ी शक्ति एक जागरूक, ईमानदार, संगठित, आत्मसम्मानी और सक्रिय नागरिक है।* ★★★ सूत्र वाक्य :- ★★★ *"जागरूक नागरिक + ईमानदार चरित्र + संवैधानिक ज्ञान + सक्रिय सहभागिता = सशक्त लोकतंत्र और सशक्त भारत।"* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढय* (185) #19/05/2026 #dineshapna


 

🌿 *स्वस्थ रहें — तन से व मन से!* 🌿 *पौष्टिक भोजन, योग से तन में नव-ऊर्जा का संचार हो,* जल, विश्राम और अनुशासन से जीवन सदा साकार हो। *नशे और बुरी आदतों से हर पल अपना नाता तोड़ें,* स्वस्थ शरीर के बल पर ही हर सपने से रिश्ता जोड़ें। *सकारात्मक सोच से जीवन में आशा का उजियारा हो,* क्रोध, तनाव, ईर्ष्या मिटें, हर मन निर्मल धारा हो। *ध्यान, प्रार्थना, प्रेम-सद्भाव से अंतर्मन मुस्काता रहे,* स्वस्थ मन ही सुख, सफलता और जीवन का सच्चा धन कहलाए। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* #(184) #18/07/2026 #dineshapna ############################ 🌿*स्वस्थ रहें — तन से व मन से !* 🌿 स्वस्थ जीवन केवल रोगों से मुक्त रहने का नाम नहीं, *बल्कि शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन* का नाम है। ◆ *तन की स्वस्थता के लिए —* • संतुलित एवं पौष्टिक आहार लें। • प्रतिदिन योग, प्राणायाम एवं व्यायाम करें। • पर्याप्त जल पिएँ और पूरी नींद लें। • नशे एवं अन्य हानिकारक आदतों से दूर रहें। ◆ *मन की स्वस्थता के लिए —* • सकारात्मक सोच अपनाएँ। • क्रोध, तनाव और ईर्ष्या से स्वयं को बचाएँ। • प्रतिदिन कुछ समय ध्यान, प्रार्थना या ईश्वर-स्मरण करें। • परिवार एवं मित्रों के साथ प्रेमपूर्ण संबंध बनाए रखें। *याद रखें —* "स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का निवास होता है, और स्वस्थ मन ही सुखी, सफल एवं सार्थक जीवन का आधार बनता है।" 🌸 *स्वस्थ रहें* — तन से भी, मन से भी; यही *सच्ची समृद्धि और जीवन का सबसे बड़ा धन* है। 🌸 ############################ ★ *प्रेसंनोट*★ *स्वस्थ तन और स्वस्थ मन ही सुखी जीवन का आधार : सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* राजसमन्द। श्रीहरि साहित्य सेवा संस्थान द्वारा "स्वस्थ रहें – तन से व मन से" विषय पर गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा चिकित्सा, पुलिस एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कर्मयोगियों का सम्मान करना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सर्कल इंस्पेक्टर औकार सिंह थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपना ट्रस्ट के अध्यक्ष सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य ने की। विशिष्ट अतिथि उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राष्ट्र सहाना आजाद एवं डॉ. घनश्याम मुरड़िया रहे। कार्यक्रम का संचालन श्रीहरि साहित्य सेवा संस्थान के अध्यक्ष रविनंदन चारण ने किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य ने कहा कि स्वास्थ्य केवल शरीर तक सीमित नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार स्वास्थ्य केवल रोगों की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक रूप से पूर्ण स्वस्थता की अवस्था है। यदि इसमें आध्यात्मिक संतुलन भी जुड़ जाए तो व्यक्ति के जीवन में वास्तविक आनंद, शांति और संतोष का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पुलिसकर्मी एवं समाजसेवी प्रतिदिन समाज की सेवा में अपना अमूल्य योगदान देते हैं। वे केवल अपने दायित्वों का निर्वहन ही नहीं करते, बल्कि समाज के स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं संस्कारों की भी रक्षा करते हैं। उन्होंने सभी से आत्ममंथन करने का आग्रह करते हुए कहा कि जो लोग दूसरों की सेवा में निरंतर लगे रहते हैं, उन्हें अपने स्वास्थ्य की भी उतनी ही चिंता करनी चाहिए। उन्होंने वर्तमान समय की तनावपूर्ण जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या तथा बढ़ते मानसिक दबाव को अनेक बीमारियों का प्रमुख कारण बताते हुए संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित योग एवं व्यायाम, पर्याप्त जल सेवन, पर्याप्त नींद तथा नशामुक्त जीवन अपनाने का आह्वान किया। साथ ही सकारात्मक सोच, ध्यान, प्रार्थना, ईश्वर-स्मरण, तनाव प्रबंधन तथा परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने को मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि "शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्", अर्थात यह शरीर ही सभी श्रेष्ठ कार्यों का प्रथम साधन है। यदि शरीर और मन स्वस्थ नहीं होंगे तो व्यक्ति परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं कर सकेगा। मुख्य अतिथि सर्कल इंस्पेक्टर औकार सिंह ने विशेष रूप से डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ एवं पुलिसकर्मियों से स्वयं के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने का आग्रह किया तथा समाजसेवियों से स्वास्थ्य जागरूकता को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धन, पद और प्रतिष्ठा का वास्तविक महत्व तभी है, जब व्यक्ति का तन स्वस्थ और मन प्रसन्न हो। विशिष्ट अतिथि डॉ. राष्ट्र सहाना आजाद एवं डॉ. घनश्याम मुरड़िया ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अनुशासित जीवनशैली अपनानी चाहिए तथा स्वयं स्वस्थ रहकर दूसरों को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सक के रूप में सेवा का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है और इस दायित्व का निर्वहन सेवा-भाव एवं समर्पण के साथ किया जाना चाहिए। इस अवसर पर चिकित्सा एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रमेश सुथार, डॉ. राष्ट्र सहाना आजाद, पारस देवी, रिद्धि शर्मा, गायत्री माली, दिव्या कुमावत, डॉ. गौतम पालीवाल, कैलाश चन्द्र बंजारा एवं मीरा कुमावत का सम्मान किया गया। पुलिस विभाग से हेड कांस्टेबल भगवतीलाल, कांस्टेबल पीराराम, एएसआई देवी लाल, एएसआई ओमप्रकाश चौधरी, कांस्टेबल विजेन्द्र कुमार, एएसआई छोगालाल, एएसआई मधुसूदन तथा एएसआई मदनलाल को भी समाज के प्रति उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, चिकित्सक, पुलिस अधिकारी, समाजसेवी एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।















 

Saturday, 18 July 2026

★ *"आम आदमी सबसे ताकतवर है"* ★ आम आदमी इस लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। क्योंकि – 1. वही अपने *मत (Vote)* से जनप्रतिनिधियों का चुनाव करता है और सरकार बनती है। 2. वही प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष *कर (Taxes)* देकर शासन-प्रशासन के संचालन में योगदान देता है। फिर भी, *अपनी संवैधानिक शक्ति को न पहचानने के कारण* अनेक नागरिक स्वयं को नेता और प्रशासन के सामने याचक समझने लगते हैं। जबकि लोकतंत्र में नागरिक स्वामी (Sovereign Citizen) है और जनप्रतिनिधि तथा प्रशासन उसके सेवक (Public Servants) हैं, जिन्हें संविधान और कानून के अनुसार जनता की सेवा का दायित्व सौंपा गया है। *आम आदमी को क्या करना चाहिए?* *(1) नेता के साथ —* - सम्मानपूर्ण, लेकिन समानता और जवाबदेही का व्यवहार रखें। - व्यक्ति नहीं, नीति, कार्य और जनहित को महत्व दें। - मतदान सोच-समझकर करें और किए गए वादों का हिसाब मांगें। - किसी भी प्रकार की चापलूसी या भय से मुक्त रहें। *(2) प्रशासन के साथ —* - कानून का पालन करते हुए अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहें। - अपना वैध कार्य आत्मविश्वास के साथ अधिकारपूर्वक करवाएँ। - आवश्यकता होने पर RTI, जनसुनवाई, शिकायत पोर्टल और न्यायालय जैसे वैधानिक उपायों का उपयोग करें। - भ्रष्टाचार, अनुचित दबाव या अन्याय का कानूनी रूप से विरोध करें। याद रखें — *लोकतंत्र में आम आदमी न तो शासक का याचक है और न ही किसी का कृपापात्र। वह संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों से संपन्न, राष्ट्र का जिम्मेदार नागरिक है। इसलिए उसका व्यवहार सम्मानपूर्ण, जागरूक, आत्मसम्मानपूर्ण और कानूनसम्मत होना चाहिए।* संदेश: *"नेता और प्रशासन का सम्मान करें, लेकिन अपने संवैधानिक अधिकारों का सम्मान सबसे पहले स्वयं करें। जागरूक आम आदमी ही सशक्त लोकतंत्र की पहचान है।"* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* (183) #एक हिन्दुस्तानी #18/07/2026