Saturday, 4 July 2026

★ *समानता, पारदर्शिता और न्याय की मांग* ★ धर्म सभी का पूज्य रहे, सम्मान सभी को मिले समान, *कानून की छाया में खिले, न्याय बने भारत की पहचान।* *मंदिर, वक्फ़, चर्च, गुरुद्वारा, सबका हो एक ही विधान,* पारदर्शिता से बढ़े विश्वास, सशक्त बने हिंदुस्तान। हर संपत्ति का स्पष्ट लेखा, जनता के सम्मुख आए, *आय-व्यय का सच्चा दर्पण, हर वर्ष जग को दिखलाए।* *स्वतंत्र ऑडिट, निष्पक्ष जांच, समय पर हो हर निर्णय,* दोषी चाहे कोई भी हो, सब पर लागू हो एक न्याय। जब नियम सभी पर एक समान, तब बढ़े जन-जन का मान, *सत्य, जवाबदेही और सेवा, यही बने राष्ट्र की शान।* *न्याय, समानता, पारदर्शिता—यही हमारी पहचान,* इन्हीं सिद्धांतों से होगा, सशक्त, समृद्ध और महान हिंदुस्तान। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (152) #04/07/2026 #dineshapna


 

Friday, 3 July 2026

★ *समानता, पारदर्शिता और न्याय की मांग* ★ धार्मिक आस्था किसी भी समुदाय की हो, *कानून, पारदर्शिता और जवाबदेही के मापदंड सभी पर समान रूप से* लागू होने चाहिए। मेरी विनम्र मांग है कि भारत सरकार सभी धार्मिक संस्थाओं—मंदिर, वक्फ़, चर्च, गुरुद्वारा एवं अन्य सार्वजनिक धार्मिक ट्रस्टों—के लिए एक समान नीति लागू करे, जिसमें— ■ नियमित स्वतंत्र ऑडिट अनिवार्य हो। ■ सभी संपत्तियों का डिजिटल अभिलेखीकरण एवं सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध हो। ■ आय-व्यय का वार्षिक प्रकटीकरण अनिवार्य किया जाए। ■ अनियमितताओं की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच हो ■ दोषी पाए जाने पर बिना किसी भेदभाव के समान कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। *न्याय तभी सार्थक है,* जब वह सभी के लिए समान हो; और *पारदर्शिता तभी प्रभावी है,* जब वह सभी पर समान रूप से लागू हो। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (151) #04/07/2026 #dineshapna


 

Wednesday, 1 July 2026

★ *समर्पण से राष्ट्र निर्माण ::* *पसीने से अर्थव्यवस्था, रक्त से मानवता* ★ खून-पसीने से जिसने राष्ट्र की तकदीर सँवारी है, चार्टर्ड अकाउंटेंट की सेवा सबसे न्यारी है। वरिष्ठों की तपस्या ने विश्वास की नींव बनाई, सत्य, श्रम और ज्ञान से भारत की शान बढ़ाई। नव-सीए अब लेकर सेवा का पावन अभियान चले, ईमानदारी की मशाल लिए नव निर्माण पथ पर चले। जब रक्तदान की कुछ बूँदें जीवन का दीप जलाती हैं, मानवता की सच्ची पूजा तब धरती पर मुस्काती है। ज्ञान का दान, सेवा का मान, यही हमारी पहचान है, राष्ट्रहित और मानवहित का यही सच्चा अभियान है। पसीना अर्थव्यवस्था को, रक्त मानवता को जीवन देता है, यही सच्चा चार्टर्ड अकाउंटेंट राष्ट्रनिर्माता कहलाता है। 🇮🇳 *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* ◆1st Elected Chairman of ICAI (2025-26) ◆Treasurer of ICAI (2026-27) (150) #02/07/2026 #dineshapna










 

★ *समर्पण से राष्ट्र निर्माण : पसीने से अर्थव्यवस्था, रक्त से मानवता* ★ आज का दिन *केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि तीन महान संकल्पों का संगम है—* CA Foundation Day, वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान व नव - योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का अभिनंदन तथा रक्तदान शिविर। पहली दृष्टि में ये तीनों कार्यक्रम अलग-अलग प्रतीत होते हैं, किन्तु यदि इनके *मूल भाव को देखें तो इनकी आत्मा एक ही है— राष्ट्र निर्माण, समर्पण और सेवा ।* आज का यह आयोजन हमें *दो महान सत्य* याद दिलाता है। *पहला—समर्पण की परम्परा।* हमारे *वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स* ने चार दशकों तक अपने ज्ञान, परिश्रम और ईमानदारी से देश की आर्थिक धारा को सशक्त बनाया है। आज जिन *युवा साथियों ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी* की कठिन यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की है, वे उसी गौरवशाली परम्परा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेकर खड़े हैं। और जब यही *युवा रक्तदान* करते हैं, तो यह केवल रक्तदान नहीं, बल्कि उस समर्पण की परम्परा का मानवीय विस्तार बन जाता है। *दूसरा—जीवन और राष्ट्र, दोनों की सुरक्षा।* *चार्टर्ड अकाउंटेंट* अपने ज्ञान और सत्यनिष्ठा से देश की आर्थिक व्यवस्था को स्वस्थ, पारदर्शी और सुदृढ़ बनाते हैं, जबकि *एक रक्तदाता* अपने रक्त से किसी अजनबी के जीवन की रक्षा करता है। एक राष्ट्र की आर्थिक नाड़ियों को सशक्त करता है, तो दूसरा मानव शरीर की नाड़ियों में जीवन का संचार करता है। हमारे *वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने अपने चार दशकों के सफर में* केवल बैलेंस शीट नहीं बनाई, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार, उद्योग और वित्तीय अनुशासन की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने अपने *खून जैसा पसीना बहाकर राष्ट्र के आर्थिक स्वास्थ्य की रक्षा की है।* आज उनका सम्मान, वास्तव में उस तपस्या को नमन है। आज जिन *युवा साथियों ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी की कठिन यात्रा* सफलतापूर्वक पूरी की है, वे *केवल एक डिग्री प्राप्त नहीं कर रहे, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक बड़ी जिम्मेदारी स्वीकार कर रहे हैं।* अब उनके ज्ञान, सत्यनिष्ठा और परिश्रम से देश की आर्थिक प्रगति को नई दिशा मिलेगी। और इसी अवसर पर आयोजित रक्तदान शिविर इस संदेश को और भी ऊँचाई देता है। *वरिष्ठों ने अपने जीवन का पसीना राष्ट्र को दिया है,* और *नवोदित सीए अपने जीवन का रक्त देकर मानवता के प्रति अपना पहला सामाजिक दायित्व निभा रहे हैं।* *कितना अद्भुत संयोग है —* एक ओर *वर्षों का पसीना* देश की *अर्थव्यवस्था को जीवन* देता है, दूसरी ओर *रक्त की कुछ बूंदें* किसी *इंसान को नया जीवन* दे सकती हैं। *यही चार्टर्ड अकाउंटेंट की वास्तविक पहचान है —* जहाँ आवश्यकता हो, वहाँ *ज्ञान का दान;* जहाँ अवसर मिले, वहाँ *सेवा का दान;* और जहाँ किसी का जीवन बच सके, वहाँ *रक्त का दान।* आइए, आज हम सभी यह संकल्प लें कि हम *केवल सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट ही नहीं, बल्कि संवेदनशील नागरिक और सच्चे राष्ट्रनिर्माता भी बनेंगे।* वरिष्ठों की *तपस्या हमारी प्रेरणा* बने, नव-सीए का *उत्साह हमारी शक्ति* बने और रक्तदान की भावना हमारी *मानवता की पहचान बने।* आज का यह संगम हमें सिखाता है कि *सीए का जीवन केवल करियर नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति निरंतर समर्पण की यात्रा है*— जहाँ *पसीना अर्थव्यवस्था* को शक्ति देता है और *रक्त मानवता* को जीवन देता है। इसी संदेश के साथ सभी *वरिष्ठ सदस्यों* को शत-शत नमन, सभी *नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स* को हार्दिक शुभकामनाएँ तथा सभी *रक्तदाताओं* को हृदय से धन्यवाद। जय हिन्द! जय ICAI. *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* ◆1st Elected Chairman of ICAI (2025-26) ◆Treasurer of ICAI (2026-27) (149) #01/07/2026 #dineshapna




 










Saturday, 27 June 2026

★ *सच्चाई का जनहित : v/s : दिखावे का जनहित* ★ ■ *"जनहित के दोनो क्षेत्र में* सभी कार्य एक जैसे दिखाई देते हैं, पर उनका उद्देश्य, परिणाम और मूल्य बिल्कुल अलग होते हैं।" ■ *दिखावे का जनहित व्यक्ति स्वयं को लाभ* पहुँचा सकता है, जबकि *सच्चा जनहित समाज को न्याय* दिलाने के लिए स्वयं संघर्ष और त्याग का मार्ग चुनता है।" *(१) सच्चे जनहित में प्रायः—* 1. अन्याय करने वाले प्रभावशाली व्यक्तियों के क्रोध, प्रतिशोध और दबाव का सामना करना पड़ता है। 2. सत्ता, धन या प्रभाव रखने वाले लोग विरोधी बन सकते हैं तथा अपने कार्यों में बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं। 3. झूठे आरोप, शिकायतें, मुकदमे या बदनाम करने के प्रयासों का सामना करना पड़ सकता है। 4. समय, धन, मानसिक शांति, पारिवारिक सुख तथा कभी-कभी प्रतिष्ठा और सुरक्षा भी दाँव पर लग जाती है। 5. फिर भी सत्य, साक्ष्य और कानून के आधार पर किया गया संघर्ष अंततः समाज का विश्वास अर्जित करता है और न्याय की राह को मजबूत बनाता है। ● *आमजन को लाभ :-* अन्याय के विरुद्ध वास्तविक राहत, न्याय की संभावना तथा व्यवस्था में सुधार का मार्ग प्रशस्त होता है। ● *जनहित करने वाले व्यक्ति को लाभ :-* आत्मसंतोष, नैतिक सम्मान, जनविश्वास और समाज में स्थायी विश्वसनीयता प्राप्त होती है। *(२) दिखावे के जनहित में प्रायः—* 1. प्रशंसा, प्रचार और लोकप्रियता शीघ्र मिल जाती है। 2. प्रभावशाली लोगों से टकराव की संभावना कम रहती है। 3. व्यक्तिगत स्वार्थ और सुविधाएँ प्रायः सुरक्षित रहती हैं। 4. मंच, सम्मान और सार्वजनिक पहचान अपेक्षाकृत आसानी से मिल सकती है। 5. बिना अधिक जोखिम उठाए जनहित का आभास उत्पन्न किया जा सकता है। ● *आमजन को लाभ :-* प्रायः केवल आश्वासन, सहानुभूति या अस्थायी राहत का अनुभव होता है; वास्तविक समस्या अक्सर जस की तस बनी रह सकती है। ● *जनहित करने वाले व्यक्ति को लाभ :-* प्रचार, प्रतिष्ठा, सामाजिक पहचान तथा व्यक्तिगत सुविधाएँ अपेक्षाकृत अधिक प्राप्त हो सकती हैं। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (148) #28/06/2026 #dineshapna




 

★ *सच्चा जनहित : संघर्ष की राह, दिखावे का लाभ* ★ ■> *"दिखावे का जनहित सम्मान दिला सकता है,* पर सच्चा जनहित संघर्ष, त्याग और बलिदान माँगता है।" ■> *"जो स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों को न्याय दिलाने का साहस रखता है,* वही सच्चे अर्थों में जनसेवक और समाज का पथप्रदर्शक कहलाता है।" जो व्यक्ति *सच्चाई के जनहित में* खड़ा होता है, उसे प्रायः *निम्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है :—* 1. अन्याय करने वाले प्रभावशाली व्यक्तियों के क्रोध, प्रतिशोध और दबाव को सहना पड़ता है। 2. सत्ता, धन या प्रभाव रखने वाले लोग स्थायी विरोधी बन जाते हैं। 3. अपने व्यक्तिगत, सामाजिक तथा प्रशासनिक कार्यों में अनावश्यक बाधाएँ उत्पन्न होने लगती हैं। 4. झूठे आरोप, शिकायतें, मुकदमे तथा चरित्र-हनन के प्रयास झेलने पड़ सकते हैं। 5. समय, धन, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख का त्याग करना पड़ता है। 6. भय, स्वार्थ या दबाव के कारण अनेक लोग साथ छोड़ देते हैं और संघर्ष अकेले लड़ना पड़ता है। 7. सामाजिक, राजनीतिक तथा प्रशासनिक दबाव बनाकर हतोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है। 8. प्रतिष्ठा, सम्मान, व्यवसाय और कभी-कभी व्यक्तिगत सुरक्षा भी जोखिम में पड़ जाती है। 9. न्याय की लड़ाई लंबी होती है; इसलिए धैर्य, साहस, संयम और दृढ़ संकल्प की निरंतर परीक्षा होती रहती है। 10. किन्तु यदि संघर्ष सत्य, साक्ष्य और कानून के आधार पर किया जाए, तो अंततः न्याय की विजय होती है, समाज का विश्वास प्राप्त होता है और वही संघर्ष जनकल्याण का इतिहास बन जाता है। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (147) #27/06/2026 #dineshapna