Sunday, 29 March 2026

★ *“Peer Review – पेशेवर स्वतंत्रता और ऑडिट गुणवत्ता का समन्वय”* ★ The Institute of Chartered Accountants of India ने सदैव *अपने सदस्यों की गरिमा, स्वतंत्रता एवं पेशेवर सम्मान* को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। विशेष रूप से *ऑडिट जैसे संवेदनशील एवं उत्तरदायित्वपूर्ण कार्य में, यह आवश्यक है कि उसकी गुणवत्ता बनी रहे*, साथ ही ऑडिटर के स्वाभिमान पर कोई आंच न आए। यह सर्वविदित है कि— ऑडिट की गुणवत्ता सुधारने के लिए *पुनः ऑडिट (Re-audit) करना न तो व्यावहारिक है और न ही यह ऑडिटर की स्वतंत्रता के अनुरूप है।* इसी प्रकार, किसी *चार्टर्ड अकाउंटेंट को बाहरी संस्था या व्यक्ति के अधीन कार्य करने* के लिए बाध्य करना भी इस प्रतिष्ठित पेशे की गरिमा के विपरीत है। इन *दोनों महत्वपूर्ण चुनौतियों का संतुलित समाधान* प्रस्तुत करते हुए ICAI ने एक अत्यंत *प्रभावी व्यवस्था विकसित की—Peer Review System* । इस प्रणाली की विशेषता यह है कि— 👉 एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के कार्य की *समीक्षा दूसरे समान स्तर के चार्टर्ड अकाउंटेंट (Peer) द्वारा* की जाती है। 👉 इसमें किसी विशेष ऑडिट को *दोबारा करने के बजाय, फर्म द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं, सिस्टम और मानकों के पालन का मूल्यांकन* किया जाता है। परिणामस्वरूप— *ऑडिट की गुणवत्ता में निरंतर सुधार होता है* *पेशे की गरिमा एवं विश्वसनीयता* बनी रहती है और सबसे महत्वपूर्ण, *बिना किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाए,* उत्कृष्ट ऑडिट के लिए सक्षम एवं प्रशिक्षित चार्टर्ड अकाउंटेंट तैयार होते हैं। अतः *Peer Review केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह विश्वास, गुणवत्ता और पेशेवर उत्कृष्टता* का सशक्त माध्यम है। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* #1st Elected Chairman (25-26) #Treasurer (26-27). Rajsamand Branch of ICAI. (105) #29/03/2026 #dineshapna








 

Sunday, 22 March 2026

★ *आम आदमी को मूर्ख कब तक बनाओगे?* ★ *तम्बाकू पर भाषण भारी,* *बच्चों से नाटक करवाते हैं,* “ये ज़हर है”—ये सिखलाकर, पीछे से खुद बिकवाते हैं। *जन-जन से जुर्माना वसूलें,* *“कानून का पालन करना है”,* और उसी धुएँ की कमाई से, खज़ाना भी तो भरना है! ये कैसी नीति, कैसी रीत, जहाँ सच भी झुक जाता है, *मेहनत जनता करती पूरी,* *फल कोई और ही खाता है।* *कब तक यूँ ही चलता रहेगा,* *दोहरी नीति का ये व्यापार?* एक हाथ से रोपण करवाओ, दूजे से काटो हर बार! *तम्बाकू पर नीति स्पष्ट हो,* *या तो पूर्ण प्रतिबंध लगे,* या फिर सच में नियंत्रण हो, दोहरी चाल अब बन्द लगे। जब नीति में ईमान दिखेगा, तभी बदलेगा देश हमारा, *वरना यूँ ही चलता रहेगा,* *“मूर्ख बनाओ”—ये खेल सारा।* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य (अपना)* #एक क्रांतिवीर कवि (6) #22/03/2026 #dineshapna


 

★ *आम आदमी को मूर्ख कब तक बनाओगे?* ★ *विश्व वानिकी दिवस आया फिर,* *नारे गूंजे—“पेड़ लगाओ!”* हाथों में फावड़ा दे कर कहते— “धरती माँ का कर्ज चुकाओ!” पर जंगल की गोद में जाकर देखो, किसका चलता खेल निराला, *एक तरफ़ पौधा रोपता जन,* *दूजी ओर कटता हरियाला।* *आम आदमी पसीना बहाए,* *छाया का सपना बोता है,* कुछ ऊँचे लोग फाइलों में ही, जंगल पूरा ढोता है। *अब वक्त है सच को पहचानो,* *जनता भी जागे, प्रश्न उठाए,* कानून बने तो सख्त बने, जो तोड़े—सीधे दण्ड पाए। *वन भूमि हो पूर्ण सुरक्षित,* *अतिक्रमण का नाम न हो,* सरकार खुद संरक्षण करे, केवल कागज़ी काम न हो। जब नीति में ईमान दिखेगा, तभी बदलेगा देश हमारा, *वरना यूँ ही चलता रहेगा,* *“मूर्ख बनाओ”—ये खेल सारा।* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य (अपना)* #एक क्रांतिवीर कवि (5) #22/03/2026 #dineshapna


 

★ *आम आदमी को मूर्ख क्यों व कब तक बनायेंगे ?* ★ १) *विश्व वानिकी दिवस पर पौधरोपण करें आम आदमी*, और वन भूमि व सरकारी भूमि पर अतिक्रमण व लूट का कार्य करें - कुछ अधिकारी / सक्षम व्यक्ति व नेता ! २) *पौधरोपण करें आम आदमी*, और पेडों की कटाई कर मलाई खाये - कुछ अधिकारी / सक्षम व्यक्ति व नेता ! ३) *तम्बाकू के दुष्प्रभाव बताने के नाटक कराने का श्रम कराया जाये आम आदमी से*, और तम्बाकू बेचकर मुनाफा / टैक्स / मलाई खाये - कुछ अधिकारी / सक्षम व्यक्ति व नेता ! ४) *तम्बाकू बेचने पर पैनल्टी का भुगतान करें आम आदमी*, और तम्बाकू व उसके उत्पाद बनाकर मुनाफा / टैक्स / मलाई खाये - कुछ अधिकारी / सक्षम व्यक्ति व नेता ! ★ *सरकार सख्त कानून बनाकर* वन व सरकारी भूमि से पूर्ण अतिक्रमण हटाकर स्वयं पौधरोपण करके व उनका संरक्षण क्यों नहीं करे ? ★ *सरकार सख्त कानून बनाकर* तम्बाकू व उसके उत्पादों के उत्पादन को ही बन्द क्यों नहीं करे ? *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* #एक हिन्दुस्तानी (104) #22/03/2026 #dineshapna


 

Friday, 20 March 2026

★ *अन्र्तराष्ट्रीय महिला दिवस* ★ (*महिलाएँ बढे, नेतृत्व व परिवर्तन की अग्रदूत बने !*) भारत की प्राचीन संस्कृति में नारी को सदैव अत्यंत उच्च स्थान दिया गया है। हमारे *धर्मग्रन्थों में नारी को “नारायणी” अर्थात् दिव्य शक्ति का स्वरूप* माना गया है। यही कारण है कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है— *“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”* अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है। इतिहास के प्रारम्भिक काल में नारी को शिक्षा, ज्ञान और सामाजिक नेतृत्व में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त था। परन्तु *समय के साथ जब समाज में पुरुष-प्रधान विचारधारा प्रबल हुई*, तब नारी की भूमिका धीरे-धीरे सीमित होने लगी। उसके अधिकार, अवसर और नेतृत्व की संभावनाएँ कम होने लगीं। इसी *ऐतिहासिक असंतुलन को सुधारने और समाज को पुनः संतुलित बनाने* के लिए आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की आवश्यकता महसूस हुई। आज का यह दिवस *केवल उत्सव नहीं, बल्कि नारी के सम्मान, समान अवसर और नेतृत्व की पुनः स्थापना* का संकल्प है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) ने इस वर्ष की *प्रेरणादायी थीम* दी है— *“Rise, Lead and Transform – Beyond Boundaries”।* *“Rise”* हमें प्रेरित करता है कि महिलाएँ शिक्षा, आत्मविश्वास और कौशल के माध्यम से आगे बढ़ें। *“Lead”* यह दर्शाता है कि महिलाएँ केवल सहभागी ही नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका भी निभाएँ। और *“Transform – Beyond Boundaries”* यह संदेश देता है कि महिलाएँ सीमाओं से परे जाकर *समाज, अर्थव्यवस्था और पेशे में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ।* अतः आज का दिन हमें यह स्मरण कराता है कि *नारी का सम्मान केवल परम्परा नहीं, बल्कि एक प्रगतिशील और संतुलित समाज की अनिवार्य आधारशिला है।* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* #1st Elected Chairman (25-26) #Treasurer (26-27). Rajsamand Branch of ICAI. (103) #19/03/2026 #dineshapna


 

Monday, 9 March 2026

★ *राष्ट्रधर्मी माता पन्नाधाय 536 व़ीं जन्म जयन्ती* ★ आशापुरा मानव कल्याण ट्रस्ट एवं राजस्थान गुर्जर महासभा के संयुक्त तत्वावधान में एक प्रेरणादायी समारोह का आयोजन किया गया। ट्रस्ट के महासचिव *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य ने स्वागत भाषण में कहा कि आज का यह आयोजन त्रिवेणी संगम के समान है*। आशापुरा मानव कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष *नानजी भाई गुर्जर ने कहा कि मेवाड़ राज्य के उत्तराधिकारी की रक्षा हेतु अपने पुत्र चंदन का बलिदान देने वाली पन्नाधाय का त्याग अद्वितीय है और उन्हें औपचारिक रूप से “राष्ट्रधर्मी माता” का दर्जा* दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10:00 बजे बांण्ड्यावास स्थित पन्नाधाय सर्किल पर पन्नाधाय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। समारोह में *राजस्थान गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश जी भाटी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कालू लाल गुर्जर ने की।* कार्यक्रम में *राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष पुरुषोत्तम फागणा, कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल वर्मा, समाजसेवी देवकीनंदन ‘काका’, राजसमंद विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी, मालासेरी डूंगरी भगवान देवनारायण मंदिर के मुख्य पुजारी हेमराज जी गुर्जर, समाजसेवी ममता अहीर* सहित महासभा के सभी जिलाध्यक्ष, समाजजन एवं कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। *भारतीय जनता पार्टी की नेता संगीता चौहान* द्वारा महिलाओं को उनके उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। वहीं *ब्रह्मपाल नागर ने पन्नाधाय आरती, पन्नाधाय चालीसा तथा वीर रस के गीत* प्रस्तुत कर सभागार को उत्साह से भर दिया। सायंकाल *राष्ट्रधर्मी माता पन्नाधाय रिसर्च फाउंडेशन एवं साकेत साहित्य संस्थान, राजसमंद के तत्वावधान में पन्नाधाय की स्मृति में सांस्कृतिक काव्य संध्या* का आयोजन किया गया। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य (अपना)* #एक हिन्दुस्तानी (102) #09/03/2026 #dineshapna








 

Sunday, 8 March 2026

★ *एक आयोजन त्रिवेणी संगम - 3 दिवस व 3 सम्मान* ★ आशापुरा मानव कल्याण ट्रस्ट एवं राजस्थान गुर्जर महासभा के संयुक्त तत्वावधान में एक प्रेरणादायी समारोह का आयोजन किया गया। ट्रस्ट के महासचिव *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य ने स्वागत भाषण में कहा कि आज का यह आयोजन त्रिवेणी संगम के समान है*, जहाँ तीन महान अवसर एक साथ जुड़े हैं— राष्ट्रधर्मी आदर्श मातृशक्ति पन्नाधाय जयंती, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस तथा पर्यावरण चेतना एवं वृक्षारोपण संकल्प दिवस। उन्होंने कहा कि पन्नाधाय का त्याग राष्ट्रनिष्ठा की अमर प्रेरणा देता है, महिला दिवस नारी सम्मान और सशक्तिकरण का संदेश देता है, जबकि पर्यावरण दिवस प्रकृति संरक्षण के प्रति हमारी जिम्मेदारी का स्मरण कराता है। आशापुरा मानव कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष *नानजी भाई गुर्जर ने कहा कि मेवाड़ राज्य के उत्तराधिकारी की रक्षा हेतु अपने पुत्र चंदन का बलिदान देने वाली पन्नाधाय का त्याग अद्वितीय है और उन्हें औपचारिक रूप से “राष्ट्रधर्मी माता” का दर्जा* दिया जाना चाहिए। इस अवसर पर *ट्रस्ट द्वारा तीन विशिष्ट सम्मान* भी प्रदान किये गये— ◆ *“पन्नाधाय राष्ट्रनिष्ठा सम्मान”* – पन्नाधाय की 18वीं पीढ़ी के सदस्य हेमंत गुर्जर को प्रदान किया गया। ◆ *“नारी शक्ति गौरव सम्मान”* – डॉ. रिद्धि पगारिया, ममता रेबारी, अनिता पटेल, प्रेम देवी धाबाई, मालती बेन, सरिता कुँवर, शकुंतला पामेचा, रेशमा चपराणा, कल्पना यादव, ज्योति चौधरी, ममता अहिर एवं पूजा गुर्जर को उनके उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। ◆ *“हरित संकल्प सम्मान”* – कृष्ण गोपाल गुर्जर, पन्नालाल कुमावत, ऋषभ गुर्जर एवं अमित वर्मा को पर्यावरण संरक्षण में योगदान हेतु सम्मानित किया गया। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य (अपना)* #एक हिन्दुस्तानी (101) #08/03/2026 #dineshapna

























 

Tuesday, 3 March 2026

🎨 *होली के पावन अवसर पर एक साहित्यिक समर्पण* 🎨 रंगों के उत्सव और उल्लास के इस शुभ दिन पर सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य द्वारा शब्दों के संकलन से निर्मित *काव्य संग्रह “कर्म से क्रांति तक”* का प्रथम अध्याय आम जनमानस को सादर समर्पित किया जा रहा है। *यह कृति केवल भावनाओं का प्रवाह नहीं, बल्कि कर्तव्य, जागरूकता और परिवर्तन की चेतना का संदेश है।* “कर्म से क्रांति तक” जीवन के उस पथ का प्रतीक है जहाँ निष्ठा से किया गया कार्य ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाता है। *होली के इन पवित्र रंगों की तरह यह प्रथम चैप्टर भी समाज में प्रेम, सत्य और उत्तरदायित्व के रंग बिखेरे* — इसी मंगलकामना के साथ यह समर्पण। 🌸 आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🌸 ------------------------------------ ~~~~~~(१)~~~~~~~ ★ *आओ! लोकतंत्र की होली खेलें* ★ *चार रंगों से सजे धरा पर,* लोकतंत्र का मान बढ़ाएँ, *विधायिका सत्य का गुलाल,* नीति का उजियारा फैलाएँ। *कार्यपालिका कर्म का रंग ले,* अन्याय पर प्रहार करे, मिलावट, अतिक्रमण, भ्रष्टाचार पर खुला प्रहार करे। *न्यायपालिका न्याय का चंदन,* निर्भीक निर्णय दे हर बार, समयबद्ध, पारदर्शी होकर, रखे संविधान का सत्कार। *मीडिया बने सच की पिचकारी,* निडरता का रंग उड़ाए, शिक्षा-स्वास्थ्य के पावन क्षेत्र से, हर माफिया दूर भगाए। *मौन नहीं अब जागरूकता हो,* यही हमारा होली गीत, उत्तरदायी चारों स्तम्भों से, लोकतंत्र बने अति प्रवीण। ~~~~~~(२)~~~~~~~ ★ *कलयुग का सच* ★ *बुरे समय में अपना भी अक्सर साथ न देता है,* जिसे मानो सबसे ख़ास, वही घाव नया देता है। *प्रेम के नाम पर देह का व्यापार बढ़ा जाता है,* सच्चे मन का रिश्ता अब दुर्लभ सा हो जाता है। *विवाह से कतराती सोच, स्वार्थ में उलझी रहती है,* ममता की छाँव भी जैसे धीरे-धीरे बहती है। *ठग ही समाज में आज श्रेष्ठ कहलाता है,* ईमानदार मेहनतकश पेट भर न पाता है। *माँ-बाप और बच्चों में दूरी बढ़ती जाती है,* सच कह दो तो जान पे भी बन आती है। *यही है कलयुग का दर्पण, यही समय की रीत,* फिर भी आशा जीवित है—सत्कर्मों से होगी जीत। ~~~~~~(३)~~~~~~~ ★ *पन्ना धाय का अमर बलिदान* ★ मेवाड़ की पावन धरती पर त्याग का दीप जला, *पन्ना धाय ने मातृत्व से बढ़कर राजधर्म को भला।* *स्वामीभक्ति की ऐसी मिसाल जग में दुर्लभ हुई,* अपने ही लाल को दे, रणभूमि की राह चुन ली। *नन्हे उदयसिंह द्वितीय को आँचल में छुपा बचाया,* राजवंश का दीपक बन, मेवाड़ का मान बढ़ाया। *माँ का हृदय रोया होगा, पर दृढ़ था उसका प्रण,* राष्ट्र रहे सुरक्षित सदा, यही था उसका व्रत-धन। *त्याग, निष्ठा, साहस का वह उज्ज्वल इतिहास है,* पन्ना का बलिदान आज भी भारत की शान है। ~~~~~~(४)~~~~~~~~ ★ *मेरा देश गुलाम क्यों रहा* ★ मेरा देश गुलाम क्यों रहा, यह प्रश्न व्यथित मन पूछ रहा, *आपसी फूट की ज्वाला में, अपना ही घर क्यों जलता रहा।* जब स्वार्थ बना संबंधों से बड़ा, विश्वास बार-बार टूटता रहा, *कुछ अपने ही गद्दार बने, शत्रु संग हाथ मिलाता रहा।* धर्म का गूढ़ संदेश जहाँ, केवल शब्दों तक सिमटता रहा, *श्रीमद्भगवद्गीता का कर्मयोग अधूरा समझ, साहस भी कहीं भटकता रहा।* रणनीति, नीति और धर्मयुद्ध का संतुलन जब छूटता रहा, *शक्ति होते हुए भी नेतृत्व, दिशा बिना ही झुकता रहा।* *विज्ञान, शस्त्र और संगठन में जब हम पिछड़ते जाते रहे,* सागर-पथ, व्यापार, उद्योग सभी पर पराये अधिकार पाते रहे। फिर भी राख तले अंगार बचा, आत्मा का दीप न बुझ पाया, *बलिदानों की तपती धरती से, स्वतंत्रता का सूरज उग आया।* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य (अपना)* #एक क्रांतिवीर कवि (4) #03/03/2026 #dineshapna







 

Monday, 2 March 2026

★ *आओ! होली खेले — चार रंगों से, लोकतंत्र के चार स्तम्भों के संग!* ★ होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि जागरूकता, साहस और जिम्मेदारी का प्रतीक है। *लोकतंत्र के चार स्तम्भ—विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया* —जब अपने दायित्वों का पूर्ण निर्वहन करें, तभी सच्चे अर्थों में “रंगों की होली” सार्थक होती है। आज आवश्यकता है कि हम प्रश्न करें— 🔹 *मिलावट* के विरुद्ध सख्त कार्रवाई क्यों नहीं? खाद्य सुरक्षा कानूनों का प्रभावी पालन कहाँ है? 🔹 *अतिक्रमण* पर मौन समर्थन या निष्क्रियता क्यों? सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा कौन करेगा? 🔹 *भ्रष्टाचार* के मामलों में ठोस, पारदर्शी और समयबद्ध कार्यवाही क्यों नहीं? 🔹 *शिक्षा व स्वास्थ्य* जैसे पवित्र क्षेत्रों में माफिया तत्वों पर नियंत्रण कब और कैसे? लोकतंत्र में *मौन भी एक प्रकार की सहभागिता बन जाता है।* यदि चारों स्तम्भ अपनी संवैधानिक मर्यादा और उत्तरदायित्व निभाएँ, तो समाज में पारदर्शिता, न्याय और विश्वास का रंग स्वतः गाढ़ा होगा। आइए इस होली पर हम संकल्प लें— *मौन नहीं, जागरूकता का रंग लगाएँ।* *समर्थन नहीं, सत्य का साथ निभाएँ।* और *लोकतंत्र के चारों स्तम्भों को सशक्त, उत्तरदायी व पारदर्शी बनाने में* सक्रिय नागरिक बनें। यही होगी सच्ची लोकतांत्रिक होली। 🌸 *बुरा मत मानो, होली है!* 🌸 *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#प्रथम निर्वाचित चेयरमैन - राजसमन्द ब्रांच आईसीएआई* (100) #02/03/2026 #dineshapna