Sunday, 10 May 2026

★ *सनातन जागरण का शंखनाद* ★ *“धर्मो रक्षति रक्षितः” — जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।* हमें गर्व है कि हम हिन्दू हैं, हिन्दुस्तानी हैं, और इसलिए सनातनी हैं। *हमारा प्रथम कर्तव्य है कि हम सनातन धर्म का पूर्ण निष्ठा से पालन करें, और साथ ही भारत के संविधान एवं विधि-व्यवस्था का सम्मान करें।* किन्तु जब कहीं संविधान की मूल भावना के विपरीत भेदभाव, अन्याय या असमानता दिखाई दे, तब उसका संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक विरोध करना भी प्रत्येक जागरूक नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है। *१. समानता का अधिकार – अनुच्छेद 14* भारत का संविधान अनुच्छेद 14 के अंतर्गत सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता एवं समान संरक्षण का अधिकार देता है। यदि अन्य धार्मिक संस्थानों की तुलना में केवल हिन्दू मन्दिरों के प्रबंधन, सम्पत्ति या धार्मिक कार्यों में अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप हो, तो यह प्रश्न उठाना स्वाभाविक है कि क्या समानता का सिद्धान्त समान रूप से लागू हो रहा है? यह विषय संवैधानिक विमर्श और न्यायिक समीक्षा का विषय है, और इस पर जागरूक चर्चा आवश्यक है। *२. धर्म की स्वतंत्रता – अनुच्छेद 25 एवं 26* संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। अनुच्छेद 26 धार्मिक सम्प्रदायों को अपने धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन का अधिकार प्रदान करता है। अतः सनातन समाज को अपने मन्दिरों, परम्पराओं और धार्मिक संस्थाओं के संरक्षण हेतु इन संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए। *३. शिक्षा और संस्कृति की रक्षा – अनुच्छेद 29 एवं 30* संविधान अनुच्छेद 29 के माध्यम से प्रत्येक समुदाय को अपनी संस्कृति और परम्परा सुरक्षित रखने का अधिकार देता है। हिन्दू समाज को भी अपनी संस्कृति, शास्त्र, संस्कार और धर्मज्ञान अगली पीढ़ियों तक पहुँचाने हेतु संगठित प्रयास करने चाहिए—घर में, समाज में और शिक्षण संस्थानों में। *अब समय है जागरण का!* यदि हम स्वयं अपने धर्म, मन्दिरों और परम्पराओं के प्रति उदासीन रहेंगे, तो उनकी रक्षा कौन करेगा? सनातन केवल पूजा-पद्धति नहीं, यह जीवन-पद्धति है। मन्दिर केवल भवन नहीं, हमारी आस्था, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के केन्द्र हैं। *आज आवश्यकता है कि प्रत्येक हिन्दू संकल्प ले :—* ⚔️ मैं अपने धर्म का ज्ञान प्राप्त करूँगा। ⚔️ मैं अपने मन्दिरों और धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों के प्रति जागरूक रहूँगा। ⚔️ मैं संविधानसम्मत और विधिसम्मत तरीके से अपने अधिकारों की रक्षा करूँगा। ⚔️ मैं सनातन संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का दायित्व निभाऊँगा। *याद रखें :—* "जो अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा नहीं करता, इतिहास उसकी पहचान मिटा देता है।" अतः आइए, *स्वयं से, अभी से, अपने घर से—सनातन रक्षा का यह पावन अभियान प्रारम्भ करें।* ●जय श्रीराम।●जय श्रीकृष्ण।●जय हिन्द। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (115) #10/05/2026 #dineshapna






 

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