Chartered Accountant,Social Activist,Political Analysist-AAP,Spritual Thinker,Founder of Life Management, From India, Since 1987.
Sunday, 7 February 2021
भारत का इतिहास गवाह है ! किन्तु हमें इतिहास से सीखना है ! ●हमने जिस पर विश्वास किया, उनके वंशजों ने ही हमें धोखा दिया ! ●हमने जिसको सम्मान/आदर दिया, उनके वंशजों ने हुकमत/अत्याचार किया ! 【यवन, मुगल, अंग्रेज, कुछ नेता, वर्तमान कुछ वल्लभ कुल, कुछ अधिकारी, कुछ स्वघोषित समाजसेवी】 सद्दू गोविन्द दोऊ खड़े, काको करु सम्मान। बलिहारी सद्दू आपने, गोविन्द दियो बताय।। ★क्या नाथद्वारा बोर्ड के सदस्य भक्त हैं ? क्या ईमानदार हैं ? क्या धनपति व समझदार हैं ? क्या श्रीनाथजी के प्रति समर्पित हैं ? ★ यदि "हाँ" तो फिर उनके कार्य नाथद्वारावासियो के जनहित मे क्यों नहीं ? यदि नाथद्वारा बोर्ड के सदस्यो के कार्य जनहित मे है तो उनके कार्यों का "सामाजिक अंकेक्षण" क्यों नहीं हो ? ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ (1) बोर्ड के सदस्य श्रीनाथजी व पुष्टि संप्रदाय के "भक्त" हैं ! ■ तो फिर "श्रीनाथजी के भक्त" होने के स्थान पर क्यों "श्रीनाथजी की सम्पत्तियों के भक्त" बन रहे हैं ? तथा बोर्ड के सदस्य क्यों नहीं वर्तमान मे श्रीनाथजी की संपत्तियों की रक्षा व सदुपयोग कर रहे हैं ?■ (2) बोर्ड के सदस्य "ईमानदार" है ! ■ तो फिर बोर्ड के सदस्यो द्वारा "कार्यो मे पारदर्शिता" के साथ क्यों नहीं किया जा रहा है ? यदि बोर्ड सदस्य ईमानदारी से कार्य कर रहे हैं, तो मन्दिर मण्डल के कार्यों का "सामाजिक अंकेक्षण" कराने से क्यों डर रहे है ?■ (3) बोर्ड के सदस्य बड़े "धनपति व समझदार" है ? ■तो फिर श्रीनाथजी की जमीनों का "जनहित में उपयोग" क्यों नहीं कर रहे हैं ? जबकि बोर्ड सदस्य अपनी स्वयं की जमीन व धन का उपयोग व कार्य 100% अपने फायदे के लिए करते हैं, इसलिए बोर्ड सदस्य धनपति/समझदार बने !■ (4) बोर्ड के सदस्य श्रीनाथजी के प्रति "समर्पित" है ! ■तो फिर श्रीनाथजी की "संपत्तियों की रक्षा" के प्रति समर्पित क्यों नहीं हो रहे है ? जबकि की श्रीनाथजी की जमीनों को अन्य लोग हड़प रहे है ? तथा नवनिर्माण के नाम पर जमीन व धन का दुरुपयोग हो रहा है !■ 【अब बृजवासियों को जागना होगा ! श्रीनाथजी की साक्षात् आज्ञा का पालन करना होगा !】 【आप वल्लभाचार्य जी बनो, नहीं तो सद्दू पाण्डे तैयार है !】 CA. Dinesh Sanadhya - 07/02/2021 #एक_बृजवासी #dineshapna www.dineshapna.blogspot.com
Saturday, 6 February 2021
श्रीनाथजी व सखा बृजवासी के साथ अन्याय हो रहा है ! क्या "कानून" से ऊपर "श्रीनाथजी की साक्षात् आज्ञा" है ? क्योंकि वल्लभ कुल मे कुछ लोग श्रीनाथजी को छोड़कर माया की ओर अग्रसर हो रहे है तथा कुछ मायापति व माया के दास अधिकारी व नेता भी उनका साथ दे रहे है ! इस हेतु कानून को भी तोड़ मरोड़कर अपने फायदे के लिए उपयोग ले रहे है ! किन्तु हकीकत यह है कि "कानून से भी ऊपर 'श्रीनाथजी की साक्षात् आज्ञा" हैं ! ★श्रीनाथजी ने सर्वप्रथम श्रीसद्दू पाण्डे जी व बृजवासियों को सेवा, पूजा, सुरक्षा व साथ में खेलने की आज्ञा दी ! ★उसके बाद श्रीवल्लभाचार्य जी को पूजा पद्वति, ज्ञान व पुष्टि मार्ग के प्रचार प्रसार की आज्ञा दी ! ★किन्तु बाद मे श्रीवल्लभाचार्य जी के वंशजों ने श्रीनाथजी की आज्ञा पालन कर पुष्टि मार्ग का प्रसार करने के बजाय अपनी सम्पत्तियों का प्रसार करने लग गये, जिसके लिए दोनों हाथों से श्रीनाथजी की सम्पत्तियां लूटा रहे है या लूटते हुए मूक दर्शक बनकर देख रहे है ! ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆【1】◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ ★श्रीनाथजी के सखा / सेवक / वैष्णवो की जिम्मेदारी !★ (१) "श्रीनाथजी का प्राकृट्य से नाथद्वारा आगमन तक" 【263 वर्ष】 (२) "श्रीनाथजी के नाथद्वारा मे आगमन से पुनः नाथद्वारा आगमन तक" 【235 वर्ष】 (३) "श्रीनाथजी के पुनः नाथद्वारा मे पधारने से मन्दिर मण्डल बनने तक" 【52 वर्ष】 (४) "श्रीनाथजी के नाथद्वारा मे मन्दिर मण्डल बनने से आज तक"【61 वर्ष】 ◆◆◆◆◆◆>>>>>>>>>>>>>>>>>>>◆◆◆◆◆◆ (१) "श्रीनाथजी का प्राकृट्य से नाथद्वारा आगमन तक" सन् 1409 (वि.सं 1466) से - (श्रावण शुक्ल पंचमी - नागपंचमी) से सन् 1672 - 20 फरवरी (वि.सं 1729) - (फाल्गुन कृष्ण सप्तमी - शनिवार) 【263 वर्ष】 श्रीनाथजी का प्राकृट्य (उध्व भुजा) सन् 1409 से श्रीवल्लभाचार्य जी के आन्यौर सन् 1506 के समय 97 वर्षों तक श्रीनाथजी की सेवा, पूजा व सुरक्षा की जिम्मेदारी श्रीनाथजी ने श्रीसद्दू पाण्डे जी व बृजवासियों को दी, जिसका निर्वहन बृजवासियों ने पूर्ण रूप व ईमानदारी से किया । इसके बाद श्रीसद्दू पाण्डे जी व बृजवासियों के द्वारा श्रीवल्लभाचार्य जी को श्रीनाथजी से मिलन कराने के बाद श्रीनाथजी ने विधिवत पूजा करने की जिम्मेदारी श्रीवल्लभाचार्य जी को दी । जिस जिम्मेदारी को उन्होंने अन्य व्यक्तियों को सौंपी थी, जिस कारण उसमे समय समय पर परिवर्तन करना पडा । किन्तु तब भी श्रीनाथजी की सेवा व सुरक्षा की जिम्मेदारी बृजवासियों के पास ही थी, जिसे उन्होंने श्रीनाथजी के नाथद्वारा पधारने तक पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी से निभाया तथा सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हुए अपने प्राण तक न्यौछावर किये । (२) "श्रीनाथजी के नाथद्वारा मे आगमन से पुनः नाथद्वारा आगमन तक" (सन् 1672 - 20 फरवरी (वि.सं 1729) - (फाल्गुन कृष्ण सप्तमी - शनिवार) से सन् 1907 (वि.सं. 1964) 【235 वर्ष】 श्रीनाथजी के नाथद्वारा आगमन पर मेवाड़ के महारणा जी ने सुरक्षा व संरक्षण की स्वयं जिम्मेदारी ली । इस प्रकार श्रीनाथजी के नाथद्वारा आगमन के पश्चात श्रीनाथजी की सेवा व सुरक्षा मे बृजवासियों के साथ मेवाड़ के महाराणा जी व उनके सभी साथियों की जिम्मेदारी हो गई, जिसे उन सभी ने पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी से निभाया । सन् 1778 (वि.स. 1835) में अजमेर मेरवाड़ा के मेरो ने मेवाड पर भयानक आक्रमण किया तथा नृशंस हत्याएं करना प्रारंभ कर दिया। इधर पिंडारियों ने नाथद्वारा में घुसकर लूट खसोट की और धन-जन को हानि पहुँचाई। सन् 1801 (वि.स. 1858) में दौलतराव सिन्धिया से पराजित होकर जसवन्तराव होल्कर यत्र तत्र भटकता हुआ मेवाड़ भूमि के समीप आ गया। परन्तु सिन्धिया की सेना उसे खोजती हुई नाथद्वारा आ पहुँची । इन सभी आक्रमणों का बृजवासियों व कोठारिया व आसपास के रावलो के राजपूतों व सैनिकों ने सामना किया व रक्षा की । उस दौरान कुछ समय के लिए श्रीनाथजी उदयपुर व घसियार पधारे । इसके बाद शान्ति होने पर सन् 1907 (वि.सं. 1964) में प्रभु श्रीनाथजी दलबल सहित अनेक भक्तों को साथ लेकर युद्ध भूमि हल्दीघाटी के अरण्य मार्ग को पारकर खमनोर होते हुए पुनः नाथद्वारा पधारे । (३) "श्रीनाथजी के पुनः नाथद्वारा मे पधारने से मन्दिर मण्डल बनने तक" सन् 1907 (वि.सं. 1964) से सन् 1959 (वि.सं. 2016) 【52 वर्ष】 इस दौरान कोई बाहरी आक्रमण नहीं हुए तथा नाथद्वारा मे शान्ति का समय था । इस समय बाहरी आक्रमण का भय नहीं था, किन्तु आन्तरिक आक्रमण शुरू हो गये थे । बृजवासियों के सेवा व सुरक्षा के अधिकारो मे वल्लभ कुल द्वारा कमी करना शुरू कर दिया । श्रीनाथजी की सम्पत्तियो / धन का दुरुपयोग व अपव्यय करना शुरू हो गया । इसलिए बृजवासियों, मेवाड़वासीयों के विरोध करने पर सरकार द्वारा सन् 1959 को नाथद्वारा मन्दिर मण्डल का गठन करना पडा । किन्तु इसमें सरकार ने मन्दिर मण्डल के सदस्यों के चयन का अधिकार गलत तरीकों से दे दिया, जिसमें बृजवासियों को उनके नैसर्गिक अधिकारो से वंचित कर दिया गया । (४) "श्रीनाथजी के नाथद्वारा मे मन्दिर मण्डल बनने से आज तक" सन् 1959 (वि.सं. 2016) से सन् 2020 (वि.सं. 2077)【61 वर्ष】 इस काल मे बृजवासियों व मेवाड़ के महाराणा जी के सुरक्षा के सम्पूर्ण अधिकार नाथद्वारा मन्दिर मण्डल के हाथों मे आ गये व उसमें भी बोर्ड के सदस्यों के चयन का अधिकार वल्लभ कुल के हाथों मे ले लिया । इसमे अधिकार केवल महाराजश्री के हाथो मे है जो उन्होंने केवल अपने चहेते वैष्णवों को दे दिये । अब यदि श्रीनाथजी की सम्पत्तियो / धन का दुरुपयोग व अपव्यय होता है तो इसकी पूर्ण जिम्मेदारी मन्दिर मण्डल सदस्यों की संयुक्त व पृथक रुप से होती है । इस दौरान भी श्रीनाथजी की सम्पत्तियो / धन का दुरुपयोग व अपव्यय हो रहा है । अतः इसे रोकने की अत्यधिक आवश्यकता है । क्योंकि श्रीनाथजी स्वयं ने बृजवासियों को सेवा, पूजा व सुरक्षा का अधिकार दिया, जिसे छिनने का किसी को भी अधिकार नहीं है । यदि कोई बृजवासियों के अधिकारो को छिनता है, तो यह संविधान, धर्म, परम्पराओं व श्रीनाथजी की आज्ञा का उल्लंघन है । ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆【2】◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ ★★श्रीनाथजी के सखा ब्रजवासियों को श्रीनाथजी से दूर करने की 348 वर्षों से साजिश ? कौन जिम्मेदार ?★★ ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ (1) 611 वर्षो से ( 1409 से 2020 तक ) बृजवासी श्रीनाथ जी की सेवा व सुरक्षा कर रहे है, किंतु आज उन्हें सेवा व सुरक्षा के निर्णय लेने के अधिकार से दूर क्यों रखा जा रहा है ? (2) 97 वर्षो तक ( 1409 से 1506 तक ) केवल बृजवासीयो ने ही श्रीनाथजी की सेवा व सुरक्षा कर रहे थे ! इसके बाद सन् 1506 में श्री वल्लभाचार्य जी पधारे,( 27 वर्ष की आयु मे ) तब से उन्होंने श्रीनाथ जी की पूजा शुरू की, जो आज तक उनके वंशजों द्वारा पूजा व अन्य जारी है ! (3) 514 वर्षो से ( 1506 से 2020 तक ) श्री वल्लभाचार्य जी ने श्रीनाथजी की पूजा सर्वप्रथम चौहान व बाद में बंगाली ब्राह्मणों तथा अन्य लोगों को करने का अधिकार दिया तथा सेवा व सुरक्षा का जिम्मा बृज वासियों को दिया ! (4) 13 वर्षों में ( 1506 से 1519 ) श्री वल्लभाचार्य जी के पधारने ब्रज मे पधारने व वहाँ श्रीनाथजी के नए मंदिर में पाटोत्सव करने व सेवा का क्रम निश्चित करने के बाद, आप मधुबन पधार गए ! (40 वर्ष की आयु में) (5) 12 वर्षो तक ( 1519 से 1531 तक ) श्री वल्लभाचार्य जी ने अपना समय पुष्टिमार्ग के लिए साहित्य सर्जन में लगा दिया ! ( 52 वर्ष की आयु तक ) (6) 489 वर्ष तक ( 1531 से 2020 तक ) श्री वल्लभाचार्य जी के बाद उनके वंशजों व पुजारियों को उनके द्वारा स्थापित सेवाक्रम व परंपरा के अनुसार ही कार्य करना था तथा ब्रजवासियों को सेवा व सुरक्षा तथा उस सम्बन्धित निर्णय का अधिकार था ! इसके लिए बृजवासीयो ने अपना जीवन व संपत्ति के भी त्याग करने मे पिछे नहीं रहे, तो भी उनसे निर्णय लेने का अधिकार छिन लिया ! (7) 348 वर्ष से ( 1672 से 2020 तक ) नाथद्वारा पधारने के बाद कालान्तर मे धीरे धीरे पूजा करने वाले श्रीनाथजी के नाम पर उनकी संपत्ति पर भी अपना अधिकार जमाने लग गये, जबकि वल्लभाचार्य जी ने (संसार की प्रवृत्ति) माया से दूर रहने के लिए सन् 1531 मे अपने अन्तिम उपदेश मे कहा था ! वर्तमान मे सम्मानीय ने सच्चे , सेवाभावी व सखा ब्रजवासियों को धीरे-धीरे श्रीनाथजी से दूर कर दिया गया ! (8) 61 वर्ष पूर्व ( 1959 से ) श्रीनाथजी की पूजा करने वालों ने हद ही पार कर दी, जिस कारण सरकार को मजबूरी मे टेम्पल बोर्ड का गठन करना पड़ा, किन्तु यहाँ भी श्रीनाथजी के सखा बृजवासीयो को बोडँ सदस्य बनने से दूर रखा गया ! तथा गलत करने वालों व जिनका नाथद्वारा से कोई लेना-देना नहीं है, उनको बोर्ड सदस्य बनाया गया ! इसके बाद जिन बोडँ सदस्यों को सुरक्षा की जिम्मेदारी दी, वह लोग श्रीनाथजी की संपत्ति की रक्षा करना तो दूर श्रीजी प्रसाद की शुद्धता मे कमी लाकर अन्याय कर रहे हैं ! ऐसे व्यक्तियों को निर्णय का अधिकार देना कहाँ तक उचित है ? (9) 04 माह से ( 3.10.2019 में ) कुछ बृजवासीयो ने श्रीनाथजी की संपत्ति के सदुपयोग व सुरक्षा के लिए बोर्ड द्वारा जो निर्णय लिए गए, उसका स्पष्टीकरण व सामाजिक अंकेक्षण करने के लिए कहा, तो बोडँ मेम्बर्स सामाजिक अंकेक्षण के नाम पर चुप क्यों ? क्या बोर्ड सदस्यों का मन्दिर के प्रति कोई कर्तव्य नहीं है ? CA. Dinesh Sanadhya - 06/02/2021 सीए. दिनेश सनाढ्य - एक बृजवासी www.dineshapna.blogspot.com #dineshapna Nathdwara, nathdwara live, nathdwara news, nathdwara darshan, shrinathji, shrinathji mandir, nathdwara mandir,
Friday, 5 February 2021
★हिन्दू मन्दिरों मे सरकारी हस्तक्षेप संविधान विरुद्ध क्यों ?★ ★श्रीराम मन्दिर के ट्रस्ट व श्रीकृष्ण मन्दिर (नाथद्वारा मन्दिर मण्डल) के ट्रस्ट मे अन्तर क्यों ? ★ क्योंकि अभी बीजेपी है, पहले कांग्रेस थी ! किन्तु अब आम आदमी जागरूक है ! (अर्थात् हम समझ गये है कि केवल हिन्दू मन्दिरों मे सरकारी हस्तक्षेप करना, संविधान की प्रस्तावना /कानून के विरुद्ध है) ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ (i) श्रीराम मन्दिर :- (ट्रस्ट मे) ★आज श्रीराम मन्दिर ट्रस्ट मे जिन्होंने सेवा व सुरक्षा हेतु संघर्ष किया, उनको ट्रस्टी बनाया गया ! ★जिन्होंने नुकसान पहुंचाया, उनको दूर रखा गया ! (ii) श्रीनाथजी मन्दिर :- (मन्दिर मण्डल मे) ★611 वर्षों से (1409 से 2020) श्रीनाथजी की सेवा व सुरक्षा बृजवासी कर रहे है, फिर भी ट्रस्ट मे स्थान क्यों नहीं दिया गया ? ★61 वर्ष पूर्व (1959 मे) ट्रस्ट मे उनको स्थान दिया जो प्रभाव/दबाव मे है व जिनसे मण्डल की सम्पत्ति सुरक्षा संदिग्ध है ! तो भी उनको मन्दिर मण्डल से दूर रखने के बजाय शामिल क्यों किया गया ? (iii) किन्तु अब आम आदमी जागरूक है ! :- ★भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है क्या ?★ नाथद्वारा मन्दिर मण्डल संविधान विरुद्ध है क्या ? धर्मनिरपेक्षता का मतलब है कि ◆धर्म का सरकार मे हस्तक्षेप न हो ! ◆धर्म व राष्ट्र अलग - अलग रहे ! ◆कानून सभी धर्मों के लोगों के लिए समान हो ! (१) भारत मे हिन्दू, मुसलमान व ईसाई के लिए अलग - अलग कानून है ! (२) सरकार का मन्दिरों पर नियन्त्रण है, किन्तु मस्जिद व चर्च पर कोई नियंत्रण नहीं है ! (३) अल्पसंख्यक व बहुसंख्यक समुदायों के लिए अलग - अलग कानून है ! (४) सरकार द्वारा हज यात्रा पर अनुदान दिया जाता है, किन्तु अमरनाथ यात्रा पर नहीं दिया जाता है ! इन चार बिन्दुओं से स्पष्ट है कि भारत के संविधान की प्रस्तावना मे उल्लेखित "धर्मनिरपेक्षता" की पालना सरकार द्वारा नहीं की गई है ! अतः स्पष्ट है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र नहीं है ! या सरकार ही खुले तौर पर संविधान का उल्लंघन कर रही है ! नाथद्वारा मन्दिर मण्डल का गठन भी सरकार द्वारा कानून पारित करके श्रीनाथजी मन्दिर पर नियंत्रण स्थापित किया व इसके बोर्ड सदस्यों का निर्णय सरकार द्वारा लेना ! यह स्पष्ट करता है कि सरकार द्वारा धर्म मे हस्तक्षेप करके संविधान का खुला उल्लंघन किया है व कर रही है ! https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2798324847077964&id=2108340926076363 सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी - एक बृजवासी एक बृजवासी - 05/02/2021 #dineshapna
Thursday, 4 February 2021
किसान आन्दोलन की सच्चाई ! किसान/सरकार/विपक्ष/देशविरोधी ! किसान व सरकार समझ नहीं रही है कि विपक्ष व देश विरोधी ताकतें इसका अनुचित फायदा उठा रही है ! ★किसान को :- कानून रद्द कराने के जिद्द करने के बजाय परिवर्तन या नया विकल्प (नया कानून) सामने रखना चाहिए ! ★सरकार को :- कानून डेढ़ साल होल्ड पर रखने के बजाय अनिश्चित समय तक होल्ड रखकर वार्ता द्वारा समाधान निकालना चाहिए ! ★विपक्ष को :- कानून रद्द की माँग करने के बजाय संसद मे बहस करे या कानून मे संशोधन बताये ! सोचे ! जब आप सरकार मे आयेंगे तब जनता तुम्हारे बनाये कानून को रद्द की माँग करेगी ! तब क्या ? ★देश विरोधी ताकतों को :- केवल चुप रहना चाहिए ! या जेल जाने को तैयार रहना चाहिए ! सीए. दिनेश सनाढ्य - 05/02/2021 #dineshapna
Wednesday, 3 February 2021
★★श्रीनाथजी प्राकृट्य से नाथद्वारा आगमन★★ ★★"जीवन्त पुष्टि मार्ग" से "ज्ञान पुष्टि मार्ग" ★★ ●●●●●●●●●●●●●【१】●●●●●●●●●●●●● "श्रीनाथजी का प्राकृट्य, प्रथम दर्शन व सेवा" - श्रीसद्दू पाण्डे जी द्वारा !(सन् 1478 - वि.सं 1535) "श्रीनाथजी से महाप्रभु जी का प्रथम मिलन" - श्रीवल्लभाचार्य जी का !(सन् 1506 - वि.सं 1563) ◆◆>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>◆◆ ◆सन् 1409 (वि.सं 1466) - (श्रावण शुक्ल पंचमी - नागपंचमी) श्रीनाथजी का प्राकृट्य (उध्व भुजा) । (श्रीसद्दू पाण्डे (सनाढ्य) के दादाजी जयदेव जी पाण्डे द्वारा "प्रथम दर्शन" व बृजवासीयो द्वारा "प्रथम सेवा" कार्य) ◆सन् 1441 (वि.सं 1498) - महाप्रिय श्री सद्दू पाण्डे जी का प्राकृट्य । ◆सन् 1478 (वि.सं 1535) - (वैशाख कृष्ण एकादशी) बालस्वरूप मे श्रीनाथजी स्वयं साक्षात् प्रकट होकर श्रीसद्दू पाण्डे को सेवा का अधिकार दिया व श्रीवल्लभाचार्य जी का प्राकृट्य । (श्रीनाथजी के उध्व भुजा प्राकृट्य के 69 वर्ष बाद श्रीवल्लभाचार्य जी का प्राकृट्य) ◆सन् 1506 (वि.सं 1563) श्रीवल्लभाचार्य जी का श्रीसद्दू पाण्डे जी के घर आन्यौर पदार्पण व श्रीनाथजी से प्रथम मिलन श्रीसद्दू पाण्डे जी के द्वारा । (97 वर्षों तक श्रीसद्दू पाण्डे, उनके परिवार व बृजवासीयो के द्वारा श्रीनाथजी की सेवा व पूजा की ।) (श्रीवल्लभाचार्य जी 28 वर्ष की उम्र मे बृज मे पधारे व श्रीनाथजी से प्रथम मिलन हुआ ।) ◆सन् 1519 (वि.सं 1576) - (वैशाख शुक्ल तीज - अक्षय तृतीया) श्रीनाथजी का जतिपुरा मन्दिर मे पाटोत्सव । (13 वर्षों मे श्रीनाथजी का जतिपुरा मे नया मन्दिर बना ।) ◆सन् 1530 (वि.सं 1587) - (आषाढ़ शुक्ल तीज, रविवार) श्रीवल्लभाचार्य जी का देवलोक गमन । (52 वर्ष की उम्र मे ) ◆सन् 1534 (वि.सं 1591) - श्रीसद्दू पाण्डे जी का देवलोक गमन । (93 वर्ष की उम्र मे ) ◆सन् 1665 (वि.सं 1722) - (आश्विन शुक्ल १५, शुक्रवार) श्रीनाथजी का बृज से प्रस्थान । (श्रीनाथजी 256 वर्ष तक बृज मे विराजे) ◆सन् 1672 - 20 फरवरी (वि.सं 1729) - (फाल्गुन कृष्ण सप्तमी - शनिवार) श्रीनाथजी का नाथद्वारा मन्दिर मे पाटोत्सव । (श्रीनाथजी को बृज से मेवाड़ पधारने मे 32 माह का समय लगा) ●●●●●●●●●●●●●●【२】●●●●●●●●●●●●● ★★"जीवन्त पुष्टि मार्ग" से "ज्ञान पुष्टि मार्ग" ★★ ■श्रीवल्लभाचार्य जी का "ज्ञान पुष्टि मार्ग" (भक्ति मार्ग) सन् 1506 से (514 वर्षों से) V/S ■बृजवासियों का "जीवन्त पुष्टि मार्ग" (प्रेम मार्ग) सन् 1409 से (611 वर्षों से) (5132 वर्ष पूर्व भी) ●●>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>●● ■श्रीवल्लभाचार्य जी के अनुसार पुष्टिमार्ग :- (सन् 1506 से ......514 वर्षों से) तीन 【3】 महत्त्वपूर्ण बिन्दु :- (१)भक्त स्वयं अपने आराध्य के समक्ष "आत्मसमर्पण" करता है ! (२)भगवान के "अनुग्रह" से भक्ति उत्पन्न होती है , उसे पुष्टि भक्ति कहते है ! (३)ऐसा भक्त भगवान के "स्वरूप दर्शन" के अतिरिक्त और अन्य किसी वस्तु के लिए प्रार्थना नहीं करता है ! ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● पुष्टि मार्ग = 【आत्मसमर्पण, अनुग्रह, स्वरूप दर्शन 】 ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ●श्रीवल्लभाचार्य जी ने पुष्टि मार्ग को जो ज्ञान रुप मे आम जन व वैष्णवों के लिए सरल भक्ति मार्ग के रूप मे बताया गया, उसका मूल भावना बृजवासीयो से ली गई । क्योंकि बृजवासी आज से 5132 वर्ष पूर्व श्रीकृष्ण के मानव रुप मे अवतार के समय से जीया था । उस समय बृजवासियों ने श्रीकृष्ण के समक्ष ◆"आत्मसमर्पण" किया, तब उन्हें श्रीकृष्ण का ◆"अनुग्रह" प्राप्त हुआ था । उस समय बृजवासियों ने श्रीकृष्ण के ◆"स्वरूप दर्शन" के अतिरिक्त कोई प्रार्थना या ईच्छा नहीं की । ●जब बृजवासियों ने हजारों वर्षों तक श्रीकृष्ण से निस्वार्थ प्रेम किया व प्रतिफल मे कुछ भी नहीं माँगा गया तो श्रीकृष्ण ने पुनः बृजवासियों के लिए "प्रतिमा" रुप मे सन् 1409 मे अवतार लिया ! इसका मूल कारण बृजवासियों का निस्वार्थ "प्रेम मार्ग" ही है । ●इस अवतार मे श्रीकृष्ण को श्रीनाथजी के नाम से जाना गया । बृजवासियों के प्रेम मार्ग (जीवन्त पुष्टि मार्ग) को जन जन तक पहुंचाने के लिए श्रीनाथजी ने श्रीवल्लभाचार्य जी को आज्ञा दी की बृजवासियों के प्रेम मार्ग (जीवन्त पुष्टि मार्ग) को शब्दों व ज्ञान रुप मे परिभाषित करें, जो आगे चलकर "पुष्टि मार्ग" कहलाया । ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ■बृजवासियों के अनुसार निस्वार्थ प्रेम मार्ग (जीवन्त पुष्टि मार्ग) :- (सन् 1409 से .........611 वर्षों से) (१)भक्त स्वयं अपने आराध्य के समक्ष "आत्मसमर्पण" करता है ! 【【जब भक्त (बृजवासी) को प्रथम बार आराध्य की ऊध्र्व भुजा के दर्शन होते ही "आत्मसमर्पण" किया, इससे भी पूर्व भक्त (बृजवासी) की गाय ने भी आत्मसमर्पण अपने दूध का किया ! उसके बाद जैसे ही बृजवासियों ने स्वतः "आत्मसमर्पण" किया !】】 (२)भगवान के "अनुग्रह" से भक्ति उत्पन्न होती है , उसे पुष्टि भक्ति कहते है ! 【【उसके बाद "भगवान श्रीकृष्ण ने अनुग्रह" किया, तो बृजवासियों मे भक्ति उत्पन्न हुई जो अनवरत रुप से 97 वर्षों तक (श्रीवल्लभाचार्य जी के जतिपुरा पधारने के पूर्व तक) जारी थी, तथा जो आजतक (611 वर्षो तक) विद्दमान है व आगे भी रहेगा !】】 (३)ऐसा भक्त भगवान के "स्वरूप दर्शन" के अतिरिक्त और अन्य किसी वस्तु के लिए प्रार्थना नहीं करता है ! 【【 बृजवासी श्रीनाथजी के प्राकृट्य सन् 1409 से सन् 1506 श्रीवल्लभाचार्य जी के पधारने से पूर्व 97 वर्ष तक केवल "स्वरूप दर्शन" के अतिरिक्त और अन्य किसी वस्तु के लिए प्रार्थना नहीं की !】】 दिनेश सनाढ्य - एक बृजवासी - 03/02/2021 - 26/11/2020 - 18/11/2020 #देव_उठनी_एकादशी #संविधान_दिवस #बहादुरी_दिवस #स्थापना_दिवस #dineshapna Nathdwara, nathdwara live, nathdwara news, nathdwara darshan, shrinathji, shrinathji mandir, nathdwara mandir, श्रीनाथजी, श्रीनाथजी दर्शन, श्रीनाथजी प्राकृट्य, श्रीनाथद्वारा,
Tuesday, 2 February 2021
★श्रीनाथजी व श्रीवल्लभाचार्य जी दोनो का प्राकृट्य वि.सं. 1535 को गोवर्धन पर्वत,मथुरा व चम्पारण, बिहार मे हुआ ! ★श्रीनाथजी के प्राकृट्य के समय श्री सद्दू पाण्डे जी की उम्र 37 वर्ष की थी ! ★श्रीवल्लभाचार्य जी ने प्रथम बार श्रीनाथजी के दर्शन किये, उस समय श्रीनाथजी के प्राकृट्य को 28 वर्ष हो चुके थे ! ★श्रीसद्दू पाण्डे व बृजवासियों ने ही श्रीवल्लभाचार्य जी को श्रीनाथजी से वि.सं. 1563 को मिलन कराया ! ★श्रीनाथजी ने सर्वप्रथम अपने सखा बृजवासियों व श्रीसद्दू पाण्डे जी से दूध व अन्य सेवा ली ! ★उसके बाद श्रीपूरणमल खत्री सेवक को आर्थिक सेवा का अवसर दिया ! ★अन्त मे श्रीवल्लभाचार्य जी को पूजा व सेवा पद्वति शुरू करने की आज्ञा दी ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक बृजवासी - 02/02/2021 #dineshapna
★श्रीनाथजी ने सद्दू पाण्डे जी व बृजवासियों को "सखा" के रुप मे सभी सेवा करने की आज्ञा की थी ! ★श्रीनाथजी ने पूरणमल खत्री जी को "सेवक" के रूप मे आर्थिक सेवा करने की आज्ञा दी थी ! ★श्रीनाथजी ने वल्लभाचार्य जी को "सेवक" रुप मे पूजा व ज्ञान सेवा करने की आज्ञा दी थी ! अतः उनके वंशजों को उसी अनुसार ही सेवा करनी चाहिए ! तथा एक दूसरे के सेवा कार्यों मे अवरोध पैदा नहीं करना चाहिए ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक बृजवासी - 02/02/2021 #dineshapna
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