Monday, 16 December 2024

★कड़वा है, परन्तु सच है !★ ■ I.N.D.I.A. गठबंधन ही INDIA के विरोध मे संविधान विरुद्ध कार्य कर रहा है ! ■ (१) कांग्रेस ही बोल रही है कि संविधान खतरे मे है, किन्तु हकीकत मे कांग्रेस ने ही संविधान की मूल भावनाओं के विरुद्ध "संविधान संशोधन" किये, "संविधान विरुद्ध कानून" बनाये ! और अब "उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे" वाला कार्य कर रही हो ! (२) कांग्रेस से टूटे कांग्रेस के अंशों (तूणमूल / राष्ट्रवादी / अन्य) ने मिलकर I.N.D.I.A. गठबंधन बनाया, जो कांग्रेस की मूल भावनाओं के अनुरूप संविधान विरुद्ध कार्य (एक समुदाय विशेष के पक्ष मे) करके संविधान का अपमान कर रहे है ! (३) 2012 मे बनी पार्टी (आप) ने भी सत्ता सुख के लिए "आम आदमी" की बातेँ करके संविधान विरुद्ध कार्य (एक समुदाय विशेष के पक्ष मे) करके संविधान का अपमान कर रहे है ! (४) I.N.D.I.A. गठबंधन की इतनी पार्टियों को संविधान विरुद्ध कार्य करते हुए देखकर "मुस्लिम लीग" भी पीछे क्यों रहे ? इसलिए वह भी "हिन्दुओं के विरोध मे" खुलकर बोलकर संविधान विरुद्ध कार्य कर रही है, जो गलत है ! 【I.N.D.I.A. गठबंधन क्या संविधान विरुद्ध कार्य करके "हिन्दू - मुस्लिम एकता" व "संविधान के लिए खतरा" है ?】 ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(214) #17/12/24 #dineshapna








 

Sunday, 8 December 2024

★कड़वा है, परन्तु सच है !★ 【धर्म रक्षा = धर्म संरक्षण + अधर्म का नाश】 (१) लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर ने "सेवा कार्य" को ही धर्म माना और जनहित के कई कार्य किये ! हमें भी नाथद्वारा मन्दिर को "सरकारी नियंत्रण से मुक्ति" दिलाकर "सेवा कार्य" करना चाहिए और यह सेवा ही हमारा धर्म है ! (२) नाथद्वारा मे हुई विशाल धर्म सभा के मंचस्थ अतिथियों का धन्यवाद ! उनसे निवेदन है कि नाथद्वारा मन्दिर पर सरकारी नियंत्रण होने से नगरपालिका मन्दिर की "जमीन लूट" रही है, अतः मन्दिर की लूटी हुई जमीन पुनः मन्दिर को दिलाने का प्रयास किया जाना चाहिए ! (३) नाथद्वारा मे हुई विशाल धर्म सभा के मंचस्थ अतिथियों का धन्यवाद ! उनसे निवेदन है कि नाथद्वारा मन्दिर पर सरकारी नियंत्रण होने से मन्दिर के "धन को लूटा / दुरुपयोग" किया जा रहा है ! इस मन्दिर के धन की लूट / दुरुपयोग को तुरन्त रोका जाना चाहिए ! (४) नाथद्वारा मन्दिर को "सरकारी नियंत्रण से मुक्ति" का अभियान एक बृजवासी के द्वारा शुरू किया व जनता का भी समर्थन मिल रहा है ! नाथद्वारा मे हुई विशाल धर्म सभा के मंचस्थ अतिथियों से धर्म रक्षार्थ सहयोग की अपेक्षा है ! 【नाथद्वारा मे मन्दिर के धन व जमीन की लूट / दुरुपयोग ही "अधर्म" है ! अतः नाथद्वारा मन्दिर "सरकारी नियंत्रण से मुक्त" हो !】 ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(213) #09/12/24 #dineshapna






 

★कड़वा है, परन्तु सच है !★ 【संविधान को हाथ मे लेने के साथ, उसे पढ़ें व समझे !】 (१) आप संविधान को हाथ मे लेकर जनता को बताने के साथ यह पढ़कर भी बताये कि इसमे हिन्दुओं व सनातन के विरुद्ध कौन कौन से संविधानिक प्रावधान है ? (२) आप व आपका परिवार अपने आपको हिन्दू / सनातनी बता रहा है तो यह बताये कि आपके परिवार ने कितने व कौन कौनसे संविधान विरुद्ध व हिन्दुओं के खिलाफ कानून बनाये ? (३) संविधान को बचाने के लिए आप बाते कर रहे है तो कृपया इसे पढ़कर यह बताये की आपके परिवार ने इसमें जो परिवर्तन किये, उससे हिन्दुओं व सनातनियों को कितना नुकसान हुआ है ? (४) आपके परिवार / कांग्रेस ने संविधान की प्रस्तावना मे "धर्मनिरपेक्षता" शब्द जोड़ा है, अच्छी बात है ! तब क्या "धर्मनिरपेक्षता" के विरुद्ध बने संविधानिक प्रावधानों व कानूनों को क्यों नहीं हटाये ? ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(212) #08/12/24 #dineshapna




 

Thursday, 5 December 2024

★सक्षम, समृद्ध व वैज्ञानिक सनातन धर्म होने के बावजूद ऐसी दुर्दशा कुछ सनातनियों व विधर्मियों के कारण !★ (१) सर्वप्रथम कुछ सनातनियों के द्वारा गलत बनाये गये ◆संविधान की मूल भावनाओं के विपरीत संविधानिक प्रावधानों को बदले ! ◆संविधान विरुद्ध 30 काले कानून जो सनातन (हिन्दू) विरोधी है, उन्हें बदले ! ◆हिन्दू मन्दिरों को सरकारी नियन्त्रण से मुक्त करावे ! (२) कुछ सनातनियों के द्वारा पैदा किये ◆जातिवाद के जहर व भेदभाव को समाप्त करे ! ◆"सक्षम लोग" (राजा/नेता/मठाधीश/धर्म के ठेकेदार) व "आम जनता" सनातन के लिए एकजुट रहे, भाईचारा रखे व अन्य किसी के साथ मिलकर सनातन को नुकसान नहीं पहुँचाये ! क्योंकि इसकी मूल जड़ "सक्षम लोगों" के द्वारा किया जा रहा "अनीति व अन्याय" ही है ! (३) वर्तमान सभी सनातनी मिलकर इन "कन्वर्टेड मुसलमान" व "कन्वर्टेड ईसाई" को अपने पूर्वजों की ओर लोटाकर उन्हें मन व कर्म से पुनः सनातन (प्रेम/दया/भाईचारा/परोपकार/विश्व बन्धुत्व) की ओर लौटाये ! इसके लिए सामाजिक, राजनैतिक व संवैधानिक स्तर पर शीघ्र व ठोस कार्य हो ! (i) भारत में "कन्वर्टेड मुसलमान" है :- ●कुल मुसलमान : 22 करोड़ (2024 अनुमान) ●कन्वर्टेड मुसलमान : 17.60 - 19.80 करोड़ (80 - 90%) (ii) भारत में "कन्वर्टेड ईसाई" है :- ●कुल ईसाई : 3 करोड़ (2024 अनुमान) ●कन्वर्टेड ईसाई : 2.40 - 2.70 करोड़ (80 - 90%) (४) हम सनातनियों ने ही सनातन धर्म को नुकसान पहुँचाया है तो उसे सुधारने की जिम्मेदारी भी हमारी है ! इसके लिए हम प्रत्येक सनातनियों को व्यक्तिगत व सामुहिक स्तर पर आज से ही ●कार्य करने की आवश्यकता है और जो भी सनातन के लिए कार्य कर रहा है उसे ●सहयोग करना होगा ! हम से अलग हुए ●कन्वटेड को उनके पूर्वजों से मिलाना होगा ! हमें किसी भी स्थिति मे ●एकजुट रहना होगा व सनातन को ही सर्वश्रेष्ठ मानते हुए कार्य करना होगा ! 【★【मैने सनातन के लिए "नाथद्वारा मन्दिर को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति" का कार्य शुरू कर दिया है, आपका सहयोग अपेक्षित है !】★】 ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(211) #05/12/24 #dineshapna


 

Wednesday, 4 December 2024

★सक्षम, समृद्ध व वैज्ञानिक सनातन धर्म होने के बावजूद संविधानिक प्रावधान व कानून इसके विरुद्ध क्यों ?★ (१) लोकतंत्र मे बहुमत से निर्णय होते है तो भी बहुसंख्यकों के विरुद्ध "संविधानिक प्रावधान" बनाये गये ! ◆संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तक धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की गई है, किन्तु सनातनीयो (हिन्दुओं) को नहीं ! ◆संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 के तहत धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी शैक्षणिक संस्थाएं स्थापित करने और उनका प्रबंधन करने का अधिकार है, किन्तु बहुसंख्यकों (हिन्दुओं) को नहीं ! ◆भारतीय संविधान की प्रस्तावना में "धर्मनिरपेक्ष" (Secular) शब्द 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से जोड़ा गया था, जो बहुसंख्यकों (हिन्दुओं) के विरुद्ध ! (२) भारतीय संविधान के तहत सभी कानूनों को संविधान के साथ संगत होना चाहिए, लेकिन समय-समय पर "कुछ कानूनों" को संविधान के मूल सिद्धांतों जैसे समानता, स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ माना जाता है। जो सनातनियों (हिन्दुओं) के विरुद्ध है ! ◆हिन्दू धार्मिक ट्रस्ट और चैरिटेबल एन्ड रिलीफ एक्ट (HR&CE Act) 1951 ◆मध्य प्रदेश सार्वजनिक धार्मिक ट्रस्ट अधिनियम, 1951 (Madhya Pradesh Public Trust Act, 1951) ◆राजस्थान पब्लिक ट्रस्ट एक्ट, 1959 (Rajasthan Public Trust Act, 1959) ◆राजस्थान देवस्थान नियम, 1973 (Rajasthan Devasthan Rules, 1973) ◆"प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991" ◆वक्फ अधिनियम, 1954 (Waqf Act, 1954) व बाद में संशोधित कर वक्फ अधिनियम, 1995 ◆नाथद्वारा मन्दिर मण्डल एक्ट, 1959 ◆तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 (Tamil Nadu Hindu Religious and Charitable Endowments Act, 1959) ◆मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरिया कानून), 1937 ◆कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1997 (Karnataka Hindu Religious Institutions and Charitable Endowments Act, 1997) ◆श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद अधिनियम, 2019 ◆उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम, 2019 (Uttarakhand Char Dham Devasthanam Management Act, 2019) ◆श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड अधिनियम, 1986 (Shri Mata Vaishno Devi Shrine Board Act, 1986) ◆आंध्र प्रदेश धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1987 (Andhra Pradesh Charitable and Hindu Religious Institutions and Endowments Act, 1987) ◆श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड अधिनियम, 2000 (३) सनातन धर्म का केन्द्र है हिंदू मंदिर ! इसलिए उन पर विशेष कानून बनाकर "सरकारी नियंत्रण" किया गया, जबकि अन्य धर्मों (जैसे मस्जिदों और चर्चों) के धार्मिक स्थलों पर यह नियंत्रण नहीं है ! जो अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 26 का उल्लंघन है ! हिन्दू मन्दिरों पर सरकारी नियंत्रण होने से ◆आय का दुरुपयोग ! ◆जमीन व सम्पत्तियों की लूट ! ◆प्रबंधन में धार्मिक समुदाय की भागीदारी मे कमी ! ◆पारदर्शिता की कमी व भ्रष्टाचार मे वृद्धि ! (४) सनातन धर्म के विरुद्ध संविधानिक प्रावधान व कानून बनाने के लिए "जिम्मेदार" है - ◆डर या लालच से बदले सनातनी ! ◆सक्षम व स्वार्थी सनातनी ! ◆सेकुलर व डरपोक सनातनी ! ◆कुछ मठाधीश व धर्म के ठेकेदार ! ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(210) #04/12/24 #dineshapna


 

Tuesday, 3 December 2024

★सक्षम, समृद्ध व वैज्ञानिक सनातन धर्म होने के बावजूद सनातन से धर्म परिवर्तन क्यों ?★ (१) सनातन धर्म में ●जाति व्यवस्था का कठोर रूप से पालन, भेदभाव और छुआछूत ने समाज के निचले तबके को हतोत्साहित किया ! कई बार इन वर्गों को समानता और सम्मान पाने के लिए अन्य धर्मों की ओर आकर्षित होना पड़ा, जैसे बौद्ध धर्म, इस्लाम और ईसाई धर्म ! ●आर्थिक और शैक्षिक असमानता के कारण गरीब और अशिक्षित वर्ग को अन्य धर्मों ने आर्थिक सहायता, शिक्षा और चिकित्सा सुविधा देकर अपनी ओर खींचा ! सनातन धर्म के अनुयायी कई बार इन वर्गों की मदद करने में असमर्थ रहे ! ●सनातन धर्म मे अपने रूढ़िवादी विचारों को सुधारने में देरी की, जैसे कि महिलाओं और दलितों के प्रति भेदभाव ! (२) धर्मगुरुओं और नेतृत्व की कमी के कारण ●सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में समय पर नेतृत्व और सुधार का अभाव रहा ! धर्म को अधिक समावेशी बनाने की कोशिशें देर से शुरू हुईं। ●अज्ञानता और आध्यात्मिक ज्ञान का अभाव के कारण सनातन धर्म के गूढ़ सिद्धांतों और वेदों-उपनिषदों की शिक्षा को जन-जन तक नहीं पहुँचाया गया ! इसके विपरीत, अन्य धर्मों ने सरल और सुलभ तरीके से अपने सिद्धांतों का प्रचार किया ! (३) धार्मिक कट्टरता और आक्रामक धर्मांतरण के कारण ऐतिहासिक रूप से, (★धन से, ★बल से व ★धोखे से) इस्लामी आक्रमणों और ब्रिटिश शासन के दौरान जबरन धर्म परिवर्तन के कई उदाहरण मिलते हैं ! मिशनरियों द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के माध्यम से ईसाई धर्म का प्रचार भी धर्मांतरण का बड़ा कारण बना ! (४) सनातन से धर्म परिवर्तन रोकने के लिए (★आम जनता को व ★नेतृत्वकर्ताओ को) ●जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव समाप्त करना ! ●समाज के कमजोर वर्गों की सेवा और उन्हें समान अधिकार देना ! ●धर्मगुरुओ के नेतृत्व को सक्रिय और प्रगतिशील बनाना ! ●सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों को सरल भाषा में प्रचारित करना ! ●आध्यात्मिकता और विज्ञान के बीच संतुलन बनाकर युवाओं को धर्म से जोड़ना ! ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(209) #03/12/24 #dineshapna


 

Monday, 2 December 2024

★सनातन धर्म सक्षम, समृद्ध व वैज्ञानिक होने के बावजूद हम गुलाम क्यों रहे ?★ (१) कुछ सनातनी लोगों (आम / जनता) की गलतियों, कमजोरियों और परिस्थितियों के कारण हम गुलाम रहे ! ★आंतरिक विघटन - जाति-व्यवस्था का कठोर रूप, भेदभाव, और समाज में एकता की कमी ने हमें कमजोर किया ! ★सामूहिक उदासीनता - धर्म के गहन सिद्धांतों को समझने और उनका पालन करने के बजाय, कई लोगों ने केवल रूढ़ियों का पालन किया ! (२) कुछ सनातनी लोगों (खास / राजा) की गलतियों के कारण हम गुलाम रहे ! ★सामरिक दुर्बलता - सनातन धर्म के अनुयायी आत्मज्ञान और आध्यात्मिकता पर अधिक ध्यान केंद्रित करते रहे, जबकि कई बार सैन्य और राजनीतिक कौशल में पिछड़ गए ! हमारे पास महान योद्धा और राजा तो थे, लेकिन कई बार रणनीतिक एकता की कमी रही ! ★बाहरी आक्रमण - अरब, तुर्क, मुगल, और ब्रिटिश जैसे आक्रमणकारियों ने हमारी कमजोरियों का लाभ उठाया ! उन्होंने न केवल हमारे भौतिक संसाधनों को लूटा, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को भी नुकसान पहुंचाया ! ★विदेशी षड्यंत्र और धोखा - बाहरी शक्तियों ने हमारे समाज को विभाजित करने के लिए षड्यंत्र रचे और उनकी ‘फूट डालो और राज करो’ नीति ने हमें और कमजोर किया ! (३) सनातन धर्म की कमजोरी नहीं है, बल्कि इसे सही रूप से समझने और लागू करने की आवश्यकता है ! ■ एकता और समरसता बढ़ानी होगी ! ■ आधुनिक विज्ञान और सैन्य कौशल में पारंगत होना होगा ! (४) सनातन धर्म अपनाने के साथ आत्मसात भी करे ! ■ धर्म के गहन और वैज्ञानिक पक्ष को समझकर रूढ़ियों से बचना होगा ! ■ संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करते हुए उनमें समयानुकूल सुधार करना होगा ! ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(208) #02/12/24 #dineshapna