Tuesday, 21 November 2017

पद्मावती “फिल्म पर रोक” व भंसाली पर “मेवाड़ द्रोह”का केस हो ! ★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★ मनोरंजन एवं विचारो के स्वतंत्रता के नाम पर भारतीय संस्कृति , इतिहास एवं परम्पराओ को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है ! पहले भी जोधा अकबर , बाजीराव मस्तानी, रामलीला जैसी फिल्मे बनाकर दुष्कृत किया था जिसको सेंसर बोर्ड एवं सरकार का समर्थन रहा ! इस पद्मावती फिल्म के द्वारा हिन्दू संस्कृति , मेवाड़ गौरव , नारी के प्रतिष्ठा एवं इतिहास के साथ खिलवाड़ करने का पुन: प्रयास किया जा रहा है किन्तु अब मेवाड़ी एवं हिदुस्तानी चुप बैठने वाले नही है ! हम अपने देश एवं धर्म के लिया प्राण दे सकते है तो इस रक्त से लिखे पत्र के माध्यम से भंसाली को यह सन्देश देना चाहते हैं की हम मेवाड़ी कुछ भी कर सकते हैं ! प्रधानमंत्री जी से अनुरोध किया है कि इस “ फिल्म को तुरंत रोका जाये ” तथा भंसाली के विरुद्ध “ मेवाड़ द्रोह ” का मुकदमा चलाकर कठोर कार्यवाही की जाये । मेवाड़ जब मुग़लों व अंग्रेज़ों का गुलाम नहीं रहा, तो भंसाली व बॉलीवुड क्या चीज है ? मेवाड़ की जनता श्री एकलिंगनाथ, श्रीनाथ जी,श्री द्वारकाधीश जी व श्री चारभुजा जी की शपथ के साथ यह “रक्तपत्र” आपको “शांति संदेश” के रूप में प्रेषित कर रहे हैं ! यह खून से लिखा प्रधानमंत्री के नाम अपना राजसमंद के दिनेश सनाढ्य, कोठारिया के वीरेंद्र सिंह चौहान,राजसमंद मेडिकेयर सिविल सोसाइटी के रविनंदन चारण, दुर्गेश यादव, मुकेश खींची, देवेंद्र दास वैष्णव, बंसी लाल टेलर व देवनारायण ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया । www.dineshapna.blogspot.in = 21.11.2017 Nathdwara,Rajsamand, (Mewar) Rajasthan, (INDIA)






Sunday, 19 November 2017

नाथद्वारा प्रभारी एडवोकेट भरत पालीवाल के द्वारा सीए. दिनेश सनाढ्य के मार्गदर्शन मे नगर कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से सुरेश कुमार गुर्जर को संरक्षक, राजेन्द्र रेही को अध्यक्ष, गोपाल सनाढ्य को उपाध्यक्ष, अशोक त्रिपाठी को महामन्त्री, मुरली वर्मा को मन्त्री, शान्ति लाल कोठारी को कोषाध्यक्ष, गौरव जैन व कृष्ण कान्त शर्मा को मिडिया प्रभारी व भावेश पालीवाल, कुणाल सांचिहर को सदस्य का गठन शनिवार 18.11.2017 को किया ! दिनेश सनाढ्य ने कहा कि ★आम आदमी की आवाज को मजबूती व सच्चे लोकतन्त्र की स्थापना को बल मिलेगा । यहाँ की ★मुख्य समस्या • सफाई, • पार्किग, • वैष्णवो को असुविधाएँ, • नगर पालिका द्वारा अनावश्यक निर्माण खर्च, • भ्रष्टाचार, • अतिक्रमण को बढावा देना आदी है । हम आपके सहयोग से आम आदमी की समस्याओ के समाधान का प्रयास करेगे !











Thursday, 16 November 2017

★★ सौ बात की एक बात :: जौहर बने ज्वाला ! ★★ ◆यहाँ केवल “फिल्म” का “विरोध” ही नहीं, ……………………… ◆हमारी संस्कृति, इतिहास व परम्पराओं को नष्ट करने का “दुस्साहस” है । ………………………………………….. ◆यह किसी भी कीमत पर “बर्दाश्त नहीं” है । …………………… (१.) भारतीय संस्कृति को नष्ट करने वालों को क्यों नहीं रोका जा रहा है ? (२.) भारतीय इतिहास के साथ बार-बार क्यों बर्बाद किया जा रहा है ? (३.) हिन्दू व हिन्दू परम्पराओं को तोड़ने वालों को क्यों नहीं रोका जा रहा है ? ★@ क्यों कुछ हिन्दू ही “ हिंदुस्तान के दुश्मन” बन रहे है ? ★@ क्यों कुछ हिन्दू ही “पैसे, पद व प्रतिष्ठा” के लिए हिंदुस्तान को दांव पर लगा रहे हैं ? {1} हम भारतीय (हिन्दू व अन्य धर्म) हमारी संस्कृति, इतिहास व परम्पराओं को पैसे, पद व प्रतिष्ठा के लिए बर्बाद नहीं होने देंगे ! {2} हम भारतीय (जनता, अभिनेता, सिनेमाघर , दर्शक, नेता व सरकार) प्रतिज्ञा करें कि जोधा अकबर, बाजीराव मस्तानी, रामलीला व पद्मावती जैसी फिल्म $ न बनाये ! $ न सेंसर बोर्ड से स्वीकृत करें ! $ न देखें ! {3} हम भारतीय (आम जनता) ऐसी फिल्मों का सर्व सम्मति से “सार्वजानिक बहिष्कार” कर “एकता” का परिचय देवें ! CA. Dinesh Sanadhya “APNA” www.dineshapna.blogspot.in



Tuesday, 14 November 2017

★हम दो शब्द के कारण 1236 वर्ष तक गुलाम रहे ! - "एकता" व "देशप्रेम" ★हम दो शब्द के कारण 1236 वर्ष से कमजोर रहे ! - "सहनशीलता" व "दयालुता" ★हम दो शब्द को 1236 वर्ष मे भी नही पहचान पाये ! - "गद्दार" व "अहंकार" ★हम दो शब्द को 70 वर्ष मे भी नही समझ सके ! - "फूट डालना" व "झूठा आश्वासन" ★हम दो शब्द को 70 वर्ष मे भी दूर नही कर सके ! - "गरीबी" व "भ्रष्टाचार" ★हम दो शब्द से 70 वर्ष से परेशान हो रहे है ! - "जातिवाद" व "वंशवाद" ★हम दो शब्द को 100% आत्मसात करे ! - "प्रेम सभी से" व "अधर्म का नाश"


★★भारत की गुलामी (1236 साल की)★★ ★★【सन् 711 से 1947 तक 】 ★★ हम भारत की आज़ादी का इतिहास तो बहुत सुनते सुनाते हैं पर कुछ करी जाये अपनी नाकामयाबियों को भी जानने की और भारत की आज़ादी के साथ-साथ भारत की गुलामी को भी जानने की| हम सभी भारतवासी जानते हैं की भारत की आज़ादी का जश्न मनाया जाता है १५ अगस्त को क्युकी इसी दिन १९४७ को भारत को आज़ादी मिली थी अंगरेजों से अंगरेजो के २०० सालों की गुलामी से| पर एक बहुत बड़ा सवाल उठता है अगर हम भारत के इतिहास को देखें तो की क्या भारत केवल अंगरेजो का ही गुलाम था? क्या भारत में कोई और विदेशी नहीं आए कभी? क्या उन्होंने राज नहीं किया जैसे अंगरेजों ने किया? क्या है भारत की गुलामी का इतिहास? क्यूँ अधूरी है हमारी १५ अगस्त को मिली आज़ादी? भारत में हुए अब तक के अतिक्रमण: १. सबसे पहले क्राइस्ट से ३२६ साल पहले अलेक्जेंडर ने आक्रमण किया और भारत में १९ महीनो तक रहा और ये भारत की धरती पर सबसे पहला विदेशी आक्रमण था| २. इसके बाद दौर आया मुग़ल आतताइयों का जिनका उद्देश्य इस्लाम को भारत में फ़ैलाने के साथ-साथ भारत के दुसरे देशों के साथ हो रहे व्यापार (ज्ञात रहे की भारत शुरू से सोने की चिड़िया और व्यापार का मुख्या केंद्र मन जाता रहा है) पर एकाधिकार जमाना भी शामिल था| इसी उद्देश्य को लेकर साल ६३६-३७ में खलीफा उमर ने समुद्री रास्ते से भारत के पश्चिमी तट ठाणे के पास त्रौम्बे पर आक्रमण किया| पर यहाँ उसे हार का सामना करना पड़ा| अब समुद्री रास्ते से मिली हार के चलते मुग़ल सेना ने साल ६४४ में जमीनी रास्ते से आक्रमण किया मकरान के तरफ से पर यहाँ भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा| पर भारत के दुर्भाग्य के चलते साल ७११ में मुग़ल मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व में जित गए भारत में| साल ७११ में इन मुगलों की सोच थी की सीरिया, पालेस्तिन, इजिप्ट और परसिया की सुखी धरती को जितने से इस्लाम को तो फैला दिया पर यहाँ क्यादा कुछ फ़ायदा नहीं होने वाला| और तब इन्होने इस्लाम को फ़ैलाने और व्यापार पर एकाधिकार या भारत के बहुमुखी व्यापार और सोने की चिड़िया को छिनने के लिए मुगलों ने भारत के ऊपर आक्रमण करने चालू किये| इस प्रकरण में इन्होने सबसे पहले सिंध को अपने कब्जे में लिया| पर आठवीं शताब्दी तक भारत के और भाग तक में इस्लाम को मानने वाले मुगलों का आतंक नहीं फ़ैल पाया| अब इस समय में मुगलों ने क्या किया वो देखते हैं जरा| >. मुग़ल जानकारों ने हिन्दू जानकारों से भारत की सभ्यता और संस्कृति को जानना चालू किये| >. संस्कृत में लिखे कितने ही खगोलीय, ज्योतिष, गणित, चिकित्सा पद्धति इत्यादि को अरबी में अनुवाद कराया गया| साथ ही प्रभाव ज़माने के लिए कुछ अरब के कार्यों को भी संस्कृत में अनुवाद कराया गया| >. मुगलों ने १-९ तक की संख्या को भारतीयों से सिखा| >. शतरंज जैसा खेल भी मुगलों ने हम भारतीयों से सिखा| >. भारतीय डाक्टरों को अरब के हॉस्पिटल में इलाज करवाने के लिए ले जाया गया| >. साथ ही सिंध में इस्लाम को सबसे बड़ा धर्म स्थापित कर दिया गया| पर ये मुग़ल यहीं नहीं रुके| ये तो मात्र एक शुरुवात थी| आगे चल कर इनका असली और विकृत चेहरा सामने आना शुरू हुआ| ३. इसके बाद बारी आया टर्किस मुहम्मद गजनी का| गजनी अफगानिस्तान का गामिनी वंश का शासक था| इसने भारत पर आक्रमण यहाँ राज करने के लिए नहीं परन्तु भारत की सम्पदा को लूटने के इरादे से आया था| और इसी इरादे के चलते गजनी नामक आतताई ने भारत साल १००० से १०२७ के दौरान पर १७ बार अपने कुत्सित विचारों से प्रभावित हो जिहाद के नाम पर आक्रमण किया| गजनी ने साल १००१-१००८ के मध्य राजा जयपाल और राजा आनंदपाल को हराया, १००९ में नागरकोट, १०१४ थानेसर, १०१५ कश्मीर, १०१८-१९ मथुरा और कन्नौज, १०२१ कालिंजर, १०२३ लाहोर| और सबसे भयानक आक्रमण रहा इसका साल १०२५ का सोमनाथ मंदिर का आक्रमण जिसमे गजनी ने ना केवल उस मंदिर को लूटा| पर यहाँ एक और घटना घटी की जब ये मंदिर से लुटे धन को ले जा रहा था अपने साथ तो जाट राजपूतों ने गजनी पर आक्रमण किया और फलस्वरूप गजनी ने साल १०२६ में सत्रहवीं और अंतिम बार सोमनाथ पर आक्रमण किया और सोमनाथ मंदिर को लूटने के साथ-साथ उस मंदिर को पूरी तरह नेस्तोनाबुत कर दिया| ३० अप्रैल १०३० को गजनी की मौत हुई पर उसके बेटे मसूद ने भारत पर आक्रमण किया और कश्मीर पर अपना अधिकार जमा लिया| ४. मुहम्मद गोरी की बारी आई इनके बाद| मोहम्मद गोरी ने अपने भाई गिसुद्दीन के साथ मिल कर ११७५ और १२०६ के मध्य भारत पर आक्रमण किया| सबसे पहले गोरी ने ११७५ में भारत पर आक्रमण कर मुल्तान पर कब्ज़ा किया, फिर ११८६ में लाहोर| फिर उसने अपने भाई की मौत के बाद इसने अपने राज्य को फैलाना चालू किया और आज की मौजूदा किताबो में पढाये जा रहे पाठो के आधार पर इसने कन्नौज के राजा जयचंद को ११९३ में हराया बल्कि सच्चाई में जयचंद की सहायता से इसने राजा पृथ्वी राज चौहान को हराया और ११९४ में गद्दार जयचंद को भी हरा उसे मौत के घाट उतर दिया था गोरी ने| क्या कारन था जयचंद को मारने का गोरी का क्युकी जयचंद ने तो गोरी का साथ दिया था एक मुस्लिम शासक का साथ पृथ्वी राज चौहान के खिलाफ? कारन साफ है की गोरी और सभी जानते हैं की जो अपने लोगों का और सबसे पहले अपने धर्म का नहीं हुआ वो किसी और का क्या होगा और इसी के चलते जयचंद को मरना पड़ा| पर आज तो पता नहीं कितने जयचंद हो गए हैं इनका क्या हस्र होगा ये तो हम केवल सोच सकते हैं| चलिए छोडिये इन बातों को हम आगे बढ़ते हैं| इसके बाद गौरी ने १२०६ में मरने और उसके पहले अपने लौटने तक में गंगा और घाघरा के दोवाब के साथ-साथ बंगाल तक पर अपना साम्राज्य स्थापित कर गया| और इसके साथ उसने अपने एक गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक को वहां का शासक बना गया जिसे आगे चल कुतुबुद्दीन ऐबक ने गुलाम वंश की स्थापना की भारत में| मोहम्मद गोरी के उपरांत निम्नांकित शासन काल रहा: गुलाम शासन .......... १२०६-१२९० खिलजी शासन .......... १२९०-१३२० तुघ्लक शासन ...... १३२०-१४१२ सैयद शासन ........ १४१४-१४५१ लोदी शासन ..........१४५१-१५२६ ५. अब आयी मुग़ल साम्राज्य का बारी| मुग़ल असल में तुर्क थे| पहला मुग़ल शासक था बाबर जो की तुर्किस और चंगेज का मिश्रित रूप था| बाबर १५२६-१५३०, हुमायूँ १५३०-१५४० और १५५५-१५५६, अकबर १५५६-१६०५, जहाँगीर १६०५-१६२७, शाहजहाँ १६२८-१६५८, औरंगजेब १६५८-१७०७, बहादुर शाह १७०७-१७१२, जहानदार शाह १७१२-१७१३, फुर्रुख्सियर १७१३-१७१९, रफ़ी-उद-दराज १७१९-१७१९, रफ़ी-उद-दौलत १७१९-१७१९, निकुसियर १७१९-१७४३, मोहम्मद इब्राहीम १७२०-१७४४, मोहम्मद शाह १७१९-१७२०, १७२०-१७४८, अहमद शाह बहादुर १७४८-१७५४, आलमगीर II १७५४-१७५९, शाह जहाँ III १७५९-१७५९, शाह आलम II १७५९-१८०६, अकबर शाह II १८०६-१८३७, बहादुर शाह II १८३७-१८५७. बाबर की लड़ाई सबसे बड़ी लड़ाई राजा राणा सांगा के साथ हुई जिसमे बाबर जीत गया और इस जीत के चलते भारत में मुग़ल साम्राज्य की स्थापना हुई और इस लड़ाई को बाबर ने "जिहाद" की संज्ञा दी थी| पहली ही लड़ाई में बाबर ने दिल्ली और आगरा को जीत लिया जिसे बाबर ने अपने लड़ाको और तोपों के वजह से जीती और साथ ही और राज्यों को जीतता गया और मुग़ल साम्राज्य को फैलता गया| पर जब बाबर की मौत हुई और हुमायूँ गद्दी पर बैठा तब शेर शाह सूरी जो की एक अफगानी था ने हुमायूँ को हराया और भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया| भारत छोड़ हुमायूँ अपनी शक्तियां बटोरने में लगा ताकि फिर से भारत में अपना राज्य स्थापित किया जाये और हुमायूँ ने ऐसा किया भी पर ज्यादा समय राज नहीं कही कर पाया और सीढियों से गिरने के वजह से मारा गया| हुमायूँ के मरने के बाद उसके १३ साल के लड़के अकबर को गद्दी पर बैठाया गया| यहाँ से शुरू हुआ असली मुग़ल साम्राज्य भारत में| क्युकी अकबर ने यहाँ चलें चलनी शुरू करी जो कमोबेश आज भी चल रही हैं पर कोई मानाने को तैयार नहीं| अकबर अपने लोगों को लड़ाई से बचाना चाहता था क्युकी उस समय राजपूत और साथ और राजा मुगलों को उखाड़ने में लगे हुए थे इस वजह से वो रिश्ते मजबूत करने के नाम पर और भाईचारा बढ़ने के नाम पर राजपूत लड़कियों से शादी के प्रस्ताव भेजने लगा साथ ही उन राज्यों को अपने में मिलाने लगा| पर इसी देश में महा राणा प्रताप जैसे लोग भी थे जिन्होंने उसके आगे झुकना तो मंजूर नहीं किया पर हल्दी घटी की लड़ाई लड़ी और उस लड़ाई को देख खुद अकबर भी एक बार को डर गया था पर एक काम तो हमेसा से आया इन मुगलों को की कैसे लोगो को अपने से जोड़े बहले झूट बोल कर (ज्ञात हो की इस्लाम में झूट बोलना मना है पर ये हमेसा से झूट बोलते आये जिसे ये खुद ताकैयाह का नाम देते हैं)| इसी के सहारे जब अकबर को लगा वो हर जायेगा तो इसने महा राणा प्रताप के कुछ सहयोगियों को अपने में मिला लिया और इसके चलते महा राणा प्रताप को हार का मुंह देखना पड़ा| अकबर ने यहाँ तक की उन राज्यों को भी नहीं छोड़ा जहाँ औरत थी गद्दी पर| ऐसी ही एक महा रानी थीं चाँद बीबी जो अकबर के साथ हुई लड़ाई नहीं जीत सकीं और १५९६ में उनके राज्य अहमदनगर को मुग़ल राज्य में मिला लिया गया| ऐसा कहा जाता है या कहें तो ऐसा हमें पढाया जाता है की अकबर हिन्दुवों को ले कर बहुत उदार था| पर इसी अकबर ने २४ फरवरी १५६८ को ३०,००० बंदी बनाये गए राजपूतों को मौत के घाट के उतरवा दिया| ये शायद एक दिन में दी गई सबसे बड़ी मृत्यु दंड की सजा होगी जिसमे इतने लोग मरे| इस सामूहिक हत्याकांड को "अब्दुल फजल" नामक अकबर का इतिहासकार दरबारी ने लिखा है| अकबर ने दिन-इ-इलाही नमक धर्म को भारत का धर्म बनाया| ज्ञात रहे की इस्लाम में आप इस्लाम के अलावा कुछ नहीं छोड़ सकते हैं फिर अकबर ने तो इस्लाम के बदले ही एक नया धर्म बना दिया था तो इसके क्या कहेंगे और इसको क्या कहा जाता है आज ये तो शायद सभी जानते होंगे| अकबर की मृत्यु के उपरांत उसका पुत्र मोहम्मद सलीम जिसे हम जहाँगीर नाम से भी जानते हैं वो बैठा दिल्ली की गद्दी पर| पर जहाँगीर अपनी बीबी नूर जहाँ के इश्क में ही फ़ना रहता था और इसके साथ-साथ अपने राज्य का कार्यभार भी एक तरह से उसने अपनी पत्नी के कंधो पर छोड़ रखा था| जहाँगीर ने भी बहुत सी लड़ियाँ लड़ीं पर अकबर जैसा कुतनितिग्य नहीं हुआ| इसके बाद आया शाह जहाँ जो अपने पिता सामान ही हुश्न का दीवाना था अपनी बेगम मुमताज़ महल का| इसने पोर्तगीज से कई लड़ियाँ लड़ीं साथ ही ये अहमदनगर का राज्य बीजापुर के शासक के साथ साँझा रूप में चलता था| और जब इसने देखा की परेसनियाँ ज्यादा बढ़ रही हैं तो इसने अपने आपको राज-पाट से अलग कर लिया और तभी इसका बेटा औरंगजेब सुल्तान बना और उसने मानवता की सारी हदें तोड़ दिन| औरंगजेब ने अपने भाइयों को मारा गद्दी के लिए वो तो किया ही साथ ही अपने बूढ़े बाप शाह जहाँ को आगरा के किले में कैद खाने में डाल दिया और कैद खाने में ही शाह जहाँ की ताज महल देखते हुए मौत हुई| अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है की जो इन्सान सुल्तान बनने के लिए अपने बूढ़े बाप को तिल-तिल कर मरने के लिए अँधेरी काल कोठरी में बंद सकता है वो और लोगों और दुसरे धर्मो को मानने वालों के साथ कैसे पेश आता होगा| औरग्जेब के ज़माने में सबसे ज्यादा मंदिरों को तोडा गया, मूर्तियों को विखंडित किया गया और मुजुदा बहुत से मंदिरों को तोड़ मस्जिद बनाया गया| इसकी गन्दी निगाह यहाँ तक की पूरी के मंदिर तक पर पड़ी थी पर कैसे भी करके उस मंदिर को उसमे राखी प्रतिमा बचाया गया| ये अलग बात रही की सबसे ज्यादा बार बंद होने वाला और सबसे ज्यादा समय तक बंद रहने वाला मंदिर बना पूरी का मंदिर| औरंगजेब ने १६७९ में हिन्दुवों पर जाजिया लगाया| इसी दौरान इसने सिखों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर सिंह जी को मौत के घाट उतारा| और इन सारी घटनाओं ने राजपूतो, सिखों और जाटों में एक विद्रोह फैला दिया और इन लोगो ने अलग मोर्चा खोल लिया औरंगजेब के खिलाफ| कुछ समय तक तो औरंगजेब लड़ता रहा पर बाद में उसने राजपूतों के साथ संधि कर ली जिसे वो बार-बार तोड़ता रहा और जिस वजह से मथुरा के आस पास के जात उसके मरने के समय तक उसे परेसान करते रहे| औरंगजेब को सबसे ज्यादा परेशानी रही वीर छत्रपति शिवाजी से| और औरंगजेब मराठों को काबू में नहीं कर पाया अपने जीवन पर्यंत| इन्ही सबके बिच में साल १६०० में ही सर थोमस रॉय के भारत आगमन के समय व्यापार की अनुमति मिल चुकी थी तत्कालीन मुग़ल शासक के द्वारा| और १६१६ में मुसलिपत्तम में अंगरेजो को पहली फैक्ट्री डालने की अनुमति मिली थी| पर अभी भी भारत पर मुगलों का शासन चल ही रहा था पर बहादुर शाह I के १७१२ में मौत के बाद कोई अच्छा मुग़ल शासक न होने के चलते मुग़ल शासक मोहम्मद शाह के शासनकाल में भारत ने नादिर शाह और उसके सिपहसलार अहमद शाह अब्दाली नामक मुगलों का भारत पर आक्रमण झेला| और इस तरह मुग़ल साम्राज्य शांत हुआ| क्युकी उस समय अंगरेजी ताकतें भी पनपने लगी थीं और इन मुगलों के अलग-अलग जगह पर बिठाये इनके भरोसेमंद सिपहसलार भी अब उन जगहों को अपना बनने में लगे थे| इसी बिच एक और शासक हुए टीपू सुल्तान जिनका नाम भारत में बड़े अदब से लिया जाता है पर कितने लोग जानते हैं की यही वो टीपू सुल्तान थे जिन्होंने १७५०-१७९९) तक राज किया पर इनका एक फतवा निकला हुआ था की सामूहिक धर्म परिवर्तन का| ये हिन्दुवों को मुसलमान बना देना चाहते थे| जिसे इतिहासकारों ने या तो दबा दिया या आज उन बातों को सामने नहीं लाया जाता है| और हमें आधी-अधूरी जानकारी दी जाती है हमारे देश के इतिहास के बारे में| मुग़ल साम्राज्य का मकसद: जितने भी मुग़ल शासक हुए भारत में या जो भी आतताई आये उनका मकसद था भारत की अतुल्य सम्पदा और धन-वैभव को लूटना और इसके साथ-साथ धीरे-धीरे और एक प्रभावपूर्ण तरीके से भारत से हिंदुत्व को मिटा इस्लाम और इस्लामिक सभ्यता को स्थापित करना| मुगलों ने बहुत कोशिस करी हमारे भारत की सभ्यता, भाषा और शिक्षा पद्धति (जैसे नालंदा विश्वविद्यालय को मटियामेट करना) को ख़तम करने की| मुगलों ने भारत के कई जगहों के मंदिरों को तोडा जैसे सोमनाथ, मथुरा, बनारस, अयोध्या, कन्नौज, थानेस्वर और इत्यादि इत्यादि| मंदिरों के पुजारियों और पजा करने वालों का सामूहिक हत्या किया गया| औरतों को मुग़ल अपने साथ अरब ले गए जहाँ उनके साथ पता नहीं कितनी ही यातनाएं दी गई होंगी और पता नहीं कितने हाथों हमारे देश की हिन्दू औरतों को बेचा गया| कारण हिन्दुवों के हार का: १. भारत के शासकों में एकता नहीं थी बल्कि ये मुग़ल पूरी तरह एकता के साथ रहते थे| (आज भी स्थिति वैसी ही है और हिन्दू बँटा हुआ है पर ये मुस्लिम एक हैं हमारे खिलाफ) २. भारतीय हमेसा से सीधे-साधे रहे और किसी और देश पर आक्रमण नहीं करते थे इस लिए इनकी सेनाएं अपने आस-पास के लोगों से रक्षा के अनुरूप ही सुसज्जित थीं जबकि मुग़ल आतताई और आक्रमणकारी होने के कारन हमेसा अपनी रणनीति और सेना को आगे बढ़ाते गए| अब सवाल है की हम आजाद हुए केवल अंगरेजों से केवल पर मुगलों ने भी तो भारत को गुलाम बनाया था| मुगलों से आज़ादी मिली क्या भारत को? क्या हमारा फर्ज नहीं बनता है की हम भारत माँ को पूरी तरह से आजाद कराएँ? क्या हमारी भुजाओं में पानी भर गया है? या हमारी आत्मा मर चुकी है? या खुद हम मर चुके हैं और देखना नहीं चाहते हैं की क्या है हमारी असलियत और क्या है हमारे देश का इतिहास? आज भी समय-समय पर आज के मुग़ल अपनी असलियत दिखा जाते हैं| क्या हमारे अन्दर का इन्सान मर चूका है? क्या हम अपने दुसरे बन्धुवों की परेशानी को अपनी परेशानी समझ नहीं खड़े हो सकते हैं? हम क्यूँ हमारे ऊपर पड़ने की बाट जोहते हैं? क्या जब एक-एक हिन्दू के ऊपर अत्याचार होगा तभी हिन्दू जागेगा? बन्धुवों तब तक इतनी देर चुकी जैसे की ६३६ में हुई थी| "जागो और अपने देश के इतिहास को जान एक बनो और आज़ादी की सोचो"


Monday, 13 November 2017

★★ज्ञान हमेशा आपके साथ★★ || Saffron e-Library || यह eLibrary है, इसमें कई सौ अमूल्य ग्रंथों के PDF हैं, ताकि यह ज्यादा से ज्यादा लोगों के काम आ सकें, देश धर्म संबंधी अमूल्य पुस्तकें इन लिंक में संग्रहीत हैं, आप विषय देखकर लिंक खोलें तो बहुत सी पुस्तकें मिलेंगी, सभी पुस्तकें आप निशुल्क download कर सकते हैं, इन लिंक्स की किताबें दो साल में अलग अलग स्त्रोतों से इकट्ठी की गईं हैं, अपनी पसंद की किताबें पढ़ें और शेयर करें... Aadi Shankaracharya - आद्य शंकराचार्य :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRallkZ0VIWnRPVjA Sri Aurobindo - श्री अरविंदो :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRSWktaVFPa2tSa2s Swami Dayananda - स्वामी दयानंद :- https://drive.google.com/folder/d/0B1giLrdkKjfRZnUxOEpPSVBHVzQ/edit Swami Vivekanand - स्वामी विवेकानन्द :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRMFAtTi1yUFAzdW8 Swami Shivanand - स्वामी शिवानंद :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRYXJDclQwYTBfWFk Swami Ramteerth - स्वामी रामतीर्थ :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRNGlYZzhqTEQtcU0 Sitaram Goel - सीताराम गोयल :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRT19aT3pnZ0tvODA Veer Savarkar - वीर सावरकर :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRbE0wQng5YVZmb1E P.N.Oak - पी.एन. ओक :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRRUVTTHpHVGhMVmM हिन्दू, राष्ट्र:- https://drive.google.com/folder/d/0B1giLrdkKjfRNW1scHdGMHQzZ0U/edit Basic Hinduism - https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRTXdpN29OTUQ0Q3c Hindutva and India :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRNzh0MXhyRVpiVEE Islam Postmortem - इस्लाम की जांच पड़ताल :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRdjB2R1VNTTk2Q3M Christianity Postmortem - बाइबिल पर पैनी दृष्टि :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRcHJfRnFkRGFQcFk Autobiography - आत्मकथाएं :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRbEpPUGcydTZlWDQ धर्म एवं आध्यात्म - https://drive.google.com/folder/d/0B1giLrdkKjfRRzViUEdGMnI2Smc/edit यज्ञ Yajna - https://drive.google.com/folder/d/0B1giLrdkKjfRUThPYWlldEd6NVE/edit Brahmcharya - ब्रह्मचर्य :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRNzJmbWpSYmg5bjQ Yog - योग :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRcWZ1NzBoWER2Tkk Upanishad - उपनिषद :- https://drive.google.com/folder/d/0B1giLrdkKjfRNDJiQVFDbVFjbGc/edit Geeta - श्रीमद्भगवद्गीता :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRWk9KVno2V3NNLXM Manusmriti - मनुस्मृति :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRTXlYQUJhUXNWM00 Valmeeki and Kamba Ramayan - वाल्मीकि व कम्ब रामायण :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRa18yTE5EM1Z3Zk0 Puran - पुराण :- https://drive.google.com/open?id=0B1giLrdkKjfRZnB1NnBCblVoUm8 Books on Vedas - वेदों पर किताबें :- https://drive.google.com/folder/d/0B1giLrdkKjfRSU9OVzBfbENTcDg/edit Maharshi Dayananda - महर्षि दयानंद :- https://drive.google.com/folder/d/0B1giLrdkKjfRN2RzYVdFZWI1a0U/edit -------------Complete commentaries on Veda - सम्पूर्ण वेद भाष्य -------- RigVeda - ऋग्वेद सम्पूर्ण - https://drive.google.com/folder/d/0B1giLrdkKjfROXl0b3B0RFpkWEE/edit YajurVeda - यजुर्वेद सम्पूर्ण - https://drive.google.com/folder/d/0B1giLrdkKjfRby02cXFWbnQ2b2M/edit SamaVeda - सामवेद सम्पूर्ण - https://drive.google.com/folder/d/0B1giLrdkKjfRNnh4ZG5PdUJ2bkU/edit AtharvaVeda - अथर्ववेद सम्पूर्ण - https://drive.google.com/folder/d/0B1giLrdkKjfRMFFXcU9waVl4aDQ/edit 🙏🙏



Tuesday, 7 November 2017

★★आम आदमी "8 नवम्बर" को "स्वेत दिवस" मनाये !★★ ◆बीजेपी "नोटबन्दी" पर "काला धन विरोधी दिवस" के रुप मे मना रही है । ●●●●●●●● #आम आदमी का कहना है कि एक साल मे जितने लोगो का काला धन बैक मे जमा हुआ है तथा बीजेपी नेताओ का कितना पैसा जमा हुआ है उसका "स्वेत पत्र" 08.11.2017 को जारी करे ! उसके बाद "काला धन विरोधी दिवस" मनाये ! ◆कांग्रेस "नोटबन्दी" पर "काला दिवस" मना रही है । ●●●●●●● #आम आदमी का कहना है कि एक साल मे आपके नेताओ ने कितना धन बैक मे जमा कराया व खर्च किया है उसका "स्वेत पत्र" 08.11.2017 को जारी करे! उसके बाद "काला दिवस"मनाये ! ★सबसे पहले दोनो पार्टी के सभी नेता अपनी आय, स्त्रोत व सम्पति पर "स्वेत पत्र" जारीकरे ! ★सभी सरकारी अधिकारी अपनी सम्पति पर "स्वेत पत्र" जारी करे ! ★सभी एक करोड़ रु. से अधिक वाले आयकरदाता अपनी सम्पति पर "स्वेत पत्र" जारी करे ! ★सभी भ्रष्टाचार के आरोपियो की आय व सम्पति पर "स्वेत पत्र" जारी करे ! ●●●● आम आदमी का स्वेत पत्र ●●●● CA.Dinesh - 07.11.2017