Friday, 28 November 2025

★ *“नवसीए का स्वर्णिम पथ”* ★ *सपनों की धरती पर आज, संघर्ष का ताज सजा,* अनगिनत राते जागकर, तुमने इतिहास नया रचा। दस्तखत तुम्हारे अब विश्वास का प्रतीक बनेंगे, *सत्य–निष्ठा, ईमानदारी से हर दायित्व तुम चुनेंगे।* कानून, नियम, विधि–व्यवस्था का सम्मान तुम्हारी शान, *भारतीय अर्थनीति में तुमसे बढ़ेगा देश का मान।* ज्ञान की दीपशिखा लेकर आगे बढ़ते रहना, *सीखने का यह संकल्प, जीवनभर तुमने गहना।* *समाज के प्रति सेवा को भी अपने मन में बसाना,* एक सही सलाह से किसी का भविष्य तुम संवारना। *सफलता की यह मंज़िल कोई अंतिम पड़ाव नहीं,* यह तो शुरुआत है, आगे का नक़्शा साफ़ नहीं। *पर याद रखना— सीए वो योद्धा है, जो हर चुनौती जीतता,* अंधेरी राहों में भी समाधान का दीप जलाता। गर्व है हम सबको तुम पर, हे नवदीपकों, नवज्योतियो, *राजसमन्द की धरती कहती—आगे बढ़ो, चमको, खनकते रहो।* उज्ज्वल भविष्य तुम्हारा हो, चरित्र की शक्ति संग, *राष्ट्र निर्माण की यात्रा में, तुम बनो भारत का उमंग।* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#राजसमन्द सीए चेयरमैन* (79) 28/11/25 #dineshapna

































 

Monday, 24 November 2025

★ *उस “एक” को मत भूलो !* ★ *आज तुम जिस कुर्सी पर बैठ कर*, राजगद्दी का मान पा रहे हो, आज़ादी की हवा में रहकर, सम्मान का सुख पा रहे हो— सोचो, यह सब क्यों सम्भव है? *उसके पीछे किसी “एक” का त्याग है*, किसी “एक” का संघर्ष है भारी, जिसने अपना समय, श्रम, समर्पण देकर, सपनों की नींव तुम्हें सौंप दी सारी। *पर आज वही “एक” ओझल है*, नज़र से दूर, चर्चा से परे— सही नहीं है उसे भूल जाना, जिसने राह दिखाई तुम्हें चलने की। वह कुर्सी, वह अधिकार, वह सम्मान, यूँ ही नहीं तुम्हारे पास आया— *यह रेडक्रॉस सोसायटी के लोकतंत्र का फल है*, जिसे एक सेवक ने अपनी निष्ठा से सजाया। वह सेवक, वह संघर्षकर्ता, जिसका नाम प्रकाश-स्तम्भ जैसा— *वही एक—सीए दिनेश सनाढ्य*, जिसने कर्तव्य को बनाया जीवन-लेखा। *मत भूलो उस एक की मेहनत*, मत अनदेखा करो उसका योगदान— जिसने बिना चाहत, बिना अपेक्षा, तुम्हें सौंपा सेवा-सम्मान का स्थान। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (77) 24/11/25 #dineshapna


 

Monday, 10 November 2025

★ *मेरा भारत कैसे सुरक्षित रहेगा !* ★ *जब संविधान के अनुरूप बने हर कानून महान*, तभी न्याय होगा सच्चा, मिलेगा जनता को सम्मान। *जब प्रस्तावना के आदर्श हर धारा में समायें*, तभी समानता, स्वतंत्रता के दीप सदा जगमगायें। *जब परिवर्तन हों लोकतंत्र के मार्ग से सरल*, तभी रहेगा विश्वास जनता का अटल व अमर। *जब संविधान की हो सबको सच्ची पहचान*, तभी मिटेगा भ्रष्टाचार, बढ़ेगा राष्ट्र का मान। *जब हर नागरिक को मिले समय पर न्याय*, तभी भारत बनेगा विश्व में सत्य का गाय। *संविधान ही सुरक्षा, यही है राष्ट्र की ढाल*, इसका पालन ही भारत की अमर मिसाल। 🇮🇳 *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक बृजवासी* (76) 10/11/25 #dineshapna



 

Thursday, 6 November 2025

★ *वल्लभकुल और बृजवासी —* *पुष्टि मार्ग का तना और जड़* ★ *श्रीवल्लभ का सत्य संदेश*, *सेवा में था जीवन सारा*, श्रीनाथजी को समर्पित तन, मन, धन, हर पल प्यारा। *भक्ति का मार्ग नया बताया,* *पुष्टि नाम से विख्याता*, सेवा, प्रेम, समर्पण पथ, जीव का मोक्ष कराता। *वल्लभकुल ने निभाई मर्यादा,* *त्याग, धर्म, परंपरा न्यारी*, उनकी रीत अमर बनी है, जैसे नदिया पावन धारा भारी। *बृजवासी त्यागी सखा बन,* *श्रीनाथ संग चले थे दूर*, बृज की माटी छोड़ दी, सेवा को माना मंज़िल हूर। *आज भी वही सखा भाव से,* *करते नित्य आराधन प्यारा*, पुष्टि मार्ग की जड़ वही हैं, जिनसे वृक्ष फूला-फला न्यारा। *वल्लभकुल तना,शाखाएँ* *उसकी, सेवा में रमे निरंतर*, जड़ बृजवासी, तना आचार्य, पुष्टिमार्ग हुआ अमर अनंत! *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक बृजवासी* (75) 06/11/25 #dineshapna



 

Wednesday, 5 November 2025

★ *गुरु नानक देव जी — मानवता के प्रकाशपुंज* ★ *जग में फैलाई ज्योति अपार*, *नानक नाम अमर आधार।* सत्य, प्रेम, करुणा के दूत, किया अंधकार का पूर्ण स्फूट। *“एक ओंकार” का दिया संदेश*, *सबमें है ईश्वर, सबमें विशेष।* भेद मिटाकर जोड़े दिलों को, मानवता बाँधी सूत्र मिलों को। *“नाम जपो, किरत करो”कहा*, *“वंड छको” से जीवन सजा।* सेवा-सद्भाव बना प्रतीक, न्याय और शांति का संगीत। *स्त्री को दी सम्मान की शान*, *“जित जन्मे राजन” का अभिमान।* मंदिर-मस्जिद सब एक समान, प्रेम बना नानक का विधान। *धन का मोह, छल का भार*, *त्याग दिया सबका अधिकार।* सादा जीवन, उच्च विचार, यही था नानक का व्यवहार। *जो नानक पथ पर चल पाता*, *सच्चे सुख का रस वह पाता।* उनके उपदेश बने आधार, जग में फैलाएँ प्रेम अपार। *नानक का दीप जले हर मन*, *मिटे अज्ञान, उठे सुमन।* मानवता का हो उत्सव नया, नानक नाम से जगमग धरा। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (74) 05/11/25 #dineshapna



 

Tuesday, 4 November 2025

★ *श्रीनाथजी मंदिर हो स्वतंत्र — बृजवासी की पुकार* ★ *नाथद्वारा धाम पवित्र, वल्लभ संप्रदाय का मान*, शासन की जंजीरों में बंधा, हुआ धर्म अपमान। *संविधान का सन्देश कहे — “हर धर्म को आज़ादी दो”*, फिर क्यों श्रीनाथजी का धाम, शासन की बेड़ी में क्यों? *दान भक्तों का होता अपार, पर उपयोग हुआ बेकार*, पारदर्शिता की लौ बुझे, फैला केवल अंधकार। *संपत्ति पर अतिक्रमण, लूट का मंजर साफ़ है*, भक्ति के स्थान पे अब, सत्ता का अन्याय है। *उठे अब एक बृजवासी — “धर्म की रक्षा का दीप जले”*, श्रीनाथजी के राज में फिर, सत्य और श्रद्धा साथ चले। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक बृजवासी* (73) 04/11/25 #dineshapna