Friday, 17 May 2019

आज नाथुराम गोडसे की जन्म तिथि है ! वर्षों बाद किसी कवि ने दबे सच को फिर से उजागर करने की कोशिश की है ! आप सभी साहित्य प्रेमी पाठकों के लिए कवि की मूल कविता नीचे विस्तार से लिखी गयी है ! यह कविता आज सुबह से सोशल मीडिया पर भारी संख्या में शेयर की जा रही हैं ! 🙏🙏 🇮🇳 🙏🙏 _______________________ माना गांधी ने कष्ट सहे थे, अपनी पूरी निष्ठा से। और भारत प्रख्यात हुआ है, उनकी अमर प्रतिष्ठा से ॥ किन्तु अहिंसा सत्य कभी, अपनों पर ही ठन जाता है। घी और शहद अमृत हैं पर, मिलकर के विष बन जाता है।। अपने सारे निर्णय हम पर, थोप रहे थे गांधी जी। तुष्टिकरण के खूनी खंजर, घोंप रहे थे गांधी जी ॥ महाक्रांति का हर नायक तो, उनके लिए खिलौना था । उनके हठ के आगे, जम्बूदीप भी बौना था ॥ इसीलिये भारत अखण्ड, अखण्ड भारत का दौर गया। भारत से पंजाब, सिंध, रावलपिंडी, लाहौर गया॥ तब जाकर के सफल हुए, जालिम जिन्ना के मंसूबे । गांधी जी अपनी जिद में, पूरे भारत को ले डूबे ॥ भारत के इतिहासकार, थे चाटुकार दरबारों में । अपना सब कुछ बेच चुके थे, नेहरू के परिवारों में ॥ भारत का सच लिख पाना, था उनके बस की बात नहीं। वैसे भी सूरज को लिख पाना, जुगनू की औकात नहीं ॥ आजादी का श्रेय नहीं है, गांधी के आंदोलन को । इन यज्ञों का हव्य बनाया, शेखर ने पिस्टल गन को ॥ जो जिन्ना जैसे राक्षस से, मिलने जुलने जाते थे । जिनके कपड़े लन्दन, पेरिस, दुबई में धुलने जाते थे ॥ कायरता का नशा दिया है, गांधी के पैमाने ने । भारत को बर्बाद किया, नेहरू के राजघराने ने ॥ हिन्दू अरमानों की जलती, एक चिता थे गांधी जी । कौरव का साथ निभाने वाले, भीष्म पिता थे गांधी जी ॥ अपनी शर्तों पर इरविन तक, को भी झुकवा सकते थे । भगत सिंह की फांसी को, दो पल में रुकवा सकते थे।। मन्दिर में पढ़कर कुरान, वो विश्व विजेता बने रहे । ऐसा करके मुस्लिम जन, मानस के नेता बने रहे ॥ एक नवल गौरव गढ़ने की, हिम्मत तो करते बापू । मस्जिद में गीता पढ़ने की, हिम्मत तो करते बापू ॥ रेलों में, हिन्दू काट-काट कर, भेज रहे थे पाकिस्तानी । टोपी के लिए दुखी थे वे, पर चोटी की एक नहीं मानी॥ मानों फूलों के प्रति ममता, खतम हो गई माली में । गांधी जी दंगों में बैठे थे, छिपकर नोवा खाली में॥ तीन दिवस में *श्री राम* का, धीरज संयम टूट गया । सौवीं गाली सुन कान्हा का, चक्र हाथ से छूट गया॥ गांधी जी की पाक परस्ती पर, जब भारत लाचार हुआ । तब जाकर नाथू, बापू वध को मज़बूर हुआ॥ गये सभा में गांधी जी, करने अंतिम प्रणाम। ऐसी गोली मारी गांधी को, याद आ गए *श्री राम*॥ मूक अहिंसा के कारण ही, भारत का आँचल फट जाता । गांधी जीवित होते तो, फिर देश, दुबारा बंट जाता॥ थक गए हैं हम प्रखर सत्य की, अर्थी को ढोते ढोते । कितना अच्छा होता जो, *नेता जी राष्ट्रपिता* होते॥ नाथू को फाँसी लटकाकर, गांधी जी को न्याय मिला । और मेरी भारत माँ को, बंटवारे का अध्याय मिला॥ लेकिन जब भी कोई भीष्म, कौरव का साथ निभाएगा । तब तब कोई अर्जुन रण में, उन पर तीर चलाएगा॥ अगर गोडसे की गोली, उतरी ना होती सीने में। तो हर हिन्दू पढ़ता नमाज, फिर मक्का और मदीने में॥ भारत की बिखरी भूमि, अब तक समाहित नहीं हुई । नाथू की रखी अस्थि, अब तक प्रवाहित नहीं हुई॥ *इससे पहले अस्थिकलश को,* *सिंधु सागर की लहरें सींचे।* *पूरा पाक समाहित कर लो,* *इस भगवा झंडे के नीचें ॥* _______________________ (भारत के इस सत्य इतिहास को प्रसारित करने के लिए शेयर अवश्य करें) 🙏🙏 🇮🇳 🇮🇳 🙏🙏





★★नाथद्वारा का विकास v/s जनता के साथ लूट★★ ■■अतिक्रमण ■■. इस नाम पर बाजार मे छोटे व्यापारियों को व बस स्टैंड पर थैला व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है जबकि इस समस्या का मूल कारण :--------- ◆बिना पार्किंग के होटल व बहुमंजिला ईमारतों का निर्माण ! ◆आईकॉन गेट व गाडँन के नाम पर सडक अवरुद्ध करना ! ◆पार्किंग के जगह माँडल बस स्टैंड बनाया तथा लालबाग, बस स्टैंड की जगह व भवन को निजी हाथों मे बेचना ! ■■■■ आगे और भी है, जानने व समझने के लिए :-



Wednesday, 8 May 2019

★अतिक्रमण करना , फायदा कम नुकसान ज्यादा★ ★केवल समझ समझ का फर्क है !★ ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ◆कांकरोली, राजसमन्द (नया बाजार, ईमली वाला बाजार, रामधुन गली) मे दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है, ग्राहकों को असुविधा, आने जाने मे परेशानी, किन्तु प्रशासन चुप व सुस्त ! ◆दुकानदार को फायदा कम - क्योंकि एक ओर अतिक्रमण तथा दूसरी ओर मोटरसाइकिल खड़ी होने से ग्राहकों को आने मे दिक्कत होती है, इसलिए ग्राहक अन्दर आकर खरीददारी मे कम इच्छुक रहते है ! ◆दुकानदार केवल दो फीट अतिक्रमण करता है, तो दुसरी ओर वाला दुकानदार दो फीट, इस प्रकार चार फीट अतिक्रमण हो जाता है , जिसके बाद एक एक दुकानदार की स्वयं की मोटरसाइकिल ! इसके बाद 4 - 5 फीट सड़क बचती है, उसमे कैसे ग्राहक आये व आसानी से खरीददारी करें ? ◆समस्या यह है कि ....... बोले कौन ? (1)दुकानदार को अल्पकालीन लाभ के कारण चुप ? (2)ग्राहक बोले तो सुने कौन ? इसलिए बाहर की दुकानों से खरीद करना पसंद करते है ! (3)प्रशासन काम नही करना चाहता है ! अगर कोई शिकायत करें तो जेब गर्म होने पर चुप हो जाते है ! ◆समाधान◆............. (1)प्रशासन नियमानुसार कार्यवाही करे ! (2) दुकानदार अतिक्रमण नही करे, अल्प लाभ को छोड़े तो ज्यादा ग्राहक आयेगे ! ■सावधान■ प्रशासन 100% अतिक्रमण हटाये व कोई रिश्वत ले या दे तो आयुक्त पुलिस अधिक्षक कार्यवाही करें ! CA. Dinesh Sanadhya www.Dineshapna.blogspot.com www.apnarajsamand.blogspot.com