Chartered Accountant,Social Activist,Political Analysist-AAP,Spritual Thinker,Founder of Life Management, From India, Since 1987.
Tuesday, 31 December 2024
★2025 का स्वागत ! & 2024 की विदाई !★ नववर्ष 2025 का स्वागत पंच तथ्यों से करें :- ◆ सबसे पहले भारत के सभी सनातनी जात पात व सम्प्रदाय /धर्मों मे बँटने के स्थान पर "एकजुट" हो ! इसके बाद "भूतपूर्व सनातनी" (500 वर्ष व उससे ज्यादा वर्षों पूर्व परिवर्तित सनातनी) "एकजुट" होकर अपने पूर्वजों की मजबूरी को समझते हुए, उनका सम्मान करे और पुनः सनातन धर्म को आत्मसात करें और वर्तमान सनातनियों का साथ दे ! ◆ भूतपूर्व व वर्तमान सनातनी सभी मिलकर सनातन को "आत्मसात" करें, भले ही भूतपूर्व सनातनी अपनी पूजा पद्वति (इस्लाम / ईसाई) नहीं बदले ! ◆ रोजगार के अवसर सरकार बढ़ाये व "आम आदमी ईमानदारी से" नौकरी / व्यापार करें तथा "देशहित व देशप्रेम" को सर्वोपरि समझते हुए कार्य करे ! ◆ "मूल संविधान" की पालना करें व असंवैधानिक / विरोधाभासी संशोधनों को हटाने मे सहयोग करें ! इसके साथ ही "शुद्ध संविधान" अर्थात् संविधान की प्रस्तावना व एकता व समानता की मूल भावनाओं को ध्यान मे रखते हुए मूल संविधान के "कुछ विरोधाभासी प्रावधानों" को हटाकर, "मूल" संविधान को "शुद्ध" संविधान बनाये ! ◆ सनातन धर्म मे ऐसे प्रावधान है जिससे न केवल भारत मे ही "शान्ति" स्थापित हो सकती है, बल्कि पूरे विश्व मे शान्ति स्थापित हो सकती है ! इसके अलावा सनातन धर्म भारत के संविधान के किसी भी प्रावधानों के विरोधाभास मे नहीं है ! अतः यदि भारत को "हिन्दू राष्ट्र" बनाया जाये, तो यह हमें विश्व गुरु बनने मे सहायक होगा ! ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(221) #01/01/25 #dineshapna
Monday, 30 December 2024
★2025 का स्वागत ! & 2024 की विदाई !★ नववर्ष 2025 :- ◆नई उम्मीदें - एकता हो / .......... ◆नए सत्कर्म - सनातन आत्मसात हो / .......... ◆नए अवसर - रोजगार बढ़े / .......... ◆संकल्प - मूल व शुद्ध संविधान हो / ............ ◆शुभारंभ - धर्म व शान्ति की / ............ गतवर्ष 2024 :- ●अनुभव :- गुलामी के मूल की / ........... ●सीख :- सनातन से शान्ति की / ........... ●उपलब्धि :- न्यायगत सोच की / ........... ●संघर्ष :- भूत व वर्तमान सनातनियों मे / ....... ●विदाई :- आपसी संघर्ष की / ........... ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(220) #31/12/24 #dineshapna
Saturday, 28 December 2024
★केवल यह ही नहीं करें, किन्तु इससे पहले यह भी करें !★ (१) हम बात करते है कि "नशा मुक्ति" की ! किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ सभी प्रकार के नशे (भाँग, शराब, तम्बाकू, अफीम) की बिक्री / व्यापार / टैक्स से आय मे सक्रिय भागीदारी सरकार की है और दिखाने के लिए प्रशासन / सरकार नशामुक्ति अभियान चलाकर जनता को गुमराह करती है ! ◆ क्या कारण है कि सरकार को मालूम है कि नशे के कारण आम जनता बीमार हो रही है व वाहन दुर्घटना हो रही है और इसके लिए चिकित्सा हेतु सरकार को करोड़ों रुपए खर्च करने पड़ रहे है तो भी सरकार नशे पर पूर्ण पाबन्दी नहीं लगा रही है ! ◆ "वर्तमान मे" सरकार नशे को बेचकर या टैक्स से जितना पैसा कमा नहीं रही है उससे ज्यादा चिकित्सा व अन्य इसके दुष्परिणामो पर खर्च कर रही है ! ◆ "भविष्य मे" क्या सरकार नशे के नाम पर दोहरी चाल चलना बन्द करके पूर्ण रुप से नशे को बन्द करेगी ? (२) हम बात करते है कि "भ्रष्टाचार मुक्ति" की ! किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ हमें देश को भ्रष्टाचार मुक्त करना है तो इसकी जड़ तक पहुँच कर, "भ्रष्टाचार की जड़" को ही समाप्त करना होगा ! ◆ क्या कारण है कि भ्रष्टाचार को समाप्त करने का प्रयास प्रशासन, सरकार व कुछ समाज सेवी लोग कर रहे है तो भी "भ्रष्टाचार समाप्त" नहीं हो रहा है ! ◆ "वर्तमान मे" हम भ्रष्टाचार को समाप्त करने की बात तो करते है व भ्रष्टाचार निरोधक विभाग भी बना रखा है व इसके लिए कानून भी है तो भी भ्रष्टाचार से मुक्ति नहीं मिल रही है ! ◆ "भविष्य मे" हम हकीकत मे भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहते है तो सर्वप्रथम भ्रष्टाचार हटाने की शुरुआत ऊपर (बड़े नेताओ व अधिकारियों) से नीचे (कर्मचारियों व आम जनता) की ओर करनी चाहिए तथा इसके साथ ही आम जनता को चुनाव मे पैसा / मुफ्त की रैवड़ी बाँटने वालों को नकारना चाहिए ! (३) हम बात करते है कि "शिक्षा" की ! किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ हमे शिक्षा को "सेवा के स्थान पर व्यापार" बनाने वालों को रोकना होगा व नैतिकता, धार्मिकता व रोजगार उन्मुख शिक्षा को बढ़ाना चाहिए ! ◆ क्या कारण है कि सरकार "करोड़ों रुपए शिक्षा" पर खर्च करने के बाद भी देश मे शिक्षा का स्तर ऊपर नहीं उठ पा रहा है ? ◆ "वर्तमान मे सरकारी शिक्षा संस्थानों की उपेक्षा की जा रही है और प्राईवेट शिक्षा संस्थानों के द्वारा लूट मचा रखी है ! ◆ "भविष्य मे" हमे शिक्षा को सेवा के रूप मे लागू करना होगा ! जिसके लिए सरकारी शिक्षा संस्थानों का स्तर ऊँचा करके निशुल्क व्यवस्था करनी होंगी व प्राईवेट शिक्षा संस्थानों पर नियंत्रण करके इसे व्यापार बनाने से रोकना होगा ! (४) हम बात करते है कि "रोजगार" की ! किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ क्या सरकार के द्वारा आम जनता को सरकारी नौकरी देना ही रोजगार देने का मापदंड है ? ◆ क्या कारण है कि आम जनता को सरकार रोजगार देने मे असफल हो रही है ? ◆ "वर्तमान मे" सरकार सभी को सरकारी नौकरी नहीं दे सक रही है व प्राईवेट नौकरी पर नियंत्रण नहीं है व छोटे व्यापारियों को पनपने नहीं दे रहे है, तो रोजगार कैसे मिले ! ◆ "भविष्य मे" सरकार को छोटे व्यापारियों को सुविधाएं देकर, व्यापार मे मिलावट व धोखाधड़ी पर अंकुश लगाना चाहिए ! प्राईवेट नौकरियों को प्रोत्साहन देकर तथा सरकारी नौकरियों को परिणाम परक बनाकर, आम जनता के लिए रोजगार के चहुंमुखी अवसर प्रदान करने चाहिए ! ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(219) #24/12/24 #dineshapna
Sunday, 22 December 2024
★केवल यह ही नहीं करें, किन्तु इससे पहले यह भी करें !★ (१) हम बात करते है कि "अपने अपने घर्म" को मानने की ! किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ सभी धर्मों को संविधान व कानून के द्वारा "समान अधिकार व छूट" मिलनी चाहिए ! ◆ क्या कारण है कि "हिन्दू धर्म के साथ भेदभाव" कर रखा है ! ◆ "वर्तमान मे" हमे हिन्दू धर्म के साथ संविधान व कानून के भेदभाव को हटाने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए जिससे अन्य धर्मों के साथ मनमुटाव व अनावश्यक लडाई झगड़ा नहीं हो ! ◆ "भविष्य मे" हमे हिन्दू - मुसलमानों को मिलकर आवाज उठानी चाहिए कि दोनों धर्मों के लिए समान कानून हो व देश मे पूर्ण धर्मनिरपेक्षता लागू हो ! (२) हम बात करते है कि "मन्दिर निर्माण व सुरक्षा" की तो यह कार्य आपसी प्रेम व सद्भाव से हो ! किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ हमें मन्दिरों के निर्माण के साथ उसकी सुरक्षा की कार्य योजना व उसके लिए कार्य भी करना चाहिए ! ◆ क्या कारण है कि "हमारे मन्दिरों को तोड़कर मस्जिद बनाई गई ? इसके लिए हमें आपस मे लड़ना नहीं चाहिए, उसके विपरीत हमें प्रेम व समझदारी से उसका समाधान निकालना चाहिए ! ◆ "वर्तमान मे" हमें यह सोचना चाहिए कि पुराने मन्दिरों को मुगलों व आतताईयों ने तोड़ा था, जो आज नहीं है ! अभी संघर्ष "सनातनियों व कन्वटेड सनातनियों (भूतपूर्व सनातनी)" के बीच मे है तो समाधान भी दोनों को ही मिलकर निकालना चाहिए ! ◆ "भविष्य मे" हम "सनातनियों व कन्वटेड सनातनियों (भूतपूर्व सनातनी)" को मिलकर यह निर्णय लेना चाहिए कि पुराने सभी मन्दिर हिन्दुओं को लौटा दे किन्तु इसके पूर्व उसके एवज मे हिन्दू नई मस्जिद बनाकर दे ! (३) हम बात करते है कि "समाज सेवा" की ! किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ हम "समाज सेवा से ज्यादा स्व सेवा" करने का कार्य नहीं करे तथा ऐसा करने वालों की सच्चाई समाज के सामने लाने का कार्य करके "सच्ची समाज सेवा" करें ! ◆ क्या कारण है कि "करोड़ों रुपए समाज सेवा" पर खर्च करने के बाद भी समाज का व्यक्ति ऊपर नहीं उठ पा रहा है ? ◆ "वर्तमान मे" हम ज्यादातर समाज सेवा उस धन से कर रहे है जो हमने समाज से ही लूटा / वसूला गया ! ◆ "भविष्य मे" हम ज्यादातर लोग समाज से अत्यधिक धन लूटे / वसूले नहीं, तो कम मात्रा मे समाज सेवा करने से ही काम आसानी से चल जायेगा ! (४) हम बात करते है कि "देश सेवा" की ! किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ क्या हम देश सेवा के नाम पर हम "स्व सेवा / कुर्सी सेवा" कर रहे है ? ◆ क्या कारण है कि "देश सेवा" हम सभी राजनैतिक दल व पूँजीपति कर रहे है तो भी हमारे देशवासी खुश व समृद्ध नहीं हो पा रहे है और देश भी सुरक्षित नहीं रह पा रहा है ? ◆ "वर्तमान मे" हम सभी राजनैतिक दल एकजुट होकर देशहित मे कार्य नहीं करने के कारण एक दल "देशसेवा" कर रहा है तो दूसरा दल "विपरीत देशसेवा" करके टाँग खिच रहा है, इस कारण "परिणाम शून्य" आ रहा है ! ◆ "भविष्य मे" हमे "देशसेवा व देशहित" को परिभाषित करने के साथ हम सभी (पक्ष - विपक्ष दलों तथा अमीर - गरीब लोगों) को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है ! इससे थोड़ी-सी देश सेवा करना भी पर्याप्त होगा ! देशसेवा व समाजसेवा के चार उदाहरण जैसे - ●देश सुरक्षा, ●सरकारी सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा ●कम व पारदर्शी मुनाफे के साथ व्यापार, ●मिलावट नहीं करना ! ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(218) #22/12/24 #dineshapna
Saturday, 21 December 2024
★केवल यह ही नहीं करें, किन्तु इससे पहले यह भी करें !★ (१) हम बात करते है कि आम जनता को "स्वास्थ्य सुविधाएं" सुलभ व किफायती दर पर मिलने की ! किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ खाद्य पदार्थों मे "मिलावट" को कैसे रोका जाये ? ◆ क्या कारण है कि "दवाओं की कीमत व ईलाज की फीस अत्यधिक" (लागत से कई सौ गुणा तक) क्यों है ? ◆ "वर्तमान मे" हम सस्ता, सुलभ व गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए क्या कर रहे है ? ◆ "भविष्य मे" हमे कुछ दवाई माफियाओं / ईलाज के नाम पर लूट को रोकने के लिए क्या करना होगा ? (२) हम बात करते है कि "अतिक्रमण" को रोककर आम जनता को राहत प्रदान की ! किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ सरकार वन, सरकारी जमीन, सड़क व जनता की जमीनो से अतिक्रमण को "क्यों नहीं रोक पा रही" है ? ◆ क्या कारण है कि "सरकारी अधिकारी अतिक्रमण" रोकने के स्थान पर चुप्पी बनाये हुए है ? ◆ "वर्तमान मे" हम अतिक्रमण को हटाने के लिए क्या कर रहे है ? ◆ "भविष्य मे" हम अतिक्रमण हटाने के लिए अधिकारियों व कानून का उपयोग करने के लिए क्या करना होगा ? (३) हम बात करते है कि "पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन" की ! किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ हम "पर्यावरण को नुकसान" पहुँचाने वालों को रोकने के लिए क्या कर रहे है ? ◆ क्या कारण है कि "सरकार करोड़ों रुपए पेड़ लगाने" पर खर्च करने के बाद भी धरातल पर उक्त पेड़ लगे हुए नजर नहीं आ रहे है ? ◆ "वर्तमान मे" हम पेड़ काटने पर, उन्हीं से पेड़ लगवाने का कानून होने के बावजूद हम उनसे पेड़ क्यो नहीं लगवा पा रहे है ? ◆ "भविष्य मे" हम पर्यावरण बचाने व प्रदूषण को रोकने के लिए आम जनता, सरकार व कानून को क्या करना होगा ? (४) हम बात करते है कि "जल संरक्षण" की ! किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ हम नदियों, तालाबों मे हो रहे जल प्रदूषण को क्यों नहीं रोक पा रहे है ? ◆ क्या कारण है कि "जल स्त्रोतों" पर हो रहे अतिक्रमणों को रोकने के स्थान पर, हम व सरकारी अधिकारी उसे नष्ट क्यों कर रहे है ? ◆ "वर्तमान मे" हम जल प्रदूषण रोकने व जल स्त्रोतों को बचाने के लिए क्या कर रहे है ? ◆ "भविष्य मे" हमे जल संरक्षण के लिए आम जनता, सरकार व कानून को क्या करना होगा ? ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(217) #21/12/24 #dineshapna
Friday, 20 December 2024
★केवल यह ही नहीं करें, किन्तु इससे पहले यह भी करें !★ (१) हम बात करते है कि हमे "आजादी" कैसे मिली ? किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ हम गुलाम "कैसे हुए" ? ◆ क्या कारण है कि हम धन व बल से सक्षम होते हुए भी गुलाम रहे ? ◆ "वर्तमान मे" हम गुलामी से मुक्ति के लिए क्या कर रहे है ? ◆ "भविष्य मे" गुलाम नहीं हो, इसके लिए क्या करना होगा ? (२) हम बात करते है कि हमारा "सनातन का इतिहास व गौरव" क्या था ? किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ हमारे सनातन व सनातनियों का क्षैत्र / महत्ता "कम क्यों हो रही" है ? ◆ क्या कारण है कि सनातनियों का ही "धर्म परिवर्तन" हो रहे है ? ◆ "वर्तमान मे" हम सनातन की रक्षा के लिए क्या कर रहे है ? ◆ "भविष्य मे" हमे सनातन मे एकता व रक्षार्थ लिए क्या करना होगा ? (३) हम बात करते है कि हमारे "संविधान की महानता" क्या है ? किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ हमारे संविधान मे अनावश्यक संशोधन "क्यों हो रही" है ? ◆ क्या कारण है कि "संविधान के विरुद्ध कुछ कानून" बनाये गये ? ◆ "वर्तमान मे" हम संविधान विरुद्ध कुछ कानूनो को हटाने के लिए क्या कर रहे है ? ◆ "भविष्य मे" हम संविधान के विरुद्ध प्रावधानों को हटाने के लिए क्या करना होगा ? (४) हम बात करते है कि "हमारे महापुरुषो व धर्म गुरुओ के आदर्श" क्या थे ? किन्तु हमे इससे पहले यह बात करनी चाहिए कि ◆ हम "महापुरुषों व धर्म गुरुओ को आत्मसात" क्यों नहीं कर रहे है ? ◆ क्या कारण है कि "महापुरुषों व धर्म गुरुओ के बताये "आदर्श मार्ग के विपरीत कार्य" कर रहे है ? ◆ "वर्तमान मे" हम महापुरुषो व धर्म गुरुओ जैसे बनने के लिए क्या कर रहे है ? ◆ "भविष्य मे" हम एकता, शक्तिशाली, ईमानदार व परोपकारी बनने लिए क्या करना होगा ? ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(216) #20/12/24 #dineshapna
Wednesday, 18 December 2024
★कड़वा है, परन्तु सच है !★ ■ भारत व भारतीयों की सभी समस्याओं की जड़ है - "मूल संविधान मे गलत / पक्षपात पूर्ण संशोधन" ! ■ (१) कांग्रेस के शासन काल मे करीब 70 से अधिक बार संविधान संशोधन किये ! इसमें कई ऐसे संशोधन किये जो "संविधान की मूल भावनाओं" व व्यक्ति के "समानता व स्वतंत्रता" के विरुद्ध है ! इस पक्षपात पूर्ण "संविधान संशोधन" के कारण हिन्दू - मुस्लिम की एकता को तोड़ने का कुकृत्य किया गया, जो क्षमा योग्य नहीं है ! (२) कांग्रेस के शासन काल मे "हिन्दू - मुस्लिम की एकता" को तोड़ने के लिए कई "काले कानून" बनाये, जो हिन्दुओं व मूल संविधान के विरुद्ध है ! ऐसे कृत्य करने वाले "मानवता के दुश्मन" है ! (३) मूल संविधान मे गलत / पक्षपात पूर्ण संशोधन के लिए जिम्मेदार कुछ हिन्दू (शान्ति व एकता के दुश्मन) व कुछ राजनैतिक पार्टियां है ! अतः कुछ विशेष धर्म वालों को खुश करने के लिए यह कार्य किया गया, जिससे उनकी "राजनैतिक कुर्सी" कायम रह सके ! (४) इसका समाधान यह है कि "वर्तमान सनातनी" व "भूतपूर्व सनातनी" (कन्वटेड मुसलमान) अपने अतीत को याद रखते हुए, सनातन को बचाने के लिए "एकजुटता" कायम रखते हुए "स्वार्थी राजनैतिक पार्टियों" को वोट नहीं दे व उनका विरोध सभी 365 दिन करे ! 【2024 के सनातनी व 1526 के बाद के (कन्वटेड मुस्लिम) सनातनी एकजुट हो !】 ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(215) #18/12/24 #dineshapna
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