Tuesday, 19 September 2017

★★झील संरक्षण कर सच्ची आराधना करे !★★ ★ झील भरने पर कोई चारभुजाजी , तो कोई एकलिग जी पद यात्रा कर रहे है ! ★ कोई पूजन कर रहे है , तो कोई आतिशबाजी कर रहे है ! ★ कोई खीर बाँट रहे है , तो कोई पकौड़े व चाय ! ★ यहाँ जिम्मेदारो की लापरवाही से पानी व्यर्थ बह रहा है , भविष्य मे भी सिंचाई के समय पानी व्यर्थ बहेगा ! ★ यह दिखावा क्यो ! आम जनता के साथ धोखा क्यो ! ★ पद यात्रा से पहले झील संरक्षण की बात क्यो नही ! ★ चारभुजाजी व एकलिगजी की पूजा से पूर्व, वरुण देव (जल देवता) का संरक्षण क्यो नही !











नाथद्वारा का विकास कैसे हो ? ★जब विकास के लिए जिम्मेदार ही गैर जिम्मेदार हो ! ★जब आम जनता की कोई सुनता नही हो ! ★अब जिम्मेदार लोग स्वार्थ व लोभ छोड़कर कर्तव्य पालन करे ! ★अब श्रीनाथजी या न्यायपालिका ही कुछ करे !











Monday, 18 September 2017

★★◆◆★★कड़वी बात★★◆◆★★ नाथद्वारा का विकास :: मोदीजी की“नजर”से  व आमजनता के “चश्मे” से !  (1) भारत में " एक देश  व  एक कानून " लागू है  तो " एक कानून  व एकसमान लागू " क्यो नही ? (2) नाथद्वारा विकास के लिए जब अतिक्रमण हटाने का “एक कानून”लागू किया जा रहा है तो सभी (“आम” व “खास” ) पर  “एकसमान रूप से लागू”  क्यों नही? नाथद्वारा में आम जनता ( दुकानदार ) अपने  अतिक्रमण हटा रहे है तो खास जनता ( बहुमंजिल ईमारत ,होटल , मंदिर मंडल , सक्षम लोग )  भी अपने अतिक्रमण हटाए ! (3) नाथद्वारा में अतिक्रमण दिल्ली बाजार,गाँधी रोड ,मंदिर मार्ग परही नही ,अन्य सड़को पर भी है,तो सभी को स्वयं आगे आकर हटाना चाहिए ! (4) नाथद्वारा में कई निर्माण, निर्माणस्वीकृति विरुद्ध है ! तो कईगलत तरीके से निर्माण स्वीकृति दे रखी है ,अतः सभी की पुनः समीक्षा नाथद्वारा विकास के लिए की जानीचाहिए ! (5) एक ओर नाथद्वारा विकास की नाम पर दुकाने हटाकर बेरोजगारकिया जा रहा है , तो  दूसरी ओर सरकारीसड़कपरअनावश्यक गेट निर्माण हो रहा है ! एक ओर सरकारकीदी गई जमीन पर गार्डन व निजी दुकानबनाई जा रही है , तो दूसरी ओर पार्किंग की लिए दुकाने वधर्मशाला तोड़ी जा रही है ! (6) मंदिर मंडल “ आम आदमीयो की होटल “ को तोड़कर” खासआदमीयो के लिए होटल “ बना रहे है !इसके अलावा इन “ खास आदमीयो के लिए होटल“की पार्किंगके लिए धर्मशाला तोड़ी जा रही है ! नई निर्मित होटलो में पर्याप्त पार्किंग भी नही है !              आम जनता ( बृजवासी , नगरवासी , दुकानदार ) व खासजनता (बहुमंजिल इमारत ,होटल , मंदिर मंडल , सक्षम लोग ) दोनोंपर अतिक्रमण हटाने का नियम व निर्माण स्वीकृति का नियम समानरूप से लागू हो !   आम जनता    व     खास जनता  पर  नियम समान  रूप  से  लागू  करने के  जिम्मेदारीजिला प्रशासन , नगर पालिका , मंदिर मंडल , विधायक व सासंद कीहै !  हम आशा करते है कि उक्तजिम्मेदार लोग नाथद्वारा व मंदिर विकासके लिए अपने स्वार्थ छोड़कर “एककानून” को “एकसमान” लागूकर “पूर्णपारदर्शिता” से श्रीनाथजी को साक्षीमानकर कार्य करेंगे ! ++++ श्रीनाथजी सभी का भला करे ! ++++ CA.Dinesh Sanadhya –18.09.2017  www.dineshapna.blogspot.com









Sunday, 17 September 2017

★★★★★★★कड़वी बात★★★★★★★ नाथद्वारा का विकास कैसे हो ! - "सबका बलिदान :: सबका विकास" हो ! (1)विकास कैसा हो ? :- ●# नाथद्वारा में चौड़ी सड़के हो ! ●# व्यस्थित पार्किंग हो ! ●# वैष्णवों के लिए रहने व भोजन के उचित व्यवस्था हो ! ●# दर्शन व प्रसाद की अच्छी व्यवस्था हो ! ●# सुन्दर व व्यस्थित बाजार हो ! ●# उचित सुरक्षा व्यवस्था हो ! (2)विकास के लिए जिम्मेदार कौन ? :- ●# नगरपालिका ! ●# सरकार ! ●# मंदिर मंडल ! ●# बोर्ड मेंबर्स ! ●# महाराजश्री ! ●# ब्रजवासी ! ●# नगरवासी ! ● #आमजनता ! (3)विकास में बाधक कौन ? :- ●# मंदिर में धर्म के स्थान पर राजनीति का प्रवेश ! ●# कुछ सक्षम व स्वार्थी बोर्ड मेंबर ! ●# बेईमान व मूकदर्शक अधिकारी ! ●# नगरपालिका का भ्रष्ट आचरण ! ●# सक्षम लोगो की मनमानी ! # आमजनता की अवहेलना ! ●# धृतराष्ट्र बने महाराजश्री ! (4)विकास कैसे हो ? :- ●# नगर विकास की योजना आमजनता की सहभागिता के साथ पारदर्शी हो ! ●# निर्माण करने का व अतिक्रमण हटाने का नियम आमजनता व सक्षम लोगो पर सामान रूप से लागू हो ! ●# दुकान व मकान हटाने से पूर्व उनको पहले उचित स्थान दिया जाये ! ●# पिछले दस सालो में दी गई निर्माण स्वीकृति के अनुसार हुए निर्माण कार्यो की निष्पक्ष जांच हो ! ●# नेता व अधिकारी आमजनता का कार्य करने के लिए हो,न की केवल सक्षम लोगो के फायदा पहुंचाने के लिए ! ★यदि आमजनता (बृजवासी , वैष्णव , नगरवासी ) को केंद्र में रखते हुए व उनकी सहभागिता से निर्णय लिए जाते है तथा उसकी पालना आमजनता व सक्षम लोगो के द्वारा समान रूप से ही हो ! इसके साथ विकास योजना लागू करने से पूर्व योजना के आर्थिक पक्ष व सामाजिक लाभहानि के साथ आमजनता के सामने रखना चाहिए ! तभी इस तरीके से "सबका साथ :: सबका विकास" होगा ! ★किन्तु नाथद्वारा विकास का काम "कुछ का बलिदान :: कुछ का विकास" की तर्ज पर हो रहा है ! नाथद्वारा में " आमजनता " का बलिदान हो रहा है व " सक्षम लोगो " का विकास हो रहा है ! सड़क चौड़ी करने व पार्किंग की लिए अतिक्रमण केवल दुकानों का हटाया जा रहा है , जबकि कई बहुमंजिल इमारतों व होटलो में पार्किंग सुविधा नही होने की कारण वे अनधिकृत रूप से वाहन सड़क पर खड़े रखने से सड़क पर अतिक्रमण हो रहा है ! नियम की अनुसार इन बहुमंजिल इमारतों व होटलो को पार्किंग व्यवस्था करनी चाहिए ! यदि "सबका साथ :: सबका विकास" करना है तो आमजनता ( दुकानदारों ) की अतिक्रमण के साथ खास लोगो ( बहुमंजिल इमारतों व होटलो ) के अतिक्रमण भी हटने चाहिए ! ◆◆ # इसके अलावा सरकारी जमीन का उपयोग (अतिक्रमण) " सड़क व पार्किंग " के स्थान पर " गेट व गार्डन " बनाने के लिए हो रहा है !#◆◆ ★★★★"सबका साथ :: सबका विकास" सही तभी होगा जब "सबका बलिदान :: सबका विकास" हो !★★★★ ##### जय हिन्द★जय भारत ##### Dinesh Sanadhya – 17.09.2017 www.dineshapna.blogspot.com


Friday, 15 September 2017

*कड़वी बात* *नाथद्वारा मंदिर में “ धर्मनीति ” के स्थान पर ” राजनीति “ प्रवेश कर चुकी है !" (1) *निर्णय लेना* :- ★निर्णय बोर्ड मेंबर्स के हाथ में ! बोर्ड मेंबर्स सरकार के हाथ में ! सरकार “राजनीती” के हाथ में ! ★महाराजश्री की निर्णय में स्वीकृति दबाव में ! ★बृजवासी , नगरवासी , मेवाड़ के महाराणा जी की निर्णय लेने में कोई अहमियत नही है ! (2) *फायदा लेना* :- ★फायदा नेता , अधिकारी व सक्षम लोग ही ले रहे है ! ★महाराजश्री की इसमें मौन स्वीकृति है ! ★वास्तविक हक़दार बृजवासी, नगरवासी, वैष्णव व आमजनता को फायदा कम, नुकसान ज्यादा ! (3) *सेवा करना* :- ★सेवा करे तन से, मन से, धन से बृजवासी , नगरवासी , वैष्णव व आमजनता ! ★उस सेवा का लाभ लेवे नेता, अधिकारी व सक्षम लोग ! ★चुप क्यों रहे महाराजश्री ! जबकि श्रीनाथजी का प्राकट्य बृजवासी व आमजनता की लिए ही हुआ तथा सर्वप्रथम श्रीनाथजी ने दर्शन व सेवा का लाभ बृजवासियों को ही दिया ! बाद में बृजवासियों ने सेवा व्यस्था का कार्य महाप्रभुजी को श्रीनाथजी की आज्ञा से सौपा ! जिसे महाप्रभुजी व उनकी 14 पीढ़ीयो तक सही तरीके से निभाया ! उसके बाद “राजनीती” ने प्रवेश किया जो आज तक चल रही है ! महाराजश्री को चाहिए की मंदिर में पुनः “धर्मनीति” की स्थापना करे ! श्रीनाथजी की प्राकट्य का मूल उद्देश्य बृजवासियों व आमजनता को उचित व उच्च स्थान (सखा भाव ) पर स्थापित करना तथा इसकी जिम्मेदारी महाप्रभुजी को सौपी थी! वर्तमान में महाराजश्री की जिम्मेदारी श्रीनाथजी के सखा बृजवासियों को उचित स्थान देने की है ! +++++ “धर्मनीति” की स्थापना हो ! +++++ +++++ “राजनीति” का निष्कासन हो ! +++++ CA.Dinesh Sanadhya – 15.09.2017 www.dineshapna.blogspot.com