Sunday, 8 January 2023

दिनू से सीए. दिनेश चन्द्र सनाढ्य बनने तक ! 21170 दिन का यादगार सफर ! ★Chartered Accountant, ★Social Activist, ★Political Analyst, ★Spiritual Thinker, ★Founder of Life Management सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिंदुस्तानी #(251) #09/01/23 #dineshapna







































 

◆अधिकार / लोक अधिकार / अधिकारो का दुरुपयोग !◆ ◆कर्तव्य / लोक कर्तव्य / कर्तव्यों की अवमानना !◆ (१)आम जन अपने कर्तव्य की पालना तो करते है किन्तु उनके अधिकारो का हनन हो रहा है ! (२)आम जन के अधिकारो का हनन नेता / सक्षम लोग / सरकारी अधिकारी करते है क्योंकि कुछ नेता / सक्षम लोग / सरकारी अधिकारी अपने कर्तव्यों की पालना पूर्ण रुप से नहीं कर रहे है ! (३)कुछ नेता अपने निजी स्वार्थ (वोट / नोट) के कारण, कुछ सक्षम लोग अति धन की लालसा के कारण व कुछ सरकारी अधिकारी नेताओं / सक्षम लोगों के दबाव या लापरवाही या भ्रष्टाचार के कारण आम जन के अधिकारो का हनन करते है ! (४)कुछ नेता / कुछ सक्षम लोग / कुछ सरकारी अधिकारी अपने कर्तव्यों की पालना नहीं करते है जिसके कारण आम जन के अधिकारो का हनन होता है और परेशानियों का सामना करना पडता है ! (५)आम जन को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए तीन विकल्प है ◆स्वयं विरोध करे ! ◆न्यायालय की शरण ले ! ◆अधिकार की रक्षा हेतु मंच या संगठन बनाये ! (६)इसमें सबसे आसान विकल्प मंच या संगठन बनाना है किन्तु कुछ मंच के अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के कारण या दूसरों के सामने अच्छा दिखाने के कारण इन नेताओं/सक्षम लोगों/अधिकारियों से जनता को अधिकार पूर्ण रुप से नहीं दिला पाते है ! यह आम जन के साथ छल है ! (७)कटु सत्य यह है कि अधिकार भीख माँगने से नहीं मिलते है, इसके लिए नेताओं/सक्षम लोगों/अधिकारियों से लडना पडता है जो कार्य ज्यादातर मंच नहीं कर पाते है ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिंदुस्तानी #(250) #08/01/23 #dineshapna



 

Saturday, 7 January 2023

◆साहित्य से सेवा - साहित्य से सुधार◆ साहित्य मण्डल के प्रधानमंत्री श्याम प्रकाश देवपुरा का सम्मान ! साहित्य ऐसा हो जिससे सेवा हो, सेवा ऐसी हो जिससे समाज मे सुधार हो । यह सुधार पहले स्वयं मे हो उसके बाद समाज मे हो । इसके लिए साहित्य लिखने के साथ स्वयं के द्वारा वास्तविक धरातल मे सकारात्मक कार्य या सुधार भी होना चाहिए । भगवती प्रसाद देवपुरा ने हिन्दी बचाने के लिए लिखा तो उसके लिए उनने पहले स्वयं हिन्दी को अपनाया उसके बाद हिन्दी को अपनाने के लिए वास्तविक धरातल मे जीवन भर कार्य भी किया । आज उनकी विरासत को (साहित्य से सेवा) उनके पुत्र श्याम प्रकाश देवपुरा आगे बढा रहे है । अपना ट्रस्ट संस्थापक अध्यक्ष सीए. दिनेश सनाढ्य व श्री हरि साहित्य सेवा संस्थान अध्यक्ष रविनन्दन चारण ने अपनी संस्थान की ओर से भी श्याम प्रकाश देवपुरा का सम्मान किया । आज भगवती प्रसाद देवपुरा की पुण्यतिथि है । आज हमें देवपुरा जी को हमारी सच्ची श्रृद्धाजंलि यह है कि हम साहित्य लिखने के साथ उसे आत्मसात करने का संकल्प ले । उसे हम भी पालन करे व अन्य को भी पालन कराने के लिए प्रयास / कर्म करें । यह ही साहित्य सृजन का मुख्य उद्देश्य हो और इसी उद्देश्य को आगे बढाने के लिए ही अपना ट्रस्ट ने श्री हरि साहित्य सेवा संस्थान का गठन किया है । सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिंदुस्तानी #(249) #06/01/23 #dineshapna































 

Sunday, 1 January 2023

नववर्ष 2023 का स्वागत ! दो सन्देश के साथ ! ●ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। ●कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। (१)ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। हिन्दी भावार्थ :- सभी सुखी होवें ! कैसे होगा ? :- सत्य, प्रेम, धर्म व न्याय हो ! सहयोग व परोपकार की भावना हो ! भ्रष्टाचार, झूठ, चोरी व अन्याय नहीं हो ! कोई अन्याय व अधर्म करें तो उसका सभी विरोध करे व रोके ! (२)कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। हिन्दी भावार्थ :- तेरा कर्म में ही अधिकार है, तेरा फल में कभी अधिकार न हो अर्थात् तुझे किसी भी अवस्था में कर्म फल की इच्छा नहीं होनी चाहिये। कैसे होगा ? :- अन्याय व अधर्म के विरुद्ध बिना फल की ईच्छा के कर्म करें ! निष्काम कर्म करें ! ★★★★★★★★★★★★ 【उपनिषद व गीता का दो श्लोकों मे विस्तृत सन्देश, जो जीवन को सही लक्ष्य की ओर अग्रसर करें !】 ●ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। ●कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। (१)ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥ - ।।उपनिषद।। हिन्दी भावार्थ :- सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी का जीवन मंगलमय बनें और कोई भी दुःख का भागी न बने। हे भगवन हमें ऐसा वर दो! ==================== (२)कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।। - ।।2.47 गीता।। हिन्दी भावार्थ :- तेरा कर्म में ही अधिकार है ज्ञान निष्ठा में नहीं। वहाँ ( कर्म मार्ग में ) कर्म करते हुए तेरा फल में कभी अधिकार न हो अर्थात् तुझे किसी भी अवस्था में कर्म फल की इच्छा नहीं होनी चाहिये। सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिंदुस्तानी #(248) #01/01/23 #dineshapna