Tuesday, 21 March 2023

नववर्ष २०८० की शुभकामनाएं !








 

★एक ब्राह्मण के सच की आवाज !★ ★अब ब्राह्मण महापंचायत का आगाज !★ (१)नाथद्वारा मन्दिर को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति के लिए सर्वप्रथम "एक बृजवासी" (एक ब्राह्मण) ने 2020 मे आवाज उठाई ! (२)नाथद्वारा मन्दिर को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति के लिए "विप्र फांउडेशन" को आवाज उठाने के लिए 2022 मे निवेदन किया ! (३)अब मन्दिर को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करके उसका नियंत्रण समाज के हाथो मे देने के लिए "ब्राह्मण महापंचायत" ने 2023 मे माँग की ! (४)अब हमे मन्दिर / धर्म स्थलों को समाज / भक्तों के नियंत्रण मे लाने के लिए कार्य योजना बनानी होगी ! (५)अब मन्दिर / धर्म स्थलों का संचालन / नियंत्रण के लिए ईमानदारी, समर्पण, पारदर्शिता, सुरक्षा व सामाजिक अंकेक्षण की निरंतरता व निष्पक्षता जरूरी हैं ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(288) #21/03/23 #dineshapna





 

Wednesday, 15 March 2023

★धर्म को समझे ! सभी धर्मों का मूल सनातन है !★ (१)भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जबकि हकीकत मे कोई भी व्यक्ति/समाज/देश धर्म के बिना नहीं रह सकता है ! (२)भारत का संविधान धर्मनिरपेक्षता की बात करता है जबकि हकीकत मे हिन्दू धर्म विरोधी 30 कानून है, मुस्लिम धर्म के पक्ष मे 13 कानून है, धर्म व सम्प्रदायों मे भेद करने वाले कई कानून है ! (३)अतः रहीम दास जी की सुने :- एकै साधे सब सधै, सब साधै सब जाय। रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय॥ (४)हमने 800 साल तक ईस्लाम धर्म , 200 साल ईसाई धर्म , 75 साल से धर्मनिरपेक्षता को लागू करने का प्रयास किया किन्तु शान्ति नहीं मिली, तो अब केवल 10 साल के लिए सनातन धर्म अपना कर देखने मे क्या बुरा है ? (५)सभी धर्मों का मूल "सनातन धर्म" है अतः सभी देशवासियों के हित के लिए भारत के संविधान मे "धर्मनिरपेक्षता" के स्थान पर "सनातन धर्म" शब्द लिखे, जिससे सभी धर्म शान्ति व सौहार्दपूर्ण रुप से रह सकेंगे ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(287) #14/03/23 #dineshapna













 

Wednesday, 1 March 2023

★सरकार का विकास धन केन्द्रित, किन्तु सच्चा विकास प्रकृति, पर्यावरण व मानव केन्द्रित हो !★ (१)"विकास" परिवर्तन प्रकृति का नियम है। परिवर्तन सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही हो सकते हैं । किसी भी समाज, देश व विश्व में कोई भी सकारात्मक परिवर्तन जो "प्रकृति और मानव" दोनों को बेहतरी की ओर ले जाता है वही वास्तव में विकास है । (२)"सतत् एवं संतुलित विकास" के लिए यह जरूरी है कि विकास का केन्द्र बिन्दु "मानव" हो । मानव के अन्र्तनिहित गुणों व क्षमताओं का विकास कर उनके अस्तित्व, क्षमता, कौशल व ज्ञान को मान्यता देना, उन्हें अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना, लोगों की सोचने की शक्ति को बढ़ाना, उनके चारों तरफ के वातावरण का विश्लेषण करने की क्षमता जागृत करना, समाज में उनको उनकी पहचान दिलाना व उन्हें सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक सशक्तता के अवसर प्रदान करना ही वास्तविक विकास है । (३)"सच्चा विकास" को समझने के लिए समग्रता में देखना जरूरी है, जिसमें मानव संसाधन, प्राकृतिक संसाधन, सामाजिक, आर्थिक राजनैतिक, सांस्कृतिक, व नैतिक व ढाँचागत विकास शामिल हो । (४)"विकास" जो नेता / सरकार आम जनता को बताती है उसमें केवल भौतिक ढाँचागत निर्माण ही है । किन्तु प्राकृतिक संसाधन केवल पूँजीपतियों के लिए, सामाजिक उत्थान के नाम पर जाती व धर्म के बीच मे लडाई, आर्थिक उत्थान केवल धनपतियों का, राजनैतिक उत्थान केवल बेईमानों व अपराधियो का, सांस्कृतिक उत्थान केवल दिखावे का, व नैतिक उत्थान केवल भाषणों मे हो रहा है । (५)"वास्तविक विकास" तब होगा जब विकास केवल प्रकृति, पर्यावरण व मानव केन्द्रित हो । सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(284) #01/03/23 #dineshapna