Tuesday, 29 October 2024

★धनतेरस व आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की जयंती पर आप सभी को "हार्दिक" - "हार्दिक" शुभकामनाएं !★ 【●धन के साथ आरोग्य मिले ! ●इसके लिए "मिलावट" करना छोड़े ! ●प्रार्थना /पूजा के साथ स्वयं अपने मे बदलाव करें !】 (१) सनातन धर्म मे "धन" व "आरोग्य" दोनो ही देवी व देवता की पूजा इसलिए की जाती है कि व्यक्ति को जीवन मे धन व आरोग्य दोनों की एक साथ आवश्यकता है ! केवल धन ही कमाते रहेंगे और स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखेगे, तो वह धन भी किसी काम का नहीं रहेगा ! (२) किन्तु वर्तमान मे व्यक्ति केवल "धन" कमाने की अन्धी दौड़ मे लगा हुआ है कि वह स्वास्थ्य का भी ध्यान नहीं रखता है तो ऐसा धन किस काम का ! व्यक्ति तो इससे भी नीचे गिर गया है कि "मिलावट" खाद्य पदार्थों, दवाइयों व अन्य सभी मे करके दूसरों का भी स्वास्थ्य खराब कर रहा है ! इस प्रकार "धन" कमाने मे स्वयं का व "मिलावट" करके दूसरों का स्वास्थ्य खराब करके धन कमा रहा है, तो ऐसा "धन" किस काम का है ? (३) इससे भी ज्यादा वर्तमान मे "मिलावट" दो प्रकार से कर रहा है :- ◆ खाद्य पदार्थों मे मिलावट से "शारिरिक स्वास्थ्य" खराब कर रहा है ! ◆ व्यवहार मे मिलावट से "मानसिक स्वास्थ्य" खराब कर रहा है ! इस प्रकार दोनों (शारिरिक व मानसिक) तरह से व दोनों (स्वयं व दूसरे व्यक्तियो) का शरीर का स्वास्थ्य खराब करके धन कमा रहे है, जो गलत है ! (४) अतः आज धनतेरस व आरोग्य दिवस पर भगवान धन्वंतरि जयंती पर हम सभी के जीवन में सुख, समृद्धि व धन सहित स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए भगवान से प्रार्थना करने के साथ स्वयं "मिलावट" नहीं करने का संकल्प ले ! ऐसा करने पर ही हमें "धन" व "आरोग्य" दोनों मिलेंगे ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(192) #29/10/24 #dineshapna


 

Monday, 28 October 2024

★सत्य (सही) को सत्य (सही) व झूठ (गलत) को झूठ (गलत) कहे !★ 【सनातन धर्म (पूरी दुनिया के लिए) व भारतीय संविधान (केवल देश के लिए) है !"】 (१) "सनातन धर्म" एक सुखी, आदर्श व सह अस्तित्व के साथ जीवन जीने की पद्वति है ! "जीयो और जीने दो" का उद्देश्य है ! इसमें प्रेम, शान्ति, सहयोग व सह अस्तित्व के लिए अपने धर्म के साथ दूसरे धर्म / प्रकृति / पशु पक्षियों का भी सम्मान किया जाता है इसलिए "वसुदेव कुटुम्ब" व "सर्वे भवन्तु सुखिनः" का सन्देश व सिद्धांत है ! अतः "सनातन धर्म" पूरी दुनिया के लिए व हित मे मान्य व स्वीकार्य है ! (२) इसके विपरीत "अन्य मजहब / सम्प्रदाय" की मान्यता का क्षेत्र सीमित है ! जैसे :- इस्लाम भी प्रेम, शान्ति, सहयोग व भाईचारा की बात तो करते है किन्तु वह सभी केवल अपने इस्लाम मजहब के लोगों तक ही सीमित है और अन्य धर्म / मजहब / सम्प्रदाय के लोगों से नफरत के साथ उन्हें समाप्त करने की बात करते है जो गलत है ! क्योंकि इस्लाम के अनुसार अल्लाह एक है तो उन्होंने ही हिन्दू व अन्य मजहब के लोगों को जन्म दिया है तो उनसे नफरत व उन्हें मिटाने की बात करना गलत होकर अल्लाह के कार्य मे रुकावट डालना है !इसलिए इस्लाम की मान्यता सीमित होने के साथ भारतीय संविधान के भी विपरीत है ! जैसेकि "नींबू मे यदि बीज नहीं होता तो नींबू अमृत हो जाता" ! उसी प्रकार इस्लाम मे से "अन्य धर्मों से नफरत" नामक "एक बीज" नहीं हो तो यह इस्लाम भी "अमृत के समान सर्वजनहिताय" हो सकता है ! (३) भारतीय संविधान भी बहुत अच्छा है किन्तु उसमें भी "एक बीज" यह है कि जनप्रतिनिधियों / नेताओं ने "संविधान के विपरीत कानून" बना रखे है, जो गलत है ! यदि उक्त बीज को हटा दिया जाये तो "भारतीय संविधान व उनके कानून" भी "अमृत के समान सर्वजनहिताय" हो सकते है ! (४) "सनातन धर्म", "इस्लाम" व "भारतीय संविधान" मे उक्त "एक असमानता" (एक बीज) के अलावा अन्य मुख्य ग्यारह (11) समानताएं है ! जैसे :- 【"सनातन धर्म" मे ●एक सर्वशक्तिमान ईश्वर, ●धर्म कर्तव्य, ●कर्म, ●आत्मा, ●जन्म मरण का चक्र, ●वेद व शास्त्र, ●योग, ●भक्ति, ●उपासना, ●दान, ●परोपकार आदि है !】 【"इस्लाम" मे ●एक सर्वशक्तिमान अल्लाह (तौहीद), ●धर्म पैगम्बर मे विश्वास (नबूवत), ●कर्म (अल्लाह के बताये कार्य), ●आत्मा (पुनर्जीवित किया जाना), ●परलोक मे विश्वास (आख़िरत) ●ईश्वरीय ग्रंथ (कुरआन), ●योग(अल्लाह के समक्ष अर्ज), ●प्रार्थना (नमाज़), ●उपवास (रोज़ा), ●दान (ज़कात), ●तीर्थयात्रा (हज) आदि है !】 【"भारतीय संविधान" मे ●एक सर्वशक्तिमान संविधान, ●संविधान प्रदत्त कर्तव्य, ●सभी के अधिकार व कार्य, ●संविधान देश की आत्मा, ●संविधानिक संस्थाओं का कानूनी चक्र, ●कानून व नियम, ●संविधान की रक्षा व समीक्षा के लिए न्यायालय, ●प्रत्येक नागरिक को पालन करना आवश्यक, ●संविधान / कानून मे नवीन या परिवर्तन की कानूनी प्रक्रिया, ●कानून की पालना व कार्य के लिए न्यायालय व कार्यपालिका , ●जनहित मे जनप्रतिनिधियों के द्वारा कानून बनाना व परिवर्तन करना आदि है !】 सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(191) #28/10/24 #dineshapna


 

Sunday, 20 October 2024

★सत्य (सही) को सत्य (सही) व झूठ (गलत) को झूठ (गलत) कहे !★ 【प्रेम, शान्ति, अहिंसा व भाईचारा कायम करने के लिए "चार" आवश्यक बिन्दु !】 (१) भारत मे ●"संविधान व कानून" सभी के लिए समान हो ! ●प्रत्येक कानून संविधान के अनुरूप हो ! ●कानून की पालना कठोरता व निष्पक्षता से हो ! ●न्याय सभी के लिए शीघ्र, सस्ता, सुलभ व पारदर्शी हो ! (२) भारत देश "संविधान" से चलता है तो "सनातन" से "देश व दुनिया" दोनों चल सकती है ! क्योंकि प्रेम, शान्ति, अहिंसा व भाईचारा की स्थापना केवल "सनातन" से ही संभव है ! (३) भारत मे "संविधान" लोगो के द्वारा बनाया गया है, तो उसमें सुधार व संशोधन की आवश्यकता हो सकती है ! किन्तु "सनातन" तो शास्वत व हजारों साल पुराना है, तो इसमें सुधार व संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है ! इसलिए भारत को "सनातन देश" बनाना चाहिए, जिससे देश व पूरी दुनिया मे प्रेम, शान्ति, अहिंसा व भाईचारा कायम हो सके ! (४) भारत को "सनातन देश" बनाने से देश मे प्रेम, शान्ति, अहिंसा व भाईचारा कायम होगा व सभी धर्मों व सम्प्रदायों का सम्मान होगा ! भ्रष्टाचार व साम्प्रदायिक हिंसा का अन्त होगा ! तब ही हम विश्व गुरु बनकर "वसुदेव कुटुम्ब" व "सर्वे भवन्तु सुखिनः" का सन्देश दुनिया को दे सकेंगे ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(189) #20/10/24 #dineshapna


 

Saturday, 12 October 2024

★विजय दशमी (दशहरा) की हार्दिक शुभकामनाएँ !★ ★विजय दशमी मनाने के साथ उसे आत्मसात करें !★ (1)अधर्म पर धर्म की व असत्य पर सत्य की विजय श्रीराम जी के द्वारा करने की शुभकामनाएँ हम एक दूसरे को देते है ! (2) किन्तु हम श्रीराम बनने का प्रयत्न नहीं करते है ! हम धर्म / सत्य पर विजय करना तो दूर, इसके विपरीत हम स्वयं अधर्म / असत्य पर चलते है ! (3) इसके साथ ही हम अपने अन्दर के दस रावण (अधर्म, असत्य, अहंकार, लोभ, स्वार्थ, ईर्ष्या, घृणा, धोखा, भ्रष्ट आचरण, परस्त्री गमण) को मारने के स्थान पर हमने रावण को आत्मसात कर रखा है ! (4) यदि हम विजय दशमी (दशहरा) - 2024 को मन से मनाना चाहते है तो हम अपने अन्दर के रावण को मारे (जलाये) ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(187) #12/10/24 #dineshapna


 

Wednesday, 2 October 2024

★गांधी जी (राष्ट्र के पिता) व शास्त्री जी (राष्ट्र के पुत्र) को जन्मदिन की शुभकामनाएं !★ (१) मोहनदास (मोहने वाले) करमचंद (कर्म करने वाले) गांधी जी (देश की सबसे बड़ी गादी - राष्ट्रपिता) व लाल (देश के लाल) बहादुर (समस्याओं से लड़ने वाले) शास्त्री जी (शास्त्र / संस्कार के अनुरूप) को उनके जन्मदिन की बधाईयाँ ! (२) गांधी जी ने बहुत अच्छे - अच्छे कार्य किये, उसके लिए आभार ! उनके छोटे से जीवन मे कुछ कार्य पूर्ण किये तो कुछ अधूरे रह गये ! उन अधूरे कार्यों (आमजन के हित के) को पूर्ण करने की जिम्मेदारी अब "आमजन" की है ! (३) गांधी जी ने जो कार्य "खासजन" (नेहरू जी / कांग्रेस / विशेष धर्म) के हित के लिए किये , किन्तु राष्ट्र / आमजन के हितो को कम महत्व दिया ! किन्तु "आमजन" का सहयोग पूरा लिया ! देश को आजादी दिलाई किन्तु देशवासियों को आजादी दिलाने का कार्य अधुरा रह गया ! (४) गांधी जी ने सत्य व अंहिसा का पाठ पढ़ाया (अहिंसा परमो परमो धर्मः !) जो अधुरा है ! पूरा पाठ (अहिंसा परमो परमो धर्मः ! धर्म हिंसा तथैव च: !) अर्थात् :- अहिंसा मनुष्य का परम धर्म है, और धर्म की रक्षा के लिए हिंसा करना उस से भी श्रेष्ठ है !) सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(186) #02/10/24 #dineshapna