Chartered Accountant,Social Activist,Political Analysist-AAP,Spritual Thinker,Founder of Life Management, From India, Since 1987.
Wednesday, 17 January 2018
★गुलामी मुक्ति अभियान :: •••••••••••••••• जमीन पर मालिकाना हक़ किसान या सरकार का ही हो !★ ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ ★ इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में जमीन का अधिग्रहण आधारभूत सुविधाओं (सड़क,रेल,एयरपोर्ट आदी) या फैक्ट्री (प्रोजेक्ट) के लिए होगा ! ★ आधारभूत सुविधाओं के लिए अधिग्रहण करे , तो जमीन सरकार के नाम ही हो , किसी कंपनी (कॉर्पोरेट) के नाम नही हो ! किसान को जमीन की कीमत बाजार मूल्य से मिले व साथ में 25% जमीन व्यावसायिक उपयोग हेतु मिले ! ★ फैक्ट्री (प्रोजेक्ट) के लिए अधिग्रहण करे , तो किसान को कंपनी (कॉर्पोरेट) में 25% शेयर दिया जाये व जमीन के बाजार कीमत का 12% किराया दिया जाये ! साथ में यह शर्त हो कि कंपनी (कॉर्पोरेट) जमीन को लोन के लिए गिरवी नही रख सकते है तथा कंपनी (कॉर्पोरेट) द्वारा व्यापार बंद करने के स्थिती में जमीन पुनः किसान को ही मिले ! ★ जमीन का मालिकाना हक़ केवल किसान के पास रहे या सरकार के पास रहे ! किन्तु किसी भी स्थिती में मालिकाना हक़ कंपनी (कॉर्पोरेट) के नाम नही हो, केवल जमीन का उपयोग व उपभोग व्यापार के लिए ही हो ! CA.Dinesh Sanadhya = 17.01.2018 www.dineshapna.blogspot.in
Sunday, 14 January 2018
★ ★ क्या देश गुलामी की ओर अग्रसर हो रहा है ? ★ ★ ◆क्या देश के "नेता / दोनो पार्टीयाँ"(देशी व विदेशी) काँर्पोरेट की मदद से आम जनता व मेरे देश "भारत को गुलाम" बना रहे है ? ◆70 वर्षो मे "कार्पोरेट" देश की जमीन, जल, जंगल, खनिज़, पर्यावरण, व्यापार, अर्थव्यवस्था, राजनीति, प्रशासन, न्याय, सरकार आदी पर "70% कब्जा" कर लिया है ! ◆अब करेन्सी (मुद्रा) पर बिट काँइन /"जियो काँइन" ला रहे है , तथा देश की मुद्रा के समानान्तर मुद्रा लाकर , नई मुद्रा पर कब्जा करने जा रहे है, तो भी क्यो हम "सभी मूकदर्शक" बने हुए है ? ◆2047 तक हम 100% गुलाम बनाने से कौन रोक सकता है ! ◆उपाय :- आम जनता 1795 दिन जाति, धर्म व पार्टी से ऊपर उठकर "मुद्दो व जनहित की समस्याओ" पर एकजुट होकर "देशहित मे संघर्ष" करने की आवश्यकता है ! ◆?◆?◆?◆?◆
Tuesday, 9 January 2018
★मेरे भारत मे लोकतन्त्र है ! तो आम जनता को सच जानने का अधिकार है !★ ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ 😢😢 आँख फाड देने वाला सच, पढ कर आप भी आश्चर्य चकित रह जायेगे ? 😳😳 ■■ 100 अरब रू. प्रतिवर्ष नेताओ पर खर्च , 100 रू. के लिए तरसे आम जनता ■■■■ •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• ★भारत में कुल 4120 MLA और 462 MLC हैं अर्थात कुल 4,582 विधायक। प्रति विधायक वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 2 लाख का खर्च होता है। अर्थात 91 करोड़ 64 लाख रुपया प्रति माह। इस हिसाब से प्रति वर्ष लगभग 1100 करोड़ रूपये। ◆◆◆◆◆ ★भारत में लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल 776 सांसद हैं। इन सांसदों को वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 5 लाख दिया जाता है। अर्थात कुल सांसदों का वेतन प्रति माह 38 करोड़ 80 लाख है। और हर वर्ष इन सांसदों को 465 करोड़ 60 लाख रुपया वेतन भत्ता में दिया जाता है। ★■■★अर्थात भारत के विधायकों और सांसदों (4582 + 776 = 5358) के पीछे भारत का प्रति वर्ष 15 अरब 65 करोड़ 60 लाख रूपये खर्च होता है। ये तो सिर्फ इनके मूल वेतन भत्ते की बात हुई। इनके आवास, रहने, खाने, यात्रा भत्ता, इलाज, विदेशी सैर सपाटा आदि का का खर्च भी लगभग इतना ही है। अर्थात लगभग 30 अरब रूपये खर्च होता है इन विधायकों और सांसदों पर। ◆◆◆◆◆◆ ★अब गौर कीजिए इनके सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के वेतन पर। एक विधायक को दो बॉडीगार्ड और एक सेक्शन हाउस गार्ड यानी कम से कम 5 पुलिसकर्मी और यानी कुल 7 पुलिसकर्मी की सुरक्षा मिलती है। 7 पुलिस का वेतन लगभग (25,000 रूपये प्रति माह की दर से) 1 लाख 75 हजार रूपये होता है। इस हिसाब से 4582 विधायकों की सुरक्षा का सालाना खर्च 9 अरब 62 करोड़ 22 लाख प्रति वर्ष है। ★इसी प्रकार सांसदों के सुरक्षा पर प्रति वर्ष 164 करोड़ रूपये खर्च होते हैं। ★Z श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त नेता, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए लगभग 16000 जवान अलग से तैनात हैं। जिन पर सालाना कुल खर्च लगभग 776 करोड़ रुपया बैठता है। ★इस प्रकार सत्ताधीन नेताओं की सुरक्षा पर हर वर्ष लगभग 20 अरब रूपये खर्च होते हैं। *अर्थात हर वर्ष नेताओं पर कम से कम [30 अरब वेतन व अन्य + 20 अरब सुरक्षा खर्च] कुल 50 अरब रूपये प्रतिवर्ष खर्च होते हैं। ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ★इन खर्चों में राज्यपाल, भूतपूर्व नेताओं के पेंशन, पार्टी के नेता, पार्टी अध्यक्ष , उनकी सुरक्षा आदि का खर्च शामिल नहीं है। [ कुल 50 अरब रूपये प्रतिवर्ष खर्च ] ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ◆ यदि उसे भी जोड़ा जाए तो ( 50 + 50 ) कुल प्रतिवर्ष खर्च लगभग 100 अरब रुपया ●●●●●●● हो जायेगा । ◆ अब सोचिये हम प्रति वर्ष नेताओं पर 100 अरब रूपये से भी अधिक खर्च करते हैं, बदले में " आम जनता " को क्या मिलता है ? ★■■■★ *क्या यही है लोकतंत्र ?* ★■■★ (यह 100 अरब रुपया हम भारत वासियों से ही टैक्स के रूप में वसूला गया होता है।) ◆◆ एक सर्जिकल स्ट्राइक यहाँ भी बनती है ! ◆◆ ◆◆ भारत में " दो कानून " अवश्य बनना चाहिए ! ◆◆ ● पहला - चुनाव प्रचार पर "प्रतिबंध" ! ★ नेता केवल टेलीविजन (टी वी) के माध्यम से प्रचार करें! ● दूसरा - नेताओं के वेतन भत्तो पर "प्रतिबंध" ! ★ ◆◆◆◆ | अब दिखाओ - देशभक्ति | ◆◆◆◆ प्रत्येक भारतवासी को •जागरूक होना• ही पड़ेगा और इस फिजूल खर्ची के खिलाफ •एकजुट होकर• बोलना पड़ेगा ?
Monday, 8 January 2018
★मेरे भारत मे लोकतन्त्र है ! तो आम जनता को सच जानने का अधिकार है !★ ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ 😢😢 आँख फाड देने वाला सच, पढ कर आप भी आश्चर्य चकित रह जायेगे ? 😳😳 ■■ 100 अरब रू. प्रतिवर्ष नेताओ पर खर्च , 100 रू. के लिए तरसे आम जनता ■■■■ •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• ★भारत में कुल 4120 MLA और 462 MLC हैं अर्थात कुल 4,582 विधायक। प्रति विधायक वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 2 लाख का खर्च होता है। अर्थात 91 करोड़ 64 लाख रुपया प्रति माह। इस हिसाब से प्रति वर्ष लगभग 1100 करोड़ रूपये। ◆◆◆◆◆ ★भारत में लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल 776 सांसद हैं। इन सांसदों को वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 5 लाख दिया जाता है। अर्थात कुल सांसदों का वेतन प्रति माह 38 करोड़ 80 लाख है। और हर वर्ष इन सांसदों को 465 करोड़ 60 लाख रुपया वेतन भत्ता में दिया जाता है। ★■■★अर्थात भारत के विधायकों और सांसदों (4582 + 776 = 5358) के पीछे भारत का प्रति वर्ष 15 अरब 65 करोड़ 60 लाख रूपये खर्च होता है। ये तो सिर्फ इनके मूल वेतन भत्ते की बात हुई। इनके आवास, रहने, खाने, यात्रा भत्ता, इलाज, विदेशी सैर सपाटा आदि का का खर्च भी लगभग इतना ही है। अर्थात लगभग 30 अरब रूपये खर्च होता है इन विधायकों और सांसदों पर। ◆◆◆◆◆◆ ★अब गौर कीजिए इनके सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के वेतन पर। एक विधायक को दो बॉडीगार्ड और एक सेक्शन हाउस गार्ड यानी कम से कम 5 पुलिसकर्मी और यानी कुल 7 पुलिसकर्मी की सुरक्षा मिलती है। 7 पुलिस का वेतन लगभग (25,000 रूपये प्रति माह की दर से) 1 लाख 75 हजार रूपये होता है। इस हिसाब से 4582 विधायकों की सुरक्षा का सालाना खर्च 9 अरब 62 करोड़ 22 लाख प्रति वर्ष है। ★इसी प्रकार सांसदों के सुरक्षा पर प्रति वर्ष 164 करोड़ रूपये खर्च होते हैं। ★Z श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त नेता, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए लगभग 16000 जवान अलग से तैनात हैं। जिन पर सालाना कुल खर्च लगभग 776 करोड़ रुपया बैठता है। ★इस प्रकार सत्ताधीन नेताओं की सुरक्षा पर हर वर्ष लगभग 20 अरब रूपये खर्च होते हैं। *अर्थात हर वर्ष नेताओं पर कम से कम [30 अरब वेतन व अन्य + 20 अरब सुरक्षा खर्च] कुल 50 अरब रूपये प्रतिवर्ष खर्च होते हैं। ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ★इन खर्चों में राज्यपाल, भूतपूर्व नेताओं के पेंशन, पार्टी के नेता, पार्टी अध्यक्ष , उनकी सुरक्षा आदि का खर्च शामिल नहीं है। [ कुल 50 अरब रूपये प्रतिवर्ष खर्च ] ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ◆ यदि उसे भी जोड़ा जाए तो ( 50 + 50 ) कुल प्रतिवर्ष खर्च लगभग 100 अरब रुपया ●●●●●●● हो जायेगा । ◆ अब सोचिये हम प्रति वर्ष नेताओं पर 100 अरब रूपये से भी अधिक खर्च करते हैं, बदले में " आम जनता " को क्या मिलता है ? ★■■■★ *क्या यही है लोकतंत्र ?* ★■■★ (यह 100 अरब रुपया हम भारत वासियों से ही टैक्स के रूप में वसूला गया होता है।) ◆◆ एक सर्जिकल स्ट्राइक यहाँ भी बनती है ! ◆◆ ◆◆ भारत में " दो कानून " अवश्य बनना चाहिए ! ◆◆ ● पहला - चुनाव प्रचार पर "प्रतिबंध" ! ★ नेता केवल टेलीविजन (टी वी) के माध्यम से प्रचार करें! ● दूसरा - नेताओं के वेतन भत्तो पर "प्रतिबंध" ! ★ ◆◆◆◆ | अब दिखाओ - देशभक्ति | ◆◆◆◆ प्रत्येक भारतवासी को •जागरूक होना• ही पड़ेगा और इस फिजूल खर्ची के खिलाफ •एकजुट होकर• बोलना पड़ेगा ?
Saturday, 6 January 2018
★हिन्दी के सेनानी भगवती प्रसाद देवपुरा जी की चतुर्थ पुण्यतिथी पर अर्पित श्रृद्वा सुमन - 06.01.2018★ ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ ■“हिंदी” के साथ “हिन्द” भी गुलामी की ओर !■ ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• ● हिंदी को हम ७० वर्षो में राष्ट्र भाषा नही बना सके क्योकि हम आज भी राजनेताओ , कॉर्पोरेट ,विदेशी मानसिकता ,एकजुट नही हो सकने की आदत के गुलाम है ! कहने को तो देश में लोकतंत्र है , किन्तु हकीकत में जनता के द्वारा राज तो है परन्तु न तो जनता का राज है व न जनता के लिए राज है ! ● हिंदी को उचित सम्मान दिलाने के लिए लड़ने वाले कई सेनानी है , कई लड़ रहे थे , कई अभी भी लड़ रहे है , उसमे से मेवाड़ का सतत , वीर, हिंदी सेनानी श्री भगवती प्रसाद जी देवपुरा थे, जिन्होने हिंदी की लिए लड़ाई शुरू की , उसे हमें अंतिम लक्ष्य व मुकाम तक पहुंचना है ! ● इसके लिए हमें एकजुट होने , विदेशी मानसिकता को छोड़ने , देश के कॉर्पोरेट का साथ लेकर विदेशी कॉर्पोरेट का सीमित बहिष्कार करने व राजनेताओ पर दबाव बनाने की आवश्यकता है ! हमें "प्रतिनिधि लोकतंत्र" की साथ "सहभागी लोकतंत्र" की स्थापना, आम जनता को "एकजुट होकर" करनी होगी ! ● यदि हम आज ऐसा नही कर पाए तो राजनेता “इंडस्ट्रियल कॉरिडोर” के माध्यम से "देश को गुलाम" बनाने की ओर बढ़ रहे है ! यदि राजनेता व कॉर्पोरेट सफल हो गए, तो " न हमारा देश स्वतंत्र रहेगा " व " न हमारी हिंदी स्वतंत्र रहेगी " ! CA. Dinesh Sanadhya = 06.01.2018 www.dineshapna.blogspot.in
Monday, 1 January 2018
★भारत मे 100 % लोकतन्त्र लागू हो , 2018 मे ! ★"प्रतिनिधी लोकतन्त्र" के साथ "सहभागिता लोकतन्त्र" हो ! ★आम जनता 1795 दिन जाति,धर्म व पार्टी से ऊपर उठकर "एकजुट" होकर "सहभागिता लोकतन्त्र" की स्थापना करे ! ★आम जनता चुनाव से "प्रतिनिधी चुनती" है, तो शेष 1795 दिन प्रत्येक जनहित कार्य व जन समस्याओ के लिए "सहभागिता कर" 100% लोकतन्त्र स्थापित करे ! CA.Dinesh Sanadhya = 01.01.2018 www.dineshapna.blogspot.in
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