Chartered Accountant,Social Activist,Political Analysist-AAP,Spritual Thinker,Founder of Life Management, From India, Since 1987.
Sunday, 24 November 2019
★नाथद्वारा मन्दिर मण्डल का सामाजिक अंकेक्षण★ ★श्रीकृष्ण का भीष्म पितामह से संवाद★ ★★हमारे लिए कलयुग मे शिक्षा★★ ★★पूरा पढ़ें ! समझे ! आत्मसात करें !★★ ■■■■■■■■■◆◆◆◆◆◆◆■■■■■■■■■ महाभारत युद्ध समाप्त हो चुका था. युद्धभूमि में द्वापर का सबसे महान योद्धा "देवव्रत" (भीष्म पितामह) शरशय्या पर पड़ा सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहा था... ! ◆तभी उनके कानों में परिचित ध्वनि पहुँची , "प्रणाम पितामह" .... !! ◆भीष्म बोले , "आओ देवकीनंदन ! मैं बहुत देर से तुम्हारा ही स्मरण कर रहा था" .... !! ◆कृष्ण बोले , "क्या कहूँ पितामह ! अब तो यह भी नहीं पूछ सकता कि कैसे हैं आप" .... ! ◆भीष्म ने कहा , "कुछ पूछूँ केशव .... ? सम्भवतः धरा छोड़ने के पूर्व मेरे अनेक भ्रम समाप्त हो जाय " .... !! ◆कृष्ण बोले - कहिये न पितामह ....! ◆भीष्म बोले , "एक बात बताओ कन्हैया ! इस युद्ध में जो हुआ वो ठीक था क्या .... ?" "किसकी ओर से पितामह .... ? पांडवों की ओर से .... ?" " कौरवों के कृत्यों पर चर्चा का तो अब कोई अर्थ ही नहीं कन्हैया ! पर क्या पांडवों की ओर से जो हुआ वो सही था .... ? आचार्य द्रोण का वध , दुर्योधन की जंघा के नीचे प्रहार , दुःशासन की छाती का चीरा जाना , जयद्रथ के साथ हुआ छल , निहत्थे कर्ण का वध , सब ठीक था क्या .... ? यह सब उचित था क्या .... ?" ◆कृष्ण: "इसका उत्तर मैं कैसे दे सकता हूँ पितामह .... ! इसका उत्तर तो उन्हें देना चाहिए जिन्होंने यह किया ..... !! उत्तर दें दुर्योधन का वध करने वाले भीम , उत्तर दें कर्ण और जयद्रथ का वध करने वाले अर्जुन .... !! मैं तो इस युद्ध में कहीं था ही नहीं पितामह .... !!" ◆भीष्म: "अभी भी छलना नहीं छोड़ोगे कृष्ण .... ? अरे विश्व भले कहता रहे कि महाभारत को अर्जुन और भीम ने जीता है , पर मैं जानता हूँ कन्हैया कि यह तुम्हारी और केवल तुम्हारी विजय है .... ! मैं तो उत्तर तुम्ही से पूछूंगा कृष्ण .... !" ◆कृष्ण: "तो सुनिए पितामह .... ! 【कुछ बुरा नहीं हुआ , कुछ अनैतिक नहीं हुआ .... ! वही हुआ जो हो होना चाहिए .... !"】 ◆भीष्म: "यह तुम कह रहे हो केशव .... ? मर्यादा पुरुषोत्तम राम का अवतार कृष्ण कह रहा है ....? यह छल तो किसी युग में हमारे सनातन संस्कारों का अंग नहीं रहा, फिर यह उचित कैसे गया ..... ? " ●●●●●●●●●●● ◆कृष्ण: ★★★★★★ 【"इतिहास से "शिक्षा" ली जाती है पितामह , पर "निर्णय" वर्तमान की परिस्थितियों के आधार पर लेना पड़ता है .... !】★★★★★ हर युग अपने तर्कों और अपनी आवश्यकता के आधार पर अपना नायक चुनता है .... !! ●राम त्रेता युग के नायक थे , ●मेरे भाग में द्वापर आया था .... ! हम दोनों का निर्णय एक सा नहीं हो सकता पितामह .... !!" ●●●●●●●●●●●● " नहीं समझ पाया कृष्ण ! तनिक समझाओ तो .... !" " राम और कृष्ण की परिस्थितियों में बहुत अंतर है पितामह .... ! ●राम के युग में खलनायक भी ' रावण ' जैसा शिवभक्त होता था .... !! तब रावण जैसी नकारात्मक शक्ति के परिवार में भी विभीषण जैसे सन्त हुआ करते थे ..... ! तब बाली जैसे खलनायक के परिवार में भी तारा जैसी विदुषी स्त्रियाँ और अंगद जैसे सज्जन पुत्र होते थे .... ! उस युग में "खलनायक भी धर्म का ज्ञान" रखता था .... !! इसलिए राम ने उनके साथ कहीं ◆"छल नहीं किया" .... ! ● किंतु मेरे युग के भाग में में कंस , जरासन्ध , दुर्योधन , दुःशासन , शकुनी , जयद्रथ जैसे "घोर पापी" आये हैं .... !! उनकी समाप्ति के लिए हर ◆ "छल उचित है" पितामह .... ! पाप का अंत आवश्यक है पितामह , वह चाहे जिस विधि से हो .... !!" ●भीष्म: "तो क्या तुम्हारे इन निर्णयों से गलत परम्पराएं नहीं प्रारम्भ होंगी केशव .... ? क्या भविष्य तुम्हारे इन छलों का अनुशरण नहीं करेगा .... ? और यदि करेगा तो क्या यह उचित होगा ..... ??" ●कृष्ण: " भविष्य तो इससे भी अधिक नकारात्मक आ रहा है पितामह .... ! कलियुग में तो इतने से भी काम नहीं चलेगा .... ! ●●●●●●वहाँ मनुष्य को कृष्ण से भी अधिक कठोर होना होगा .... नहीं तो धर्म समाप्त हो जाएगा .... !●●●●●● जब क्रूर और अनैतिक शक्तियाँ सत्य एवं धर्म का समूल नाश करने के लिए आक्रमण कर रही हों, तो नैतिकता अर्थहीन हो जाती है पितामह .... ! तब महत्वपूर्ण होती है "विजय" , केवल "विजय" .... ! भविष्य को यह सीखना ही होगा पितामह ..... !!" ●भीष्म: "क्या धर्म का भी नाश हो सकता है केशव .... ? और यदि धर्म का नाश होना ही है , तो क्या मनुष्य इसे रोक सकता है ..... ?" ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ ●कृष्ण: "सबकुछ ईश्वर के भरोसे छोड़ कर बैठना मूर्खता होती है पितामह .... ! ईश्वर स्वयं कुछ नहीं करता ..... !केवल मार्ग दर्शन करता है। सब मनुष्य को ही स्वयं करना पड़ता है .... ! आप मुझे भी ईश्वर कहते हैं न .... ! तो बताइए न पितामह , मैंने स्वयं इस युद्घ में कुछ किया क्या ..... ? सब पांडवों को ही करना पड़ा न .... ? यही प्रकृति का संविधान है .... ! ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ युद्ध के प्रथम दिन यही तो कहा था मैंने अर्जुन से .... ! यही परम सत्य है ..... !! भीष्म अब सन्तुष्ट लग रहे थे .... ! उनकी आँखें धीरे-धीरे बन्द होने लगीं थी .... ! उन्होंने कहा - चलो कृष्ण ! यह इस धरा पर अंतिम रात्रि है .... कल सम्भवतः चले जाना हो ... अपने इस अभागे भक्त पर कृपा करना कृष्ण .... !" ●कृष्ण ने मन मे ही कुछ कहा और भीष्म को प्रणाम कर लौट चले , पर युद्धभूमि के उस डरावने अंधकार में भविष्य को जीवन का सबसे बड़ा सूत्र मिल चुका है। ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ "जब अनैतिक और क्रूर शक्तियाँ सत्य और धर्म का विनाश करने के लिए आक्रमण कर रही हों, तो नैतिकता का पाठ आत्मघाती होता है ....।।" ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ CA. Dinesh Sanadhya - 24.11.2019 www.dineshapna.blogspot.com
Saturday, 23 November 2019
★★★★आओ ! जागो ! आवाज़ उठाओ !★★★★ ★★ श्रीजी अपने है ! नाथद्वारा अपना है ! ★★ ◆मन्दिर मण्डल की "जमीन व धन" का उपयोग आम जनहित मे उपयोग करने के स्थान पर लापरवाही कर जिम्मेदार लोग "नुकसान" पहुंचा रहे है ! ◆आम जनता की समस्या "पार्किंग" व "दुकानों से रोजगार" की ओर किसी का ध्यान नहीं है ! जबकि मन्दिर की जमीन व पैसों से इसका समाधान हो सकता था ! ◆जिम्मेदार (मन्दिर मण्डल बोर्ड व बोर्ड मेम्बर्स) "चुप व लापरवाह" है, इसलिए "हमें बोलना ही होगा" ! ◆क्यों नहीं, वल्लभ विलास, नाथद्वारा का सामाजिक अंकेक्षण हो ! ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ■जो "असहमत" हो, केवल वह ही "Comment" करें ! ■जो "सहमत" हो, वह "shreeji 24365@gmail.com" पर मेल करें ! CA. Dinesh Sanadhya - 24.11.2019 www.dineshapna.blogspot.com
Thursday, 21 November 2019
★एक गुण (100%) से सभी गुण अपने आप !★ ★★★★★★★★★"प्रेम"★★★★★★★★★ भक्तिरसामृतसिन्धु में भगवान् "श्री कृष्ण" के 64 गुण बताए गए हैं , जो इस प्रकार हैं : - (1) सम्पूर्ण शरीर का सुन्दर स्वरूप (2) समस्त शुभ गुणों से अंकित (3) अतिव रूचिर (4) तेजवान (5) बलवान (6) नित्य युवा (6) अद्भुत भाषाविद् (8) सत्यवादी ★ (9) मधुर भाषी ★ (10) वाक् पटु (11) सुपण्डित (12) अत्यधिक बुद्धिमान् (13) प्रतिभावान् (14 ) विदग्ध (15) अतिव चतुर (16) दक्ष (17) कृतज्ञ ★ (18) दृढ़संकल्प ★ (19) काल तथा परिस्थियों के कुशल निर्णायक (20) वेदों या शास्त्रों के आधार पर देखने एवं बोलने वाले (21) पवित्र (22) आत्मसंयमी (23) स्थिर (24) सहिष्णु (25) क्षमावान् ★ (26) गंभीर ★ (27) धैर्यवान् ★ (28) समदृष्टि रखने वाले (29) उदार (30) धार्मिक (31) शूरवीर (32) दयालु (33) सम्मान करने वाले (34) भद्र (35) विनयी (36) लज्जावान् (37) शरणागत पालक (38) सुखी (39) भक्तों के हितैषी ★ (40) प्रेमवश्य ★ (41) सर्वमंगलमय (42) परम शक्तिमान् (43) परमयशस्वी (44) लोकप्रिय (45) भक्तों का पक्ष लेने वाले (46) समस्त स्त्रियों के लिए अत्यधिक आकर्षक (47) सर्व आराध्य (48) सर्व सम्पन्न (49) सर्व सम्मान्य (50) परम नियंता (51) परिवर्तन रहित (52) सर्वज्ञ (53) चिर नूतन (54) सच्चिदानंद(सदैव नित्य आनन्दमय शरीरवाले) (55) समस्त योग सिद्धियों से युक्त । (56) वे अचिंत्य शक्तिमय हैं.. (57) उनके शरीर से असंख्य ब्रह्माण्ड उत्पन्न होते हैं.. (58) समस्त अवतारों के उद्गम वे ही हैं.. (59) वे अपने द्वारा मारे हुए शत्रुओं को भी मुक्ति देने वाले हैं.. (60) वे मुक्तात्माओं के लिए आकर्षक हैं । (61) वे अद्भुत लीलाओं के कर्ता हैं ( विशेष कर उनकी बाल लीलाएं) (62) वे अद्भुत भगवत् से युक्त भक्तों द्वारा घिरे रहते हैं (63) वे अपनी वंशी से सारे जीवों को आकृष्ट कर सकते हैं (64) उनका रूप सौंन्दर्य अद्भुत है जो सारी सृष्टि में अद्वितीय है। इन 64 असाधारण गुणों से युक्त श्री कृष्ण 64 कला से भी परिपूर्ण हैं। ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ ■ हम कुछ सीखें , अपने जीवन मे आत्मसात करें ! ■ उक्त 64 मेसे 9 गुण अपना सकते है ! ■ इन 9 गुणों मे से कोई एक गुण को 100% अपना ले , तो शेष 8 गुण अपने आप आत्मसात हो जाते है ! ■ मै केवल एक गुण "प्रेम" को आत्मसात करने का प्रयास कर रहा हूँ ! (१) हम "सत्य" का साथ दे ! ★ (२) हम "मधुर भाषी" बने ! ★ (३) हम "कृतज्ञ" बने ! ★ (४) हम "दृढ़संकल्प" के साथ कार्य करे ! ★ (५) हम "क्षमावान्" बने ! ★ (६) हम अपने कार्य के प्रति "गंभीर" बने ! ★ (७) हम "धैर्यवान्" बने ! ★ (८) हम आम जन के "हितैषी" बने ! ★ (९) हम सभी से "प्रेम" करें ! ★ ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● CA. Dinesh Sanadhya - 21/11/2019 www.dineshapna.blogspot.com #dineshapna #nathdwara
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