Monday, 2 March 2026

★ *आओ! होली खेले — चार रंगों से, लोकतंत्र के चार स्तम्भों के संग!* ★ होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि जागरूकता, साहस और जिम्मेदारी का प्रतीक है। *लोकतंत्र के चार स्तम्भ—विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया* —जब अपने दायित्वों का पूर्ण निर्वहन करें, तभी सच्चे अर्थों में “रंगों की होली” सार्थक होती है। आज आवश्यकता है कि हम प्रश्न करें— 🔹 *मिलावट* के विरुद्ध सख्त कार्रवाई क्यों नहीं? खाद्य सुरक्षा कानूनों का प्रभावी पालन कहाँ है? 🔹 *अतिक्रमण* पर मौन समर्थन या निष्क्रियता क्यों? सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा कौन करेगा? 🔹 *भ्रष्टाचार* के मामलों में ठोस, पारदर्शी और समयबद्ध कार्यवाही क्यों नहीं? 🔹 *शिक्षा व स्वास्थ्य* जैसे पवित्र क्षेत्रों में माफिया तत्वों पर नियंत्रण कब और कैसे? लोकतंत्र में *मौन भी एक प्रकार की सहभागिता बन जाता है।* यदि चारों स्तम्भ अपनी संवैधानिक मर्यादा और उत्तरदायित्व निभाएँ, तो समाज में पारदर्शिता, न्याय और विश्वास का रंग स्वतः गाढ़ा होगा। आइए इस होली पर हम संकल्प लें— *मौन नहीं, जागरूकता का रंग लगाएँ।* *समर्थन नहीं, सत्य का साथ निभाएँ।* और *लोकतंत्र के चारों स्तम्भों को सशक्त, उत्तरदायी व पारदर्शी बनाने में* सक्रिय नागरिक बनें। यही होगी सच्ची लोकतांत्रिक होली। 🌸 *बुरा मत मानो, होली है!* 🌸 *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#प्रथम निर्वाचित चेयरमैन - राजसमन्द ब्रांच आईसीएआई* (100) #02/03/2026 #dineshapna


 

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