Sunday, 22 March 2026

★ *आम आदमी को मूर्ख कब तक बनाओगे?* ★ *तम्बाकू पर भाषण भारी,* *बच्चों से नाटक करवाते हैं,* “ये ज़हर है”—ये सिखलाकर, पीछे से खुद बिकवाते हैं। *जन-जन से जुर्माना वसूलें,* *“कानून का पालन करना है”,* और उसी धुएँ की कमाई से, खज़ाना भी तो भरना है! ये कैसी नीति, कैसी रीत, जहाँ सच भी झुक जाता है, *मेहनत जनता करती पूरी,* *फल कोई और ही खाता है।* *कब तक यूँ ही चलता रहेगा,* *दोहरी नीति का ये व्यापार?* एक हाथ से रोपण करवाओ, दूजे से काटो हर बार! *तम्बाकू पर नीति स्पष्ट हो,* *या तो पूर्ण प्रतिबंध लगे,* या फिर सच में नियंत्रण हो, दोहरी चाल अब बन्द लगे। जब नीति में ईमान दिखेगा, तभी बदलेगा देश हमारा, *वरना यूँ ही चलता रहेगा,* *“मूर्ख बनाओ”—ये खेल सारा।* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य (अपना)* #एक क्रांतिवीर कवि (6) #22/03/2026 #dineshapna


 

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