Saturday, 16 May 2026

★ *श्रीनाथजी मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त हो !* ★ — (आस्था, अधिकार और उत्तरदायित्व का प्रश्न) — नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि *वल्लभ सम्प्रदाय की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत केंद्र है।* सदियों से यह मंदिर “सेवा ही साधना” की भावना के साथ वल्लभ कुल एवं वैष्णव समाज द्वारा संचालित धार्मिक मर्यादाओं का प्रतीक रहा है। गोवर्धन से मेवाड़ तक *श्रीनाथजी की यात्रा केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि धर्म और परंपरा की रक्षा का इतिहास है।* महाराणा राज सिंह जी के संरक्षण में स्थापित यह मंदिर सदैव धार्मिक स्वायत्तता और श्रद्धा का केंद्र रहा, किन्तु *वर्तमान में “नाथद्वारा मंदिर मंडल अधिनियम, 1959” के अंतर्गत सरकारी नियंत्रण में है।* भारतीय *संविधान के अनुच्छेद 25 से 28* प्रत्येक धार्मिक सम्प्रदाय को अपने धर्म और धार्मिक संस्थानों के संचालन की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं। ऐसे में किसी विशिष्ट हिन्दू मंदिर पर निरंतर सरकारी नियंत्रण धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांत पर प्रश्न खड़े करता है। चिंता का विषय यह भी है कि *सरकारी नियंत्रण के बावजूद मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा, दानराशि के पारदर्शी उपयोग एवं प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर समय-समय पर प्रश्न उठते रहे हैं।* श्रद्धालुओं की अपेक्षा है कि ठाकुरजी को अर्पित धन धर्म, सेवा, गौसंरक्षण, संस्कृत शिक्षा और जनकल्याण में समर्पित हो। अतः समय की मांग है कि श्रीनाथजी मंदिर को *सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर, वल्लभ कुल एवं बृजवासी समाज की परंपरानुसार* एक पारदर्शी, उत्तरदायी और धर्मसम्मत व्यवस्था स्थापित की जाए। यह *केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि आस्था के सम्मान, परंपरा की रक्षा और श्रद्धालुओं के विश्वास की पुनर्स्थापना का प्रश्न है।* “श्रीनाथजी की सेवा, श्रीनाथजी की मर्यादा के अनुसार हो — यही प्रत्येक भक्त की भावना है।” *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (117) #16/05/2026 #dineshapna




 

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