Tuesday, 12 May 2026

★ *स्वतंत्र भारत में सनातन समाज के अधिकार* ★ *भारत की सनातन संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध परम्पराओं में से एक है।* हमारे मन्दिर केवल पूजा-स्थल नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक जीवन के केन्द्र रहे हैं। इतिहास साक्षी है कि *आक्रांताओं ने हमारी आस्था को कमजोर करने हेतु सबसे पहले मन्दिरों को लूटा, तोड़ा, हमारी शिक्षा और जीवन-पद्धति को नष्ट करने का प्रयास किया तथा अनेक लोगों को अत्याचार सहने पड़े।* किन्तु *आज हम स्वतंत्र भारत के नागरिक हैं। हमारा Constitution of India हमें समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार देता है।* *अनुच्छेद 14* सभी को समानता का अधिकार देता है, जबकि *अनुच्छेद 25 एवं 26* हमें अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक संस्थाओं के स्वतंत्र संचालन का अधिकार प्रदान करते हैं। ऐसी स्थिति में *यह अपेक्षा न्यायसंगत है कि सनातन समाज, उसके मन्दिरों और धार्मिक संस्थानों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव या अन्याय न हो।* हमें अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक होकर, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपने जनप्रतिनिधियों से न्याय और समानता की मांग करनी चाहिए। *इतिहास ने हमें संघर्ष सिखाया है, और संविधान ने हमें अधिकार दिए हैं* — अब समय है जागरूक होकर अपने अधिकार प्राप्त करने का। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (116) #12/05/2026 #dineshapna


 

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