Thursday, 31 October 2024

★दीपावली व राष्ट्रीय एकता दिवस पर आप सभी को "हार्दिक" - "हार्दिक" शुभकामनाएं !★ 【भगवान श्रीराम के "विजयोत्सव" के साथ राष्ट्रीय "एकता दिवस" पर एकजुट हो !】 (१) ◆भगवान श्रीराम के 14 वर्षों के वनवास व लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने की खुशी मे मनाया जाता है ! ◆भगवान श्रीविष्णु के नरसिंह अवतार व ◆श्रीलक्ष्मी माता के जन्मदिन के रूप मे मनाया जाता है ! (२) दीपावली का मतलब है 'दीपों की पंक्ति' और इसे अंधकार पर प्रकाश की विजय, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है ! इसके साथ ही यह त्यौहार एकता का सन्देश भी देता है ! अनेक दीपक के पंक्तिबध्द होकर "एकता" से प्रकाश पूँन्ज ! सभी व्यक्ति सामूहिकता के साथ मनाकर "एकता" का सन्देश देते है ! (३) इस 2024 मे सुखद अवसर है कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद भारत की 562 रियासतों का एकीकरण कर एक सशक्त और अखंड भारत की नींव रखी थी। उनके इसी योगदान से 31 अक्टूबर को उनके जन्मदिन को "राष्ट्रीय एकता दिवस" के रूप में मनाकर लोगों के बीच राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है ! (४) अतः 2024 की दीपावली पर ◆भगवान श्रीराम के आगमन ◆भगवान श्रीविष्णु के नरसिंह अवतार ◆श्रीलक्ष्मी माता के जन्मदिन ◆सरदार वल्लभभाई पटेल के जन्मदिन ! को ●आध्यात्मिक एकता, ●सांस्कृतिक एकता, ●आर्थिक एकता ●राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप मे मनाने के साथ हम स्वयं भी शेष 364 दिन सभी सनातनी एकजुट रहे ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(194) #31/10/24 #dineshapna


 

Wednesday, 30 October 2024

★रुप चतुर्दशी व नरक चतुर्दशी पर आप सभी को "हार्दिक" - "हार्दिक" शुभकामनाएं !★ 【भगवान वामन व श्रीकृष्ण की पूजा करने के साथ भगवान के किये कार्यो को स्वयं करे !】 (१) "सतयुग" में भक्त प्रहलाद के पौत्र हुए थे दैत्यराज बलि ! राजा बलि ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया तो सभी देवताओं ने भगवान विष्णु के पास मदद मांगने पहुंचे। भगवान विष्णु ने देवमाता अदिति के यहां "वामन" अवतार लेकर देवताओं को भय मुक्त किया ! (★रुप चतुर्दशी को दिये जलाये !) (२) "द्वापरयुग" मे भगवान "श्री कृष्ण" ने अत्याचारी, दुराचारी व दु्र्दांत असुर "नरकासुर" का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कराके उन्हें सम्मान प्रदान किया था ! (★नरक चतुर्दशी को दिये जलाये !) (३) "कलयुग" मे हम सतयुग व द्वापरयुग से आजतक हम दिये जला कर श्री विष्णु के दोनो अवतारो "वामन" व "श्रीकृष्ण" की पूजा करके यह बताया जा रहा है कि ●दैत्यराज "बलि" से मुक्ति दिलाकर "देवताओं को भय मुक्त किया व ●दुराचारी दु्र्दांत असुर "नरकासुर" मे 16100 कन्याओं को भय मुक्त किया ! इसलिए हम "कलयुग" मे "वामन भगवान" व "श्रीकृष्ण भगवान" की पूजा करने के साथ उनके चरित्र को भी आत्मसात करे ! अधर्म /अनीति करने वालों को नाश करने के लिए श्री विष्णु के अवतार लेने का इन्तजार करने के स्थान पर स्वयं आगे आकर "कानून का हथियार" उठाकर अधर्म /अनीति करने वालों का नाश करें ! (★भगवान वामन व श्रीकृष्ण ने अधर्म /अनीति का नाश किया !) (४) "कलयुग" मे व्यक्ति को क्या करना है ? उसका सन्देश "द्वापरयुग" मे ही "महाभारत" मे अर्जुन को गीता का उपदेश देकर स्पष्ट कर दिया कि अधर्म / अनीति का नाश तुम स्वयं को ही करना है, भगवान श्रीकृष्ण तो केवल मार्गदर्शक व सारथी मात्र है ! इसके साथ यह भी सन्देश दिया कि अधर्म / अनीति पर चलने वाला भले ही आपका भाई, पितामह, सगे- सम्बन्धी व गुरु भी क्यों न हो ? आपको अधर्म / अनीति करने वालों से युद्ध करना है ! यह तुम्हारा कर्म है, उसे बिना फल / परिणाम की ईच्छा रखें करना है ! (★स्वयं ही अधर्म /अनीति का नाश करे !) सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(193) #30/10/24 #dineshapna


 

Tuesday, 29 October 2024

★धनतेरस व आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की जयंती पर आप सभी को "हार्दिक" - "हार्दिक" शुभकामनाएं !★ 【●धन के साथ आरोग्य मिले ! ●इसके लिए "मिलावट" करना छोड़े ! ●प्रार्थना /पूजा के साथ स्वयं अपने मे बदलाव करें !】 (१) सनातन धर्म मे "धन" व "आरोग्य" दोनो ही देवी व देवता की पूजा इसलिए की जाती है कि व्यक्ति को जीवन मे धन व आरोग्य दोनों की एक साथ आवश्यकता है ! केवल धन ही कमाते रहेंगे और स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखेगे, तो वह धन भी किसी काम का नहीं रहेगा ! (२) किन्तु वर्तमान मे व्यक्ति केवल "धन" कमाने की अन्धी दौड़ मे लगा हुआ है कि वह स्वास्थ्य का भी ध्यान नहीं रखता है तो ऐसा धन किस काम का ! व्यक्ति तो इससे भी नीचे गिर गया है कि "मिलावट" खाद्य पदार्थों, दवाइयों व अन्य सभी मे करके दूसरों का भी स्वास्थ्य खराब कर रहा है ! इस प्रकार "धन" कमाने मे स्वयं का व "मिलावट" करके दूसरों का स्वास्थ्य खराब करके धन कमा रहा है, तो ऐसा "धन" किस काम का है ? (३) इससे भी ज्यादा वर्तमान मे "मिलावट" दो प्रकार से कर रहा है :- ◆ खाद्य पदार्थों मे मिलावट से "शारिरिक स्वास्थ्य" खराब कर रहा है ! ◆ व्यवहार मे मिलावट से "मानसिक स्वास्थ्य" खराब कर रहा है ! इस प्रकार दोनों (शारिरिक व मानसिक) तरह से व दोनों (स्वयं व दूसरे व्यक्तियो) का शरीर का स्वास्थ्य खराब करके धन कमा रहे है, जो गलत है ! (४) अतः आज धनतेरस व आरोग्य दिवस पर भगवान धन्वंतरि जयंती पर हम सभी के जीवन में सुख, समृद्धि व धन सहित स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए भगवान से प्रार्थना करने के साथ स्वयं "मिलावट" नहीं करने का संकल्प ले ! ऐसा करने पर ही हमें "धन" व "आरोग्य" दोनों मिलेंगे ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(192) #29/10/24 #dineshapna


 

Monday, 28 October 2024

★सत्य (सही) को सत्य (सही) व झूठ (गलत) को झूठ (गलत) कहे !★ 【सनातन धर्म (पूरी दुनिया के लिए) व भारतीय संविधान (केवल देश के लिए) है !"】 (१) "सनातन धर्म" एक सुखी, आदर्श व सह अस्तित्व के साथ जीवन जीने की पद्वति है ! "जीयो और जीने दो" का उद्देश्य है ! इसमें प्रेम, शान्ति, सहयोग व सह अस्तित्व के लिए अपने धर्म के साथ दूसरे धर्म / प्रकृति / पशु पक्षियों का भी सम्मान किया जाता है इसलिए "वसुदेव कुटुम्ब" व "सर्वे भवन्तु सुखिनः" का सन्देश व सिद्धांत है ! अतः "सनातन धर्म" पूरी दुनिया के लिए व हित मे मान्य व स्वीकार्य है ! (२) इसके विपरीत "अन्य मजहब / सम्प्रदाय" की मान्यता का क्षेत्र सीमित है ! जैसे :- इस्लाम भी प्रेम, शान्ति, सहयोग व भाईचारा की बात तो करते है किन्तु वह सभी केवल अपने इस्लाम मजहब के लोगों तक ही सीमित है और अन्य धर्म / मजहब / सम्प्रदाय के लोगों से नफरत के साथ उन्हें समाप्त करने की बात करते है जो गलत है ! क्योंकि इस्लाम के अनुसार अल्लाह एक है तो उन्होंने ही हिन्दू व अन्य मजहब के लोगों को जन्म दिया है तो उनसे नफरत व उन्हें मिटाने की बात करना गलत होकर अल्लाह के कार्य मे रुकावट डालना है !इसलिए इस्लाम की मान्यता सीमित होने के साथ भारतीय संविधान के भी विपरीत है ! जैसेकि "नींबू मे यदि बीज नहीं होता तो नींबू अमृत हो जाता" ! उसी प्रकार इस्लाम मे से "अन्य धर्मों से नफरत" नामक "एक बीज" नहीं हो तो यह इस्लाम भी "अमृत के समान सर्वजनहिताय" हो सकता है ! (३) भारतीय संविधान भी बहुत अच्छा है किन्तु उसमें भी "एक बीज" यह है कि जनप्रतिनिधियों / नेताओं ने "संविधान के विपरीत कानून" बना रखे है, जो गलत है ! यदि उक्त बीज को हटा दिया जाये तो "भारतीय संविधान व उनके कानून" भी "अमृत के समान सर्वजनहिताय" हो सकते है ! (४) "सनातन धर्म", "इस्लाम" व "भारतीय संविधान" मे उक्त "एक असमानता" (एक बीज) के अलावा अन्य मुख्य ग्यारह (11) समानताएं है ! जैसे :- 【"सनातन धर्म" मे ●एक सर्वशक्तिमान ईश्वर, ●धर्म कर्तव्य, ●कर्म, ●आत्मा, ●जन्म मरण का चक्र, ●वेद व शास्त्र, ●योग, ●भक्ति, ●उपासना, ●दान, ●परोपकार आदि है !】 【"इस्लाम" मे ●एक सर्वशक्तिमान अल्लाह (तौहीद), ●धर्म पैगम्बर मे विश्वास (नबूवत), ●कर्म (अल्लाह के बताये कार्य), ●आत्मा (पुनर्जीवित किया जाना), ●परलोक मे विश्वास (आख़िरत) ●ईश्वरीय ग्रंथ (कुरआन), ●योग(अल्लाह के समक्ष अर्ज), ●प्रार्थना (नमाज़), ●उपवास (रोज़ा), ●दान (ज़कात), ●तीर्थयात्रा (हज) आदि है !】 【"भारतीय संविधान" मे ●एक सर्वशक्तिमान संविधान, ●संविधान प्रदत्त कर्तव्य, ●सभी के अधिकार व कार्य, ●संविधान देश की आत्मा, ●संविधानिक संस्थाओं का कानूनी चक्र, ●कानून व नियम, ●संविधान की रक्षा व समीक्षा के लिए न्यायालय, ●प्रत्येक नागरिक को पालन करना आवश्यक, ●संविधान / कानून मे नवीन या परिवर्तन की कानूनी प्रक्रिया, ●कानून की पालना व कार्य के लिए न्यायालय व कार्यपालिका , ●जनहित मे जनप्रतिनिधियों के द्वारा कानून बनाना व परिवर्तन करना आदि है !】 सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(191) #28/10/24 #dineshapna


 

Sunday, 20 October 2024

★सत्य (सही) को सत्य (सही) व झूठ (गलत) को झूठ (गलत) कहे !★ 【प्रेम, शान्ति, अहिंसा व भाईचारा कायम करने के लिए "चार" आवश्यक बिन्दु !】 (१) भारत मे ●"संविधान व कानून" सभी के लिए समान हो ! ●प्रत्येक कानून संविधान के अनुरूप हो ! ●कानून की पालना कठोरता व निष्पक्षता से हो ! ●न्याय सभी के लिए शीघ्र, सस्ता, सुलभ व पारदर्शी हो ! (२) भारत देश "संविधान" से चलता है तो "सनातन" से "देश व दुनिया" दोनों चल सकती है ! क्योंकि प्रेम, शान्ति, अहिंसा व भाईचारा की स्थापना केवल "सनातन" से ही संभव है ! (३) भारत मे "संविधान" लोगो के द्वारा बनाया गया है, तो उसमें सुधार व संशोधन की आवश्यकता हो सकती है ! किन्तु "सनातन" तो शास्वत व हजारों साल पुराना है, तो इसमें सुधार व संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है ! इसलिए भारत को "सनातन देश" बनाना चाहिए, जिससे देश व पूरी दुनिया मे प्रेम, शान्ति, अहिंसा व भाईचारा कायम हो सके ! (४) भारत को "सनातन देश" बनाने से देश मे प्रेम, शान्ति, अहिंसा व भाईचारा कायम होगा व सभी धर्मों व सम्प्रदायों का सम्मान होगा ! भ्रष्टाचार व साम्प्रदायिक हिंसा का अन्त होगा ! तब ही हम विश्व गुरु बनकर "वसुदेव कुटुम्ब" व "सर्वे भवन्तु सुखिनः" का सन्देश दुनिया को दे सकेंगे ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(189) #20/10/24 #dineshapna