Sunday, 10 November 2024

★आम जनता "वोट व नोट" देकर देती है - कार्य शक्ति ! "कुछ नेता व अधिकारी / सक्षम लोग" कार्य करते है - स्वयं के लिए !★ 【कुल (-) कुछ (=) शेष !】 【शेष (+) शेष (=) सर्वश्रेष्ठ !】 [श्रीकृष्ण बने ! जनहित के लिए एक बने !] (१) आम जनता भारत के लोकतंत्र मे "राजा" होता है, किन्तु उसे "बन्धुआ मजदूर" बना रखा है ! उसे केवल "वोट व नोट" देने वाला बना रखा है ! उसे नेताओं को "वोट" देने, अधिकारियों को "नोट" देने व सक्षम लोगों के "नोट व श्रम" देने वाली मशीन बना रखा है ! इसके बावजूद उसे अपना कार्य करवाने के लिए नेताओं व अधिकारियों के सामने "भीख" माँगनी पडती है क्योंकि काम तो सक्षम लोग / नेता / अधिकारी के ही कार्य होते है ! उसे न्याय के लिए उक्त व्यक्तियो के साथ न्यायालय के चक्कर लगाने पड़ते है ! (२) इसके विपरीत "कुछ नेता / अधिकारी / सक्षम लोग" आम जनता व सरकारी धन / सम्पत्तियों को लूटते व लूटाते है व भ्रष्टाचार करते है ! इसके साथ ही धन व पद के प्रभाव से न्याय को भी प्रभावित करके आम जनता के साथ अन्याय करते है ! (३) अतः आम जनता को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की जरूरत है ! एक रहने के साथ अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की आवश्यकता है ! (४) इसके लिए प्रत्येक गाँव / वाडँ स्तर पर संगठन बनाकर समस्याओं / अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की जरूरत है व स्वयं को "श्रीकृष्ण" बनने की जरूरत है ! ★आम जनता को जाति, समाज, धर्म व राजनैतिक पार्टीयो से ऊपर उठकर •जनहित को सर्वोपरि मानते हुए •एकता के साथ कार्य करना होगा !★ ■इसके लिए मै तैयार हूँ, आपका क्या निर्णय है ?■ ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(199) #10/11/24 #dineshapna






 

Saturday, 9 November 2024

★आम जनता "वोट व नोट" देकर देती है - कार्य शक्ति ! "कुछ नेता व अधिकारी / सक्षम लोग" कार्य करते है - स्वयं के लिए !★ 【कुल (-) कुछ (=) शेष !】 【शेष (+) शेष (=) सर्वश्रेष्ठ !】 (१) सक्षम लोग (धन से, पद से, नेताओं के सम्बंध से, व्यापार से) सक्षम बनते है ! यह आम जनता के द्वारा धन / वोट / टैक्स देने के कारण व अन्याय सहन करके चुप रहने के कारण ऐसा सम्भव होता है ! (२) धन से सक्षम बनने के लिए कुछ लोग व्यापार मे बैंक से लोन लेते है तो कुछ लोग बिक्री से कमाई करते है, भ्रष्टाचार करते है, टैक्स चोरी करते है, सरकारी सम्पत्ति लूटते है, मिलावट करते है, कानून विरुद्ध कार्य करते है व आदि ! इन सभी के पिछे धन व सम्पत्ति का योगदान तो केवल आम जनता का ही होता है ! (३) आम जनता वोट देकर नेताओं को पद देते है किन्तु कुछ नेता धन लूटने के लिए अपने आस पास के कुछ व्यक्तियों को रखते है ! ऐसी स्थिति मे उक्त कुछ व्यक्तियों का उद्देश्य धन कमाना है जो आम जनता के हक को हड़प के "सक्षम लोग" बन जाते है और आम जनता को लूटते है ! (४) अतः कुछ सक्षम लोग आम जनता से धन / वोट लेकर नेताओं / अधिकारियों के साथ मिलकर आम जनता को ही लूटते है ! कुछ सक्षम लोग एकजुट होकर आम जनता के असंगठित होने व चुप्पी का फायदा उठाकर लूटते व लूटाते है ! ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(198) #09/11/24 #dineshapna


 

Wednesday, 6 November 2024

★आम जनता "वोट व नोट" देकर देती है - कार्य शक्ति ! "कुछ नेता व अधिकारी / सक्षम लोग" कार्य करते है - स्वयं के लिए !★ 【कुल (-) कुछ (=) शेष !】 【शेष (+) शेष (=) सर्वश्रेष्ठ !】 (१) आम जनता नोट (टैक्स) देती है उस टैक्स के धन से ही "अधिकारियों" को वेतन मिलता है जिससे उनका घर खर्च चलता है ! इसके साथ ही अधिकारियों को नौकरी मिलने के साथ "जनहित" के कार्य करने की सपथ दिलाई जाती है किन्तु हकीकत मे कुछ अधिकारी "जनहित" के स्थान पर "स्वहित" या नेताओं के हित या सक्षम लोगों के हित के कार्य करते है ! जनहित के कार्य केवल दिखावा मात्र के लिए करते है ! (२) "कुछ अधिकारी" स्वहित / नेताओं के हित / सक्षम लोगों के हित के कार्य 80% करते है, और आम जनता के हित के कार्य केवल 20% ही करते है ! जबकि आम जनता कुल आबादी की 99% है और नोट (टैक्स) के रुप मे 80% से ज्यादा धन देती है, इसमें प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष टैक्स शामिल है ! (३) आम जनता को यह बताया जाता है कि सरकारी टैक्स भुगतान मे 50% से ज्यादा हिस्सेदारी "सक्षम लोग" (कारपोरेट / बडे व्यापारीयो) की है जो पूर्णतः गलत है ! क्योंकि भारत मे टैक्स भुगतान मे 90% योगदान अप्रत्यक्ष टैक्स व 10% प्रत्यक्ष टैक्स का होता है ! और यह भी प्रमाणित है कि अप्रत्यक्ष टैक्स (GST) का अन्तिम भुगतान उपभोक्ता (ग्राहक) के द्वारा ही किया जाता है और अन्तिम उपभोक्ता आम जनता ही है जो 99% है, तो इस प्रकार पूरे देश का अप्रत्यक्ष टैक्स (GST) का हकीकत मे भुगतान "आम जनता" ही करती है ! केवल प्रत्यक्ष टैक्स (आयकर) का भुगतान ही सक्षम लोगों के द्वारा किया जाता है ! इसके अतिरिक्त "सक्षम लोग" (कारपोरेट / बडे व्यापारी) अपने व्यापार के लिए धन की व्यवस्था भी "कम्पनी शेयर या बैंक से लोन या सब्सिडी" लेकर ही करते है, और इसमे भी 80% धन आम जनता का ही होता है ! (४) अतः सरकारी अधिकारियों को अब यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि जो वेतन आपको मिलता है उसमे 99% धन प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से आम जनता का ही है ! तो काम भी प्रमुखता व प्राथमिकता से "आम जनता" का ही करना चाहिए ! जिस दिन "आम जनता" को उक्त तथ्य समझ आ जायेगा तब भारत जैसे लोकतंत्र मे आम जनता "राजा" बन जायेगी ! ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(197) #06/11/24 #dineshapna


 

Tuesday, 5 November 2024

★आम जनता "वोट व नोट" देकर देती है - कार्य शक्ति ! "कुछ नेता व अधिकारी / सक्षम लोग" कार्य करते है - स्वयं के लिए !★ 【कुल (-) कुछ (=) शेष !】 【शेष (+) शेष (=) सर्वश्रेष्ठ !】 (१) आम जनता वोट देकर जनप्रतिनिधि (नेता) चुनती है कि वह "जनहित" के लिए कार्य करे ! किन्तु हकीकत मे "कुछ नेता" ●"स्वहित" के लिए, ●सक्षम लोगों के लिए, व ●अधिकारियों के लिए ही कार्य करते है क्योंकि इनसे प्राप्त धन व शक्ति से ही चुनाव जीतते है ! इसके विपरीत आम जनता के लिए केवल दिखावे के कार्य करते है जिससे वह अगली बार पुनः वोट ले सके ! कुछ नेता आम जनता से वोट लेकर सक्षम लोगों के लिए कार्य करके धन व सम्पत्ति लूटाते है ! इसके साथ ही स्वयं के लिए धन व सम्पत्ति अधिकारियों के माध्यम से लूट का भ्रष्टाचार करते है ! (२) "कुछ नेता" वोट के लिए "विशेष धर्म / सम्प्रदाय" को खुश करने के लिए संविधान विरुद्ध कानून बनाते है ! उनको आश्रय देकर वोट लेते है और आम जनता के हितों के विपरीत कार्य करते है ! (३) "कुछ नेता" सरकारी संसाधनों (जमीन, खनिज, धन) को लूटने के साथ, अधिकारियों व सक्षम लोगों को लूटाते भी है जिससे उनसे धन (चन्दा) या वोट ले सके ! इस प्रकार आम जनता से "वोट व नोट (टैक्स)" लेकर आम जनता के साथ अन्याय करते है ! (४) "कुछ नेता" जो "◆देश को बाँटकर, आजादी दिलाने वाली पार्टी ◆देश को जोडकर, सनातन को बचाने वाली पार्टी ◆खास को छोड़कर, आम आदमी के लिए काम करने वाली पार्टी ◆सत्ता के लिए, देशहित के विरुद्व कार्य करने वाली पार्टीयो मे है ! अर्थात् सभी राजनैतिक पार्टियों मे ऐसे "कुछ नेता" होते ही है ! "शेष नेता" उक्त पार्टियों मे अच्छे व देश व देशवासियों के हित के कार्य कर रहे है ! इसी कारण व न्यायपालिका के कारण थोड़ा बहुत आम जनता के कार्य हो रहे है ! ●अतः प्रत्येक पार्टी मे से "शेष नेताओं" को जोडकर कार्य करें तो देश व देशवासियों का भला हो सकता है !● ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(196) #05/11/24 #dineshapna


 

Thursday, 31 October 2024

★अन्नकूट व अहंकार मर्दन दिवस पर आप सभी को "हार्दिक" - "हार्दिक" शुभकामनाएं !★ 【प्रकृति पूजा व इन्द्र के अहंकार मर्दन कर आमजनता को सन्देश !】 (१) इन्द्र देवता ने अपने कार्य (वर्षा कराने) के बदले अपनी पूजा कराने से अहंकार हो गया था जबकि वर्षा तो गोवर्धन पर्वत व उन पर उगे पेड़ों (प्रकृति) के कारण होती है ! इसलिए श्रीकृष्ण ने आमजनता को "व्यक्ति पूजा" के स्थान पर "प्रकृति पूजा" का सन्देश दिया ! (२) अन्नकूट पर्व का अर्थ है "अन्न" यानी चावल और "कूट" यानी ढेर ! इस पर्व पर भगवान श्रीकृष्ण को विभिन्न प्रकार के अन्न और भोजन के ढेर से सजाया जाता है और उनकी (श्रीकृष्ण व गोवर्धन) की पूजा की जाती है ! (३) वर्तमान मे भी कुछ नेता / अधिकारी / सक्षम लोगों को इन्द्र जैसा अहंकार हो रहा है कि हम व हमारे कार्यों से ही आमजनता का जीवन यापन है, इसलिए आमजनता उनकी "पूछ या पूजा" करें, जो गलत है ! यह ही उनका अहंकार / लूट / भ्रष्टाचार है ! (४) जबकि हकीकत यह है कि आमजनता के लिए जो भी कार्य किये जाते है, वह सभी धन आमजनता ही देती है ! नेता / अधिकारी / सक्षम लोग केवल आमजनता के कार्यों को करते है और उसके बदले मे पारिश्रमिक लेते है ! इसके बावजूद उक्त लोग पारिश्रमिक के अलावा आमजनता से झूठ / भ्रष्टाचार / लूट करके अतिरिक्त धन (भ्रष्टाचार) करके अपनी पूजा करा रहे है ! यह उक्त कार्य "इन्द्र जैसा अहंकार" करने जैसा है ! आमजनता समझे कि अब इनके अहंकार का मर्दन करने के लिए श्रीकृष्ण का इन्तजार करने के स्थान पर आमजनता को स्वयं गोवर्धन पर्वत को उठाना होगा अर्थात् "विरोध की आवाज" व "कानून की किताब" को उठाना होगा ! ★जयश्रीकृष्ण★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(195) #01/11/24 #dineshapna


 

★दीपावली व राष्ट्रीय एकता दिवस पर आप सभी को "हार्दिक" - "हार्दिक" शुभकामनाएं !★ 【भगवान श्रीराम के "विजयोत्सव" के साथ राष्ट्रीय "एकता दिवस" पर एकजुट हो !】 (१) ◆भगवान श्रीराम के 14 वर्षों के वनवास व लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने की खुशी मे मनाया जाता है ! ◆भगवान श्रीविष्णु के नरसिंह अवतार व ◆श्रीलक्ष्मी माता के जन्मदिन के रूप मे मनाया जाता है ! (२) दीपावली का मतलब है 'दीपों की पंक्ति' और इसे अंधकार पर प्रकाश की विजय, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है ! इसके साथ ही यह त्यौहार एकता का सन्देश भी देता है ! अनेक दीपक के पंक्तिबध्द होकर "एकता" से प्रकाश पूँन्ज ! सभी व्यक्ति सामूहिकता के साथ मनाकर "एकता" का सन्देश देते है ! (३) इस 2024 मे सुखद अवसर है कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद भारत की 562 रियासतों का एकीकरण कर एक सशक्त और अखंड भारत की नींव रखी थी। उनके इसी योगदान से 31 अक्टूबर को उनके जन्मदिन को "राष्ट्रीय एकता दिवस" के रूप में मनाकर लोगों के बीच राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है ! (४) अतः 2024 की दीपावली पर ◆भगवान श्रीराम के आगमन ◆भगवान श्रीविष्णु के नरसिंह अवतार ◆श्रीलक्ष्मी माता के जन्मदिन ◆सरदार वल्लभभाई पटेल के जन्मदिन ! को ●आध्यात्मिक एकता, ●सांस्कृतिक एकता, ●आर्थिक एकता ●राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप मे मनाने के साथ हम स्वयं भी शेष 364 दिन सभी सनातनी एकजुट रहे ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(194) #31/10/24 #dineshapna


 

Wednesday, 30 October 2024

★रुप चतुर्दशी व नरक चतुर्दशी पर आप सभी को "हार्दिक" - "हार्दिक" शुभकामनाएं !★ 【भगवान वामन व श्रीकृष्ण की पूजा करने के साथ भगवान के किये कार्यो को स्वयं करे !】 (१) "सतयुग" में भक्त प्रहलाद के पौत्र हुए थे दैत्यराज बलि ! राजा बलि ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया तो सभी देवताओं ने भगवान विष्णु के पास मदद मांगने पहुंचे। भगवान विष्णु ने देवमाता अदिति के यहां "वामन" अवतार लेकर देवताओं को भय मुक्त किया ! (★रुप चतुर्दशी को दिये जलाये !) (२) "द्वापरयुग" मे भगवान "श्री कृष्ण" ने अत्याचारी, दुराचारी व दु्र्दांत असुर "नरकासुर" का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कराके उन्हें सम्मान प्रदान किया था ! (★नरक चतुर्दशी को दिये जलाये !) (३) "कलयुग" मे हम सतयुग व द्वापरयुग से आजतक हम दिये जला कर श्री विष्णु के दोनो अवतारो "वामन" व "श्रीकृष्ण" की पूजा करके यह बताया जा रहा है कि ●दैत्यराज "बलि" से मुक्ति दिलाकर "देवताओं को भय मुक्त किया व ●दुराचारी दु्र्दांत असुर "नरकासुर" मे 16100 कन्याओं को भय मुक्त किया ! इसलिए हम "कलयुग" मे "वामन भगवान" व "श्रीकृष्ण भगवान" की पूजा करने के साथ उनके चरित्र को भी आत्मसात करे ! अधर्म /अनीति करने वालों को नाश करने के लिए श्री विष्णु के अवतार लेने का इन्तजार करने के स्थान पर स्वयं आगे आकर "कानून का हथियार" उठाकर अधर्म /अनीति करने वालों का नाश करें ! (★भगवान वामन व श्रीकृष्ण ने अधर्म /अनीति का नाश किया !) (४) "कलयुग" मे व्यक्ति को क्या करना है ? उसका सन्देश "द्वापरयुग" मे ही "महाभारत" मे अर्जुन को गीता का उपदेश देकर स्पष्ट कर दिया कि अधर्म / अनीति का नाश तुम स्वयं को ही करना है, भगवान श्रीकृष्ण तो केवल मार्गदर्शक व सारथी मात्र है ! इसके साथ यह भी सन्देश दिया कि अधर्म / अनीति पर चलने वाला भले ही आपका भाई, पितामह, सगे- सम्बन्धी व गुरु भी क्यों न हो ? आपको अधर्म / अनीति करने वालों से युद्ध करना है ! यह तुम्हारा कर्म है, उसे बिना फल / परिणाम की ईच्छा रखें करना है ! (★स्वयं ही अधर्म /अनीति का नाश करे !) सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #(193) #30/10/24 #dineshapna