Chartered Accountant,Social Activist,Political Analysist-AAP,Spritual Thinker,Founder of Life Management, From India, Since 1987.
Monday, 8 January 2018
★मेरे भारत मे लोकतन्त्र है ! तो आम जनता को सच जानने का अधिकार है !★ ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ 😢😢 आँख फाड देने वाला सच, पढ कर आप भी आश्चर्य चकित रह जायेगे ? 😳😳 ■■ 100 अरब रू. प्रतिवर्ष नेताओ पर खर्च , 100 रू. के लिए तरसे आम जनता ■■■■ •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• ★भारत में कुल 4120 MLA और 462 MLC हैं अर्थात कुल 4,582 विधायक। प्रति विधायक वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 2 लाख का खर्च होता है। अर्थात 91 करोड़ 64 लाख रुपया प्रति माह। इस हिसाब से प्रति वर्ष लगभग 1100 करोड़ रूपये। ◆◆◆◆◆ ★भारत में लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल 776 सांसद हैं। इन सांसदों को वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 5 लाख दिया जाता है। अर्थात कुल सांसदों का वेतन प्रति माह 38 करोड़ 80 लाख है। और हर वर्ष इन सांसदों को 465 करोड़ 60 लाख रुपया वेतन भत्ता में दिया जाता है। ★■■★अर्थात भारत के विधायकों और सांसदों (4582 + 776 = 5358) के पीछे भारत का प्रति वर्ष 15 अरब 65 करोड़ 60 लाख रूपये खर्च होता है। ये तो सिर्फ इनके मूल वेतन भत्ते की बात हुई। इनके आवास, रहने, खाने, यात्रा भत्ता, इलाज, विदेशी सैर सपाटा आदि का का खर्च भी लगभग इतना ही है। अर्थात लगभग 30 अरब रूपये खर्च होता है इन विधायकों और सांसदों पर। ◆◆◆◆◆◆ ★अब गौर कीजिए इनके सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के वेतन पर। एक विधायक को दो बॉडीगार्ड और एक सेक्शन हाउस गार्ड यानी कम से कम 5 पुलिसकर्मी और यानी कुल 7 पुलिसकर्मी की सुरक्षा मिलती है। 7 पुलिस का वेतन लगभग (25,000 रूपये प्रति माह की दर से) 1 लाख 75 हजार रूपये होता है। इस हिसाब से 4582 विधायकों की सुरक्षा का सालाना खर्च 9 अरब 62 करोड़ 22 लाख प्रति वर्ष है। ★इसी प्रकार सांसदों के सुरक्षा पर प्रति वर्ष 164 करोड़ रूपये खर्च होते हैं। ★Z श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त नेता, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए लगभग 16000 जवान अलग से तैनात हैं। जिन पर सालाना कुल खर्च लगभग 776 करोड़ रुपया बैठता है। ★इस प्रकार सत्ताधीन नेताओं की सुरक्षा पर हर वर्ष लगभग 20 अरब रूपये खर्च होते हैं। *अर्थात हर वर्ष नेताओं पर कम से कम [30 अरब वेतन व अन्य + 20 अरब सुरक्षा खर्च] कुल 50 अरब रूपये प्रतिवर्ष खर्च होते हैं। ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ★इन खर्चों में राज्यपाल, भूतपूर्व नेताओं के पेंशन, पार्टी के नेता, पार्टी अध्यक्ष , उनकी सुरक्षा आदि का खर्च शामिल नहीं है। [ कुल 50 अरब रूपये प्रतिवर्ष खर्च ] ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ◆ यदि उसे भी जोड़ा जाए तो ( 50 + 50 ) कुल प्रतिवर्ष खर्च लगभग 100 अरब रुपया ●●●●●●● हो जायेगा । ◆ अब सोचिये हम प्रति वर्ष नेताओं पर 100 अरब रूपये से भी अधिक खर्च करते हैं, बदले में " आम जनता " को क्या मिलता है ? ★■■■★ *क्या यही है लोकतंत्र ?* ★■■★ (यह 100 अरब रुपया हम भारत वासियों से ही टैक्स के रूप में वसूला गया होता है।) ◆◆ एक सर्जिकल स्ट्राइक यहाँ भी बनती है ! ◆◆ ◆◆ भारत में " दो कानून " अवश्य बनना चाहिए ! ◆◆ ● पहला - चुनाव प्रचार पर "प्रतिबंध" ! ★ नेता केवल टेलीविजन (टी वी) के माध्यम से प्रचार करें! ● दूसरा - नेताओं के वेतन भत्तो पर "प्रतिबंध" ! ★ ◆◆◆◆ | अब दिखाओ - देशभक्ति | ◆◆◆◆ प्रत्येक भारतवासी को •जागरूक होना• ही पड़ेगा और इस फिजूल खर्ची के खिलाफ •एकजुट होकर• बोलना पड़ेगा ?
Saturday, 6 January 2018
★हिन्दी के सेनानी भगवती प्रसाद देवपुरा जी की चतुर्थ पुण्यतिथी पर अर्पित श्रृद्वा सुमन - 06.01.2018★ ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ ■“हिंदी” के साथ “हिन्द” भी गुलामी की ओर !■ ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• ● हिंदी को हम ७० वर्षो में राष्ट्र भाषा नही बना सके क्योकि हम आज भी राजनेताओ , कॉर्पोरेट ,विदेशी मानसिकता ,एकजुट नही हो सकने की आदत के गुलाम है ! कहने को तो देश में लोकतंत्र है , किन्तु हकीकत में जनता के द्वारा राज तो है परन्तु न तो जनता का राज है व न जनता के लिए राज है ! ● हिंदी को उचित सम्मान दिलाने के लिए लड़ने वाले कई सेनानी है , कई लड़ रहे थे , कई अभी भी लड़ रहे है , उसमे से मेवाड़ का सतत , वीर, हिंदी सेनानी श्री भगवती प्रसाद जी देवपुरा थे, जिन्होने हिंदी की लिए लड़ाई शुरू की , उसे हमें अंतिम लक्ष्य व मुकाम तक पहुंचना है ! ● इसके लिए हमें एकजुट होने , विदेशी मानसिकता को छोड़ने , देश के कॉर्पोरेट का साथ लेकर विदेशी कॉर्पोरेट का सीमित बहिष्कार करने व राजनेताओ पर दबाव बनाने की आवश्यकता है ! हमें "प्रतिनिधि लोकतंत्र" की साथ "सहभागी लोकतंत्र" की स्थापना, आम जनता को "एकजुट होकर" करनी होगी ! ● यदि हम आज ऐसा नही कर पाए तो राजनेता “इंडस्ट्रियल कॉरिडोर” के माध्यम से "देश को गुलाम" बनाने की ओर बढ़ रहे है ! यदि राजनेता व कॉर्पोरेट सफल हो गए, तो " न हमारा देश स्वतंत्र रहेगा " व " न हमारी हिंदी स्वतंत्र रहेगी " ! CA. Dinesh Sanadhya = 06.01.2018 www.dineshapna.blogspot.in
Monday, 1 January 2018
★भारत मे 100 % लोकतन्त्र लागू हो , 2018 मे ! ★"प्रतिनिधी लोकतन्त्र" के साथ "सहभागिता लोकतन्त्र" हो ! ★आम जनता 1795 दिन जाति,धर्म व पार्टी से ऊपर उठकर "एकजुट" होकर "सहभागिता लोकतन्त्र" की स्थापना करे ! ★आम जनता चुनाव से "प्रतिनिधी चुनती" है, तो शेष 1795 दिन प्रत्येक जनहित कार्य व जन समस्याओ के लिए "सहभागिता कर" 100% लोकतन्त्र स्थापित करे ! CA.Dinesh Sanadhya = 01.01.2018 www.dineshapna.blogspot.in
Sunday, 31 December 2017
Thursday, 28 December 2017
■ राजसमंद के कॉर्पोरेट (हिंदुस्तान जिंक) :: सरकार की छूट ! ;; खनिजों की लूट ! ■ ■सरकार प्राकृतिक संसाधनों (जमीन व खनिज)को बचा नही सकी, तो देश कैसे बचाएगी ? ■ ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ★ सरकार ने हिंदुस्तान जिंक (विश्व के दूसरी बड़ी जिंक कंपनी) को जितने में बेचा, उससे ज्यादा राशि खरीदार कॉर्पोरेट (वेदान्ता लिमिटेड) ने उसके भंगार (वेस्ट मैटेरियल्स) को बेचकर कमा लिए ! ◆ अर्थात जमीन, बिल्डिंग व पांच माइंस फ्री में दे दी ! ★ जनता ने सरकारी कंपनी (हिंदुस्तान जिंक) में धन लगाया, सरकार ने ( ZINC, LEAD, SILVER AND CADMIUM) की माइंस दी , ताकी खनिज काउपयोग जनहित में हो सके ! किन्तु 2002 में सरकार ने कंपनी को नुकसान में बता कर 10.00 रु. का शेयर को 3.66 रु.में बेच दिया जबकि आज उस शेयर की कीमत 306.00 रु. है ! ◆ अर्थात सरकार ने "आम जनता के साथ धोखा" किया ? ★ सरकार सरकारी कंपनी (हिंदुस्तान जिंक) में 6000 लोगो को रोजगार नही दे सकी, तो देश में लाखो लोगो को रोजगार कैसे देगी ? ★ सरकार ने सरकारी कंपनी (29.50% in Hindustan Zinc and 49.00% in Balco) को “नुकसान” में बताकर देश के खनिजों (ZINC,LEAD,SILVER, CADMIUM and Aluminum) को फ्री में कॉर्पोरेट (वेदान्ता लिमिटेड)को दिया, क्योकि यह दोनों 21000 करोड़ रु. में बेचा जबकि कॉर्पोरेट (वेदान्ता लिमिटेड) 7323 करोड़ रु. प्रतिवर्ष “मुनाफा” कमा रहे है ! ◆◆◆◆◆●●●●● निष्कर्ष ●●●●●◆◆◆◆ ★ सरकार आम जनता की सरकारी कंपनी (हिंदुस्तान जिंक) की जमीन, माइंस व खनिजों को फ्री में {1} कॉर्पोरेट (देशी) को दे दिया, तो इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में {1000} कॉर्पोरेट (देशी व विदेशी) से देश की जमीन व प्राकृतिक संसाधनों(पानी, जंगल व खनिज) को कैसे बचाएगी ? ★ इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में नियंत्रण सरकारी कंपनी के हाथ में है, जिसमे सरकार का शेयर 49.00% है ! अर्थात इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की सरकारी कंपनी के नियंत्रण व अधिकार में देश 1/3 भूभाग होगा ! ◆ ◆ जो कभी भी सरकार "नुकसान बताकर" कॉर्पोरेट (विदेशी) को बेच सकती है ! ◆ ◆ ★★★★ तब देश व देश की आम जनता को "गुलाम होने से" भगवान भी नही रोक सकती है ! ★★★★ CA. Dinesh Sanadhya = 28.12.2017 www.dineshapna.blogspot.in
Tuesday, 26 December 2017
■■★■■ राजसमंद के कॉर्पोरेट (मिराज) :: {"नशे से नफा"} ■■★■■ ■■★■■ {दिखाने की सेवा "एक" :: कमाई का मुनाफा "चार"} ■■★■■ ★ नाथद्धारा बस स्टैण्ड पर जनता के लिए "आयकॉन गेट", किन्तु हकीकत में + यातायात में परेशानी, + सरकारी जमीन का दुरूपयोग, + गेट के एवज में सरकार से अन्य जमीन,+ नाथद्धारा "श्रीजी का" परन्तु गेट "मिराज के नाम का" {सेवा एक ? :: मुनाफा चार ?} ★ गणेश टेकरी पर जनता के लिए "सबसे बड़ी शिवजी की प्रतिमा", किन्तु हकीकत में +साथ में व्यापार केंद्र, + स्थानीय व्यापार समाप्ति की ओर, + वैष्णव सम्प्रदाय V/S शैव सम्प्रदाय, + जनता की जमीन सेवा के लिए व ज्यादा उपयोग व्यापार हेतु {सेवा एक ? :: मुनाफा चार ?} ★ जनता के स्वास्थ्य के कीमत पर पैसा कमाया तथा सरकार को साथ देना पड़ा क्योकि तम्बाकू (नशे) का व्यापार कॉर्पोरेट कर रहे है ! ★ जनता के खेल मैदान के लिए करोडो की राजसमंद में जमीन, किन्तु हकीकत में "चार कॉर्पोरेट"ने "चार करोड़ रूपए" में लेकर"खास आदमी" के मौज मस्ती के लिए"मेवाड़ क्लब" बनाया ! कॉर्पोरेट द्वारा आम जनता की जमीन पर कब्ज़ा किया, किन्तु क्यों प्रशासन का सहयोग रहा व सरकार चुप रही ? ◆◆◆◆◆●●●●●निष्कर्ष :- ◆◆◆◆◆●●●●● ★ कॉर्पोरेट कितना भी अच्छा हो, आखिर तो “मुनाफे की लिए” आम जनता की लिए “नुक़सानदेह” ही होता है ! ★ कॉर्पोरेट “मुनाफे के लिए” आम जनता का या “स्वास्थ्य” जायेगा ? या “पैसा” जायेगा ? या “जमीन” जाएगी ? CA. Dinesh Sanadhya = 26.12.2017 www.dineshapna.blogspot.in
Monday, 25 December 2017
★★राजसमंद के कॉर्पोरेट (सद्भाव) :: संसाधनों की लूट, जनता से वसूली★★ ★★सरकार की मौन स्वीकृति ; प्रशासन बेबस ; जनता लूटने को मजबूर★★ ◆◆◆◆{{{{{{{{{{{{{{{{{}}}}}}}}}}}}}}}}}}}◆◆◆◆ ◆◆राजसमंद के कॉर्पोरेट (सदभाव) गोमती उदयपुर फोरलेन द्वारा विकास के नाम पर लूट :- ◆◆ ★ नियम व गुणवत्ता के अनुसार सड़क निर्माणनही ! ★ कर राजस्व व पर्यावरण (पेडो की कटाई)को नुकसान ! ★ जनता की पुरानी सड़क व जनता की जमीन का पूरा मुआवजा नही दिया ! ★ जनता की शिकायतों को न सुना व न ही समाधान किया ! ★ केवल मुनाफे के लिए जमीन व संसाधनों कादुरुपयोग, जनता को परेशान व जान जोखिम में डालकर टोल टैक्स के रूप में करोडो की लूट ! ◆◆ सरकार मौन ; प्रशासन बेबस व जनता से लूट :- ◆◆ ★ जनता के 250 से 300 शिकायतों व ज्ञापनके बावजूद सरकार , कुछ नेताओ व कुछ अफसरों ने कॉर्पोरेट का पक्ष लिया तथा स्वयं व कॉर्पोरेट को फायदा पहुंचाया ! ★ जनता की जमीन छीनी, पर्यावरण बिगाड़ा,कर राजस्व की चोरी , जोख़िमभरी सड़क बनाई, जबरन टोलवसूली, जनता को कोई फायदा नही, तो भी जबरन टोल देना तथा जनता की कोईसुनवाही नही ! ◆◆ निष्कर्ष :- (आम जनता , सरकार , प्रशासन व कॉर्पोरेट) ◆◆ ★ आम जनता का धन व धरम दोनों गया ! सरकार व प्रशासन को कुछ फायदा ! कॉर्पोरेट को धन व अधिकार दोनों मिले ! ★ यह कॉर्पोरेट (एक - देशी) की 80 किमी सड़क का हाल है, तो सोचो ! जब इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में कॉर्पोरेट ( एक हजार - देशी व विदेशी) की 8000 किमी सड़क, रेल, फैक्ट्री, हवाई अड्डे, बन्दरगाह होगे ? ★ तब क्या सरकार उनपर नियंत्रण कर आमजनता का हित सुरक्षित कर पायेगी ? क्या जब आम जनता व देश कॉर्पोरेट (विदेशी व देशी ) का गुलाम नही होगा ? CA. Dinesh Sanadhya = 25.12.2017 www.dineshapna.blogspot.in
Subscribe to:
Posts (Atom)




