Saturday, 12 November 2022

★रामकथा से मिले, सबको अपने अपने राम★ ■रामकथा के कथा वाचक, कथा आयोजक व कथा आयोजन मे काम / व्यवस्था करने वाले सभी व्यक्तियों को दिल की गहराई से धन्यवाद !■ (1)रामकथा से एक व्यक्ति को मिला, "906 का अंक" ! (2)रामकथा से एक व्यक्ति को मिला, अपने "धन का शुद्धिकरण" ! (3)रामकथा से एक व्यक्ति को मिला, "व्यापार का नया विकल्प" ! (4)रामकथा से अनेक व्यक्तियो को मिला, "वोट मिलने की आशा" ! (5)रामकथा से अनेक व्यक्तियो को मिला, अपने "अखबार भरने का प्रसाद" ! (6)रामकथा से अनेक व्यक्तियो को मिला, "9 दिन का रोजगार" ! (7)रामकथा से कुछ व्यक्तियो को मिला, किसी व्यक्ति विशेष के उचित / अनुचित कार्यो को "कानूनी तरीक़े से करने का रास्ता" ! (8)रामकथा से आम जनता को मिला, "9 दिन का आनन्द" सभी प्रकार से ! (9)रामकथा से प्रकट ही नहीं हुए राम, तो भी सबको मिल गये अपने अपने राम ! (10)राम के नाम पर, विश्वास के साथ, आम आदमी को 9 दिन के आनन्द सागर मे गोते लगवाकर, "खास लोग चुनकर ले गये मोती, शेष रह गये कंकड़" ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिंदुस्तानी #(231) #07/11/22 #dineshapna

















 

Saturday, 5 November 2022

★"अध्यात्म रामायण" से "हकीकत रामायण" - नवां दिन★ "अध्यात्म रामायण" से वाल्मीकि रामायण, तुलसी रामायण व "हकीकत रामायण" तक ! (1)हम "रामकथा" सुनते व सुनाते है किन्तु श्रीराम बनने के स्थान पर श्रीरावण के आचरण को अपना कर, उनके जैसा बनने (केवल धनपति बनने व अधर्म के कृत्य) का कार्य करते है और ईच्छा करते है कि "रामराज्य की स्थापना" हो ! (2)हम "भागवत कथा" सुनते व सुनाते है किन्तु श्रीकृष्ण व पाण्डव बनने के स्थान पर कौरवों के आचरण को अपना कर, उनके जैसा बनने (केवल धनपति बनने व अधर्म के कृत्य) का कार्य करते है और ईच्छा करते है कि "श्रीकृष्ण की प्राप्ति" हो ! (3)आजकल रामकथा / भागवत कथा सुनने वाले, सुनवाने वाले व सुनाने वाले अन्दर से "कुछ व बाहर से कुछ" है ! सभी को "धन या झूठी प्रतिष्ठा" ही चाहिए और उसके लिए भगवान के नाम का अपने स्वार्थ के लिए उपयोग भी करने से नहीं चूकते है ! (4)हम श्रीराम की "मर्यादाओं" की बात करते है किन्तु उनके "धनुष" को भूल जाते है ! हम श्रीकृष्ण की "बाँसुरी" की बात करते है किन्तु उनके "सुदर्शन चक्र" को भूल जाते है ! (5)आओ ! हम संकल्प करें कि श्रीराम / श्रीकृष्ण के गुणों के भण्डार मे से केवल एक गुण "अधर्म / असत्य के विरुद्ध युद्ध" को आत्मसात करें व श्रीशिव जी "विश्वास स्वरुपम्" को विश्वास दिलाये कि हम यह 906 वीं रामकथा को व्यावहारिकता मे आत्मसात करके, उसे पूर्ण सफल बनाये ! ■इति रामकथा विश्राम■ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिंदुस्तानी #(230) #06/11/22 #dineshapna











 

★"अध्यात्म रामायण" से "हकीकत रामायण" - आठवां दिन★ "अध्यात्म रामायण" से वाल्मीकि रामायण, तुलसी रामायण व "हकीकत रामायण" तक ! (1)रामायण मे श्रीराम ने "सत्य, धर्म व करुणा" को जी कर बताया गया ! इसमे श्रीराम ने मर्यादा पालन के साथ "अधर्म / असत्य के विरुद्ध युद्ध" करके बताया ! इस प्रकार श्रीराम ने आदर्श व सद्गुणों को केवल उपदेश देकर ही नहीं बताया, बल्कि उसको जी कर दिखाया गया ! (2)वर्तमान मे रामकथा केवल बोलकर बताने के साथ, "श्रीराम के चरित्र को व्यावहारिकता मे जी कर" बताने की जरूरत है ! तब ही देश मे रामराज्य की स्थापना होगी ! (3) वर्तमान मे ●रामकथा कहने वाले, ●रामकथा कराने वाले व ●रामकथा सुनने वालों को चाहिए कि श्रीराम के अनेकों गुणों (सत्य, प्रेम, करुणा, मर्यादा आदि) को आत्मसात करने से पहले केवल एक गुण - "अधर्म / असत्य के विरुद्ध युद्ध" करना चाहिए ! यदि आप "अधर्म / असत्य के विरुद्ध युद्ध" नहीं कर सकते हो तो कम से कम उसके विरुद्ध बोलना तो होगा ! (4)यदि आप "अधर्म / असत्य के विरुद्ध युद्ध" नहीं करते हो तो क्या यह श्रीराम का अपमान नहीं है ? यदि यह रामकथा "विश्वास स्वरुपम्" के सानिध्य मे की जा रही है और हम श्रीराम को संकल्प के साथ आत्मसात नहीं करते है तो क्या यह श्रीशिव जी का भी अपमान नहीं है ? (5)आओ ! हम संकल्प करें कि श्रीराम के गुणों के भण्डार मे से केवल एक गुण "अधर्म / असत्य के विरुद्ध युद्ध" को आत्मसात करें व श्रीशिव जी "विश्वास स्वरुपम्" को विश्वास दिलाये कि हम यह 906 वीं रामकथा को व्यावहारिकता मे आत्मसात करके, पूर्ण सफल बनाये ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिंदुस्तानी #(229) #05/11/22 #dineshapna










 

Thursday, 3 November 2022

★"अध्यात्म रामायण" से "हकीकत रामायण" - सातवां दिन★ "अध्यात्म रामायण" से वाल्मीकि रामायण, तुलसी रामायण व "हकीकत रामायण" तक ! (1)श्रीराम के दस गुण ●शास्त्रों व मर्यादा पालक, ●सहनशील व धैर्यवान, ●दयालु व बेहतर स्वामी, ●बेहतर प्रबन्धक, ●विषम परिस्थितियों मे निति पालक, ●सत्य व धर्म पालक, ●न्याय प्रिय व आर्दश मित्र, ●आदर्श पुत्र व भाई, ●सत्य व न्याय के लिए युद्ध करने वाले, ●धर्म व ऋषियों के रक्षक थे ! (2) श्रीराम मे केवल एकमात्र विशेष गुण था कि "शास्त्रों के साथ शस्त्रों का सही उपयोग" करते थे ! (3)श्रीरावण के दस गुण ●महादेव का बहुत बड़ा भक्त, ●एक प्रकांड पंडित, ●प्रखंड विद्धान, ●प्रखर शास्त्र ज्ञाता, ●एक कुशल व्यापारी, ●कुशल राजनीतिज्ञ, ●महायोद्धा, ●चित्रकार व संगीतज्ञ, ●महाबलशाली, ●महाधनी था ! (4)श्रीरावण मे केवल एकमात्र अवगुण या गलती थी कि "स्त्री का अपहरण" अर्थात् "स्त्री का अपमान" किया था ! (5)आजकल एक रावण के स्थान पर अनेकों रावण है व हर गली - गली मे (यत्र तत्र सर्वत्र) रावण है ! आजकल रावण के गुणो (महादेव के भक्त, कुशल व्यापारी, विद्धान, शास्त्रों के ज्ञाता, राजनीतिज्ञ, महाधनी) को प्राप्त करने के लिए "मेहनत, ईमानदारी व त्याग" का उपयोग करने के स्थान पर "अन्याय, बेईमानी व लूट" का उपयोग करते है ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिंदुस्तानी #(228) #04/11/22 #dineshapna









 

Wednesday, 2 November 2022

★"अध्यात्म रामायण" से "हकीकत रामायण" - छठा दिन★ "अध्यात्म रामायण" से वाल्मीकि रामायण, तुलसी रामायण व "हकीकत रामायण" तक ! (1)आध्यात्म का उद्देश्य मनुष्य के आंतरिक और बाह्य जगत में संतुलन स्थापित करना है ! मनुष्य को इस तरह विकसित होने में मदद करना की बाहर जीवन और जगत में घटित होने वाली किसी भी घटना से व्यक्ति का आंतरिक संतुलन ना बिगड़े ! (2)आध्यात्मिक प्रक्रिया का उद्देश्य मनुष्य को हर स्थिति में शांत, स्थिर और समता पूर्वक अपने और समस्त के कल्याण करनेवाले चेतन और समर्थ व्यक्ति के रूप में विकसित और प्रतिष्ठित करना है ! (3)रामायण के सभी पात्र कैसे अपने स्वधर्म में स्थित है और किस तरह अपने कर्म कर्तव्यों का निष्ठा पूर्वक पालन करके जीवन और इतिहास में अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है कि आज सात आठ हजार वर्षों पश्चात भी रामायण और राम हमारे जीवन का आधार है, हमारे लिए परम पूजनीय और आदरणीय है ! (4)श्रीराम का पूरा जीवन त्रासदियों और असफलताओं का लंबा सिलसिला है, लेकिन वो कभी भी विपरीत और अनचाही स्थितियों में भी अपने धर्म और कर्तव्य से विमुख नहीं हुए, कोई शिकायत या पलायन नहीं किया ! (5)श्रीराम ने सदा अपने सभी धर्मों का मर्यादा पूर्वक पालन किया एक व्यक्ति और एक आदर्श राजा के रूप में और संपूर्ण जगत के लिए, शौर्य, साधना, धर्म और कर्तव्य निष्ठता, की अलौकिक और अद्भुत मिसाल कायम की, जिसके लिए वो आज तक संपूर्ण विश्व में जाने और पूजे जाते हैं। (6)रामायण सभी मनुष्यों के लिए आदर्श जीवन व्यवहार और कर्म की सहज मानवीय पाठशाला है, महत्तम सांसारिक और आध्यात्मिक कल्याण की उपलब्धि के लिए, इसमें कोई पांडित्य और ज्ञान की प्रतिष्ठा नहीं है, यह विवेक पूर्ण और मर्यादित तरीके से जीवन जीने की कला और कौशल सीखने का विज्ञान है, प्रबंध है ! (7)रावण शिव भक्त, ज्ञानी, धनपति व सक्षम था किन्तु केवल अधर्मी होने के कारण श्रीराम ने युद्ध कर रावण को मारा ! (8)श्रीराम धर्म पर चलते हुए मर्यादाओं का पालन किया किन्तु अधर्म के विरुद्ध युद्ध भी किया ! हमें स्वयं को भी धर्म पर चलने के साथ अधर्म / अन्याय के विरुद्ध धनुष (कानून व संविधान) का उपयोग करना होगा ! (9)आज के रावण है कुछ नेता, कुछ अधिकारी, कुछ सक्षम लोग व कुछ धर्म के ठेकेदार, किन्तु यह उक्त सभी अधर्म पर चल रहे है इसलिए राम को धनुष (कानून व संविधान) उठाने की आवश्यकता है ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिंदुस्तानी #(227) #03/11/22 #dineshapna








 

★"अध्यात्म रामायण" - पांचवा दिन★ सर्वप्रथम भगवान श्री शंकर के मुख से निकली श्रीराम की यह पवित्र कथा "अध्यात्म रामायण" है ! राम कथा का दर्शन "अध्यात्म, और विज्ञान" !!!!!! "अयोध्या" रामकथा का प्रारम्भ और समापन स्थल है ! (1) रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की स्थापना व पूजा का विज्ञान : - राम ने गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र के साथ- साथ अन्य ऋषियों से वेद-वेदांग की शिक्षा ग्रहण की थी ! वे जानते हैं कि इस ब्रह्माण्ड का मूल स्रोत (नाभिक) क्या है ? वेद जहाँ "वेदाहमस्य भुवनस्य नाभिम" (यजु. २६.६०) कहकर इसे रेखांकित किया है ! वहीँ गीता ने "सर्वभूतानाम बीजं" तथा "प्रभवः प्रलयः स्थान निधानं बीजं अव्ययम" कहकर बताया है ! वहीँ विज्ञानं ने इसे 'बिग बैंग' थियरी द्वारा विश्लेषित किया है ! (2) राम ने वहां उपस्थित सभी सहयोगियों को समझाया :- सृजन और प्रलय प्रकृति का शाश्वत नियम है ! दृष्टिगत यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड अत्यंत घनीभूत होकर एक बिन्दु रूप में विलीन हो जाती है ! इसलिए अहंकारी रावण को परास्त करने के लिए इस ज्ञान सिद्धांत की, इस ब्रह्म सत्ता की आराधना - पूजा करना सर्वथा उचित है, श्रेयष्कर है.- "लयं गच्छति भूतानि संहारे भूतानि निखिलं यतः / सृष्टि काले पुनः सृष्टि: तस्माद लिंगामुदाह्रितम //" (लिंग पुराण- ९९.८). बिन्दु की आराधना, विन्दु की पूजा, बिन्दु में सिन्धु समाहित हो जाने का दर्शन वानरों की समझ में नहीं आया ! (3)तब राम ने मुट्ठी भर रेत हाथ में लेकर गोलाकार पिंड बनाया, मंत्रोच्चार सहित स्थापित किया ! राम समझाते रहे, यही पिंड, शिवलिंग है, शालीग्राम है... ब्रह्मा का प्रतीक है. - "मूले ब्रह्मा तथा मध्ये विष्णु त्रिभुवानेश्वार: रुद्रोपरी महादेव: प्राणवाख्य: सदाशिवः // वानरों की समझ में अब भी कुछ नहीं आया ! तब राम ने पिंड को अंडाकार बनाया, उसके नीचे अर्घा (जलहरी) बनाया, और अपनी व्याख्या को और सरल किया ! यह अंडाकार पिंड 'ब्रह्माण्ड पुरुष सिद्धांत' है, तथा यह अर्घा (जलहरी) 'ब्रह्माण्ड नारी सिद्धांत' है ! (4)युग्म रूप में यही 'शिवशक्ति', यही सिद्धांत है ! यही 'अर्द्ध-नारीश्वर' है, यही सृजनहार है ! यह परम तत्त्व है ! इसे न केवल अध्यात्म तक सिमित किया जा सकता है न केवल विज्ञान तक ! यह असीम है, कल्याणकारी 'शिवम्' है ! इसलिए यह न पुलिंग है, न स्त्रीलिंग और न ही नपुंसक लिंग ! यह मात्र 'ब्रह्माण्ड लिंग' है ! यही राम को सर्व प्रिय है -"लिंग थापि विधिवत करि पूजा शिव समान प्रिय मोहि न दूजा" । (5)विधिवत पूजा का अर्थ है :- उसके सिद्धांत को जानना, उसके अनुप्रयोग को जानना ! केवल गोल पिंड, न्यूट्रान रूप है, अर्घा सहित पिंड 'अर्ध-नारीश्वर' रूप है, हाइड्रोजन रूप है ! इस तत्त्व दर्शन ने वानरों के अंतर के भय को समाप्त कर दिया ! ज्ञानचक्षु खुल जाने से अहंकार रूपी लंका पर विजी संभव हो पाया ! (6)यही रामकथा का संक्षिप्त विज्ञान - दर्शन है ! लंका विजय के पश्चात राम, अयोध्या नरेश हैं, दशरथ रूप हैं क्योकि "रामराज्य बैठे त्रैलोका हर्षित भये गए सब शोका...........". इसी में योग की, अध्यात्म की, विज्ञान की पूर्णता भी है ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक आध्यात्मिक विचारक #(226) #02/11/22 #dineshapna