Chartered Accountant,Social Activist,Political Analysist-AAP,Spritual Thinker,Founder of Life Management, From India, Since 1987.
Saturday, 15 May 2021
★नाथद्वारा मन्दिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त हो !★ ●नाथद्वारा मन्दिर की स्थिति छ: दशकों से दिन प्रतिदिन ठीक नहीं चल रही है :- २- मन्दिर मे सेवा व भावनाओं के स्थान पर व्यापार हो रहा है ! ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ पुष्टिमार्ग के अनुसार नाथद्वारा मन्दिर मे पूजा सेवा व समर्पण के साथ की जाती है तथा पुष्टिमार्ग मे श्रीनाथजी की सेवा बाल भाव व निस्वार्थ भाव से की जाती है किन्तु वर्तमान मे सेवा व समर्पण भाव का स्थान प्रतिफल प्राप्ति से भी ज्यादा इसको पूर्णरुप से लाभार्जन हेतु व्यापार बना दिया है ! क्योंकि ज्यादातर बोर्ड मैम्बर्स व्यापारी है तथा शेष की सोच व्यापारिक है, अधिकारी की सोच लाभ दर्शाने की है व बोर्ड अध्यक्ष तो केवल लक्ष्मी के दास मात्र है ! ऐसी स्थिति मे सेवावालों मे समर्पण के भाव कैसे आयेंगे ? ●मन्दिर के प्रसाद जनता को वितरित कराने के स्थान पर मुनाफा कमाकर बेचा जा रहा है ! ●सेवा का पद तोलमोल के दिया जाता है तो हम उनसे सेवा की उम्मीद कैसे करें ? ●जब संचालन करने वाले (बोर्ड मैम्बर्स, अधिकारी व अध्यक्ष) स्वयं पूर्णरूप से पुष्टिमार्गीय वैष्णव ही नहीं है तो श्रीनाथजी की सेवा पुष्टि भावनाओं से कैसे होगी ? ●जब सभी का उद्देश्य व मापदंड ही आर्थिक है तो सेवा भावना कैसे होगी ? कोरानाकाल मे श्रीजी के नित्य भोग मे कटौती इसका अकाट्य प्रमाण है ! ■■पुष्टिमार्ग के अनुसार श्रीनाथजी की सेवा व भावना प्रधान परम्पराओं से कार्य होना चाहिए !■■ हिन्दू जाग गया :: बृजवासी जाग गया सीए. दिनेश सनाढ्य - एक बृजवासी #16/05/2021 #dineshapna
★★अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस★★ (आज मनायें व 365 दिन अपनाये !) पाश्चात्य संस्कृति मे परिवार दिवस केवल एक दिन मनाने की समझ 1993 मे आई, जबकि हमारी सनातन संस्कृति मे हजारों वर्षों से 365 दिन मना रहे है ! एक साजिश के तहत हमें अपनी संस्कृति को गलत बताकर, दूर किया जा रहा है, बाद मे जब उसकी महत्ता समझ आती है, तब केवल एक दिवस के रुप मे मनाकर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री करते है ! जैसे - महिला दिवस, मातृ दिवस, पितृ दिवस, बालिका दिवस, शिक्षक दिवस, हँसी दिवस आदि ! परिवार का मतलब - (पति, पत्नी व बच्चे) (साथ मे माता पिता व भाई बहन) (साथ मे सगे सम्बन्धी) (साथ मे अपना गाँव/शहर) (साथ मे अपना धर्म/देश) (साथ में पूरा विश्व) यहाँ तक हमारी सनातन संस्कृति परिवार मानती है ! साथ मे श्रीकृष्ण का यह सन्देश भी याद रखना चाहिए कि जो न्याय व धर्म पर नहीं चले, वह भाई भी हो तो भी उसे परिवार का सदस्य नहीं मानना चाहिए ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #15/05/2021 #dineshapna
Thursday, 13 May 2021
★नाथद्वारा मन्दिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त हो !★ ●नाथद्वारा मन्दिर की स्थिति छ: दशकों से दिन प्रतिदिन ठीक नहीं चल रही है :- १- मन्दिर पर बेवजह सरकारी हस्तक्षेप व नियंत्रण बढ़ रहा हैं ! ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● 1959 मे नाथद्वारा मन्दिर का नियंत्रण बृजवासियों व समर्पित वैष्णवों को देने के स्थान पर स्वयं अपने हाथ मे लेकर मन्दिर की सम्पत्तियों को लूटना व लूटाना चालू कर दिया ! क्योंकि जो अधिकारी लूट रोकने के लिए लगाये गये वह भी मूक दर्शक व कर्तव्य विमुख हो गये ! ●नगरपालिका मन्दिर की जमीन लूटकर बेच रही है और अधिकारी चुप है ! जैसे:- लालबाग की जमीन, बड़ा मगरा की जमीन, कच्छवाई, कांटीमाला की जमीन, भीलवाड़ा की जमीन आदी अन्य जमीने ! ●मन्दिर की करोड़ों की जमीन सरकार लूटा रही है और सम्पदा अधिकारी चुप व लाखो रुपये का वेतन उठा रहा है ! ●मन्दिर की जमीनों से फूल, फल, सब्जी आदि अपेक्षित उपज नहीं हो रही है, और हम कृषि अधिकारी को लाखो रुपये वेतन के रुप मे व्यर्थ दे रहे है ! ●मन्दिर की जमीन लुटाई जा रही है, धन का अपव्यय हो रहा है, बोर्ड उल्टे सुलटे निर्णय ले रहा है तो भी मुख्य अधिकारी चुप है ? जनता की आवाज को बोर्ड के सामने नहीं रख रहे है, क्योंकि उन्हें श्रीनाथजी से ज्यादा नौकरी की फिक्र है ? इस प्रकार सरकार नाथद्वारा मन्दिर मे अनावश्यक हस्तक्षेप व नियंत्रण कर रही है ! सरकारी हस्तक्षेप संविधान के विरुद्ध है ! हिन्दू जाग गया :: बृजवासी जाग गया सीए. दिनेश सनाढ्य - एक बृजवासी #12/05/2021 #dineshapna
Wednesday, 12 May 2021
★नाथद्वारा मन्दिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त हो !★ ■नाथद्वारा मन्दिर की स्थिति छ: दशकों से दिन प्रतिदिन ठीक नहीं चल रही है :- १- मन्दिर पर बेवजह सरकारी हस्तक्षेप व नियंत्रण बढ़ रहा हैं ! २- मन्दिर मे सेवा व भावनाओं के स्थान पर व्यापार हो रहा है ! ३- मन्दिर की जमीनों को बेचा जा रहा है या लूटा जा रहा है ! ४- मन्दिर के धन का दुरुपयोग कर अनावश्यक निर्माण किया जा रहा है ! ५- मन्दिर के प्रसाद की गुणवत्ता घटाई जा रही है ! ६- मन्दिर मे गैर वैष्णवों का हस्तक्षेप व अधिकार बढ़ रहा है ! ७- बृजवासियों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है ! ८- पुष्टिमार्ग की परम्पराओं को तोड़ा या बदला जा रहा है ! ■कारण व जिम्मेदार कौन :- १- बोर्ड मैम्बर्स :- क्योंकि मन्दिर की जमीन व धन की सुरक्षा व सदुपयोग की जिम्मेदारी आपकी ही है ! वर्तमान मे बोर्ड मैम्बर्स अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने मे पूर्णतः असफल रहे है ! २- सरकार व अधिकारी :- क्योंकि बोर्ड के निर्णयों के अनुसार मन्दिर सम्पत्तियों की सुरक्षा व व्यवस्था का काम है किन्तु इसके विपरीत सरकार व अधिकारी स्वयं सम्पत्तियों का नुकसान कर रहे है और देखते व जानते हुए भी चुप है ! ३- महाराजश्री :- क्योंकि मन्दिर की व्यवस्था व परम्पराओं की रक्षा की जिम्मेदारी आप पर ही है फिर भी आप अपनी जिम्मेदारी निभाने मे असफल रह रहे हैं ! ■समाधान :- १- श्रीनाथजी की सेवा व सुरक्षा का प्रथम अधिकार व जिम्मेदारी बृजवासियों की है ! २- पुष्टिमार्ग मे वैष्णवों की सेवा व समर्पण महत्त्वपूर्ण है ! ३- हिन्दू मन्दिरो पर से सरकारी नियंत्रण हटना चाहिए क्योंकि यह संविधान के विरुद्ध है ! ४- इसके लिए बृजवासियों, समर्पित वैष्णवों, समर्पित नाथद्वारावासी, विद्धानों व महाराणा के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक मार्गदर्शक मण्डल बनाने की आवश्यकता है ! हिन्दू जाग गया :: बृजवासी जाग गया सीए. दिनेश सनाढ्य - एक बृजवासी #12/05/2021 #dineshapna
Monday, 10 May 2021
★पुष्टिमार्ग को जाने, माने व अपनाये !★ ★श्रीवल्लभाचार्यजी की जयन्ती मनायें !★ श्रीवल्लभाचार्य जी वेदों, पुराणों, भागवत व गीता के जानकर व विद्धान थे । वेदों व उपनिषदों का सार भागवत व गीता है । भागवत के अनुसार पुष्टि का अर्थ पोषण अर्थात् भगवान का अनुग्रह होता है । भगवान श्रीकृष्ण की कृपा या अनुग्रह ही पुष्टि है । इस प्रकार पुष्टिमार्ग भगवान को प्राप्त करने का सरल व सुगम मार्ग है । पुष्टि मार्ग के तीन महत्त्वपूर्ण बिन्दु है :-आत्मसमर्पण, अनुग्रह, स्वरूप दर्शन । इस प्रकार पुष्टिमार्ग मे (१)भक्त स्वयं अपने आराध्य के समक्ष "आत्म समर्पण" करता है ! (२)भगवान के "अनुग्रह" से भक्ति उत्पन्न होती है , उसे पुष्टि भक्ति कहते है ! (३)ऐसा भक्त भगवान के "स्वरूप दर्शन" के अतिरिक्त और अन्य किसी वस्तु के लिए प्रार्थना नहीं करता है ! इस भक्ति मार्ग को ●सतयुग मे भक्त प्रह्लाद व ध्रुव ने अपनाया । ●त्रैतायुग मे भरत, लक्ष्मण, हनुमान व विभिषण ने अपनाया था । ●द्वापरयुग मे बृजवासियों ने अपनाया था । बृजवासियों ने श्रीकृष्ण के समक्ष आत्मसमर्पण किया, उससे श्रीकृष्ण की कृपा से भक्ति प्राप्त हुई, उसके बाद बृजवासियों ने केवल स्वरूप दर्शन के अलावा कुछ नहीं माँगा । ●कलयुग मे बृजवासियों की निस्वार्थ भक्ति व प्रेम 4521 वर्षो तक चलता रहा व उन्होंने श्रीकृष्ण से कुछ नहीं माँगा, तब श्रीकृष्ण ने बृजवासियों के लिए गिरिराज जी पर 612 वर्ष पूर्व सन् 1409 मे प्रतिमा रुप मे अवतार लिया । यह ही बृजवासियों की "पुष्टि भक्ति" है ! इसे हम "जीवन्त पुष्टिमार्ग" कह सकते है ! यह श्रीकृष्ण का "प्रतिमा अवतार" है जो आज श्रीनाथजी के रुप मे हमारे बीच है । हम श्रीवल्लभाचार्य जी के ऋणी है कि उस पुष्टि मार्ग की सरल शब्दों मे व्याख्या करके इस सरल व सर्वश्रेष्ठ भक्ति मार्ग को जन - जन तक पहुँचाया । श्रीवल्लभाचार्य जी प्रेम, समर्पण व त्याग की मुर्ति है । आज हम श्रीवल्लभाचार्य जी के प्राकृट्य दिवस के अवसर पर हमे श्रीवल्लभाचार्य जी व पुष्टिमार्ग को जानना, मानना व अपनाना है । यह विचार सीए. दिनेश सनाढ्य ने 544 वीं श्रीवल्लभाचार्य जी की जयन्ती (वैशाख कृष्ण एकादशी सम्वत् १५३५ (सन् 1478) - 07/05/2021) पर आयोजित वर्चुअल संगोष्ठी मे रखे ! सीए. दिनेश चन्द्र सनाढ्य - Chartered Accountant, Social Activist, Political Analyst, Spiritual Thinker, Founder of Life Management #dineshapna - 08/05/2021
• श्रीवल्लभाचार्य जी का "अष्ट आयामी सन्देश" - वल्लभ कुल व वैष्णवों को ! • श्रीवल्लभाचार्य जी का ●प्रेम, ●समर्पण, ●त्याग, ●समदृष्टि, ●जनकल्याण, ●निस्वार्थ सेवा, ●धर्म व ●ज्ञान ! • श्रीवल्लभाचार्य जी का ज्ञान, अब नाथद्वारा मठाधीश को ! ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆【१】◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ ★नाथद्वारा मठाधीश किस दिशा मे चले ?★ ●जो अपने "बड़ों का सम्मान" न करें ! ●जो अपने "परिवार" का ध्यान न रखें ! ●जो अपनी "सनातन परम्पराओं" का ध्यान न रखें ! ●जो "पद" के लिए पुष्टि व समाज की परम्पराओं को नहीं माने ! ●जो "धन" के लिए अपने ईष्ट (भगवान) की सम्पत्तियो का नुकसान करें ! ●जो अपनो के "अन्तिम दर्शन" का सम्मान न करें ! ●जो अपनो का "अन्तिम संस्कार" भी न कर सकें ! ■जो व्यक्ति अपनो व अपने परिवार का नहीं, तो श्रीनाथजी, पुष्टि मार्ग, बृजवासियों, वैष्णवों व नाथद्वारावासीयो का कैसे हो सकता है ? कुछ तो सोचो !■ ■जो अपनो को अन्तिम बार अपने घर (मोती महल) मे नही आने दे व अन्तिम संस्कार मे शामिल नहीं हो सके ! उसके द्वारा आज श्रृद्धांजलि सभा रखना दिखावा मात्र है !■ ★जैसे श्रीनाथजी ने आज्ञा की, वैसा लिख दिया !★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक_बृजवासी #01/05/2021 #dineshapna •••••••••••••••••••••••【२】•••••••••••••••••••••••••• ★नाथद्वारा मन्दिर के "मठाधीश" किस दिशा मे चले ?★ ★मन्दिर मे "तिलकायत" नहीं,"मठाधीश" बन बैठे है ?★ ★जो स्वयं नियम/परम्पराओं को तोड़े, उसे "पद" का अधिकार कैसे ?★ ●नाथद्वारा मन्दिर मे तिलकायत बनने के लिए नियम व परम्परा है कि तिलकायत का ज्येष्ठ पुत्र ही तिलकायत बनता है, यदि तिलकायत का पुत्र नहीं हो तो पुत्र गोद लेने की परम्परा है ! ●पूर्व तिलकायत श्री दाऊजी तृतीय (राजीव जी) के कोई पुत्र नहीं था व न ही उन्होंने किसी को सामाजिक व वैध तरीक़े से गोद लिया है । ●वर्तमान तिलकायत श्री इन्द्रदमन जी (राकेश जी) न तो पूर्व तिलकायत श्री दाऊजी तृतीय (राजीव जी) के पुत्र है और न ही उनको गोद लिया गया । अर्थात् वर्तमान तिलकायत श्री इन्द्रदमन जी (राकेश जी) "गलत तरीकों से स्वघोषित" "तिलकायत" बने है ! इसलिए आज वैध रुप से "तिलकायत" का पद खाली है ! ●नाथद्वारा मन्दिर मे श्रीवल्लभाचार्य जी के कुल मे से नियम / परम्पराओं व वैध तरीकों से आज कोई भी "तिलकायत" नहीं है ! ◆ऐसी परिस्थिति मे नाथद्वारा मन्दिर की बागडोर उनके हाथों मे दी जानी चाहिए, जिनके हाथों मे श्रीवल्लभाचार्य जी से पूर्व थी । अर्थात् श्रीवल्लभाचार्य जी से पूर्व श्रीनाथजी की सेवा "बृजवासी" करते थे, अतः मन्दिर की बागडोर बृजवासियों के हाथों मे ही देना "उचित व वैध" है !◆ ★जैसे श्रीनाथजी ने आज्ञा की, वैसा लिख दिया !★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक_बृजवासी #02/05/2021 #dineshapna •••••••••••••••••••••••【३】•••••••••••••••••••••••••• ★नाथद्वारा मन्दिर के "मठाधीश" किस दिशा मे चले ?★ ★जो अपनो के "अन्तिम दर्शन" का सम्मान न करें !★ ★जो अपनो का "अन्तिम संस्कार" भी न कर सकें !★ ●व्यक्ति किसी के "अन्तिम दर्शन" के समय दुश्मन भी अपनी दुश्मनी को छोड़ कर दिवंगत व्यक्ति को सम्मान देता है किन्तु यहाँ पूर्व तिलकायत की पत्नी को अपने घर (मोती महल) मे आने से रोकना "सनातन धर्म" के अनुसार सबसे निकृष्ट कृत्य है ! ●मोती महल नाथद्वारा मन्दिर (श्रीनाथजी) की सम्पत्ति है, न कि वर्तमान "स्वघोषित तिलकायत" का निजी मकान ! यह भवन (मोती महल) को तिलकायत (मुख्य पुजारी) व उनके परिवार के लिए मन्दिर ने नि:शुल्क आवास हेतु दे रखा है ! ●चूंकि "श्रीमती महालक्ष्मी बहुजी" पूर्व तिलकायत की पत्नी है इसलिए श्रीनाथजी मन्दिर ने इनको मोतीमहल आवास हेतु दे रखा है ! इस कारण वर्तमान स्वघोषित तिलकायत इनको (पार्थिव शरीर को) मोतीमहल मे आने से रोकना गलत है ! ●जो पुष्टिमार्ग के प्रधान अपने बड़े भाई की पत्नी (भाभीजी) का अन्तिम समय मे भी सम्मान नहीं कर सकता है वह वैष्णवों व समाज को क्या धर्म की शिक्षा / ज्ञान देगा ? ●सनातन धर्म मे 16 संस्कारों मे सबसे महत्वपूर्ण, श्रेष्ठ व पूण्य का "अन्तिम संस्कार" है । यह कार्य उसका पुत्र, भाई, भतीजा या परिवार वाले करते है । इस समय दुष्ट से दुष्ट व्यक्ति भी अपनी दुष्टता छोड़कर यह पुण्य कार्य करता है । यह "शास्त्रों व लोक व्यवहार" का मत है । वर्तमान स्वघोषित तिलकायत ने उक्त पुण्य कार्य न करके पुष्टिमार्ग के वैष्णवों को क्या सन्देश दिया ? ■हम इसलिए कह रहे है कि आप हमारे श्रीनाथजी मन्दिर के प्रधान पुजारी बनकर बैठे हो, हम बृजवासियों को श्रीनाथजी से दूर करके स्वघोषित तिलकायत बने बैठे हो और हमारे मन्दिर व पुष्टिमार्ग की छवि धूमिल कर रहे हो ! इससे भी ज्यादा अपने कर्मचारियों के माध्यम से दिखावे की "श्रृद्धांजलि सभा" कराकर नाटक कर रहे हो ! जो गलत है !■ ★जैसे श्रीनाथजी ने आज्ञा की, वैसा लिख दिया ! ★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक_बृजवासी #03/05/2021 #dineshapna •••••••••••••••••••••••【४】•••••••••••••••••••••••••• ★नाथद्वारा मन्दिर के "मठाधीश" किस दिशा मे चले ?★ ●श्रीनाथजी श्रीकृष्ण का स्वरूप है अतः हमें श्रीकृष्ण को मानने के साथ अपनाना भी होगा ! अब यह बात हमारे पुष्टिमार्ग व श्रीवल्लभाचार्य जी के वंशज वर्तमान स्वघोषित तिलकायत तो कहेंगे नहीं ! इसलिए हमे ही श्रीकृष्ण को अपनाना होगा जैसे हम (बृजवासी) आज से सन् 1506 (515 वर्ष) से पूर्व श्रीकृष्ण को आत्मसात कर रखा था ! तथा जो सन्देश हमें श्रीकृष्ण ने आज से 5132 वर्ष पूर्व दिया था ! ●नाथद्वारा मन्दिर के वर्तमान स्वघोषित तिलकायत को भी श्रीकृष्ण का सन्देश है कि जैसे पाण्डवों ने युद्ध के बाद दोनों पक्षों के मरे हुए योद्धाओं का अंतिम संस्कार किया था। उसी प्रकार श्रीमती महालक्ष्मी बहुजी का अन्तिम संस्कार करना चाहिए । ●महाभारत का युद्ध धर्म के लिए हुआ था किन्तु आपने जो अघोषित युद्ध चालू कर रखा है वह अधर्म पर आधारित है क्योंकि पुष्टिमार्ग व श्रीवल्लभाचार्य जी के अनुसार जब आपने सभी कुछ श्रीनाथजी को समर्पण कर रखा है तो आपकी तो कोई सम्पत्ति है ही नहीं ! तब आप श्रीनाथजी की सम्पत्तियों के लिए क्यों लड़ रहे हो ! आपका सम्पत्ति के लिए लड़ना ही अधर्म है ! ●महाभारत के स्त्री पर्व के अनुसार युद्ध समाप्त होने के बाद युधिष्ठिर के कहने पर पांडवों ने ही दोनों पक्षों के मरे हुए योद्धाओं का अंतिम संस्कार किया था। उन्होंने इसलिए कोरवों के मरे हुए योद्धाओं का अंतिम संस्कार किया था क्योंकि मरने के बाद दुश्मनी खत्म हो जाती है और आखिर वह थे तो उनके भाई व परिवार के सदस्य ही । ■अभी भी वक्त है कि श्रीवल्लभाचार्य जी के सिद्धांतों व पद चिन्हों पर चले, नहीं तो हमें (बृजवासियों को) श्रीकृष्ण के सिद्धांतों व पद चिन्हों पर चलना होगा क्योंकि हम श्रीनाथजी (श्रीकृष्ण) को "मानते" भी है और "अपनाते" भी है !■ ★जैसे श्रीनाथजी ने आज्ञा की, वैसा लिख दिया !★ सीए. दिनेश सनाढ्य - #एक_बृजवासी #04/05/2021#dineshapna •••••••••••••••••••••••【५】•••••••••••••••••••••••••• ★★श्रीवल्लभाचार्य जी बनो !★★ (१)श्रीवल्लभाचार्य जी सभी से "प्रेम" करते थे किन्तु उनके वंशज नाथद्वारा मठाधीश "अपनो से ही प्रेम" नहीं करते है, तो "वैष्णवों का क्या" होगा ! (२)श्रीवल्लभाचार्य जी ने "प्रेम" से पुष्टिमार्ग बना दिया किन्तु उनके वंशज नाथद्वारा मठाधीश ने "अपनो मे से ही प्रेम हटा" दिया, तो "पुष्टिमार्ग कैसे" बढ़ायेंगे ! ★श्रीनाथजी ने आज्ञा की, वैसा लिख दिया !★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक_बृजवासी #05/05/2021 #dineshapna •••••••••••••••••••••••【६】•••••••••••••••••••••••••• ★★श्रीवल्लभाचार्य जी बनो !★★ (३)श्रीवल्लभाचार्य जी ने सभी के लिए "समर्पण" किया किन्तु उनके वंशज नाथद्वारा मठाधीश अपने कर्मों मे से ही "समर्पण हटा दिया", तो "वैष्णवों को क्या सन्देश" देगें ! (४)श्रीवल्लभाचार्य जी ने "समर्पण" से पुष्टिमार्ग बना दिया किन्तु उनके वंशज नाथद्वारा मठाधीश ने "अपनो के लिए ही समर्पण नहीं" किया, तो "पुष्टिमार्ग कैसे" बढ़ायेंगे ! जब जनता के लिए "समर्पण" नहीं, तो जनता का "आर्शीवाद" नहीं, तो हमारे "महाराजश्री" नहीं ! जब भगवान के लिए "आत्मसमर्पण" नहीं, तो भगवान का "अनुग्रह" नहीं, तो हम "पुष्टिमार्गीय" नहीं ! ★श्रीनाथजी ने आज्ञा की, वैसा लिख दिया !★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक_बृजवासी #05/05/2021 #dineshapna •••••••••••••••••••••••【७】•••••••••••••••••••••••••• ★★श्रीवल्लभाचार्य जी बनो !★★ (५)श्रीवल्लभाचार्य जी ने श्रीनाथजी की सेवा के लिए धन सम्पत्ति का "त्याग" किया किन्तु उनके वंशज नाथद्वारा मठाधीश ने धन सम्पत्ति के लिए "श्रीनाथजी सेवा का त्याग" किया, तो "वैष्णवों को क्या सन्देश" देगें ! (६)श्रीवल्लभाचार्य जी ने "त्याग" से पुष्टिमार्ग बना दिया किन्तु उनके वंशज नाथद्वारा मठाधीश ने "अपनो का व पुष्टिमार्ग के सिद्धांतों का त्याग" किया, तो "पुष्टिमार्ग को कैसे" बढ़ायेंगे ! ★श्रीनाथजी ने आज्ञा की, वैसा लिख दिया !★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक_बृजवासी #06/05/2021 #dineshapna •••••••••••••••••••••••【८】•••••••••••••••••••••••••• ★★श्रीवल्लभाचार्य जी बनो !★★ (७)श्रीवल्लभाचार्य जी ने जनकल्याण के लिए ज्ञान का "प्रचार" किया किन्तु उनके वंशज नाथद्वारा मठाधीश स्वकल्याण के लिए धन का "प्रसार" कर रहे है, तो "वैष्णवों को क्या सन्देश" देगें ! (८)श्रीवल्लभाचार्य जी ने पुष्टिमार्ग व लक्ष्मीपति श्रीकृष्ण का "प्रचार" हेतु तीन बार भारत भ्रमण किया किन्तु उनके वंशज नाथद्वारा मठाधीश भौतिक मार्ग व लक्ष्मी जी के "प्रसार" हेतु बार बार मायानगरी का भ्रमण व रमण कर रहे है, तो "पुष्टिमार्ग को कैसे" बढ़ायेंगे ! ★श्रीनाथजी ने आज्ञा की, वैसा लिख दिया !★ सीए. दिनेश सनाढ्य - एक_बृजवासी #06/05/2021 #dineshapna CA. Dinesh Sanadhya - ●Chartered Accountant, ●Social Activist, ●Political Analyst, ●Spiritual Thinker, ●Founder of Life Management #dineshapna - 11/05/2021
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