Wednesday, 17 June 2026

★ *गुलामी के 1200 वर्ष* *बनाम* *आज़ादी के 79 वर्ष* ★ ( महाराणा प्रताप के पाँच महान आदर्श ) इतिहास साक्षी है कि जब-जब हमारे शासकों में *आपसी फूट बढ़ी, स्वार्थ राष्ट्रहित पर भारी पड़ा और समाज मौन दर्शक बना,* तब-तब राष्ट्र को भारी मूल्य चुकाना पड़ा। विदेशी शक्तियों ने हमारी कमजोरियों का लाभ उठाया और देश लंबे समय तक पराधीन रहा। आज हम स्वतंत्र भारत के नागरिक हैं, परंतु स्वतंत्रता केवल सीमाओं की रक्षा से नहीं, बल्कि विचारों, मूल्यों, संस्कृति, चरित्र और राष्ट्रीय एकता की रक्षा से भी सुरक्षित रहती है। *लोकतंत्र में भी यदि दलगत हित, व्यक्तिगत स्वार्थ, सामाजिक विभाजन और नागरिक उदासीनता बढ़ती है, तो यह राष्ट्र के लिए चिंता का विषय* बन सकता है। वर्तमान युग का *संघर्ष तलवारों का नहीं, बल्कि विचारों, संस्कृति, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, सूचना और सामाजिक चेतना का है।* इसलिए आज का राष्ट्रधर्म केवल शत्रु से लड़ना नहीं, बल्कि स्वयं को जागरूक, संगठित, चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ बनाना है। ऐसे समय में *महाराणा प्रताप का जीवन हमें मार्ग दिखाता है।* उनका संदेश *किसी विशेष समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि अन्याय, पराधीनता, स्वार्थ और आत्मसमर्पण के विरुद्ध था।* उनके जीवन के *पाँच महान आदर्श* आज भी प्रासंगिक हैं— ■ अटूट स्वाभिमान ■ राष्ट्रनिष्ठा ■ अदम्य साहस ■ प्रेरक नेतृत्व ■ त्यागमय जीवन आज *आवश्यकता किसी एक महाराणा प्रताप की नहीं, बल्कि करोड़ों ऐसे नागरिकों की है* जिनमें प्रताप जैसा स्वाभिमान, कर्तव्यबोध, राष्ट्रप्रेम और त्याग की भावना हो। ★ *संकल्प* ★ "हम किसी के *विरोध में नहीं, राष्ट्र के उत्थान के पक्ष में* खड़े होंगे। हम *विभाजन नहीं, एकता का मार्ग* चुनेंगे। हम *स्वार्थ नहीं, राष्ट्रहित को प्राथमिकता* देंगे। और अपने आचरण से महाराणा प्रताप के आदर्शों को जीवन में उतारेंगे।" "हर भारतीय में *जब प्रताप का स्वाभिमान जागेगा, तभी राष्ट्र का गौरव और अधिक ऊँचा होगा।"* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* *#एक हिन्दुस्तानी* (134) #17/06/2026 #dineshapna



 

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