Chartered Accountant,Social Activist,Political Analysist-AAP,Spritual Thinker,Founder of Life Management, From India, Since 1987.
Friday, 18 June 2021
★प्रभुजी का "प्रेममार्ग" ही महाप्रभुजी का "पुष्टिमार्ग"★ ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ◆सर्वशक्तिमान प्रभु (श्रीकृष्ण) ने आज से 5132 वर्ष पूर्व बृज मे अवतार लिया तब बृजवासियों ने निस्वार्थ प्रेम व समर्पण के द्वारा श्रीकृष्ण से अनुग्रह मे "प्रेम भक्ति" प्राप्त की तथा श्रीकृष्ण ने बृजवासियों के साथ मित्रवत व्यवहार किया ! ◆सर्वशक्तिमान प्रभु (श्रीकृष्ण) के द्वारा बृजवासियों को "मित्र बनाने" के कारण व श्रीकृष्ण के कृष्णावतार की लीला पूर्ण करने के बाद भी बृजवासियों को श्रीकृष्ण ने "अनुग्रह" मे "निस्वार्थ प्रेम भक्ति" दी ! ◆बृजवासी को सर्वशक्तिमान प्रभु (श्रीकृष्ण) द्वारा "मित्र" बनाने के कारण उनके समकक्ष बृजवासी को प्रभुजी श्रीकृष्ण ने बनाये ! ◆बृजवासी 5132 वर्ष पूर्व श्रीकृष्ण से निस्वार्थ प्रेम को उनके लीला समाप्ति के बाद भी प्रतिमा रुप मे 4521 वर्ष बाद तक भी निरन्तर प्रेम करते रहे ! इसी "निस्वार्थ प्रेम" के कारण सर्वशक्तिमान प्रभु (श्रीकृष्ण) को अपने मित्र बृजवासियों के लिए 611 वर्ष पूर्व पुनः प्रतिमा रुप मे उसी बृज मे साक्षात् प्रकट हुए ! श्रीकृष्ण व बृजवासी दोनों आपस मे मित्र होने के कारण एक "सर्वशक्तिमान प्रभु" तो दूसरा "प्रभुजी" कहलाये ! ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ ◆बृजवासियों के "निस्वार्थ प्रेम" व "आत्मसमर्पण" के कारण श्रीकृष्ण ने "अनुग्रह" करके उन्हें प्रेम भक्ति दी तथा बृजवासीयो ने भी 5132 वर्षो से केवल "स्वरूप दर्शन" के अलावा अन्य कोई प्रार्थना नहीं की ! 【आत्मसमर्पण + अनुग्रह + स्वरूप दर्शन】 यही "प्रेममार्ग" आगे चलकर "पुष्टिमार्ग" कहलाया ! ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ ◆बृजवासियों ने 4521 वर्ष तक श्रीकृष्ण के साथ एकीकार होकर जो दर्शन व प्रेममार्ग पर चले ! उसको ज्ञान व शब्द रुप मे प्रस्तुत करने के लिए श्रीनाथजी (श्रीकृष्ण) ने महाप्रभुजी को 514 वर्ष पूर्व आज्ञा कर बृज मे बुलाया ! ◆महाप्रभुजी ने श्रीनाथजी (श्रीकृष्ण) की आज्ञानुसार प्रभुजी (बृजवासी) के प्रेममार्ग को ज्ञान व शब्दों मे "पुष्टिमार्ग" के रुप मे वैष्णवजनों के समक्ष रखा ! ◆प्रभुजी (बृजवासियों) के "प्रेममार्ग" व महाप्रभुजी (वल्लभाचार्य जी) के "पुष्टिमार्ग" समान है ! सर्वशक्तिमान प्रभु (श्रीकृष्ण) की आज्ञानुसार ही वल्लभाचार्य जी ने प्रेम मार्ग को पुष्टि मार्ग रुप मे जनकल्याण हेतु परिभाषित किया ! केवल अन्तर यह है कि "प्रेममार्ग" को बृजवासियों ने "वास्तिवकता मे जीया" है व "पुष्टिमार्ग" को वल्लभाचार्य जी ने संसार के जनकल्याण हेतु "ज्ञान व शब्दों मे" प्रकट किया है जिससे श्रीकृष्ण भक्ति का फायदा ज्यादा से ज्यादा लोगो को मिल सके ! दिनेश सनाढ्य - एक बृजवासी - 18/06/2020 हल्दीघाटी युद्ध - महाराणा प्रताप - 18/06/1576 ●●●● 444 वर्ष ●●●● #dineshapna
Thursday, 17 June 2021
नाथद्वारा श्रीनाथजी मन्दिर की 5 चुनौतीयाँ :- (३)वल्लभाचार्यजी के सिद्धांतों की पालना नहीं ! (i)श्रीवल्लभाचार्य जी अपना सर्वश्व "श्रीनाथजी को समर्पण" करने व सेवा करने की आज्ञा दी, किन्तु आजकल स्वयं के साथ श्रीनाथजी का भी "स्वयं को अर्पण" करके सेवा कर रहे है ! (ii)श्रीवल्लभाचार्य जी ने कहा कि श्रीनाथजी "लौकिक कार्य की तरह" की गई सेवा अंगीकार नहीं करते है, भगवद् सेवा "भक्त का भाव" ही एकमात्र साधन है, किन्तु आजकल लौकिक कार्य की तरह ही सेवा कार्य हो रहा है ! (iii)श्रीवल्लभाचार्य जी ने "धर्म के लिए" तीन बार पृथ्वी परिक्रमा की, किन्तु आजकल "धन के लिए" मायानगरी की ही परिक्रमा करने के साथ स्थाई निवास भी बना लिया है ! (iv)श्रीवल्लभाचार्य जी ने केवल एक धोती मे ही अपना जीवन "श्रीनाथजी व जनकल्याण" के लिए अर्पण किया, किन्तु आजकल उन्हें धोती भर के धन "स्वयं के लिए" चाहिए ! (v)श्रीवल्लभाचार्य जी की अन्तिम शिक्षा जो उनके पुत्रों व वैष्णवो को दी, वह शिक्षा तो ग्रहण करनी चाहिए कि "जब तुम प्रभु से बहिँमुख हो जावोगे तब कलिकाल के प्रभाव मे रहने वाले तुम्हारे देह, मन इत्यादि निश्चित रुप से तुम्हारा नाश कर देगे," ऐसा मेरा मंतव्य है । सीए. दिनेश सनाढ्य - एक बृजवासी #18/06/2021 #dineshapna
Wednesday, 16 June 2021
नाथद्वारा श्रीनाथजी मन्दिर की 5 चुनौतीयाँ :- (२)मन्दिर की जमीन व धन का दुरुपयोग ! (i)मन्दिर की कई जमीन हाथ से निकल गई, इसका कारण बोर्ड सदस्यो की लापरवाही व महाराज श्री की नासमझी है ! जैसे भीलवाड़ा की जमीन, लालबाग बस स्टैण्ड की जमीन इत्यादि ऐसे कई जमीने है जिसका नुकसान मन्दिर को हुआ है व हो रहा है ! (ii)आय देने वाले पायगा काँटेज को तोड़कर केवल खर्चा बढ़ाने वाला वल्लभ विलास का निर्माण करना ! क्या धन व जमीन का दुरुपयोग नहीं है ? (iii)मन्दिर के होटल, धर्मशाला, दुकानों व अन्य निर्माणो मे पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं करना ! क्या जमीन व धन का दुरुपयोग नहीं है ! (iv)बड़ा बाजार जैसी मजबूत दो मंजिला स्कूल को तोड़कर, पुनः दो मंजिला स्कूल बनाना ! क्या धन का दुरुपयोग नहीं है ! (v)अनावश्यक निर्माण, अधिकारियों के वेतन, अत्यधिक अंकेक्षण फीस व हिसाब किताब के नाम पर खाना पूर्ति, बगीचे/जमीनों पर प्रभावी नियंत्रण/सदुपयोग नहीं होने से ! क्या धन/जमीन का दुरुपयोग नहीं हो रहा है ? सीए. दिनेश सनाढ्य - एक बृजवासी #17/06/2021 #dineshapna
★प्रश्नों के उत्तर तीन दिन मे किन्तु 1/5 ही, किन्तु 4 प्रश्नों के उत्तर शेष !★ नाथद्वारा नगर पालिका के वार्ड नम्बर 2 के तेलियों का तालाब हाउसिंग बोर्ड में पानी की टंकी के पास एक गार्डन की दीवार । (१)नगर पालिका द्वारा पुनः निर्माण कार्य तीन दिन मे शुरू के लिए विधायक महोदय को धन्यवाद । (२)ठेकेदार के द्वारा केवल भराव भरकर उसके ऊपर से ही दिवार पुनः बनाना गलत है ।【?】 (३) विधायक महोदय को यह भी जाँच करानी चाहिए कि गाडँन निर्माण मे करीब 3000 वर्गफीट सरकारी जमीन छोड़ना, एक बहुत बड़ा घोटाला है ।【?】 (४)सभी सार्वजनिक निर्माण की लागत, ठेकेदार का नाम व पता, निर्माण वर्ष, निर्माण शर्तों को बोर्ड पर अंकित करके मौका स्थल पर लगाये ।【?】 (५)विधायक महोदय से निवेदन है कि पिछले पाँच वर्षों मे हुए सभी निर्माण कार्यों का आम जनता द्वारा सामाजिक अंकेक्षण कराकर आपकी मेहनत व ईमानदारी को सार्थक करें !【?】 सीए. दिनेश सनाढ्य - एक हिन्दुस्तानी #16/06/2021 #dineshapna
Tuesday, 15 June 2021
★★बृजवासी का "निस्वार्थ प्रेम" V / S बोर्ड मैम्बर्स / अधिकारी का "कर्त्तव्य"★★ ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ ■निस्वार्थ प्रेम वही होता है जो ●बिना किसी स्वार्थ / प्रतिफल की आशा के दूसरे के लिए कुछ भी किया जाये , ●दूसरे का सम्मान करें , ●दूसरे के प्रति आदर व सर्मपण भाव रखें ! निस्वार्थ प्रेम करने वाला व्यक्ति हमेशा ●अटूट विश्वास करता है ! ■कर्तव्य का अभिप्राय उन कार्यों से होता है, जिन्हें करने के लिए व्यक्ति ●नैतिक रूप से प्रतिबद्ध होता है। एक ●पारिश्रमिक प्राप्ति के बदले नैतिक बंधन मात्र है। कर्तव्य दो प्रकार के होते हैं- नैतिक तथा कानूनी। नैतिक कर्तव्य वे हैं जिनका संबंध ●मानवता की नैतिक भावना, ●अंत:करण की प्रेरणा या उचित कार्य की प्रवृत्ति से होता है। यदि मानव इन कर्तव्यों का पालन नहीं करता तो स्वयं उसका अंत:करण उसको धिक्कार सकता है, या समाज उसकी निंदा कर सकता है ! कानूनी कर्तव्य वे हैं जिनका पालन न करने पर नागरिक ●राज्य द्वारा निर्धारित दंड का भागी हो जाता है। ■श्रीनाथजी से बृजवासी "निस्वार्थ प्रेम" करते थे इसलिए सन् 1409 से 1506 तक बिना प्रतिफल की आशा के ●97 वर्ष तक सेवा की , उसके उपरान्त महाप्रभु वल्लभाचार्य जी पधारे व श्रीनाथजी के दर्शन की इच्छा जाहिर की तो तुरंत ●बृजवासी सद्दू पाण्डे ने वल्लभाचार्य जी को श्रीनाथजी से मिला दिये ! उसके बाद श्रीवल्लभाचार्य जी के कहे अनुसार श्रीनाथजी की सेवा आजतक निस्वार्थ भाव से कर रहे है ! जब बृज (जतिपुरा) मे संकट आया तो श्रीनाथजी के लिए अपने प्राण तक दिये व अपनी सम्पत्ति छोडकर मथुरा से मेवाड़ तक आये ! यहाँ नाथद्वारा मे आक्रमण हुए तो अपने प्राण देकर रक्षा की ! ●बृजवासीयो का श्रीनाथजी से "निस्वार्थ प्रेम" का 611 वर्षो का इतिहास है ! ■सत्ता से असुरक्षा :- श्रीनाथजी को बृज (मथुरा) मे सन् 1669 मे सत्ता व अधिकारी से असुरक्षा थी व शायद सन् 1959 के बाद भी सत्ता व बोर्ड मैम्बर्स/अधिकारी से असुरक्षा बढ़ रही है ! क्योंकि इतिहास गवाह है कि हमेशा कुछ सत्ताधीशों से ही असुरक्षा होती है जैसे अकबर, शाहजहाँ व जहाँगीर से नहीं औरंगजेब से असुरक्षा थी ! ■सन् 1959 मे नाथद्वारा मन्दिर मण्डल का गठन श्रीनाथजी की सम्पत्तियों की रक्षार्थ किया था ! इस प्रकार कुछ वर्षो तक सत्ताधीशों ने सुरक्षा भी की, किन्तु वर्तमान के सत्ताधारी, बोर्ड मैम्बर्स व अधिकारियों के काम व व्यवहार से श्रीनाथजी की सम्पत्तियों की सही ढंग से सुरक्षा नहीं हो पा रही है ! इसके अनेकों उदाहरण प्रमाण सहित है ! इसलिए इनसे (सत्ता से) असुरक्षा है ! ■पहले श्रीवल्लभाचार्य जी, उनके पुत्र व पौत्रों ने असुरक्षा की स्थिति मे पलायन किया, किन्तु वर्तमान मे उनके वंशज ऐसी असुरक्षा की स्थिति मे चुप है यानि मौन स्वीकृति है ? CA. Dinesh Sanadhya - 14/06/2020 www.dineshaona.blogspot.com
नाथद्वारा श्रीनाथजी मन्दिर की 5 चुनौतियाँ :- (१)मन्दिर पर बढ़ता सरकारी नियंत्रण ! (i)सरकारी अधिकारियों के वेतन व अन्य खर्च बढ़ने के बावजूद कोई फायदा नहीं ! क्योंकि सम्पदा व कृषि अधिकारी होने के बावजूद सम्पत्तियों का नुकसान व कृषि आय मे कोई वृद्धि नहीं ! (ii)सरकारी अधिकारी ज्यादातर समय सरकार का या सरकार के हित का कार्य करते है ! (iii)सरकारी हस्तक्षेप होने से मन्दिर को व्यापार बनाने की ओर अग्रसर हो रहे है ! जिससें धार्मिक आस्था व भावनाओं की कमी हो रही है ! (iv)समर्पित कर्मचारियों के स्थान पर ठेका पद्धति से कार्य होने के कारण बृजवासियों को रोजगार से वंचित होना पड़ रहा है ! (v)सरकारी हस्तक्षेप होने से भ्रष्टाचार, धार्मिक आस्थाओं के विपरीत कार्य, धन का दुरुपयोग, परम्पराओं को तोड़ना, नेताओं का अनावश्यक दखल व पारम्परिक कला / संस्कृति के ह्रास आदि की संम्भावनाएँ बढ़ेगी ! सीए. दिनेश सनाढ्य - एक बृजवासी #16/06/2021 #dineshapna
"विकास" के नाम पर धन का "विनाश" क्यों ? नाथद्वारा की आम जनता के 20 यक्ष प्रश्न ? विधायक का धन्यवाद, अन्य को सावधान ! विकास हेतु उपलब्ध धन का सदुपयोग हो ! ■नाथद्वारा विधायक जैसे तैसे धन लाते है, किन्तु अधिकारी व ठेकेदार उस धन को बबार्द कर रहे है !■ (१.१)नाथद्वारा मे चौपाटी पर पानी निकासी के लिए नाले के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किये जिसकी पोल पहली बारिश मे ही खुल गई, तो क्या यह बेकार था ? (२.२)कोबल स्टोन मे न लेवल का व न मजबूती का ध्यान रखा, तो क्या धन की बबार्दी है ? (३.३)यदि करोडों रुपये खर्च करके भी पानी की समस्या का समाधान नहीं तो करोड़ों रुपये खर्च क्यों किये गये ? (४.४)क्या नगरपालिका द्वारा किये गये उक्त निर्माण कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण किया जाना चाहिए ? (५.५)क्या ईमानदार विधायक को जनता के धन का सदुपयोग सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक अंकेक्षण का आदेश देना चाहिए ? ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ ■नाथद्वारा विधायक नवीन योजना लाते है, किन्तु हकीकत मे योजना के मूर्तरूप मे मूलस्वरूप क्यों नहीं ?■ (६.१)पानी निकासी व कोबल स्टोन निर्माण की योजना की पोल पहली बारिश मे ही खुल गई, तो इसके लिए कौन जिम्मेदारी से क्षतिपूर्ति करेगा ? (७.२)क्या पार्क निर्माण, चौराहा निर्माण व अन्य योजना भी क्या पहली बारिश मे धराशायी हो जायेगी ? (८.३)जैसा कि पहले सिवरेज पाईप सही नहीं जोडने की समस्या आई थी, तो यदि यही हाल है तो क्या 13 करोड़ का सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बेकार नहीं होगा ? (९.४)नगरपालिका की जमीन, सुखाडिया नगर पार्क की जमीन,सिंहाड़ व नाथूवास तालाब की जमीन आदि पर अतिक्रमण नहीं रोक पा रहे हो तो थीम पार्क का क्या औतिच्य है ? (१०.५)जब नगरपालिका सड़कों पर अतिक्रमण से हो रही बदसूरती को नहीं रोक सकती है तो चौराहों व नगर के सौन्दर्यीकरण पर धन की बबार्दी क्यों ? ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ ■नाथद्वारा विधायक सुविधाजनक योजनाएँ लाते है, किन्तु हकीकत मे क्यों ऐसी योजनाएँ अतिक्रमण के भेट चढ़ जाती है ?■ (११.१)लालबाग मे सुविधा युक्त बस स्टैण्ड बनाया, तो क्यों नगरपालिका ने लालबाग बस स्टैण्ड की जमीन मन्दिर से हड़प कर बेच दी ? (१२.२)फोरलेन ब्रिज के नीचे की जमीन पार्किंग हेतु होनी चाहिए, तो क्यों नगरपालिका सौन्दर्यीकरण के नाम पर जमीन बेकार कर रही है ? (१३.३)सरकार व नियम है कि प्रत्येक होटल / बहुमंजिला बिल्डिंग मे पार्किंग व्यवस्था अनिवार्य रुप से हो, तो क्यों नगरपालिका बिना पार्किंग व्यवस्था के निर्माण स्वीकृति देती है ? या नियम विरुद्ध कार्यों पर चुप क्यों ? (१४.४)विधायक चाहते है सुव्यवस्थित विकास / निर्माण कार्य हो, तो नगरपालिका सक्षम व्यक्तियों के नियम विरुद्ध निर्माण कार्यों पर चुप क्यों ? (१५.५)विधायक चाहते है नाथूवास / सिंहाड़ तालाब का सौन्दर्यीकरण हो, तो नगरपालिका यहाँ हो रहे अतिक्रमण पर मौन सहमति क्यों ? ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ ■नाथद्वारा विधायक बडी - बडी योजनाएँ लाते है, किन्तु हकीकत मे क्यों ऐसी योजनाएँ मौत व घोटाले का सफर बन जाती है ?■ (१६.१)विधायक फोरलेन लाये, किन्तु यह नाथद्वारा ऐलिवेटेड पुल व चौराहों पर मौत की सड़क बन गई ! जिसमें स्वयं कांग्रेसी नेता भी शिकार होते होते बचे ! (१७.२)विधायक फोरलेन लाये, किन्तु निर्माण मे कुछ भी सही नहीं सभी मे कुछ न कुछ कमियाँ है ! जैसे डिवाइडर, मोड़, ब्रिज, अण्डरपास, पानी निकासी, सड़क की गुणवत्ता, टोल वसूली आदी ! (१८.३)विधायक बस स्टैण्ड लाये, किन्तु नगरपालिका ने उसको बनाने मे लाखों रुपये व्यर्थ कर दिये, बाद मे श्रीनाथजी मन्दिर से किराए पर ली जमीन को ही बेच दी ! (१९.४)विधायक हाँस्पिटल लाये, किन्तु उसकी भी कुछ जमीन सब्जी मण्डी को दे दी, जिससे उसके विस्तार मे भविष्य मे दिक्कत आयेगी व वर्तमान मे व्यवधान हो रहा है ! (२०.५)विधायक बड़ी - बड़ी योजनाएं व विकास के लिए अपार धन तो लाते है किन्तु उसके धरातल पर सदुपयोग सुनिश्चित हो, उसकी कोई योजना नहीं है ! उन्हें पिछले 15 वर्षों के सभी विकास कार्यों का "सामाजिक अंकेक्षण" पारदर्शिता के साथ आम जनता से कराना चाहिए ! ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ★5 यक्ष प्रश्नों के 5 पूरक प्रश्न, विचारणीय बिन्दु व सुझाव !★ नाथद्वारा नगर पालिका के वार्ड नम्बर 2 के तेलियों का तालाब हाउसिंग बोर्ड में पानी की टंकी के पास एक गार्डन का निर्माण विगत कुछ वर्षों में हुआ और हाल में ही नाथद्वारा विधायक श्रीमान् डॉ. सीपी जोशी जी ने वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया था । ठेकेदार द्वारा घटिया निर्माण व नगरपालिका की अनदेखी से कल पहली बारिश में ही दीवार ढह गई । अच्छा हुआ यह हादसा रात को हुआ, दिन मे पार्क में बच्चे और कोलोनी वासी घूमते है । (१)नगर पालिका चेयरमैन, वार्ड पार्षद और जिम्मेदार अधिकारी तुरंत कार्यवाही कर पुनः निर्माण कराये । (२)विधायक महोदय के अथक प्रयास से लाये धन को बबार्द न करें । (३)इस घटिया निर्माण की जाँच कराकर दोषी व्यक्ति से नुकसान की वसूली कराई जाये । (४)सभी सार्वजनिक निर्माण की लागत, ठेकेदार का नाम व पता, निर्माण वर्ष बोर्ड पर अंकित करके मौका स्थल पर लगाये । (५)विधायक महोदय से निवेदन है कि पिछले पाँच वर्षों मे हुए सभी निर्माण कार्यों का आम जनता द्वारा सामाजिक अंकेक्षण कराकर आपकी मेहनत व ईमानदारी को सार्थक करें ! सीए. दिनेश सनाढ्य. - एक हिन्दुस्तानी #10-11-12-13-14/06/2021. #dineshapna
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