Chartered Accountant,Social Activist,Political Analysist-AAP,Spritual Thinker,Founder of Life Management, From India, Since 1987.
Sunday, 12 July 2026
★ *जमीर की पुकार* ★ *हराम की कमाई से सम्मान नहीं मिलता,* झूठ के महलों में सच्चा इंसान नहीं मिलता। *दौलत यदि छल से आई, पल में बिखर जाएगी,* सत्य की कमाई ही जीवन को महकाएगी। *महँगे इत्रों की खुशबू क्या मन को बदल सके,* यदि भीतर द्वेष भरा हो, कौन उसे संभाल सके। *कपड़ों की चमक से केवल तन ही सज पाता है,* चरित्र का उजियारा ही जग में मान दिलाता है। *श्रृंगार से मुख सुंदर हो, यह तो संभव बात,* किन्तु निर्मल आचरण से ही मिलती सच्ची सौगात। *मन में यदि कीचड़ पलता हो, स्वर्ग भी फीका लगे,* निर्मल दृष्टि वाला मानव हर पल ईश्वर को जगे। *अहंकार का विष सबसे गहरा घाव बना देता,* विवेक, दया और प्रेम का दीप स्वयं बुझा देता। *सफेद वस्त्र पहन लेने से मन उजला कब होता,* सत्य, सेवा और सदाचार से जीवन निर्मल होता। *दोगलेपन की राह सदा अंत में हार दिलाती है,* ईमानदारी की छोटी राह भी मंज़िल तक ले जाती है। *जिसके भीतर जमीर जगा, वही सच्चा धनवान,* वही समाज का दीपक है, वही देश की शान। *कर्मों का लेखा-जोखा एक दिन सामने आता है,* अच्छा-बुरा हर कर्म अपना फल अवश्य दिलाता है। इसलिए जीवन का केवल एक ही हो आधार— *सत्य, ईमान, विनम्रता और निष्कलुष व्यवहार।* ं *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* #एक_हिन्दुस्तानी (166) | 12/07/2026 #dineshapna
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