Friday, 23 October 2026

■ *दशहरे से दीपावली :* ■ (लंका विजय से अयोध्या आगमन तक का 20 दिवसीय सफ़र) श्रीराम रावण वध के बाद लंका के कार्य केवल 2 से 3 दिनों में संपन्न हो गए थे और बाकी का अधिकांश समय अयोध्या लौटने की यात्रा तथा रास्ते में ऋषि-मुनियों से मिलने में बीता। लंका विजय (दशहरा) से लेकर अयोध्या वापसी (दीपावली) के 20 दिनों का घटनाक्रम मुख्य रूप से इस प्रकार रहा :- (1.) *लंका में हुए कार्य (शुरुआती 2 से 3 दिन)* (i) *रावण का अंतिम संस्कार :* श्रीराम के निर्देश पर विभीषण ने रावण और अन्य योद्धाओं का शास्त्र सम्मत अंतिम संस्कार किया। (ii) *विभीषण का राज्याभिषेक :* श्रीराम के आदेश पर लक्ष्मण जी ने वानर और राक्षसों की उपस्थिति में विभीषण का लंका नरेश के रूप में विधिवत राजतिलक किया। (iii) *माता सीता से भेंट व अग्नि-परीक्षा :* हनुमान जी माता सीता को अशोक वाटिका से आदरपूर्वक लेकर आए। इसके बाद माता सीता की पवित्रता को जगत के सामने प्रमाणित करने के लिए अग्नि-परीक्षा हुई। (iv) *देवताओं की स्तुति व वरदान :* भगवान शिव, इंद्र तथा दशरथ जी प्रकट हुए और प्रभु श्रीराम की स्तुति की। इंद्रदेव ने वरदान देकर युद्ध में मारे गए सभी वानर-भालुओं को पुनः जीवित कर दिया। (2.) *पुष्पक विमान से अयोध्या की यात्रा (लगभग 17 से 18 दिन)* रावण वध के बाद श्रीराम लंका में अधिक नहीं रुके, क्योंकि उनके 14 वर्ष के वनवास की अवधि पूरी होने में केवल कुछ ही दिन शेष थे (भरत जी ने प्रतिज्ञा की थी कि यदि राम एक भी दिन देर से आए, तो वे प्राण त्याग देंगे)। विभीषण ने अयोध्या लौटने के लिए श्रीराम को पुष्पक विमान भेंट किया। वापसी की यात्रा में कई पड़ाव और महत्वपूर्ण कार्य हुए : - (i) *रास्ते में स्मृतियों का दर्शन :* श्रीराम पुष्पक विमान से माता सीता को लंका का युद्धक्षेत्र, सेतुबंध (रामसेतु), किष्किंधा और दंडकारण्य के वे स्थान दिखाते हुए चले जहाँ उन्होंने वनवास का समय बिताया था। (ii) *किष्किंधा में ठहराव :* किष्किंधा पहुँचकर विमान रुका, जहाँ सुग्रीव की पत्नियों और अन्य वानर स्त्रियों को भी अयोध्या चलने के लिए विमान में सवार किया गया। (iii) *ऋषि भारद्वाज का आश्रम (प्रयागराज) :* ● वनवास की 14 वर्ष की अवधि पूरी होने के दिन (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी/अमावस्या से ठीक पहले) प्रभु प्रयागराज में महर्षि भारद्वाज के आश्रम पहुँचे। ● वहाँ श्रीराम ने महर्षि का आशीर्वाद लिया और ऋषि के आग्रह पर भोजन व विश्राम किया। ● हनुमान जी का नंदीग्राम जाना: ● आश्रम से श्रीराम ने हनुमान जी को नंदीग्राम भेजा, ताकि वे भरत जी को श्रीराम के सकुशल लौटने की सूचना दे सकें और उनकी प्रतिक्रिया देख सकें। ● गुहराज निषाद से भेंट: श्रृंगवेरपुर में श्रीराम ने अपने परम मित्र निषादराज गुह से पुनः भेंट की। *3. अयोध्या आगमन (दीपावली का दिन)* कार्तिक अमावस्या के दिन श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, विभीषण और पूरी वानर सेना सहित अयोध्या के निकट नंदीग्राम पहुँचे। वहाँ भरत जी से उनका अत्यंत भावुक मिलन हुआ और फिर अयोध्या प्रवेश हुआ। 14 वर्ष के वनवास और लंका विजय के बाद प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने की इसी खुशी में अयोध्यावासियों ने घर-घर घी के दीप जलाए, जिसे आज हम दीपावली के रूप में मनाते हैं । *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* • Chartered Accountant • Social Activist • Political Analyst • Spiritual Thinker • Founder of Life Management (336) #एक_हिन्दुस्तानी #24/10/2026 #dineshapna



 

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