Chartered Accountant,Social Activist,Political Analysist-AAP,Spritual Thinker,Founder of Life Management, From India, Since 1987.
Thursday, 27 August 2026
★ *रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ !* ★ रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि *“रक्षा के संकल्प”* का पर्व है। जिस प्रकार बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधकर यह विश्वास करती है कि भाई जीवनभर उसकी रक्षा करेगा, उसी प्रकार लोकतंत्र में *जनता अपने मत के रूप में जनप्रतिनिधि की कलाई पर एक जिम्मेदारी का रक्षासूत्र* बाँधती है। जनता पार्षद को केवल वोट नहीं देती—वह *पाँच वर्षों के लिए अपने अधिकारों, सुविधाओं और वार्ड के विकास की जिम्मेदारी* सौंपती है। लेकिन जब कोई जनप्रतिनिधि *जनहित और अपने कर्तव्य से विमुख होकर व्यक्तिगत हित* को प्राथमिकता देने लगे, तब लोकतंत्र में सबसे बड़ी आवश्यकता होती है—जागरूक जनता की। ★ *आइए, इस रक्षाबंधन पर एक नया संकल्प लें* ★ हम अपना वोट केवल उस पार्षद को देंगे— ● जो जनता के हितों की रक्षा करे, ● जो अपने वार्ड की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध रहे, ● जो जनता के धन का हिसाब देने को तैयार रहे, ● जो विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करे, और ●जो आगामी पाँच वर्षों के लिए जनता के पाँच प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर एवं स्पष्ट कार्य-संकल्प दे। क्योंकि— ● बहन का रक्षासूत्र *भाई को रक्षा का दायित्व* देता है, और जनता का वोट *जनप्रतिनिधि को जनसेवा का दायित्व* देता है। ● रक्षाबंधन पर भाई से रक्षा का वचन, और लोकतंत्र में पार्षद से जनहित की रक्षा का वचन! ★ *इस बार केवल वोट नहीं—जवाबदेही का रक्षासूत्र बाँधें!* ★ *Gen-S से Gen-A बनें।* सोती जनता नहीं—जागती, पूछती और जवाबदेही तय करती जनता बनें। *“एक दिन का मतदान नहीं,* *1825 दिन की जन-जागरूकता!”* 🇮🇳 *CA. Dinesh Chandra Sanadhya* (252) | #एक_हिन्दुस्तानी #28/08/2026 #dineshapna
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