Tuesday, 14 July 2026

★★ *"श्रीकृष्ण शरणम् ममः"* ★★ (यह पुष्टिमार्ग का मूल अष्टाक्षर मंत्र है।) *(1) यह भगवत्प्रदत्त (ईश्वर से प्राप्त) मंत्र है : -* पुष्टिमार्ग की परंपरा के अनुसार जगद्गुरु श्री वल्लभाचार्य महाप्रभु (1479–1531 ई.) को *स्वयं भगवान श्रीकृष्ण (श्रीनाथजी) से यह दिव्य अष्टाक्षर मंत्र प्राप्त हुआ।* उसी के आधार पर उन्होंने पुष्टिमार्ग में ब्रह्मसम्बन्ध दीक्षा की परम्परा स्थापित की। अर्थात् पुष्टिमार्ग की मान्यता में यह मंत्र किसी मानव द्वारा रचित नहीं, बल्कि *भगवत्प्रदत्त (ईश्वर से प्राप्त) मंत्र माना जाता है* *(2) यह मंत्र किस शास्त्र या धार्मिक ग्रंथ में मिलता है?* "श्रीकृष्ण शरणम् ममः" शब्दशः किसी एक वेद, उपनिषद, श्रीमद्भागवत या भगवद्गीता में मंत्ररूप में उद्धृत नहीं मिलता। यह मंत्र मुख्यतः पुष्टिमार्गीय परंपरा में प्राप्त एवं संरक्षित है। *(3) क्या इसका आधार शास्त्रों में है? :-* हाँ। यद्यपि मंत्र के शब्द उसी रूप में नहीं मिलते, परंतु इसका भाव अनेक शास्त्रों में मिलता है। *(क) भगवद्गीता (18.66)* "सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।" अर्थात् सब धर्मों का त्याग करके केवल मेरी शरण में आओ। *(ख) श्रीमद्भागवत महापुराण* भागवत में अनेक स्थानों पर भगवान की शरणागति को ही सर्वोच्च साधन बताया गया है। *(ग) विष्णु पुराण, नारद भक्ति सूत्र तथा अन्य वैष्णव ग्रंथों* में भी भगवान विष्णु/श्रीकृष्ण की शरण ग्रहण करने का महत्व प्रतिपादित है। अतः यह कहा जा सकता है कि *"श्रीकृष्ण शरणम् ममः" शास्त्रों की शरणागति-परंपरा का सार है।* *(4) इसका महत्व क्या है? :-* पुष्टिमार्ग में इसे जीवन का मूल मंत्र माना जाता है क्योंकि यह— ◆ *भगवान श्रीकृष्ण को अपना एकमात्र आश्रय* स्वीकार कराता है। ◆ *जीव और भगवान के बीच ब्रह्मसम्बन्ध* स्थापित करने का माध्यम है। ◆ *अहंकार का त्याग और पूर्ण आत्मसमर्पण* सिखाता है। ◆ *भगवान की कृपा (पुष्टि) प्राप्त करने* का आधार माना जाता है। ◆ *भय, चिंता और असुरक्षा को दूर कर विश्वास एवं आनंद* का संचार करता है। *(5) निष्कर्ष :-* "श्रीकृष्ण शरणम् ममः *" केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि पूर्ण शरणागति का जीवन-दर्शन है।* यद्यपि यह मंत्र शब्दशः वेद, गीता या भागवत में नहीं मिलता, पर इसका भाव सम्पूर्ण वैष्णव दर्शन का मूल है। *पुष्टिमार्ग की परंपरा में इसे स्वयं श्रीनाथजी द्वारा श्री वल्लभाचार्य महाप्रभु को प्रदत्त दिव्य अष्टाक्षर मंत्र माना जाता है* और यही इसकी सर्वोच्च आध्यात्मिक महत्ता है। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* #एक_हिन्दुस्तानी (170) | 14/07/2026 #dineshapna








 

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