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Monday, 13 July 2026
★★ *"श्रीकृष्ण शरणम् ममः"* ★★ ( *पुष्टिमार्ग का* अत्यंत प्रसिद्ध एवं दिव्य *अष्टाक्षर मंत्र* है।) *1. अर्थ :-* "भगवान श्रीकृष्ण ही मेरे एकमात्र आश्रय हैं।" अर्थात् "मैं भगवान श्रीकृष्ण की शरण में हूँ।" *2. भावार्थ :-* इस मंत्र का भाव केवल इतना नहीं कि हम संकट के समय भगवान को पुकारें, बल्कि यह है कि— ◆जीवन के प्रत्येक सुख-दुःख में श्रीकृष्ण पर पूर्ण विश्वास रखें। ◆अहंकार, भय, मोह और चिंता छोड़कर स्वयं को भगवान को समर्पित करें। ◆यह स्वीकार करें कि जो कुछ भी हो रहा है, वह उनकी कृपा और इच्छा से ही हो रहा है। ◆अपने तन, मन, धन, कर्म और जीवन को प्रभु की सेवा एवं कृपा पर समर्पित करें। *पुष्टिमार्ग में* यह मंत्र *पूर्ण आत्मसमर्पण (शरणागति)* का प्रतीक माना जाता है। *3. संदेश :-* "श्रीकृष्ण शरणम् ममः" हमें यह संदेश देता है कि— ◆ अहंकार छोड़ो, भगवान का आश्रय ग्रहण करो। ◆ कर्तव्य करते हुए परिणाम भगवान पर छोड़ दो। ◆ हर परिस्थिति में विश्वास और धैर्य बनाए रखो। ◆ प्रेम, सेवा, करुणा और विनम्रता को जीवन का आधार बनाओ। ◆ सच्चा आनंद संसार में नहीं, भगवान के चरणों में है। *4. जीवन में उपयोगिता :-* ◆ *आर्थिक क्षेत्र :-* लोभ और अनैतिक कमाई से बचकर ईमानदारी अपनाने की प्रेरणा। ◆ *सामाजिक क्षेत्र :-* सभी के प्रति प्रेम, सहयोग और क्षमा का भाव। ◆ *व्यावहारिक क्षेत्र :-* तनावमुक्त होकर विवेकपूर्ण निर्णय लेने की शक्ति। ◆ *धार्मिक क्षेत्र :-* भक्ति, सेवा और सत्संग में स्थिरता। ◆ *आध्यात्मिक क्षेत्र :-* आत्मसमर्पण, अंतःशांति और ईश्वर से आत्मिक संबंध की अनुभूति। *5.निष्कर्ष :-* "श्रीकृष्ण शरणम् ममः" केवल जप करने का मंत्र नहीं, बल्कि *जीवन जीने का सिद्धांत* है। *इसका सार यही है :—* *"मैं अपने अहंकार का नहीं, भगवान श्रीकृष्ण की कृपा का आश्रित हूँ।"* "जब जीवन श्रीकृष्ण की शरण में होता है, तब *भय के स्थान पर विश्वास*, *चिंता के स्थान पर शांति* और *अशांति के स्थान पर आनंद* का उदय होता है।" *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* #एक_हिन्दुस्तानी (169) | 14/07/2026 #dineshapna
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