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Sunday, 12 July 2026
★ *जयश्रीकृष्ण बोलो!* ★ ★ *श्रीकृष्ण को आत्मसात करो!* ★ यह केवल भगवान श्रीकृष्ण का नाम लेने का *संदेश नहीं देता, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारने* की प्रेरणा देता है। यदि केवल "जय श्रीकृष्ण" कहा जाए, *लेकिन जीवन में उनके गुण न हों, तो उसका उद्देश्य अधूरा रह* जाता है। *श्रीकृष्ण की पाँच प्रमुख शिक्षाएँ, जिन्हें आत्मसात कर* जीवन सफल बनाया जा सकता है— *1. धर्मनिष्ठा एवं सत्य का पक्ष !* *2. निष्काम कर्म !* *3. समत्व एवं आत्मसंयम !* *4. प्रेम, करुणा एवं लोककल्याण !* *5. विवेकपूर्ण नेतृत्व एवं साहस !* "जयश्रीकृष्ण बोलो" *श्रद्धा का उद्घोष है।* "श्रीकृष्ण को आत्मसात करो" *जीवन का आदर्श है।* जब हमारे विचारों में सत्य, कर्म में निष्ठा, व्यवहार में प्रेम, निर्णय में विवेक और जीवन में धर्म आ जाएगा, तभी वास्तव में हम श्रीकृष्ण को आत्मसात कर पाएँगे। *यही श्रीकृष्ण भक्ति का सर्वोच्च स्वरूप है :—* ◆ *नाम हो* "जयश्रीकृष्ण", ◆ *काम हो* "श्रीकृष्ण जैसा", ◆ *जीवन हो* "श्रीकृष्ण के आदर्शों" का प्रतिबिम्ब। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* #एक_हिन्दुस्तानी (167) | 13/07/2026 #dineshapna
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