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Wednesday, 15 July 2026
★ *"श्रीकृष्ण शरणम् ममः" का व्यावहारिक स्वरूप* ★ *(१) यदि "श्रीकृष्ण शरणम् ममः" मंत्र का वास्तविक एवं जीवंत स्वरूप किसी ने अपने जीवन में चरितार्थ किया, तो वे बृजवासी थे।* यद्यपि यह मंत्र उस समय शब्दरूप में प्रचलित था या नहीं, इसका ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, किन्तु इसका भाव सम्पूर्ण बृज-जीवन में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है। *(२) बृजवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण को केवल ईश्वर नहीं माना*, बल्कि उन्हें अपना सर्वस्व मान लिया। उन्होंने अपना तन, मन, धन, परिवार, मान-सम्मान और सम्पूर्ण जीवन श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया। उनकी भक्ति निष्काम थी; उन्होंने भगवान की सेवा के बदले कभी स्वर्ग, मोक्ष, सिद्धि अथवा किसी सांसारिक लाभ की कामना नहीं की। *(३) इसी निष्काम, अनन्य और आत्मसमर्पित प्रेम के कारण* श्रीमद्भागवत में व्रजवासियों का स्थान समस्त भक्तों में सर्वोच्च माना गया है। इसलिए श्रीकृष्ण बृजवासियों को अपना सखा मानते है। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं कि वे बृजवासियों के प्रेम का ऋण कभी नहीं चुका सकते। *(४) पुष्टिमार्ग का मूल सिद्धान्त* भी यही है कि भगवान की कृपा (पुष्टि) प्राप्त करने का मार्ग निष्काम प्रेम और पूर्ण शरणागति है। इसलिए पुष्टिमार्ग बृजवासियों की इसी भाव-भक्ति को आदर्श मानता है। *(५) श्रीकृष्ण का पुनः प्राकट्य :-* पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार, बृजवासियों के इसी निष्काम प्रेम के प्रतिफलस्वरूप भगवान श्रीकृष्ण ने कलियुग में श्रीनाथजी के रूप में पुनः प्राकट्य किया, ताकि वे अपने प्रिय भक्तों से पुनः सेवा स्वीकार कर सकें। (६) पुष्टिमार्ग व परंपरा के अनुसार, *गोवर्धन पर्वत पर श्रीनाथजी ने सर्वप्रथम सद्दू पाण्डे को दर्शन दिए और उनसे अपनी सेवा प्रारम्भ करवाई।* इसके पश्चात् भगवान ने जगद्गुरु श्री वल्लभाचार्य महाप्रभु को स्वप्न में आज्ञा देकर गोवर्धन पधारने का आदेश दिया तथा अपनी नियमित सेवा-पूजा की व्यवस्था स्थापित कराई। इसी से पुष्टिमार्ग में सेवा-प्रधान भक्ति और ब्रह्मसम्बन्ध की परंपरा का विस्तार हुआ। *(७) निष्कर्ष :-* इस दृष्टि से कहा जा सकता है कि *"श्रीकृष्ण शरणम् ममः" केवल उच्चारण करने का मंत्र नहीं, बल्कि बृजवासियों द्वारा जिया गया जीवन-दर्शन है।* बृजवासियों ने इसे अपने आचरण से सिद्ध किया और पुष्टिमार्ग ने उसी आदर्श को सिद्धान्त एवं साधना के रूप में प्रतिष्ठित किया। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* #एक_हिन्दुस्तानी (171) | 15/07/2026 #dineshapna
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