Wednesday, 15 July 2026

★ *"श्रीकृष्ण शरणम् ममः"* ★ श्रीकृष्ण शरणम् ममः, जीवन का दिव्य विधान, *शरणागति में छिपा हुआ, भक्ति-सुधा का अमृत-ज्ञान।* अहंकार का त्याग जहाँ हो, कृपा वहीं बरसाती है, *श्रीनाथजी की करुणा से, जीवन-ज्योति जगाती है।* *वल्लभ प्रभु को स्वयं प्रभु ने, यह अष्टाक्षर मंत्र दिया,* ब्रह्मसम्बन्ध के पावन पथ का, दिव्य अनन्त प्रकाश किया। *बृजवासियों ने तन-मन-धन, अर्पित कर निज प्राण दिए,* निष्काम प्रेम की अनुपम गाथा, जग को अमर प्रमाण दिए। *सेवा ही साधन, सेवा ही साध्य, यही पुष्टिमार्ग का सार,* कृपा बिना न मिलते श्याम, यही भक्ति का सच्चा आधार। भय मिटता, विश्वास खिलता, शांति हृदय में घर करती, *प्रेम, समर्पण, विनय, सरलता, जीवन को मधुवन करती।* जप से बढ़कर इसे जियो, यही प्रभु का सच्चा मर्म, *"श्रीकृष्ण शरणम् ममः" बने, मानव जीवन का परम धर्म।* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* #एक_हिन्दुस्तानी (172) | 16/07/2026 #dineshapna







 

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