Saturday, 31 October 2026

■ *'आचार संहिता' (Code of Ethics)* ■ आदरणीय अध्यक्ष महोदय, सम्मानित मंच और मेरे सभी प्रबुद्ध सहकर्मियों, आज हम एक ऐसे अत्यंत *महत्वपूर्ण और पवित्र विषय पर चर्चा* करने के लिए एकत्रित हुए हैं, *जो हमारे पूरे पेशे और संगठन की रीढ़ है*—इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया *(ICAI) द्वारा निर्धारित 'आचार संहिता' (Code of Ethics)* और साथ ही *हमारी ICAI राजसमंद ब्रांच के विजन को दिशा देने वाले मूल्य।* एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) केवल बही-खातों का मिलान करने वाला पेशेवर नहीं होता, बल्कि वह *देश की आर्थिक व्यवस्था का प्रहरी और जनता के वित्तीय विश्वास का संरक्षक* होता है। आइए, इस अवसर पर हम *राष्ट्रीय स्तर पर ICAI की आचार संहिता और राजसमंद ब्रांच के विशिष्ट मार्गदर्शन* —दोनों के समन्वय पर दृष्टि डालें: *भाग 1:* *ICAI की आचार संहिता के मूल स्तंभ* ● *1. सत्यनिष्ठा (Integrity) और निष्पक्षता:* आचार संहिता का सबसे पहला और अनिवार्य नियम है सत्यनिष्ठा। एक पेशेवर के रूप में हमारा यह दायित्व है कि हम अपने सभी व्यावसायिक और वित्तीय संबंधों में पूर्णतः सच्चे, ईमानदार और पारदर्शी रहें। किसी भी प्रकार का दबाव या प्रलोभन हमारी निष्पक्षता (Objectivity) को डिगा नहीं सकता। ● *2. व्यावसायिक सक्षमता और उचित सावधानी (Professional Competence & Due Care):* कानून, कर प्रणालियाँ, लेखा मानक और व्यावसायिक तकनीकें निरंतर बदल रही हैं। ICAI की आचार संहिता हमें निरंतर सीखने का कर्तव्य याद दिलाती है, ताकि हम अपने मुवक्किलों और संस्थाओं को सर्वश्रेष्ठ और त्रुटिहीन सेवा दे सकें। ● *3. गोपनीयता (Confidentiality):* एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के पास किसी भी व्यवसाय की सबसे संवेदनशील वित्तीय जानकारियाँ होती हैं। आचार संहिता सिखाती है कि बिना उचित कानूनी अधिकार के क्लाइंट की गोपनीय जानकारी साझा न की जाए; यही विश्वास हमारे पेशे की असली पूंजी है। *●*4. उच्च व्यावसायिक आचरण (Professional Behavior):* कानून के दायरे में रहकर कार्य करना और देश के नियमों का पालन करना हर सीए का कर्तव्य है। हमें ऐसी किसी भी गतिविधि से बचना चाहिए जिससे हमारे पेशे की गरिमा को ठेस पहुँचे। *भाग 2:* *राजसमंद ब्रांच के विजन और 'टिंट' (T.I.N.T.) का संदेश* साथियों, राष्ट्रीय आचार संहिता के इन *उच्च मूल्यों को जमीन पर उतारने और अपनी संस्था को गति* देने के लिए, ICAI की *राजसमंद ब्रांच के प्रथम निर्वाचित चेयरमैन, सीए दिनेश सनाढ्य का संदेश* हम सभी को एक अत्यंत प्रेरक और व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह संदेश इस बात को उजागर करता है कि कैसे *"T.I.N.T." (टिंट) यानी सूक्ष्म परिवर्तन* के सिद्धांतों को अपनाकर संगठन को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है। इस 'टिंट' (T.I.N.T.) के चार महत्वपूर्ण आयाम हैं: ● *1. T for Together Work & Grow (सामूहिक कार्य और विकास):* सभी सदस्य मिलकर कार्य करें और एक-दूसरे का संबल बनकर आगे बढ़ें। ● *2. I for Integrity & Equality (नैतिकता और समानता):* संगठन में सभी के साथ समान सम्मान और पूर्ण ईमानदारी से व्यवहार किया जाए। ● *3. N for New Ideas & Concepts (नए विचार और अवधारणाएं):* कार्यप्रणाली में नवीन दृष्टिकोण और आधुनिक विचारों को अपनाया जाए। ● *4. T for Transparency & Honesty (पारदर्शिता और ईमानदारी):* प्रशासनिक निर्णयों और कार्यों में पूरी स्पष्टता और सत्यनिष्ठा बनाए रखी जाए। *यह दृष्टिकोण नेतृत्व, सामूहिक प्रयास और पारदर्शिता को बढ़ावा देने का एक अनूठा उदाहरण है।* *संकल्प का आह्वान* साथियों, ICAI की आचार संहिता और राजसमंद ब्रांच का यह 'टिंट' (T.I.N.T.) *संदेश केवल नियमों या शब्दों की किताबें नहीं हैं, बल्कि यह हमारे अंतःकरण की आवाज* हैं। आइए, आज हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपने *दैनिक व्यावसायिक जीवन में इन नैतिक मूल्यों का पूर्ण पालन करेंगे,* अपनी ब्रांच और *देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएंगे और जनता के विश्वास को* हमेशा सर्वोपरि रखेंगे। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद! जय हिंद, जय भारत! ★जयश्रीकृष्ण★ *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* • Chartered Accountant • Social Activist • Political Analyst • Spiritual Thinker • Founder of Life Management (349) #एक_हिन्दुस्तानी #31/10/2026 #dineshapna



 

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