Sunday, 20 September 2026

★ *साकेत की कलम — राष्ट्र-जागरण का संकल्प* ★ कलम उठे तो सत्य लिखे, जन-जन की आवाज बने, शब्द-शब्द में देश जगे, भारत का विश्वास बने। कविता केवल भाव नहीं, जागृति की पुकार बने, सोई हुई संवेदना में, चेतन मन का संचार बने। कलम न झुके अन्याय के आगे, सत्य का सम्मान करे, जनहित की हर बात लिखे, मानवता का मान करे। देशभक्ति केवल नारा नहीं, कर्मों में दिखाई दे, भारत माँ के चरणों में, जीवन अपनी आहुति दे। संस्कारों की ज्योति जले, नई पीढ़ी राह चुने, साहित्य से समाज जुड़े, मिलकर भारत आगे बढ़े। पच्चीस वर्ष की साधना, नई दिशा का आज प्रण, साकेत की यह कलम बने, राष्ट्र-जागरण का स्पंदन! *CA Dinesh Chandra Sanadhya* Chartered Accountant • Social Activist • Political Analyst • Spiritual Thinker (288) #एक_हिन्दुस्तानी #21/09/2026 #dineshapna



 

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