Wednesday, 30 September 2026

★ *अपना मंच — (Gen-A = जागरूक जनता)* ★ ( आम जनता की पाठशाला – ●4● ) *1. आम जनता लोकतंत्र का आधार क्यों है?* *(i) लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता:* 【वोट देती है → प्रतिनिधि चुनती है → कर/राजस्व देती है → सार्वजनिक व्यवस्था चलाने के लिए संसाधन उपलब्ध कराती है → और शासन से जवाबदेही मांग सकती है।】 *(ii) स्थानीय शासन के संदर्भ में* संविधान ने *पंचायती राज और नगरपालिकाओं को संवैधानिक स्थान* दिया है। लेकिन उनके प्रभावी कामकाज के लिए Functions, Funds और Functionaries का वास्तविक हस्तांतरण महत्वपूर्ण है। *CAG* की हाल की स्थानीय निकाय ऑडिट रिपोर्टों में भी इन्हीं क्षेत्रों—कार्य, वित्त, स्टाफ, वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही—से संबंधित कमियाँ सामने आती रही हैं। *इसलिए केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि “सरकार है, इसलिए काम हो जाएगा।”* *(iv) सही प्रश्न है:* “जिस काम की जिम्मेदारी जिस संस्था की है, *उसे काम करने के लिए अधिकार, धन, कर्मचारी और जवाबदेही—चारों मिले हैं या नहीं?”* *2. फिर आम जनता के मूलभूत कार्य क्यों नहीं हो पाते?* इसके कई कारण हो सकते हैं। हर मामले में सभी कारण लागू हों, यह जरूरी नहीं। *① जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होती* एक नागरिक की समस्या—जैसे सड़क, नाली, पानी, सफाई या स्ट्रीट लाइट—एक से अधिक विभागों से जुड़ सकती है। फिर नागरिक को कहा जाता है: *“यह हमारे विभाग का काम नहीं है।”* इससे जिम्मेदारी एक-दूसरे पर स्थानांतरित होती रहती है। *② अधिकार और जिम्मेदारी अलग-अलग संस्थाओं में बँटी होती है* कई बार स्थानीय निकाय से सेवा देने की अपेक्षा होती है, लेकिन उसके पास पर्याप्त धन, कर्मचारी या प्रशासनिक अधिकार नहीं होते। *CAG* की स्थानीय निकाय संबंधी रिपोर्टों में ऐसी स्थितियों के उदाहरण मिलते हैं — *जैसे स्टाफ की कमी, वित्तीय प्रबंधन की कमियाँ और कार्यों/संसाधनों के हस्तांतरण से जुड़ी समस्याएँ।* *③ खर्च होना और परिणाम मिलना अलग-अलग बातें हैं* सरकार यह बता सकती है कि: “₹10 लाख खर्च किए गए।” लेकिन *जनता का असली प्रश्न होना चाहिए:* “₹10 लाख से जनता को मिला क्या?” यही Financial Audit से आगे Performance Audit का मूल प्रश्न है। CAG स्थानीय निकायों में वित्तीय, अनुपालन और *performance audit करता है।* *④ योजना बनती है, लेकिन क्रियान्वयन कमजोर हो सकता है* समस्या: 【आवश्यकता → योजना → बजट → स्वीकृति → कार्य → भुगतान】 इनमें से किसी भी चरण पर कमी हो तो अंतिम परिणाम जनता तक नहीं पहुँचता। *⑤ जवाबदेही परिणाम से नहीं, केवल प्रक्रिया से जुड़ जाती है* ◆कई बार अधिकारी कह सकता है: *“फाइल चला दी।”* ◆जनप्रतिनिधि कह सकता है: *“कार्य स्वीकृत करा दिया।”* ◆ठेकेदार कह सकता है: *“काम कर दिया।”* ◆लेकिन जनता पूछती है: *> “समस्या समाप्त हुई या नहीं?”* यहीं *Outcome-based accountability आवश्यक हो* जाती है। *⑥ सूचना का अभाव जनता की शक्ति कम करता है* यदि जनता को यह ही पता नहीं कि — ◆पैसा कितना आया? ◆किस योजना में आया? ◆किसने स्वीकृत किया? ◆किसे ठेका मिला? ◆कितना भुगतान हुआ? ◆काम की गुणवत्ता किसने जाँची? *तो जवाबदेही मांगना कठिन हो जाता है।* इसीलिए RTI Act, 2005 का उद्देश्य ही सार्वजनिक प्राधिकरणों के नियंत्रण में उपलब्ध सूचना तक नागरिकों की पहुँच के माध्यम से transparency और accountability को बढ़ाना है। *3. क्या इसका अर्थ है कि जनप्रतिनिधि या सरकारी कर्मचारी काम नहीं करते?* नहीं। यह निष्कर्ष भी सही नहीं होगा। बहुत से जनप्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी-कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। *समस्या को व्यक्ति-विशेष के बजाय व्यवस्था और जवाबदेही के दृष्टिकोण से देखना अधिक उचित है।* असल प्रश्न यह होना चाहिए: *> जहाँ जनता का वैध काम नहीं हो रहा है, वहाँ जिम्मेदार व्यक्ति/संस्था कौन है और उसे जवाबदेह बनाने की प्रभावी व्यवस्था क्या है?* *4. समाधान क्या है?* मेरे विचार से आपके “अपना मंच — Gen-A = जागरूक जनता” के लिए *समाधान का सबसे मजबूत मॉडल* यह हो सकता है: *जनता को शिकायतकर्ता से Social Auditor बनाना।* अर्थात— ① समस्या पहचानो ↓ ② जिम्मेदार विभाग/अधिकारी पहचानो ↓ ③ कानून और अधिकार जानो ↓ ④ रिकॉर्ड और प्रमाण प्राप्त करो ↓ ⑤ लिखित आवेदन करो ↓ ⑥ समयबद्ध जवाब मांगो ↓ ⑦ आवश्यकता हो तो RTI/अपील/अन्य वैधानिक उपाय अपनाओ ↓ ⑧ काम और खर्च की जाँच करो ↓ ⑨ परिणाम की जाँच करो ↓ ⑩ समस्या समाप्त होने तक निगरानी रखो। *यही आपकी पहले से विकसित श्रृंखला —* 【जानकारी → प्रश्न → प्रमाण → आवेदन → सुनवाई → जवाबदेही → समाधान → निगरानी】 का वास्तविक उपयोग है। *5. सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कहाँ चाहिए?* सिर्फ “सरकार से काम करवाना” पर्याप्त नहीं है। *व्यवस्था को इस प्रकार देखना चाहिए:* *पुराना तरीका:* 【जनता → शिकायत → अधिकारी → आश्वासन → फिर शिकायत】 *Gen-A का तरीका:* 【जनता → समस्या → कानून → प्रमाण → जिम्मेदारी → लिखित कार्रवाई → समयसीमा → परिणाम → Social Audit】 इससे बातचीत “कृपया मेरा काम कर दीजिए” से बदलकर *> “कानून के अनुसार यह काम किसकी जिम्मेदारी है, किस समय में होना चाहिए और इसकी जवाबदेही किसकी है?”* हो जाती है। *6. एक लाइन में पूरा निष्कर्ष* *> लोकतंत्र में जनता का काम केवल सरकार चुनना नहीं है; सरकार के काम का वैधानिक, तथ्यात्मक और शांतिपूर्ण तरीके से सामाजिक ऑडिट करना भी जागरूक नागरिकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।* और आपके अपना मंच के लिए इसे इस सूत्र में रखा जा सकता है: 🟥 *वोट से सरकार चुनो —* कानून से अधिकार जानो — प्रमाण से सवाल करो — जवाबदेही से काम कराओ — और परिणाम का Social Audit करो।** *यही “आम जनता → Gen-A (जागरूक जनता)” बनने की दिशा है।* *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* • Chartered Accountant • Social Activist • Political Analyst • Spiritual Thinker • Founder of Life Management (304) #एक_हिन्दुस्तानी #01/10/2026 #dineshapna


 

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