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Thursday, 30 July 2026
★ *कलियुग में सनातनी का कर्तव्य* ★ (1-2-3) *"धर्मो रक्षति रक्षितः"* भावार्थ : - जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। यह केवल *एक सूक्ति नहीं, बल्कि सनातन धर्म का शाश्वत सिद्धांत है।* यहाँ धर्म का अर्थ किसी एक पंथ या पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्य, न्याय, कर्तव्य, करुणा, मर्यादा, आत्मसंयम, लोककल्याण और नैतिक जीवन से है। *(1) कलियुग की सबसे बड़ी चुनौती — समग्र ज्ञान का अभाव* इतिहास में हमारे समाज ने अनेक आक्रमण, संघर्ष और कठिन परिस्थितियों का सामना किया। इतिहास के कारण अनेक और जटिल हैं, परंतु एक महत्वपूर्ण आत्ममंथन यह भी है कि *क्या हमने अपने शास्त्रों और महापुरुषों के संदेश को उसके समग्र स्वरूप में समझा ?* कई बार समाज में *किसी सिद्धांत का केवल एक पक्ष अधिक प्रसिद्ध हो गया, जबकि दूसरा पक्ष अपेक्षाकृत कम चर्चा में रहा।* उदाहरण के लिए— ■ *"अहिंसा परमो धर्मः"* पर अधिक बल दिया जाता है, जबकि व्यापक रूप से प्रचलित उक्ति का अगला भाग है— ■ *"धर्मरक्षा तथैव च।"* इसका भाव यह है कि अहिंसा सर्वोच्च आदर्श है, किन्तु धर्म, न्याय और निर्दोषों की रक्षा करना भी उतना ही आवश्यक कर्तव्य है। ■ सनातन का संदेश केवल करुणा नहीं, बल्कि करुणा और साहस, क्षमा और न्याय, शास्त्र और शस्त्र, भक्ति और कर्मयोग—इन सभी का संतुलन है। *(2) भगवान के हाथों में शास्त्र और शस्त्र क्यों?* यदि हम भगवान विष्णु, श्रीराम, श्रीकृष्ण, भगवान शिव और माँ दुर्गा के स्वरूप देखें, तो पाएँगे कि *उनके हाथों में केवल ज्ञान के प्रतीक नहीं, बल्कि धर्मरक्षा के प्रतीक* भी हैं। *यह हमें सिखाता है—* ■ शास्त्र से विवेक प्राप्त करो। ■ शस्त्र का अर्थ केवल अस्त्र नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा करने की क्षमता, साहस और उत्तरदायित्व भी है। ■ पहले संवाद, न्याय और शांति का मार्ग अपनाओ। ■ परंतु यदि सभी वैध और शांतिपूर्ण उपाय निष्फल हो जाएँ और निर्दोषों पर अन्याय हो, तो धर्मानुकूल और मर्यादित प्रतिरोध भी कर्तव्य हो सकता है। *इसलिए सनातन का आदर्श है—* "शास्त्र से बुद्धि, शस्त्र से सुरक्षा।" *(3) श्रीकृष्ण का नीति-दर्शन* भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत *युद्ध को कभी प्रथम विकल्प नहीं बनाया।* *उन्होंने पहले—* ■ संवाद किया, ■ समझौते का प्रयास किया, ■ शांति-दूत बनकर गए, ■ और युद्ध टालने के अनेक प्रयास किए। किन्तु जब अन्याय ने सभी सीमाएँ पार कर दीं, तब उन्होंने अर्जुन से कहा कि मोह और भ्रम छोड़कर अपने धर्मानुकूल कर्तव्य का पालन करो। इसलिए *श्रीकृष्ण का संदेश है—* ■ शांति चाहो, पर कायरता नहीं। ■ करुणा रखो, पर अन्याय का समर्थन मत करो। ■ क्षमा करो, पर अधर्म को स्थायी मत बनने दो। ■ कर्तव्य से विमुख मत हो। *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* (205) #एक_हिन्दुस्तानी #31/07/2026 #dineshapna
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