Chartered Accountant,Social Activist,Political Analysist-AAP,Spritual Thinker,Founder of Life Management, From India, Since 1987.
Sunday, 26 July 2026
★ *जीवन मे दीर्घकालिक व स्थाई सफलता के 10 गुणो का सार तत्व "स्वयं से प्रेम" :-* ★ *यदि "स्वयं से प्रेम" का अर्थ है—* ● स्वयं का सम्मान करना, ● अपने शरीर, मन और चरित्र का आदर करना, ● अपने दीर्घकालिक हित का ध्यान रखना, ● स्वयं को निरंतर बेहतर बनाने का प्रयास करना, तो यह वास्तव में अनेक सद्गुणों का शक्तिशाली स्रोत है। *उदाहरण के लिए :-* (1) स्वयं से प्रेम → अपने मूल्यों से समझौता नहीं करेंगे *→ सत्यनिष्ठा।* (2) स्वयं से प्रेम → अपनी क्षमता पर विश्वास *→आत्मविश्वास।* (3) स्वयं से प्रेम → भय के कारण स्वयं को पीछे नहीं हटाएँगे *→ निडरता।* (4) स्वयं से प्रेम → अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहेंगे *→ दृढ़ संकल्प।* (5) स्वयं से प्रेम → अपने स्वास्थ्य, समय और आदतों का ध्यान रखेंगे *→ अनुशासन।* (6) स्वयं से प्रेम → अपने भविष्य के लिए मेहनत करेंगे *→ लगन एवं परिश्रम।* (7) स्वयं से प्रेम → तात्कालिक लाभ छोड़कर दीर्घकालिक सफलता चुनेंगे *→ धैर्य।* (8) स्वयं से प्रेम → अपने हित में सही निर्णय लेने का प्रयास करेंगे *→ विवेक।* (9) स्वयं से प्रेम → स्वयं को निराशा में डूबने नहीं देंगे *→ सकारात्मक सोच।* (10) स्वयं से प्रेम → अपनी कमियों को स्वीकार कर सुधार करेंगे *→ विनम्रता एवं सीखने की प्रवृत्ति।* यदि स्वयं से प्रेम का अर्थ स्वार्थ, आत्ममोह (Narcissism) या अहंकार बन जाए, तो यही भावना सत्यनिष्ठा, विनम्रता और विवेक को कमजोर भी कर सकती है। इसलिए *"स्वयं से प्रेम" का स्वस्थ और संतुलित अर्थ ही इन गुणों का आधार बन सकता है।* *निष्कर्ष :—* *"स्वयं के श्रेष्ठ स्वरूप से प्रेम ही उत्कृष्ट चरित्र का मूल है;* उसी से सत्यनिष्ठा, आत्मविश्वास, निडरता, दृढ़ संकल्प, अनुशासन, परिश्रम, धैर्य, विवेक, सकारात्मक सोच और विनम्रता का विकास होता है।" *सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य* (197) #एक_हिन्दुस्तानी #26/07/2026 #dineshapna
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